tgindex

धर्मसम्राट

Статистика
@DharmSamratOfficialанглийский

SHRIMAD RAMAYAN - An epic tale that explores the eternal battle between the good and evil, highlighting the quest for righteousness and spiritual awakening.❣️

Последний пост
14 авг.
Последнее чтение
ещё не заходили
Постов за неделю
1
Всего постов
28
Тип
открытый
Язык
английский
В каталоге с
13 авг.
Подписчики
3 897
−24 за 4 дн.
Сутки
−1
−0,03%
Неделя
 
Месяц
 
Просмотров на пост
681
28 постов
Вовлечённость
17,5%
к подписчикам
Постов в день
0,1
всего 28
Упоминаний
0
каналов
Охват размещения
оценка
1/24сутки в ленте
111
1/48двое суток
127
1/72трое суток
137

Оценка по просмотрам недавних постов: пост набирает почти всё за первые сутки.

Посты

  • 🔥 NEW VIDEO | Gen Z vs Millennials 🧠 Gen Z या Millennials — कौन है ज़्यादा बुद्धिमान? दो generations, दो अलग सोच और जिंदगी को देखने के दो अलग नज़रिए! ⚡ Jantar Mantar Protest 🆚 Navnirman Andolan 🗣️ Rudeness 🆚 Boldness 👨‍👩‍👧‍👦 Being Alone 🆚 Being With Family 📱 Social Media 🆚 Real Social Life 🧠 Digital Intelligence 🆚 Life Experience क्या Gen Z ज्यादा smart, bold और independent है, या Millennials के पास ज्यादा experience और resilience है? 🔥 Gen Z vs Millennials: Who Is ACTUALLY Smarter? ▶️ वीडियो जरूर देखें और बताएं—आपके अनुसार कौन है ज़्यादा बुद्धिमान? **ऋषि उवाच | Rishi Uvach https://youtu.be/XS3HzlFKIwk?si=b-KTd-qri4LZZKx0

  • श्रीराम ने शम्बूक को क्यों मारा? शम्बूक-वध — मूल रामायण या प्रक्षेप? रामायण का शम्बूक-वध प्रसंग आज भी अनेक गंभीर प्रश्न खड़े करता है। एक ओर आलोचक कहते हैं कि शम्बूक शूद्र था और तपस्या कर रहा था, इसलिए श्रीराम ने उसका वध किया—और इसी आधार पर श्रीराम पर जातिवाद का आरोप लगाया जाता है। दूसरी ओर कुछ परम्परागत व्याख्याएँ भी यह स्वीकार करती हैं कि शम्बूक का वध शूद्र होकर तपस्या करने के कारण हुआ, लेकिन इसे वर्णधर्म की रक्षा के रूप में प्रस्तुत करती हैं। लेकिन यदि दोनों पक्षों की मूल धारणा यही है, तो प्रश्न स्वाभाविक है— क्या श्रीराम को जातिवादी कहा जाना चाहिए? या इससे भी पहले हमें यह पूछना चाहिए— क्या शम्बूक-वध का प्रसंग मूल वाल्मीकि रामायण का हिस्सा है? इसी प्रश्न से रामायण के पाठ-इतिहास की एक अत्यन्त रोचक चर्चा प्रारम्भ होती है। 📜 क्या रामायण में प्रक्षेप हुए हैं? 📜 प्रक्षेप पहचानने के शास्त्रीय एवं ऐतिहासिक आधार क्या हैं? 📜 क्या प्रक्षेप का सिद्धान्त केवल आर्य समाज की देन है? 📜 क्या महर्षि दयानन्द से पहले भी भारतीय विद्वानों ने ग्रन्थों में प्रक्षेप स्वीकार किए थे? 📜 Critical Edition क्या होती है और उसे कैसे तैयार किया जाता है? 📜 रामायण की विभिन्न पाण्डुलिपियाँ हमें क्या बताती हैं? 📜 रामायण की प्राचीनता के ऐतिहासिक प्रमाण क्या हैं? 📜 और क्या उत्तरकाण्ड मूल वाल्मीकि रामायण का ही भाग है? इन प्रश्नों पर भावनाओं और राजनीतिक धारणाओं से अलग हटकर मूल संस्कृत पाठ, प्राचीन परम्परा, पाण्डुलिपियों, पाठभेदों और ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर विस्तृत चर्चा— 🎙️ प्रोफेसर ज्वलंतकुमार शास्त्री जी के साथ 📺 ऋषि उवाच पर नया विशेष संवाद “श्रीराम ने शम्बूक को क्यों मारा?” आस्था हो या आलोचना—दोनों की कसौटी प्रमाण होना चाहिए। प्रश्न भी होंगे। शास्त्र भी होंगे। प्रमाण भी होंगे। ▶️ वीडियो अवश्य देखें और अपने विचार साझा करें। https://youtu.be/y-X722Wma6M?si=XL2qG6G3snHHU-Sc

  • 🚨 NEW VIDEO DROPPED! 🔥 🔥 हिन्दू धर्म का Real Version: Myth vs Reality Gen Z ke paas questions hain. ऋषि उवाच के पास उत्तर हैं। ❌ ना अंधविश्वास। ❌ ना क्लिकबेट। ❌ ना प्रोपेगैंडा। ✅ केवल वेद। ✅ केवल उपनिषद। ✅ तर्क, इतिहास और प्रमाण। 🤔 क्या हिन्दू धर्म सिर्फ़ “Way of Life” है? 🕉️ ब्रह्म क्या है? ⚖️ धर्म का वास्तविक अर्थ क्या है? 🙏 क्या मूर्ति पूजा अनिवार्य है? 📜 अगर आप भी इंटरनेट पर फैली आधी-अधूरी जानकारी, वायरल मिथकों और बिना प्रमाण वाले दावों से परेशान हैं, तो यह श्रृंखला आपके लिए है। 🎥 Watch Now! 💬 अपना सबसे कठिन प्रश्न कमेंट में लिखिए। अगला एपिसोड शायद आपके सवाल पर हो। 🔥 Gen Z Asks. Rishi Uvach Replies. 📖 सोचिए प्रमाण से, ट्रेंड से नहीं। https://youtu.be/J_-ylYxDaIo?si=duBfoI_wUFkLF8tw #RishiUvach #Hinduism #Sana

  • https://youtube.com/shorts/vY62G63ENU0?si=PseVk42k8fkLEi1_

  • 🚨 क्या ऋग्वेद को लेकर हमें पूरी सच्चाई बताई गई है? 👀 क्या ऋग्वेद सचमुच संसार का सबसे प्राचीन ग्रंथ है? 📜 या फिर... ❓ क्या प्रथम और दशम मण्डल बाद में जोड़े गए थे? ❓ क्या मैक्समूलर, मैकडॉनेल जैसे विद्वानों का रचनाकाल सही था? ❓ कौन थे वे प्राचीन ऋग्वेद-भाष्यकार, जिनका भाष्य आज लुप्त हो चुका है? ❓ और ऋग्वेद पर लगाए जाने वाले प्रसिद्ध आक्षेपों का उत्तर क्या है? यदि आप इतिहास को केवल सुनी-सुनाई बातों से नहीं, बल्कि प्रमाणों से समझना चाहते हैं, तो यह वीडियो आपके लिए है। Click now https://www.youtube.com/watch?v=wiiHw4eVn-U&feature=youtu.be 🔥 देखना मत भूलिए—हो सकता है यह वीडियो ऋग्वेद के बारे में आपकी धारणा ही बदल दे! #ऋग्वेद #वेद #भारतीयइतिहास #वैदिकज्ञान #महर्षिदयानन्द #RishiUvach

  • 📢 नई वीडियो | शनिवार, 11 जुलाई 2026 | दोपहर 3:00 बजे नियोग और मेरीटल रेप पर हिन्दूधर्म क्या कहता है? क्या हिन्दू धर्म Marital Rape की अनुमति देता है? इस महत्वपूर्ण वीडियो में शास्त्रीय दृष्टि से चर्चा होगी— ✅ हिन्दू धर्म में विवाह का वास्तविक स्वरूप ✅ पति-पत्नी के पारस्परिक अधिकार एवं कर्तव्य ✅ मेरीटल रेप पर धर्मशास्त्रीय दृष्टिकोण ✅ नियोग (Niyoga) की व्यवस्था ✅ विधवा विवाह (Widow Remarriage) पर वैदिक दृष्टि ✅ आधुनिक कानून और हिन्दू धर्म के बीच अंतर यदि आप इस विषय पर हिन्दू धर्म का वास्तविक दृष्टिकोण जानना चाहते हैं, तो इस वीडियो को अवश्य देखें। 🗓 प्रकाशन: शनिवार, 11 जुलाई 2026 🕒 समय: दोपहर 3:00 बजे वीडियो देखने के बाद अपने विचार अवश्य साझा करें और इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएँ। https://www.youtube.com/watch?v=AGI448CulXM

  • कुतर्क का अंत: शास्त्रार्थ की कसौटी पर अंतिम साँसें गिनता पौराणिक पक्ष कार्तिक अय्यर आचार्य अग्निव्रत जी ने शिवंश नारायण द्विवेदी (आवाहन) के संग जो शास्त्रार्थ किया, वो अपने आप में सुनने योग्य है और आर्यसमाज के उस गौरवशाली युग की याद दिलाता है। वैसे तो मैं आवाहन जैसे प्रपंची को आचार्य जी या किसी भी वरिष्ठ विद्वान के सामने बैठने का अधिकारी नहीं मानता, पर उसको अपने चैनल पर लाना उचित था ताकि वह म्यूट-म्यूट का खेल न खेल सके। आचार्य जी ने उसके हर तर्क का जवाब दिया और प्रमाण से साबित किया कि इससे अवतारवाद साबित नहीं हो सकता। शिवांश के तर्क 'नाली में ईश्वर' और ’बलात्कार का साक्षी’ तक ही सीमित रहे, जबकि आचार्य जी का तर्क अकाट्य रहा कि एक शरीर में बँधना ईश्वर का सामर्थ्य कम करता है। प्रमाणों में आचार्य जी ने सांख्य के प्रमाण दिए और यजुर्वेद ४०.८ का 'अपापविद्धम्' रखा कि शरीर धारण से ईश्वर विकारी हो जाता है। शिवांश के पास इनका कोई जवाब नहीं था, इसलिए कह दिया कि प्रमाण की चर्चा आगे होगी। उसने ले-देकर यजुर्वेद ३१.१९ का प्रमाण सायण के भाष्य से दिया, जो कि त्रुटिपूर्ण है क्योंकि शुक्ल यजुर्वेद-माध्यन्दिनी शाखा पर सायण का कोई भाष्य है ही नहीं; उन्होंने तैत्तिरीय शाखा का भाष्य किया है। इस पर केवल उव्वट और महीधर के ही भाष्य मौजूद हैं, और उनके वास्तविक अर्थों से भी कोई अवतारवाद सिद्ध नहीं होता: उव्वट भाष्य: वह परम पुरुष ही प्रजापति रूप होकर संसार के भीतर, बिना उत्पन्न हुए (अजायमानः) भी, चारों प्रकार के जीवों के भीतर चेतना रूप में विचरण करता है। योगी लोग सब कुछ त्याग कर उस परमात्मा के मूल स्वरूप को पहचानते हैं। यहाँ घट-घट व्यापी चेतना की बात है, किसी सशरीर अवतार की नहीं। महीधर भाष्य: वह अजन्मा परमात्मा अपनी 'माया' से इस दृश्य प्रपंच (संसार) के रूप में प्रकट होता है। जो ब्रह्मविद् हैं, वे उसके स्वरूप को 'अहं ब्रह्मास्मीति' रूप में साक्षात् करते हैं। यहाँ महीधर साफ तौर पर अद्वैत वेदांत के कारण-कार्य सिद्धांत (विवर्तवाद) की बात कर रहे हैं, पौराणिक अवतारवाद का कोई समर्थन नहीं है। आचार्य जी ने 'अजायमानो बहुधा विजायते' (यजुर्वेद ३१.१९) मन्त्र का अत्यंत प्रामाणिक वैदिक अर्थ प्रस्तुत किया। मन्त्र का पहला ही शब्द 'अजायमानो' (जिसका कभी जन्म नहीं होता) पौराणिक अवतारवाद के ताबूत में आखिरी कील है। सूर्य, पृथ्वी और संपूर्ण ब्रह्मांड को नियम में बांधकर रखना ही उस ईश्वर का प्राकट्य (बहुधा विजायते) है, किसी भी स्थिति में 'अवतार लेना' नहीं। असल में हमारे विद्वान रामचंद्र देहलवी जी, बुद्धदेव मीरपुरी जी, पं. मनसाराम जी ने इन सब प्रश्नों के उत्तर कब से दे रखे हैं! मन्त्र कहता है 'तस्य योनिं परि पश्यन्ति धीराः' अर्थात् केवल 'धीर' (तत्वदर्शी विद्वान) ही ईश्वर के इस व्यवस्थागत प्राकट्य को समझ सकते हैं। राम-कृष्ण आदि को तो रावण-कंस जैसे दुष्ट भी देखते थे, इसलिए 'धीर लोग ही देख सकते हैं'—यह लक्षण तथाकथित अवतारों में घटित नहीं होता। अंत में, मैं आचार्य जी को नमन करता हूँ; उन्होंने कुतर्की आवाहन को अच्छा सबक सिखाया और उसकी 'वन-वे ट्रैफिक' की नौटंकी बंद की। तर्कों के सामने टिक न पाने के कारण वह भगोड़ा गुस्सा करके भाग निकला। ऐसे ही आर्यसमाज पौराणिक, वामपंथी और अन्य पक्षों का खंडन करता रहे, ऐसी कामना है। कोई भी इसके खोखले जाल में न फँसे। वैदिक धर्म की जय हो। वंदे वेदमातरम्! (23/06/2026)

  • https://youtube.com/shorts/qg5JVRwlvvM?si=Rn5tL1W60J-qiaXa

  • *क्या पाताल सच में था… या सिर्फ कल्पना? 🤯* आजकल कुछ लोग पुराणों के “पाताल लोक” को Fantasy कहकर dismiss कर देते हैं। YouTuber नित्यानन्द मिश्र ने भी महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती के पाताल संबंधी विचारों का मज़ाक उड़ाते हुए उसे केवल कल्पना बताया। 😶 लेकिन दूसरी ओर Ritter, नन्दलाल डे जैसे शोधकर्ता पाताल को वास्तविक मानकर उसका भौगोलिक स्थान खोजने का प्रयास करते हैं। 🌎 तो आखिर सच क्या है? 🔹 क्या पाताल कोई underground दुनिया थी? 🔹 क्या यह अमेरिका या पृथ्वी के दूसरे भागों का संकेत था? 🔹 या फिर बाद की कल्पनाओं ने इसके अर्थ को बदल दिया? इस वीडियो में हम शास्त्र, इतिहास, भूगोल और वैदिक दृष्टि से पाताल के रहस्य को decode करेंगे। 🔥 https://www.youtube.com/shorts/Kt9ahZ7c7GQ

  • काशी शास्त्रार्थ 2.0 देखिए, कैसे स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी, जो गोवर्धन मठ पुरी के शंकराचार्य हैं, एक 23 वर्ष के आर्यसमाजी युवक के साथ शास्त्रार्थ में पराजित हो जाते हैं। आर्य समाज का युवा निर्भय आर्य बिना डरे काशी में उनके पंडाल तक पहुँचता है और उनसे सीधे प्रश्न करता है। निश्चलानंद जी प्रश्नों के उत्तर में इधर-उधर की बातें करने लगते हैं, और जब उनकी बातों का तर्कपूर्ण खंडन किया जाता है, तब वे मौन हो जाते हैं। पूरा पंडाल अद्वैतवादियों से भरा हुआ था, परंतु उन सबके बीच निर्भय आर्य अपने नाम को सार्थक करते हुए निर्भयतापूर्वक प्रश्न प्रस्तुत करता है। इस दौरान वहाँ उपस्थित कुछ लोग उत्तेजित हो जाते हैं और उसे घेर लेते हैं। उस पर लगभग 15 लोगों द्वारा जानलेवा आक्रमण करने का प्रयास किया जाता है। निर्भय के साथ उसकी बहन भी उपस्थित थी, जिसके साथ भी अनुचित व्यवहार किया गया। इसके बावजूद, अद्वैतवादियों के गढ़ में एक आर्यसमाजी युवक दृढ़ता से खड़ा रहता है। निर्भय किसी गुरुकुल में शिक्षित नहीं है; वह एक सामान्य युवक है। फिर भी, एक सामान्य युवा द्वारा अद्वैतवाद के सर्वोच्च गुरु को पराजित करना यह दर्शाता है कि उनके सिद्धांतों में कितनी कमजोरी है। जब उनके शीर्ष गुरु की यह स्थिति है, तो सामान्य अनुयायियों की स्थिति का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। शिवांश जैसे लोग इधर-उधर से साधारण पुरोहितों से प्रश्न करते हैं, परंतु विद्वानों के समक्ष नहीं आते। जबकि निर्भय ने सीधे उनके सर्वोच्च गुरु से संवाद किया। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि अद्वैतवादी आर्यसमाज से क्यों असहज रहते हैं। यदि एक सामान्य आर्य युवा इतना सामर्थ्य रखता है, तो विचार कीजिए कि स्वामी दयानंद सरस्वती जैसे महर्षि कितने महान रहे होंगे। इतिहास साक्षी है कि काशी के समस्त पंडित उनके सामने पराजित हुए थे। आज निर्भय ने उसी इतिहास का पुनः स्मरण करा दिया। Watch today at 6-00 pm https://youtu.be/ANg1zTqm-3I?si=l2oQJBg15-hNYKm7

  • 🔥 Big Reveal Tonight! 🔥 महात्मा फुले & महर्षि दयानन्द के बीच का hidden history आज सामने आने वाला है… 👀 क्या सच में उनके बीच सिर्फ विरोध था? या कहानी कुछ और ही है जो हमें कभी बताई ही नहीं गई? 🎤 By Dr. Jwalantkumar Shastri ⏰ Video Premieres at 7:30 PM TODAY 👉 miss मत करना — यह सिर्फ एक video नहीं, history का सच है। 📢 set your reminder now & share with others! #HiddenHistory #RishiUvach #IndianHistory #VedicTruth https://www.youtube.com/watch?v=R-hSdEpcxCI

  • https://youtube.com/shorts/Aavdb5eY2po?si=T09fLos6NnAdDhz0

  • महात्मा ज्योतिबा फुले की २००वी जन्मजयंती पर उनहें विनम्र श्रद्धांजली। चलीये आज हम जानते है की कैसे महात्मा फुले ने महर्षि दयानंद के प्राण बचाये थे!! https://youtube.com/shorts/cExFIJP6sLY?si=2lweIV0m0B0CY-H2

  • युट्युबर नित्यानन्द मिश्र के साथ हुई मेरी वोट्सएप चर्चा विषय - वेद और दयानन्द

  • हम सनातनियों के सर्वोच्च धर्मगुरु जगद्गुरु महर्षि दयानन्द सरस्वती के जन्मदिवस पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। महर्षि दयानन्द के विचार हम सनातनियों के लिए सदा पथप्रदर्शक रहे हैं।

  • 4 февр.1 15011

    https://youtube.com/shorts/pdQEDjv9MCw?si=aHx9rEza_5TJB4rr

  • 🚨 BIG ALERT! 🚨 नई UGC Guidelines ने campus में आग लगा दी है 🔥 अब सवाल सीधा है — “Social Justice या Reverse Discrimination?” 🎙 Lakshya (IIM Alumnus and Anti Caste Activist) 🖊 By Rishi Uvach यह कोई boring lecture नहीं है — यह है real talk, real facts, real सवाल। 👉 क्या दलितों की सुरक्षा के नाम पर General Category को दबाया जा रहा है? 👉 क्या जाति-संवेदनशीलता अब free speech को kill कर रही है? 👉 क्या university अब place of learning है या place of डर? 🟥 यह सिर्फ debate नहीं है, यह future of Indian campuses का सवाल है। 📢 Live on YouTube 💬 अपने सवाल लाओ 🔥 अपनी राय रखो ⚖️ सच बनाम सिस्टम देखो बहस करो, चुप मत रहो। Join the discussion. 👊 30 January 2026 8:30 PM https://www.youtube.com/watch?v=hgsmYtSmjoI

  • कर्म किसी को नहीं छोड़ते! गत वर्ष कुम्भ मेले में यही अविमुक्तेश्वरानन्द था, जिसने आर्यसमाजियों का अपमान करते हुए उन्हें मेले में स्नान करने से मना कर दिया था। और आज देखिए—इस बार उसी मेले में उसका स्वयं का अहंकार टूट गया। अनशन का नाटक किया, लेकिन किसी ने भाव नहीं दिया, और अंततः अपमानित होकर मेले से वापस लौटना पड़ा। आर्यसमाजियों का स्नान रोकने वाले का स्नान स्वयं ईश्वर ने रोक दिया। अभी तो केवल अकड़ टूटी है, रगड़ होना अभी बाकी है! किसी ने सही ही कहां है - आर्यो से बहस, जिंदगी तहस नहस!

  • 🔥 BIGGEST PHILOSOPHICAL DEBATE 🔥 🗓 24 जनवरी | Saturday ⏰ रात 8:30 PM ⚔️ Sāṅkhya Philosophy: नास्तिक Myth या Vedic Reality? 🎙 Debators: ✨ रजत पाल (PhD Scholar, IIT Madras) ✨ सार्थक विद्यार्थी (Vedic Scholar) 🤔 क्या Sāṅkhya सच में नास्तिक है? या फिर एक deeply Vedic system, जिसे सालों से गलत समझा गया? 🚫 No myths 📜 Only शास्त्र 🧠 Pure logic 👉 Watch करो. Think करो. Decide करो. 👍 Like करो | 🔄 Share करो | 🔔 Subscribe करो 💬 Comment में बताओ — Atheist या Vedic? #SankhyaDebate #BiggestDebate #IndianPhilosophy #SanatanDharma #LogicOverMyth https://www.youtube.com/watch?v=Uk51QX4HNIc

  • https://youtu.be/XQEiNsBiK-g?si=mnLOaFUOkIkm_6hV