𝐀 𝐨𝐧𝐞 𝐉𝐮𝐝𝐢𝐜𝐢𝐚𝐥 𝐀𝐜𝐚𝐝𝐞𝐦𝐲 (करें अपनी तैयारी बेहतर)
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Bihar APO (GS) Pre with official Answer key.pdf
बिहार APO परीक्षा: आयोग की गलती, अभ्यर्थियों से वसूली - प्रश्नों पर आपत्ति शुल्क के नाम पर आर्थिक शोषण बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा APO प्रारंभिक परीक्षा की उत्तर कुंजी के गलत प्रश्नों पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए प्रति प्रश्न 250 रुपये का शुल्क लेना अभ्यर्थियों के साथ सरासर अन्याय है। एक तरफ आयोग स्वयं अपरिपक्व प्रश्न पत्र तैयार करता है और गलत उत्तर कुंजी जारी करता है, वहीं दूसरी तरफ अपनी ही गलतियों को सुधारने का वित्तीय बोझ बेरोजगार युवाओं पर डाल देता है। वर्षों से प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के पास आय का कोई साधन नहीं होता। 4-5 गलत प्रश्नों को चुनौती देने के लिए 1000-1200 रुपये खर्च करना एक सामान्य अभ्यर्थी के लिए अत्यधिक कठिन है। जब प्रश्न या उत्तर आयोग के विशेषज्ञों द्वारा गलत तैयार किए जाते हैं, तो उसकी सजा अभ्यर्थियों को शुल्क के रूप में क्यों दी जा रही है? गलती आयोग की है, तो सुधार नि:शुल्क होना चाहिए। यह व्यवस्था यह संदेश देती है कि आयोग में जनहित और निष्पक्षता से अधिक प्राथमिकता राजस्व जुटाने को दी जा रही है। जो छात्र आर्थिक तंगी के कारण शुल्क जमा नहीं कर पाते, वे सही होते हुए भी आपत्ति दर्ज कराने से वंचित रह जाते हैं। इससे उनके परिणाम और भविष्य पर बुरा असर पड़ता है। शिक्षा और चयन प्रक्रियाओं का उद्देश्य प्रतिभा को परखना होना चाहिए, न कि छात्रों की मजबूरी का व्यापार करना। बिहार आयोग को इस छात्र-विरोधी निर्णय पर तुरंत पुनर्विचार करते हुए गलत उत्तरों पर आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया को नि:शुल्क करना चाहिए।
बिहार APO 2026 (M Series) ▪️ लॉ पेपर, आधिकारिक उत्तर कुंजी के साथ
बिहार APO 2026 (M Series) ▪️ सामान्य ज्ञान आधिकारिक उत्तर कुंजी के साथ ▪️ प्रश्न स. 83 का उत्तर आयोग ने गलत बताया ▪️ प्रश्न स. 20 डिलीट किया गया ▪️कुल 99 प्रश्न से मिलेंगे अंक
Bihar APO Law M series.pdf
Bihar APO General-Studies M series.pdf
Bihar APO Law M series.pdf
Bihar APO General-Studies M series.pdf
Bihar APO 2026 ▪️Official Answer key जारी, 12 तारीख से आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध । ▪️यह प्रिविजनल Answer key ▪️14 तारीख से 18 तारीख तक दर्ज कर सकते है आपत्ति। ▪️आपत्ति आने और उसका समाधान होने पर अंतिम आंसर key जारी की जायेगी।
संसद के दोनो सदनों से पारित हुआ विवादित अधिकरण सुधार विधेयक, 2026 (ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स बिल, 2026) अधिकरण सुधार विधेयक, 2026 (Tribunals Reforms Bill, 2026) संसद के दोनों सदनों से पास हो चुका है। लोकसभा ने इसे 10 अगस्त 2026 को और राज्यसभा ने 11 अगस्त 2026 को मंजूरी दी। यह विधेयक देश के 16 प्रमुख अधिकरणों (ट्रिब्यूनलों) की प्रशासनिक व्यवस्था और नियुक्तियों में बड़े बदलाव करता है। यह विधेयक पुराने ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 को प्रतिस्थापित और निरस्त करता है। विधेयक से जुड़ा मुख्य विवाद और पृष्ठभूमि विपक्ष और आलोचकों द्वारा इस कानून को लेकर पूर्व में कई चिंताएं जताई गई थीं: ▪️न्यायिक स्वतंत्रता बनाम सरकारी नियंत्रण: इस कानून के पिछले स्वरूप (2021 एक्ट) को लेकर यह विवाद था कि इसके प्रावधान कार्यपालिका (सरकार) को अधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति एवं सेवा शर्तों पर बहुत अधिक नियंत्रण देते हैं। विपक्ष ने इसे न्यायिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों और शक्तियों के पृथक्करण (Separation of Powers) के खिलाफ बताया था। ▪️सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास बार एसोसिएशन बनाम भारत संघ मामले में पूर्ववर्ती अधिकरण सुधार अधिनियम, 2021 के कुछ आपत्तिजनक प्रावधानों को असंवैधानिक ठहराते हुए खारिज कर दिया था। कोर्ट ने तब सरकार को एक स्वतंत्र राष्ट्रीय अधिकरण आयोग (NTC) बनाने का निर्देश दिया था। ▪️बिना चर्चा के पारित होने पर आपत्ति: विपक्ष ने इस बात पर भी तीखा विरोध जताया कि संसद के मानसून सत्र में भारी हंगामे और विरोध प्रदर्शनों के बीच इस महत्वपूर्ण विधेयक को बिना किसी विस्तृत बहस या चर्चा के ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। विवादों और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को देखते हुए इस नए विधेयक (2026) में निम्नलिखित प्रमुख सुधार जोड़े गए हैं: ▪️राष्ट्रीय अधिकरण आयोग (NTC) का गठन: अधिकरणों में पारदर्शिता, योग्यता और निष्पक्षता से नियुक्तियां करने के लिए इस स्वतंत्र आयोग की स्थापना की जाएगी। ▪️आयोग की संरचना: इस आयोग के अध्यक्ष कोई सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश या हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश होंगे। इसमें दो न्यायिक सदस्य और दो तकनीकी सदस्य शामिल होंगे। ▪️निश्चित कार्यकाल: अधिकरण के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल अब 5 वर्ष तय किया गया है (या निर्धारित आयु सीमा तक, जो भी पहले हो)। ▪️अधिकार क्षेत्र अपरिवर्तित: केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने स्पष्ट किया कि इस कानून से किसी भी ट्रिब्यूनल के मूल अधिकार क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है। Join 👉 https://t.me/AoneJa
ये मोहतरमा प्रयागराज की पल्लवी सिंह राजपूत है, इन्होंने ऑनलाइन डेटिंग एप से कई बड़े घरों के लड़कों से दोस्ती की. फिर उनके साथ होटल में संबंध बनाए. और हाइड कैमरे से पूरे कर्मकांड की वीडियो बना डाली, फिर उसी वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर 200 लड़कों से वसूले तकरीबन 6 करोड़ रूपये, अब हुआ मुकदमा दर्ज, तलाश में जुटी पुलिस... आज के जमाने की छोरिया क्या छोरो से कम है 😂
#Raj_APO_@AoneJA राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 (भाग 13) धारा 13 - आबकारी वस्तु के आयात, निर्यात और परिवहन को प्रतिबंधित करने की शक्ति राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा किसी आबकारी वस्तु के संबंध में प्रतिबंध लगा सकती है। धारा 13(क) - आयात या निर्यात पर प्रतिबंध राज्य सरकार किसी आबकारी वस्तु के - ▫️राजस्थान में आयात, या ▫️राजस्थान से निर्यात को पूरी तरह या किसी क्षेत्र के संबंध में प्रतिबंधित कर सकती है। धारा 13(ख) - परिवहन पर प्रतिबंध राज्य सरकार किसी आबकारी वस्तु के परिवहन को भी प्रतिबंधित कर सकती है। धारा 14 : आयात, निर्यात और परिवहन के लिए परमिट आवश्यक राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा किसी आबकारी वस्तु की एक निश्चित मात्रा निर्धारित कर सकती है। उस निर्धारित मात्रा से अधिक आबकारी वस्तु को - ▫️आयात, ▫️निर्यात, या ▫️परिवहन नहीं किया जा सकता, जब तक कि उसके लिए परमिट प्राप्त न किया गया हो। विशेष प्रावधान यदि आबकारी वस्तु या मादक पदार्थ राजस्थान के अधिनियम-लागू क्षेत्र के बाहर से किसी अन्य स्थान के लिए पहले से विधिवत जारी परमिट के अंतर्गत ले जाया जा रहा है, तो राज्य सरकार द्वारा अन्यथा निर्देश न दिए जाने तक उसके परिवहन के लिए इस धारा के अंतर्गत अलग परमिट आवश्यक नहीं होगा धारा 15 : आयात, निर्यात और परिवहन के लिए परमिट जारी करना 15(1) आबकारी वस्तु के - ▫️आयात, ▫️निर्यात, या ▫️परिवहन के लिए परमिट जारी करने की शक्ति - 👉 आबकारी आयुक्त या 👉 इस कार्य के लिए विधिवत अधिकृत आबकारी अधिकारी के पास है। लेकिन यह परमिट राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर लगाई गई शर्तों और प्रतिबंधों के अधीन होगा। 15(2) - परमिट के प्रकार परमिट दो प्रकार का हो सकता है - 1. सामान्य परमिट किसी निश्चित - ▫️अवधि, ▫️आबकारी वस्तु या मादक पदार्थ के लिए सामान्य रूप से जारी किया जा सकता है। 2. विशेष परमिट किसी - ▫️विशेष अवसर, या ▫️विशेष खेप के लिए जारी किया जा सकता है। Join 👉 https://t.me/AoneJa
#Raj_APO_@AoneJA राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 (भाग 11) धारा 10 : अन्य अधिकारियों को आबकारी राज्य सरकार यह निर्धारित कर सकती है कि किसी अन्य सरकारी अधिकारी को इस अधिनियम के अंतर्गत आबकारी अधिकारी की कुछ या सभी शक्तियाँ और कर्तव्य दिए जाएँ। धारा 10-क : जांच-चौकियाँ स्थापित करने की शक्ति ▪️राज्य सरकार को यह शक्ति दी गई है कि वह राजस्थान के भीतर या उसकी सीमाओं पर जांच-चौकियाँ स्थापित कर सकती है। ▪️इनका उद्देश्य आबकारी वस्तुओं के आवागमन की जांच और नियंत्रण करना है। जांच-चौकी पर क्या किया जा सकता है? राज्य सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी - ▫️आने-जाने वाली आबकारी वस्तुओं की जांच कर सकते हैं; ▫️ऐसी वस्तुओं को ले जाने वाले वाहन या अन्य साधन को रोककर उसकी जांच कर सकते हैं; ▫️आवश्यक होने पर संबंधित व्यक्ति से जानकारी या दस्तावेज मांग सकते हैं; ▫️अधिनियम के उल्लंघन का संदेह होने पर कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकते हैं। अध्याय 3 - आयात, निर्यात और परिवहन धारा 11 : आबकारी वस्तु का आयात किसी आबकारी वस्तु को राजस्थान के उस क्षेत्र में, जहाँ यह अधिनियम लागू है, आयात नहीं किया जा सकता, जब तक कि निम्न तीन शर्तें पूरी न हों - 1. राज्य सरकार ने उसके आयात की - ▫️सामान्य अनुमति, या ▫️विशेष अनुमति दी हो। 2. राज्य सरकार ने यदि आयात के संबंध में कोई शर्त लगाई है, तो उस शर्त का पालन किया गया हो। 3. धारा 28 के अधीन लगाया गया शुल्क - ▫️चुका दिया गया हो, या ▫️उसके भुगतान के लिए बंधपत्र दे दिया गया हो। धारा 12 : आबकारी वस्तु का निर्यात और परिवहन किसी आबकारी वस्तु का निर्यात या परिवहन तब तक नहीं किया जा सकता, जब तक - (1) धारा 28 के अधीन लगाया गया शुल्क - चुका दिया गया हो, या उसके भुगतान के लिए बंधपत्र दे दिया गया हो। (2) राज्य सरकार द्वारा लगाई गई सभी आवश्यक शर्तों का पालन किया गया हो। धारा 11 और 12 में अंतर ▫️आयात - धारा 11 ▫️निर्यात और परिवहन - धारा 12 ▫️लेकिन तीनों में एक महत्वपूर्ण समानता है - शुल्क का भुगतान या उसके लिए बंधपत्र आवश्यक है। Join 👉 https://t.me/AoneJa
देशभर में पेपर लीक रुकने का नाम नहीं ले रहे... 🤔
UP HJS 2023 ▪️Mains Question Paper ▪️Paper 4 (Law 3rd) ▪️Exam Date 2 Aug 2026
UP HJS 2023 ▪️Mains Question Paper ▪️Paper 3 (Law 2nd) ▪️Exam Date 2 Aug 2026