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This should have been explained by Gadkari or Petroleum minister. Anyways good video on E20. Hope it clears all the confusion.
This is interesting way to educate public. Share it in the interest of Public health and safety.
India Today: Godzilla El Nino could be strongest in 1,000 years. 2027 to be the year of extremes - https://cngnet.bot.cd/mshyr1tzhpzb
📊 JSP 📝 CJP ki sena Jharkhand Students Protest mein kyun interest nahi le rhi? 🔒 Anonymous poll Votes: 13 Wahan kya faayda hai? — 1 (8%) CJP ne student protest kiya tha? — 5 (38%) Students ki chinta to kisi ko bhi nahi hai Bhai Bharat desh mein — 7 (54%)
Chitthi se ChatGPT tak, hum Millennials ne sab tolerate kiya hain. From landlines to AI, we are the ultimate test samples of the universe.
कॉकरोच Gen Z नहीं हैं। और Gen Z कॉकरोच नहीं हैं। 50 दिनों तक, भारत को एक सस्ता, अश्लील ड्रामा बेचा गया। कुछ देश विरोधी लोग जंतर-मंतर पहुंचे। उन्होंने प्रधानमंत्री को गाली दी। उन्होंने भारतीय सेना का अपमान किया। उन्होंने सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ की। उन्होंने अराजकता पैदा की। फिर सोशल मीडिया ने घोषणा की: "देखो। ये है Gen Z की आवाज़।" सच में? एक माइक्रोफोन, एक बैरिकेड और गंदी नाली से उधार ली हुई शब्दावली। पूरी एक पीढ़ी का प्रतिनिधित्व नहीं करती। जबकि आउटरेज इंडस्ट्री तीसरे दर्जे की अश्लीलता को फिल्माने में व्यस्त थी, भारत का असली Gen Z काम कर रहा था। ग्लासगो में: शर्मिला धांकर ने गोल्ड जीता। दिलीप महादु गावित ने गोल्ड जीता। ज्ञानेश्वरी यादव ने सिल्वर जीता। मुथुपांडी राजा ने सिल्वर जीता। सर्वेश कुशारे ने सिल्वर जीता। गुलवीर सिंह ने सिल्वर जीता। मुरली श्रीशंकर ने सिल्वर जीता। मोहम्मद बासिल ने सिल्वर जीता। वल्लूरी अजय बाबू ने सिल्वर जीता। बिंद्यारानी देवी ने ब्रॉन्ज जीता। शिल्पा के. शाइला ने ब्रॉन्ज जीता। उन्होंने भारत को गाली नहीं दी। उन्होंने भारत का तिरंगा लहराया। और उनके गर्व से भरे गालों पर आंसू की एक बूंद बह गई। फिर आया इंटरनेशनल मैथमेटिकल ओलंपियाड। एबेल जॉर्ज ने गोल्ड जीता। आरव गुप्ता ने गोल्ड जीता। कणव तलवार ने सिल्वर जीता। संजना चाको ने सिल्वर जीता। बैरव मुरुगन ने सिल्वर जीता। श्रेया शांतनु ने सिल्वर जीता। न कोई तोड़फोड़। न कोई गाली-गलौज। न कोई अश्लीलता। सिर्फ कड़ी मेहनत। सिर्फ अनुशासन। सिर्फ माँ भारती के लिए। फिर शतरंज को देखिए। डी. गुकेश। आर. प्रज्ञानानंद। आर. वैशाली। दिव्या देशमुख। दूसरे खेलों को देखिए। नीरज चोपड़ा। लक्ष्य सेन। अंतिम पंघाल। पलक गुलिया। सूर्यवंशी। खेल से आगे देखिए। युवा भारतीय सैटेलाइट बना रहे हैं। AI सिस्टम डिज़ाइन कर रहे हैं। रोबोटिक्स में काम कर रहे हैं। रक्षा तकनीक में प्रवेश कर रहे हैं। स्पेस स्टार्टअप बना रहे हैं। सेमीकंडक्टर बना रहे हैं। ऐसी समस्याओं को हल कर रहे हैं जिनका नाम तक कॉकरोच नहीं ले सकते। ये है Gen Z। न आलसी। न सांस्कृतिक रूप से कंगाल। न बौद्धिक रूप से खाली। न हर बात पर अपमानित होने वाले। वे मिलेनियल्स से ज्यादा समझदार हैं। तकनीकी रूप से ज्यादा सक्षम हैं। वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हैं। और उस कैरिकेचर से कहीं ज्यादा महत्वाकांक्षी हैं जो हमें बेचा गया। तो, मेरे प्यारे दोस्तों, Gen Z के नाम को भीड़ के हवाले मत करो। जिन लोगों ने देश को गाली दी, वे हमारा प्रतिनिधित्व नहीं करते। उन्हें गुंडा कहो। उन्हें उपद्रवी कहो। उन्हें परजीवी कहो। उन्हें अराजकतावादी कहो। लेकिन उन्हें भारत का भविष्य मत कहो। असली Gen Z मेडल लेकर चल रहा है। समीकरण लेकर चल रहा है। रैकेट लेकर चल रहा है। सैटेलाइट लेकर चल रहा है। तिरंगा लेकर चल रहा है। दूसरे लोग तीसरे दर्जे के पोस्टर लेकर चल रहे थे। शोर को बुद्धिमत्ता समझ बैठे। सिर्फ लाइक्स और फर्जी फॉलोअर्स के लिए। वे Generation Z नहीं हैं। वे Generation Zombie हैं। उनका महिमामंडन मत करो। उन्हें बेनकाब करो। उनके आचरण को खारिज करो। गाली-गलौज की उनकी राजनीति को अलग-थलग करो। क्योंकि भारत में युवाओं की समस्या नहीं है। भारत में कैमरे की समस्या है। कैमरा बार-बार नाली की तरफ घूम जाता है। जबकि एक पूरी पीढ़ी सितारों तक पहुंचने में व्यस्त है।
Ruchika Singh who abused PM Modi is now crying. She said "I am apologizing to the entire country. I am so ashamed that I cannot even lift my eyes. I am asking for forgiveness from everyone, please forgive me, please. This is my first and last mistake. After this, I will never do anything like that, nor will I ever post such a thing again" I hope Students have realised that, these leaders will come, ignite you and go and won't care about your future. It's you only who are responsible for your deeds.
NEET हिंदी परीक्षा की इस टॉपर बहन की ये वीडियो जरूर देखनी चाहिए- तैयारी इतनी की है कि प्रयोग किए गए पेन गिन नहीं पाओगे - पढ़ पढ़कर पेज घिसकर फट गए है ❤️👏👏 तब जाकर इस 140 करोड़ के देश में टॉप होता है। या तो पढ़कर AIIMS BHU जैसे टॉप संस्थानों में एडमिशन ले लो, या सड़को पर अराजकता करके अपने माँ बाप की मेहनत की कमाई को कोर्ट कचहरी में बर्बाद कर लो।
एक कॉकरोची के घर थाने से फोन आया-- हेलो, मै पुलिस स्टेशन से कह रहा हू, निसा है ?? उत्तर-- निसा नहीं है, मै उसकी मम्मी बोल रही हू साब, पुलिस-- आपकी बेटी जंतर मंतर पे हुड़दंग कर रही थी, फुटेज है उसे कल पुलिस स्टेशन भेज दियो, निसा की मम्मी--- साब, मेरी बेटी बच्ची है नादान है , वो वहा हुड़दंग नही बुब्बे दिखाने गई थी, पुलिस-- बुब्बे दिखान वास्ते जंतर मंतर ही मिली थी , अपनी गली मुहल्लो मे भी दिखा सकती थी ?? निसा की मम्मी-- का कहें साब, मेरी निसा एक दिन छत पे ढोडी और बुब्बे दिखाकर जवनिया लूटअ ऐ राजा गाकर नाच रही थी, तभी 18-20 लोग मेरे घर ढुक गए, और मेरे हाथ 100, 100रू पकडाकर कहने लगे, आन्टी उसे छत से जल्दी बुलाओ, ज्यादा समय नहीं लूँगा 5 मिनट मे ही निपटा दूँगा, एक आदमी तो निसा का पापा को 20रू देकर बोला-- ऐ बुढऊ, 2ठो कॉन्डम लेता आ, कुछ लोग तो हमे ही दिवाल धरकर खडा होने के लिए कह रहे थे पुलिस-- अच्छा तो खानदानी छिनार हो तुमलोग ??
तिलचट्टों की दलीलें इतनी क्यूट क्यूट हैं कि अब क्या ही कहूँ। इनका कहना है कि पुलिस को इनके उपद्रव के वीडियो बनाने से रोका जाना चाहिये, क्योंकि इससे इनकी “प्राइवेसी” वायलेट होती है। सही सुना आपने — तिलचट्टों की तरफ से ये दलील दिल्ली हाईकोर्ट मे खुद उनकी वकील ने पेश की। ये बैरिकेड तोड़ के जबरन संसद मे घुसने पर आमादा रहें, पुलिस रोके तो उसका सर फोड़ डालें, लेकिन ये तमाम गैरकानूनी कुकर्म करते हुए भी पुलिस इनका वीडियो न बनाये क्योंकि उसमे खौराये कुकुर अभिजीत दीपके, किन्नर दहिया, सतरंगी सौरभ दास, और सर्वांग सुंदरी आशुतोष रांका की ब्रा-पैंटी दिख जाने से उनकी प्राइवेसी भंग हो जाने का खतरा है। इन लोगों का ये भी कहना है कि पुलिस को फेशियल रिकॉग्निशन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने से रोका जाना चाहिये, क्योंकि पुलिस इसके उपयोग से “शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों” के नाम पते निकाल कर बाद मे उन्हे झूठे मामलों मे फँसा सकती है। सौरभ दास तो Times Now पर आ के ये तक कह रहा कि कौन शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहा था और कौन हिंसा कर रहा था — ये वीडियो देख कर दिल्ली पुलिस नही — हम तय करेंगे। यदि पुलिस को यह अधिकार दिया गया तो पुलिस निर्दोष शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को फँसा सकती है। मै तो कहता हूँ कि पुलिस डिपार्टमेंट ही बंद कर देना चाहिये, क्योंकि थाना रहेगा तो पुलिस झूठी FIR लिख कर भी तिलचट्टों को फँसा सकती है। डिपार्टमेंट रहेगा तो पुलिस को सर्विस-वेपन भी मिलेंगे ही, और पुलिस इनका इस्तेमाल कर शांतिपूर्ण तिलचट्टों का एनकाउंटर भी कर सकती है। बल्कि मै तो यह भी मानता हूँ कि पुलिस ही क्या, इस देश मे जो भी व्यक्ति तिलचट्टा पार्टी के समर्थन मे जंतर मंतर पहुँच कर संसद फूंकने के प्रयास मे शामिल नही हुआ — कोर्ट को ऐसे हर एक व्यक्ति का लिंग कटवा देना चाहिये, क्योंकि ऐसे हजारों लाखों व्यक्ति तिलचट्टों पर कुपित हैं और अवसर मिलते ही पोटेंशियली उनके साथ अप्राकृतिक कुकर्म कर सकते हैं। सरकार, प्रशासन और अदालतों के सामने यदि आज कोई सबसे अधिक महत्व का काम उपस्थित है तो वह है तिलचट्टों को हर हाल देश फूंकने के लिये विरोधमुक्त अभयारण्य प्रदान करना, उनको किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई से इम्यूनिटी देना, और उनके किसी भी संभावित विरोधी को खतरा बनने से पहले ही केवल आशंका के आधार पर एलिमिनेट कर देना। ये सारा देश तिलचट्टालैंड है और तिलचट्टे ही इसके मूल निवासी….. अन्य सभी लोग घुसपैठिये हैं जिन्हे समाप्त किया जाना पूरी तरह युक्तियुक्त और तर्कसंगत है। सरकार और अदालतें इस तथ्य का संज्ञान ले अविलंब पुलिस और समस्त नॉन-तिलचट्टा जगत पर कठोरतम कार्रवाई शुरू करें। हमने दीपके, सौरभ दास, दहिया और रांका जैसों के प्रोटेस्ट मे कोई सहयोग न करके उन्हे जो मानसिक आघात पहुंचाया है — उसका दंड तो हमे मिलना ही चाहिये। जज साहब, आप प्लीज हम लोगों को पेल दो!
The Sabarmati Express Godhra massacre of Hindus, narrated by a Pakistani news anchor. No Indian news anchor has ever narrated it this clearly or without filters. None has dared to speak the truth.
Good one! Isha Koppikar very articulately explains the casual way leftist liberals and Gen Z cockroaches use the word "dictatorship". And, "the parents should teach academics also, and civics also"
Job Bot for Indians only - https://lnk.ua/aPQJs8ALv
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Abhijeet Dipke's real agenda finally came out 🚨 Question - Now that the protest is over, why don't you raise questions against reservation as many students are asking for it? Abhijeet - That's not my headache. Now the government should deal with all it's issues Reporter - If that's not your headache, then how was this NEET protest your headache? Students are the one suffering in both cases Abhijeet - I don't think population based reservation is anything wrong. It should be there. If SCs are 15% of the population, they should get 15% reservation Reporter - Then why not apply the same logic to paying taxes? If SCs are 15% of the population, should they also pay 15% of the total tax? Why should the general category pay all the tax? Shouldn't everyone contribute according to the same population logic? Would that be fair? Abhijeet just made the same sad face he keeps making after losing every debate. Give her a raise man 🙏
प्रिय छात्र, >ये आंदोलन वगैरह से कुछ नहीं होगा, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कुछ नहीं होगा, नया बिल आने से भी कुछ नहीं होगा। >क्योंकि इस देश का सिस्टम सड़ा हुआ है, लोग मुर्दा हैं, नेता भ्रष्ट हैं, अधिकारी सुवर हैं। >एक छोटी सी बात बताता हूं, अभी कुछ दिन पहले नोएडा में कर्मचारियों, मजदूरों ने कितना बड़ा आंदोलन किया, लाठी खायीं, केस झेले, मुकदमे खाए, कुछ मजदूरों का घर का बजट बिगड़ गया, लेकिन क्या हुआ? >हरियाणा के बहादुरगढ़ फुटवियर पार्क में जितनी भी कंपनियां हैं वो दीपावाली आने के 4 महीने पहले से ही मजदूरों को निकालती हैं, ताकि बोनस का पैसा न देना पड़े। >थोड़ा सा भी काम कम होता है तो तुरंत मजदूरों को निकाल दिया जाता है, काम आने पर नए मज़दूर भरे जाते हैं। >अनस्किल्ड लेबर बोलकर स्किल्ड लेबर का काम लिया जाता है, जिसकी सैलरी 8 घंटे की 12000 रुपए है, औरते शाम को आते आते बुरी तरह थक जाती हैं, इतना काम लिया जाता है। >किसको फर्क पड़ता है? कौन सी सरकार को फर्क पड़ता है? किस मंत्री को फर्क पड़ता है? कितनो का इस्तीफा मांगोगे, इस्तीफा मांगते मांगते जीवन समाप्त हो जाएगा, लेकिन भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा। सब के सब चोर हैं साले। >जो आंदोलन आज बीजेपी के खिलाफ चल रहा है, अगर यही आंदोलन किसी अन्य विपक्ष शासित राज्य में होता तो बिल्कुल सेम टू सेम रिजल्ट होता, कुछ भी फर्क नहीं होता। >किसी को भी बच्चों की नहीं पड़ी, किसी को भी गरीबों की नहीं पड़ी, किसी को भी मजदूरों की नहीं पड़ी। >पड़ी है तो खुद के बच्चों की, जितने भी विधायक हैं या सांसद हैं या मंत्री हैं, 95% के बच्चे विदेशों में या तो पढ़ रहे हैं या फिर सेटल हो चुके हैं। >मैने जो लिखा ये सच्चाई है इस देश की, राजनीत का चश्मा हटाकर पढ़ना, असलियत सामने आ जाएगी। >इसलिए जिन बच्चों के कुछ अरमान हो, माँ बाप सक्षम न हों, घर की अकेली जिम्मेदारी हो, वो बच्चे फर्जी आंदोलन से दूर रहें। जय हिंद