खिड़की
Статистикаकब तक चलेगा खोखले शब्दों का कारोबार Admins : @TheStarryMan, @woundedbbanimal English Quotes Channel - @IcedBook If you have a quote, PM me.
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खिड़की pinned «rest in peace vinod kumar shukla»
"हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था व्यक्ति को मैं नहीं जानता था हताशा को जानता था इसलिए मैं उस व्यक्ति के पास गया मैंने हाथ बढ़ाया मेरा हाथ पकड़कर वह खड़ा हुआ मुझे वह नहीं जानता था मेरे हाथ बढ़ाने को जानता था हम दोनों साथ चले दोनों एक दूसरे को नहीं जानते थे साथ चलने को जानते थे।" -विनोद कुमार शुक्ल
rest in peace vinod kumar shukla
"मुश्किल है इमरोज होना रोज रोज क्या, एक रोज होना" - अमृता प्रीतम
"शिकवे जुल्मते-शब से तो कहीं बेहतर था अपने हिस्से की कोई शम्मा जलाते जाते" -अहमद फ़राज़
"मुझे पसंद नहीं ऐसे कारोबार में हूँ ये जब्र है कि मैं ख़ुद अपने इख़्तियार में हूँ हुदूद-ए-वक़्त से बाहर अजब हिसार में हूँ मैं एक लम्हा हूँ सदियों के इंतिज़ार में हूँ अभी न कर मिरी तश्कील मुझ को नाम न दे तिरे वजूद से बाहर में किस शुमार में हूँ मैं एक ज़र्रा मिरी हैसियत ही क्या है मगर हवा के साथ हूँ उड़ते हुए ग़ुबार में हूँ बस आस-पास ये सूरज है और कुछ भी नहीं महक रहा तो हूँ लेकिन मैं रेगज़ार में हूँ" - आदिल मंसूरी
"यह हार एक विराम है जीवन महासंग्राम है तिल-तिल मिटूँगा पर दया की भीख मैं लूँगा नहीं वरदान माँगूँगा नहीं स्मृति सुखद प्रहरों के लिए अपने खण्डहरों के लिए यह जान लो मैं विश्व की सम्पत्ति चाहूँगा नहीं वरदान माँगूँगा नहीं क्या हार में क्या जीत में किंचित नहीं भयभीत मैं संघर्ष पथ पर जो मिले यह भी सही वह भी सही वरदान माँगूँगा नहीं लघुता न अब मेरी छुओ तुम हो महान बने रहो अपने हृदय की वेदना मैं व्यर्थ त्यागूँगा नहीं वरदान माँगूँगा नहीं चाहे हृदय को ताप दो चाहे मुझे अभिशाप दो कुछ भी करो कर्त्तव्य पथ से किन्तु भागूँगा नहीं वरदान माँगूँगा नहीं" -शिवमंगल सिंह सुमन
"मैं हूँ रात का एक बजा है ख़ाली रस्ता बोल रहा है आज तो यूँ ख़ामोश है दुनिया जैसे कुछ होने वाला है कैसी अँधेरी रात है देखो अपने आप से डर लगता है" -नासिर काज़मी
"ऊँची इमारतों से मकाँ मेरा घिर गया कुछ लोग मेरे हिस्से का सूरज भी खा गए" -जावेद अख़्तर
"मैं इस उमीद पे डूबा कि तू बचा लेगा अब इस के बा'द मिरा इम्तिहान क्या लेगा ये एक मेला है वा'दा किसी से क्या लेगा ढलेगा दिन तो हर इक अपना रास्ता लेगा मैं बुझ गया तो हमेशा को बुझ ही जाऊँगा कोई चराग़ नहीं हूँ कि फिर जला लेगा कलेजा चाहिए दुश्मन से दुश्मनी के लिए जो बे-अमल है वो बदला किसी से क्या लेगा मैं उस का हो नहीं सकता बता न देना उसे लकीरें हाथ की अपनी वो सब जला लेगा हज़ार तोड़ के आ जाऊँ उस से रिश्ता 'वसीम' मैं जानता हूँ वो जब चाहेगा बुला ले" - वसीम बरेलवी
"कब तक पड़े रहोगे हवाओं के हाथ में कब तक चलेगा खोखले शब्दों का कारोबार " - आदिल मंसूरी
"क्यूँ चलते चलते रुक गए वीरान रास्तो तन्हा हूँ आज मैं ज़रा घर तक तो साथ दो " - आदिल मंसूरी
"मेरे टूटे हौसले के पर निकलते देख कर उस ने दीवारों को अपनी और ऊँचा कर दिया " - आदिल मंसूरी
"ये मोहब्बत की कहानी नहीं मरती लेकिन लोग किरदार निभाते हुए मर जाते हैं " - अब्बास ताबिश
"तू ने कहा न था कि मैं कश्ती पे बोझ हूँ आँखों को अब न ढाँप मुझे डूबते भी देख " - शकेब जलाली
"बद-क़िस्मती को ये भी गवारा न हो सका हम जिस पे मर मिटे वो हमारा न हो सका " - शकेब जलाली
"चेहरे पे मिरे ज़ुल्फ़ को फैलाओ किसी दिन क्या रोज़ गरजते हो बरस जाओ किसी दिन " - अमजद इस्लाम अमजद
"दर्द हल्का है साँस भारी है जिए जाने की रस्म जारी है आप के ब'अद हर घड़ी हम ने आप के साथ ही गुज़ारी है रात को चाँदनी तो ओढ़ा दो दिन की चादर अभी उतारी है शाख़ पर कोई क़हक़हा तो खिले कैसी चुप सी चमन पे तारी है कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था आज की दास्ताँ हमारी है " - गुलज़ार
"सुख के लम्हे तक पहुँचते-पहुँचते, हम उन सब लोगों से जुदा हो जाते हैं जिनके साथ हमने दुःख झेलकर, सुख का स्वप्न देखा था।" — निर्मल वर्मा
"प्रेम बहुत रहस्यमय होता है पता नहीं चलने देता मिल रहा है या बिछड़ रहा है" — काजल खत्री