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💥🖍TRE 4.O में होगा प्री और मेन्स एग्जाम ।
◾️AEDO & TRE 4- दोनों में प्री & मेन्स होगा । ◾️परीक्षा तिथि कैलेण्डर में नहीं दिया गया https://t.me/shriclassesnayidisaa
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BPSC Exam Calendar.. 72nd Pre 25 October 2026 https://t.me/shriclassesnayidisaa
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हिंदी मीडियम से पढ़ाई, प्रतापगढ़ से शुरुआत और फिर Caltech तक का सफर! Professor Deepak Dhar की कहानी बताती है कि बड़े सपनों के लिए शुरुआत बड़ी होना जरूरी नहीं। बचपन में उनके पिता घर पर Science Magazines लाते थे और इन्हीं को पढ़ते-पढ़ते उनके मन में विज्ञान को समझने की जिज्ञासा पैदा हुई। यही जिज्ञासा उन्हें Allahabad University, IIT Kanpur और फिर Caltech तक ले गई, जहां उन्होंने PhD की और महान वैज्ञानिक Richard Feynman के Teaching Assistant के तौर पर भी काम किया। विदेश में शानदार मौके होने के बावजूद दीपक धर ने भारत लौटने का फैसला किया। TIFR में उन्होंने दशकों तक Theoretical Physics के क्षेत्र में काम किया और कई पीढ़ियों के युवा वैज्ञानिकों को मार्गदर्शन दिया। अब 74 साल की उम्र में उन्हें Statistical Mechanics में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए 2026 का प्रतिष्ठित Dirac Medal मिला है। इससे पहले 2022 में वे Boltzmann Medal पाने वाले पहले भारतीय बने थे और 2023 में उन्हें Padma Bhushan से सम्मानित किया गया। जिस बच्चे की विज्ञान के प्रति जिज्ञासा पिता की लाई Science Magazines से शुरू हुई थी, वही जिज्ञासा आज उन्हें दुनिया के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक सम्मानों तक ले आई है। उनकी कहानी हमें याद दिलाती है कि सपनों की शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन सवाल पूछने की हिम्मत और सीखते रहने का जुनून हो, तो मंज़िल की कोई सीमा नहीं होती। कभी-कभी एक छोटी-सी जिज्ञासा ही एक असाधारण सफर की शुरुआत बन जाती है। [Deepak Dhar, 2026 Dirac Medal, Indian physicist]
NEET exam के लिए इस्तीफा मांगने वाले लोग झारखंड मामले में चुप्पी साध लिए है, हर वक्त बीजेपी बीजेपी, अंधभक्त अंधभक्त चिल्लाने वाले लोग कहां सो गए, क्या झारखंड में छात्र नहीं दिखाई दे रहे हैं या यूं कहें की दिल्ली के जंतर-मंतर पर भारत विरोधी नारे, और देश के प्रधानमंत्री, भारतीय सेना और पुलिस को गाली देने वाले और संसद तक पहुंच कर उत्पात मचाने वाले ही लोग ही छात्र है, बस यही समझ नहीं आता कि जब हर जगह विरोध हो रहा है तो हम सिर्फ एक जगह के ही विरोध का सपोर्ट क्यों करते हैं हमारी आत्मा बाकी राज्यों में छात्रों के साथ हो रहे अत्याचार/ अन्याय के समय मर क्यों जाती है, दिल्ली का लाठीचार्ज दिखाई दिया लेकिन झारखंड में लाठीचार्ज पर सब मौन, गजब के लोग हैं भाई गज़ब के कुछ बोल नहीं सकते हैं,
सावन माह में शिवद्वार धाम से महादेव के दिव्य श्रृंगार का दर्शन करें 🚩 हर हर महादेव 🔱 #सावन #महादेव
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होम साइंस को गायब कर दिया गया है
◾️राजकीय इण्टर कालेज में - ◾️सीधी भर्ती से - ◾️LT ग्रेड के 819 व GIC प्रवक्ता के 340 पद नवीन सृजित https://t.me/prayagrajeducations
होम साइंस को गायब कर दिया गया है
बिरहा पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार (भोजपुरी क्षेत्र) का एक बेहद लोकप्रिय और पारंपरिक लोकगीत है। यह मुख्य रूप से अहीर (यादव) समुदाय द्वारा गाया जाने वाला एक वीर रस और श्रृंगार रस से भरपूर गायन है।
💥👆👇🖍🗓️ 8 अगस्त 1942 को महात्मा गाँधी नेतृत्व में “करो या मरो!” नारा के साथ सम्पूर्ण देश ने स्वतंत्रता के लिए अंतिम संघर्ष का आह्वान किया। यह ऐतिहासिक आंदोलन 'भारत छोड़ो आन्दोलन' नाम से प्रसिद्ध हुआ। ब्रिटिश शासन को भारत से बाहर करने के लिए, गाँधी जी ने दिया था स्पष्ट संदेश: “भारत छोड़ो” यह आंदोलन केवल स्वतंत्रता का आंदोलन नहीं था, बल्कि साहस, एकजुटता और राष्ट्रप्रेम की मिसाल बना। 🇮🇳 आज़ादी के शहीदों को नमन! https://t.me/shriclassesnayidisaa
ग्रामीण यूपी ,बिहार के घरों मे देवता का स्थान / पूजा की अलमारी
कुछ हैंडलूम सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए नहीं, बल्कि अपनी कहानी के लिए भी याद रखे जाते हैं। यह दुर्लभ बुनाई अपनी खास 'बूटी' के लिए जानी जाती है। हर साड़ी पर एक ही तरह की नाज़ुक बूटी को 52 बार हाथों से बुना जाता है। यही वजह है कि इस कला का नाम भी 'बावन बूटी' पड़ा। इन बूटियों में कमल, बोधि वृक्ष, धर्मचक्र, शंख, मछली और मोर जैसे कई प्रतीक नज़र आते हैं, जिन पर इस क्षेत्र की बौद्ध विरासत की गहरी छाप दिखाई देती है। यह डिज़ाइन छपाई या कढ़ाई से नहीं, बल्कि एक्स्ट्रा वॉर्प और एक्स्ट्रा वेफ्ट तकनीक से करघे पर ही बुने जाते हैं, जिसके लिए बेहद धैर्य और महीन कारीगरी की ज़रूरत होती है। समय के साथ यह कला लगभग विलुप्त होने की कगार पर पहुँच गई थी, कुछ ही बुनकर परिवारों ने पीढ़ियों तक इसे जीवित रखा। अब हाल ही में मिले GI Tag ने इस पारंपरिक शिल्प को नई पहचान दी है और उम्मीद है कि इससे इस अनमोल विरासत को संरक्षित करने और बुनकरों तक इसका लाभ पहुँचाने में मदद मिलेगी। क्या आप बता सकते हैं कि 'बावन बूटी' किस राज्य से जुड़ा है?
📚 *उत्तर प्रदेश शिक्षक भर्ती परीक्षा — नई प्रश्न-पद्धति का गहन विश्लेषण* प्रिय अभ्यर्थी साथियों, नवगठित शिक्षा सेवा चयन आयोग के अंतर्गत प्रस्तावित शिक्षक भर्ती परीक्षाओं की संरचना में एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आ रहा है, जिसे समझना प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए अत्यंत आवश्यक है। *प्रस्तावित प्रश्न-पत्र संरचना (कुल 120 प्रश्न)* ▫️ 90 प्रश्न — संबंधित विषय (Subject) ▫️ 30 प्रश्न — सामान्य अध्ययन (GK) इस नई संरचना में सबसे निर्णायक तत्व है — *नकारात्मक अंकन (Negative Marking)*। यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो इसका सीधा और गहरा प्रभाव अंतिम कटऑफ पर पड़ेगा, और परीक्षा की पूरी रणनीति बदलनी होगी। ━━━━━━━━━━━━━━━ 🔹 *पुरानी व्यवस्था — तुक्केबाजी का लाभ* विगत परीक्षाओं में TGT/PGT स्तर पर सामान्यतः 125 प्रश्न पूछे जाते थे। यदि किसी अभ्यर्थी के 90 प्रश्न सटीक रूप से सही होते थे, तो शेष 35 प्रश्नों में अनुमान (तुक्का) लगाना उसके लिए लाभदायक सिद्ध होता था — औसतन 10 से 12 प्रश्न संयोगवश सही हो जाते थे, जिससे कुल स्कोर 100 के आँकड़े को पार कर जाता था। इसी प्रवृत्ति के कारण कटऑफ भी स्वाभाविक रूप से ऊँची चली जाती थी। प्राथमिक शिक्षक भर्ती में भी यही प्रवृत्ति देखी गई — 150 प्रश्नों में से 100 प्रश्न सही करने वाले अभ्यर्थी शेष 50 प्रश्नों में अनुमान के सहारे अपना स्कोर 112 से 118 तक पहुँचा लेते थे। ━━━━━━━━━━━━━━━ 🔹 *नई व्यवस्था — अनुमान अब जोखिम है* नई पद्धति में शामिल 30 सामान्य ज्ञान के प्रश्न — कंप्यूटर, सामान्य विज्ञान, करेंट अफेयर्स, इतिहास, भूगोल एवं संविधान जैसे विषयों से होंगे, जिनमें सभी अभ्यर्थियों की पकड़ समान नहीं होती। यहीं से प्रतिस्पर्धा का वास्तविक चरित्र बदल जाता है। व्यावहारिक आकलन के अनुसार, यदि कोई अभ्यर्थी— ▫️ सामान्य ज्ञान में 15 से 18 प्रश्न ▫️ संबंधित विषय में 70 से 72 प्रश्न सही करने में सफल होता है, तो उसका कुल स्कोर लगभग 85 से 90 के बीच बनेगा। प्रश्नपत्र यदि वर्ष 2022 के स्तर का अथवा उससे कुछ अधिक कठिन रहा, तो यही स्कोर अंतिम चयन के लिए निर्णायक सिद्ध हो सकता है। ━━━━━━━━━━━━━━━ ✅ *श्री क्लासेस संस्थान विशेष सलाह* ✔️ नकारात्मक अंकन की गंभीरता को समझें — अनावश्यक अनुमान अथवा तुक्केबाजी से पूर्णतः बचें। ✔️ केवल उन्हीं प्रश्नों का उत्तर दें, जिन पर आपको पूर्ण एवं तथ्यात्मक विश्वास हो। ✔️ 90 अथवा उससे अधिक के सुरक्षित स्कोर को लक्ष्य बनाकर व्यवस्थित तैयारी करें। ✔️ सामान्य ज्ञान (GK) को कदापि हल्के में न लें — यही खंड चयन और असफलता के बीच की निर्णायक रेखा सिद्ध हो सकता है। स्मरण रखिए — इस बार केवल विषयगत ज्ञान पर्याप्त नहीं होगा; सही रणनीति और अनुशासित तैयारी ही सफलता की कुंजी सिद्ध होगी। आप सभी के उज्ज्वल भविष्य एवं आगामी परीक्षा में सफलता की हार्दिक शुभकामनाएँ। 🌸 शुभ रात्रि। ❤️ https://t.me/shriclassesnayidisaa
लड़कियों ने अपने आधे शौक इसलिए छोड़ दिए, क्योंकि उन्हें घरवालों से अनुमति नहीं मिली। लड़कों ने अपने आधे शौक इसलिए छोड़ दिए, क्योंकि उनकी जिम्मेदारियों ने उन्हें अनुमति नहीं दी। ज़िंदगी अक्सर सपनों और कर्तव्यों के बीच समझौते का नाम बन जाती है।