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कुत्ता काट ले तो क्या करें?
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हम अक्सर सोचते हैं कि अगर किसी कुत्ते ने काट लिया, तो रेबीज होना तय है। लेकिन मेडिकल साइंस और इतिहास बताते हैं कि रेबीज का इन्फेक्शन होना इतना सीधा नहीं है। यह एक "दुर्लभ संयोग" (Rare Probability) है जो कई शर्तों के पूरा होने पर ही होता है। जानिए, वो कौन सी 4 शर्तें हैं जिनका पूरा होना वायरस के लिए जरूरी है: ✅ शर्त 1: कुत्ता 'पागल' (Rabid) होना चाहिए हर आक्रामक कुत्ता रेबीज से ग्रस्त नहीं होता। अगर कुत्ता सामान्य है या 10 दिन बाद भी जिंदा है, तो रेबीज का खतरा 0% है। ✅ शर्त 2: 'वायरस' का ट्रांसफर होना (Viral Shedding) अगर कुत्ता पागल भी है, तो जरूरी नहीं कि काटते वक्त उसकी लार (Saliva) में वायरस मौजूद हो। वायरस "रुक-रुक कर" (Intermittently) निकलता है। अगर लार में वायरस नहीं था, तो इन्फेक्शन नहीं होगा। (यही कारण है कि इतिहास में बिना वैक्सीन के भी 50% लोग बच जाते थे)। ✅ शर्त 3: घाव की गहराई और जगह (Entry Point) क्या दांत ने जींस/पैंट के ऊपर से काटा? (रिस्क बहुत कम) क्या घाव पैर में है? (दिमाग तक पहुंचने में वायरस को बहुत मुश्किल होगी) अगर घाव गहरा है और गर्दन/चेहरे पर है, तभी रिस्क 'High' होता है। ✅ शर्त 4: सबसे बड़ा बचाव - साबुन और पानी अगर आपने तुरंत 15 मिनट तक घाव को साबुन से धो दिया, तो वायरस की बाहरी परत (Lipid Layer) वहीं फट जाती है। इससे इन्फेक्शन का चांस 80% तक खत्म हो जाता है। 📊 निष्कर्ष (Conclusion): रेबीज होना एक "Bad Luck" का खेल है जहाँ सारी शर्तें आपके खिलाफ होनी चाहिए। लेकिन याद रखें... यह एक ऐसा जुआ है जिसमें जीतने पर 'जिंदगी' मिलती है और हारने पर 'मौत'। 💡 मेरी सलाह: तथ्यों को जानिए, पैनिक मत कीजिये। रेबीज होना मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं। इसलिए पागल कुत्तों ओर डॉक्टर्स से सावधान रहें।... Watch Full Video: https://www.facebook.com/share/v/16xubyKXBS/
CDC - Genital HPV Infection - Fact Sheet CDC के मुताबिक, 10 में से 9 HPV इन्फेक्शन (90%) बिना किसी इलाज के 2 साल के भीतर अपने आप ठीक हो जाते हैं।
WHO : विश्व स्वास्थ्य संगठन भी मानता है कि ज्यादातर HPV इन्फेक्शन 'Transient' (अस्थायी) होते हैं और कैंसर नहीं बनते।" Source: WHO Cervical Cancer Fact Sheet
The Lancet Global Health / Ho et al. (1998) - Natural History of Cervicovaginal HPV Infection यह स्टडी दिखाती है कि युवा महिलाओं में 70% HPV इन्फेक्शन 1 साल में और 91% इन्फेक्शन 2 साल में क्लियर हो जाते हैं।
इसको अन्य नाम से भी जाना जाता है : बच (Bach), वचा (Vacha), घोरबच (Ghorbach), उग्रगंधा (Ugragandha), स्वीट फ्लैग (Sweet Flag), कैलमस (Calamus), वेखंड (Vekhand), वासा, वशाम्बु, बजे, घोड़ावज, षड्ग्रन्था।
⚠️ सावधान ❗ कहीं आप भी अपने परिवार को 'रोटी' के साथ 'धीमा जहर' तो नहीं खिला रहे? आजकल घरों में साल भर का गेहूं स्टोर करते समय हम अनजाने में एक बहुत बड़ी गलती कर बैठते हैं। कीड़ों से बचने के लिए हम गेहूं की टंकी में 'सल्फास' (Celphos), 'पारे की गोली' या 'केमिकल की पुड़िया' डाल देते हैं। एक Dietitian और Nutritionist होने के नाते, मेरा यह फर्ज है कि मैं आपको इसके सच से रूबरू कराऊं। ⚠️ जानलेवा खतरा: ये गोलियां हवा के संपर्क में आते ही 'फॉस्फीन' (Phosphine) जैसी जहरीली गैस छोड़ती हैं। यह गैस सिर्फ कीड़ों को ही नहीं मारती, बल्कि गेहूं के दानों में समा जाती है। परिणाम? ❌ कैंसर (Cancer) का खतरा ❌ लिवर और किडनी डैमेज ❌ नर्वस सिस्टम की कमजोरी ❌ पेट की गंभीर बीमारियां ✅ प्राकृतिक और 100% सुरक्षित समाधान (The Ultimate Solution): हमारे आयुर्वेद और पुरानी परंपराओं में इसका "रामबाण इलाज" मौजूद है जो सल्फास से भी ज्यादा असरदार है और सेहत के लिए सुरक्षित है। मेरी सलाह (Expert Recommendation): "डबल सुरक्षा कवच" 1️⃣ अरंडी का तेल (Castor Oil) का मोयन: 100 किलो गेहूं में 150-200 ml अरंडी का तेल मिलाकर अच्छे से मसलें (मोयन दें)। यह दानों पर एक सुरक्षा कवच बना देता है जिससे कीड़े अंदर अंडे नहीं दे पाते। 2️⃣ बच की जड़ें (Sweet Flag/Vacha): पंसारी से 'बच' की सूखी जड़ें लाएं और सूती कपड़े में बांधकर (पोटली बनाकर) गेहूं के बीच में रख दें। इसकी गंध से कीड़े आस-पास भी नहीं भटकते। इसको अन्य नाम से भी जाना जाता है : बच (Bach), वचा (Vacha), घोरबच (Ghorbach), उग्रगंधा (Ugragandha), स्वीट फ्लैग (Sweet Flag), कैलमस (Calamus), वेखंड (Vekhand), वासा, वशाम्बु, बजे, घोड़ावज, षड्ग्रन्था। 🌿 निष्कर्ष: अपने परिवार की सेहत के साथ खिलवाड़ न करें। जहर वाली गोलियां छोड़ें और अरंडी के तेल + बच का नेचुरल तरीका अपनाएं। स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें। ✍️ Dt. विक्रम सिंह मीणा (Dietitian & Nutritionist, BNYS) प्राकृतिक चिकित्सा अपनाएं, रोग मुक्त जीवन पाएं।
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आजकल हम "प्रोबायोटिक्स" (Probiotics) और "विटामिन B12" के नाम पर हजारों रुपये की महंगी दवाइयां और सप्लीमेंट्स खा रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे बुजुर्गों के पास इन सब बीमारियों का एक ही इलाज था, जिसे आज मॉडर्न साइंस भी 'World’s Best Natural Probiotic' मान रहा है? जी हाँ, वह है— छाछ-राबड़ी (Chhach-Rabdi)। यह सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं है, यह एक "फंक्शनल फूड" है। आइए समझते हैं इसके पीछे का विज्ञान और यह आपके शरीर में क्या चमत्कार करती है। 🔬 साइंस क्या कहता है? (The Science Behind It) राबड़ी "फर्मेंटेशन" (Fermentation) की प्रक्रिया से बनती है। जब हम बाजरे या जौ की घाट (Prebiotic) को छाछ (Probiotic) में मिलाकर, पूरी रात मिट्टी की हांडी में रखते हैं, तो उसमें लाखों गुना 'गुड बैक्टीरिया' (Lactobacillus) पैदा होते हैं। यह प्रक्रिया इस साधारण भोजन को Vitamin B12 की फैक्ट्री बना देती है। ✅ राबड़ी के 5 चमत्कारी फायदे: पेट और आंतों का कायाकल्प (Gut Healer): अगर आपको IBS (संग्रहणी), कब्ज, गैस या अपच है, तो राबड़ी अमृत है। यह आंतों की सूजन को कम करती है और पाचन तंत्र को रीसेट करती है। शाकाहारियों के लिए B12 का खजाना: शाकाहारी भोजन में अक्सर Vitamin B12 नहीं मिलता, जिससे नसों में कमजोरी और थकान होती है। राबड़ी B12 का सबसे शक्तिशाली नेचुरल स्रोत है। हड्डियाँ होंगी लोहे जैसी: इसमें भरपूर कैल्शियम होता है। चूँकि यह आंतों को स्वस्थ करती है, इसलिए शरीर Vitamin D को बेहतर सोख पाता है, जिससे जोड़ों का दर्द और ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) दूर होता है। वजन और शुगर कंट्रोल: इसमें 'कॉम्प्लेक्स कार्ब्स' और फाइबर होते हैं। इसे पीने के बाद लंबे समय तक भूख नहीं लगती, जिससे वजन घटता है और शुगर लेवल अचानक नहीं बढ़ता। प्राकृतिक शीतलक (Natural Coolant): इसकी तासीर ठंडी और क्षारीय (Alkaline) होती है, जो शरीर की गर्मी और एसिडिटी को शांत करती है। ☕ चाय vs राबड़ी: फैसला आपका! 🥣 🔴 चाय (Tea): शरीर में एसिड बनाती है, भूख मारती है, नींद उड़ाती है और हड्डियों से कैल्शियम खींचकर उन्हें खोखला करती है। 🟢 राबड़ी (Rabdi): शरीर को एल्कलाइन (Alkaline) करती है, पाचन सुधारती है, गहरी नींद लाती है और नया खून बनाती है। मेरी सलाह: अपनी सुबह की शुरुआत 'चाय' के तेजाब से नहीं, बल्कि मिट्टी की हांडी में बनी 'राबड़ी' के अमृत से करें। यह न केवल परंपरा है, बल्कि स्वस्थ जीवन का आधार है। स्वस्थ रहें, मस्त रहें! Dt. Vikram Singh Meena Internationally Accredited Nutritionist 🎓 BNYS Scholar 🏆 Certified by: Lincoln University (Malaysia) | Indo-Vietnam Medical Board | Fab Academy (USA) #ChhachRabdi #DesiSuperfood #VitaminB12 #GutHealth #IndianDiet #Naturopathy #Ayurveda #HealthyLiving #dipdiet@Dr_Biswaroop_Roy_Chowdhury
क्या आपको पता है Covid से 5 साल में कुल 5 लाख लोग मरे अबतक जबकि डॉक्टर और अस्पताल की गलती से एक साल में लगभग 50 लाख लोग मर जाते है भारत में : Harvard Study यह आंकड़ा वाकई डराने वाला है! एक तरफ 5 साल की महामारी, और दूसरी तरफ हर साल होने वाली मेडिकल लापरवाही। क्या हमें अपने स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल नहीं उठाने चाहिए? आपके क्या विचार हैं? #health #scam #india #Healthcare #expose #IndiaHealthcare #MedicalNegligence #HealthData #HarvardStudy" https://www.facebook.com/share/p/1ARjVsa2QQ/
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बिहार के सहरसा में शुक्रवार (17 अक्टूबर, 2025) को एचपीवी इंजेक्शन के चलते 30 से 35 के आसपास छात्राओं की तबीयत खराब हो गई. कुछ छात्राएं बेहोश हो गईं. आनन-फानन में पूरा मामला सत्तर कटैया प्रखंड के मध्य विद्यालय आरन का है. तबीयत बिगड़ते ही स्कूल में हंगामा मच गया. परिजन और स्कूल के कर्मियों ने इन्हें सदर अस्पताल में भर्ती करवाया.
Covid वैक्सीन से 6 तरह के कैंसर का खतरा
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