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─⊰❀ ऐ जिंदगी मोटिवेशन ❀⊰─

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  • 23 июн.3 2623110

    🌹स्वयं मे स्वयं को ढूंढो💐 🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾 आपकी समस्याओं का समाधान केवल एक ही व्यक्ति कर सकता है... और वो है, आप \ इसलिए अपनी समस्याओं को किसी को ना बताये, अगर बताये तो उसे जो आपको समझता हो, आपको अपना मानता हो..!! क्योंकि दूसरे केवल सुझाव दे सकते है ताना मार सकते है..! वक़्त आने पर आपको नीचा दिखा सकते है इसलिए किसी के सामने अपनी समस्याओं को लेकर कमजोर ना बने..!! खुद मे मजबूत रहे और हर परिस्थिति मे धैर्य बनाए रखे..!! अगर problem है तो उसका solution भी होगा बस हिम्मत नहीं हारना है..ll क्योंकि ताला(lock) बनने से पहले उसकी चाबी(key ) बन जाती है..!! इसलिए किसी से अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद ना करे पहले खुद ही समाधान ढूंढने की कोशिश करे..!! क्योंकि आप से बेहतर आपकी कमियां और खूबियां कोई नहीं जानता और ना कोई समझ सकता है..!!

  • 16 июн.3 48012

    Telegram ko Govt ne 22 June tak ban kar diya hai... Aur Govt ese Permanent bhi band kar sakti hai Isliye sab information & updates k liye jldi se sab whatsapp channel join krlo Join 👇👇 https://whatsapp.com/channel/0029Vb5o45KK5cDEPAsvvB2Z

  • 5 июн.5 010219

    🍁वो सुनो👂 जो ना कहा गया हो 🌴 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿 बहुत समय पहले की बात है. चाइना के एक राजा ने अपने बेटे को अच्छा शासक बनाने के मकसद से एक जेन मास्टर के पास भेजा. जेन मास्टर ने कुछ दिन अपने साथ रखने के बाद युवराज को एक साल के लिए जंगल में अकेले रहने के लिए भेज दिया. जब युवराज लौटे तो मास्टर ने पूछा, “बताओ तुमने जंगल में क्या सुना?” “मैंने कोयल की कूक सुनी, नदियों की कल-कल सुनी, पत्तियों की सरसराहट सुनी, मधुमक्खियों की गुंजन सुनी, मैंने झींगुरों का शोर सुना, हवा की धुन सुनी…” युवराज अपना अनुभव सुनाता चला गया. जब युवराज ने अपीन बात पूरी कर ली तब मास्टर बोले, “अच्छा है, अब तुम एक बार फिर जंगल जाओ और जब तक तुम्हे कुछ नयी आवाजें ना सुनाई दे दें तब तक मत लौटना.” एक साल जंगल में बिताने के बाद युवराज अपने राज्य को लौटना चाहता था, पर मास्टर की बात को टाल भी नहीं सकता था, इसलिए वह बेमन ही जंगल की ओर बढ़ चला. कई दिन गुजर गए पर युवराज को कोई नयी आवाज़ नहीं सुनाई दी. वह परेशान हो उठा. उसने निश्चय किया कि अब वह हर आवाज़ को बड़े ध्यान से सुनेगा! फिर एक सुबह उसे कुछ अनजानी सी आवाजें हल्की-हल्की सुनाई देने लगीं. इस घटना के कुछ दिनों बाद वह जेन मास्टर के पास वापस लौटा और बोला, “पहले ती मुझे वही ध्वनियाँ सुनाई दीं जो पहले देती थीं, लेकिन एक दिन जब मैंने बहुत ध्यान से सुनना शुरू किया तो मुझे वो सुनाई देने लगा जो पहले कभी नहीं सुनाई दिया था…. मुझे कलियों के खिलने की आवाज सुनाई देने लगी, मुझे धरती पर पड़ती सूर्य की किरणों, तितलियों के गीत, और घांस द्वारा सुबह की ओस पीने की ध्वनियाँ सुनाएं देने लगीं….” यह सुनकर जेन मास्टर खुश हो गए और मुस्कुराकर बोले, “अनसुने को सुनने की क्षमता होना एक अच्छे राजा की निशानी है. क्योंकि जब कोई शासक अपने लोगों के दिल की बात सुनना सीख लेता है, बिना उनके बोले, उनकी भावनाओं को समझ लेता है, जो दर्द बयाँ न किया गया हो उसे समझ लेता है, अपने लोगों की अनकही शिकायतों को सुन लेता है, केवल वही अपनी प्रजा का विश्वास जीत सकता है, कुछ गलत होने पर उसे समझ सकता है और अपने नागरिकों की वास्तविक आवश्यकताओं को पूरी कर सकता है. ” दोस्तों, अगर हमें अपनी फील्ड का लीडर बनना है तो हमें भी वो सुनना सीखना चाहिए जो नहीं कहा गया है. यानी हमें उस युवराज की तरह बिलकुल अलर्ट हो कर अपना काम करना चाहिए और अपने साथ काम करने वालों की ज़रूरतों और भावनाओं का ख्याल रखना चाहिए तभी हम खुद को एक ट्रू लीडर की तरह स्थापित कर सकेंगे. -----------------------------

  • 2 июн.4 4352010

    ✍️ऐसे लोगों को खोजना बहुत आसान है जो मरने के लिए तैयार हो, मगर ऐसे लोगों का मिलना बहुत मुश्किल है जो कठिन समय में सब्र के साथ दर्द सहने को तैयार हो !! ✍️जिसके अंदर सब्र करने की क्षमता है और जो मेहनत करने से नहीं घबराता है, निश्चित रूप से एक दिन सफलता उसके क़दम चूमती है !! ✍️माली किसी पेड़ को चाहे कितना भी पानी दे लेकिन फल तो मौसम आने पर ही लगेगा, इसलिए धैर्य होना बहुत जरूरी हैं। ✍️खुशी कुछ समय के लिए सब्र देती है लेकिन सब्र लम्बे समय तक खुशी देता हैं। ✍️किस्मत एक दिन बदलती जरूर है और जब बदलती है तो सब कुछ पलट देती है इसलिए अपने अच्छे दिनों में अहंकार न करें और बुरे दिनों में सब्र करें। ✍️ सब्र के सामने भयंकर संकट भी धुएं के बादल की तरह उड़ जाते हैं।समस्या के समय सब्र रखना मानो आधी समस्या पर काबू पा लिया हैं।

  • 20 апр.7 843308

    जो बातें तुम्हें पागलपन जैसी लगती हैं, वही अक्सर तुम्हारी असली पहचान के दरवाज़े खोलती हैं। तुम्हारी सीमाएँ वास्तव में वास्तविक नहीं— वे सिर्फ़ तुम्हारे मन की बनाई हुई दीवारें हैं। तुम खुद को रोकते हो, तुम खुद को सीमित करते हो, और तुम खुद ही अपने सपनों से दूर खड़े हो जाते हो। ❤️❤️so try again❤️❤️Miss maan

  • 31 мар.9 524377

    💥चार मोमबत्तियां 💥 ❤️⚔️🍂🍃⚔️🍀⚔️♥️ रात का समय था, चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था , नज़दीक ही एक कमरे में चार मोमबत्तियां जल रही थीं। एकांत पा कर आज वे एक दुसरे से दिल की बात कर रही थीं। पहली मोमबत्ती बोली, ” मैं शांति हूँ , पर मुझे लगता है अब इस दुनिया को मेरी ज़रुरत नहीं है , हर तरफ आपाधापी और लूट-मार मची हुई है, मैं यहाँ अब और नहीं रह सकती। …” और ऐसा कहते हुए , कुछ देर में वो मोमबत्ती बुझ गयी। दूसरी मोमबत्ती बोली , ” मैं विश्वास हूँ , और मुझे लगता है झूठ और फरेब के बीच मेरी भी यहाँ कोई ज़रुरत नहीं है , मैं भी यहाँ से जा रही हूँ …” , और दूसरी मोमबत्ती भी बुझ गयी। तीसरी मोमबत्ती भी दुखी होते हुए बोली , ” मैं प्रेम हूँ, मेरे पास जलते रहने की ताकत है, पर आज हर कोई इतना व्यस्त है कि मेरे लिए किसी के पास वक्त ही नहीं, दूसरों से तो दूर लोग अपनों से भी प्रेम करना भूलते जा रहे हैं ,मैं ये सब और नहीं सह सकती मैं भी इस दुनिया से जा रही हूँ….” और ऐसा कहते हुए तीसरी मोमबत्ती भी बुझ गयी। वो अभी बुझी ही थी कि एक मासूम बच्चा उस कमरे में दाखिल हुआ। मोमबत्तियों को बुझे देख वह घबरा गया , उसकी आँखों से आंसू टपकने लगे और वह रुंआसा होते हुए बोला , “अरे , तुम मोमबत्तियां जल क्यों नहीं रही , तुम्हे तो अंत तक जलना है ! तुम इस तरह बीच में हमें कैसे छोड़ के जा सकती हो ?” तभी चौथी मोमबत्ती बोली , ” प्यारे बच्चे घबराओ नहीं, मैं आशा हूँ और जब तक मैं जल रही हूँ हम बाकी मोमबत्तियों को फिर से जला सकते हैं। “ यह सुन बच्चे की आँखें चमक उठीं, और उसने आशा के बल पे शांति, विश्वास, और प्रेम को फिर से प्रकाशित कर दिया। मित्रों , जब सबकुछ बुरा होते दिखे ,चारों तरफ अन्धकार ही अन्धकार नज़र आये , अपने भी पराये लगने लगें तो भी उम्मीद मत छोड़िये….आशा मत छोड़िये , क्योंकि इसमें इतनी शक्ति है कि ये हर खोई हुई चीज आपको वापस दिला सकती है। अपनी आशा की मोमबत्ती को जलाये रखिये ,बस अगर ये जलती रहेगी तो आप किसी भी और मोमबत्ती को प्रकाशित कर सकते हैं।

  • 30 мар.7 343288

    . एक प्रेरणादायक कहानी.... __ एक अमीर आदमी था। उसने समुद्र मे अकेले घूमने के लिए एक नाव बनवाई। छुट्टी के दिन वह नाव लेकर समुद्र की सेर करने निकला। आधे समुद्र तक पहुंचा ही था कि अचानक एक जोरदार तुफान आया। उसकी नाव पुरी तरह से तहस-नहस हो गई लेकिन वह लाईफ जैकेट की मदद से समुद्र मे कूद गया। जब तूफान शांत हुआ तब वह तैरता तैरता एक टापू पर पहुंचा लेकिन वहाँ भी कोई नही था। टापू के चारो और समुद्र के अलावा कुछ भी नजर नही आ रहा था। उस आदमी ने सोचा कि जब मैंने पूरी जिदंगी मे किसी का कभी भी बुरा नही किया तो मेरे साथ ऐसा क्यूँ हुआ..? उस आदमी को लगा कि भगवान ने मौत से बचाया तो आगे का रास्ता भी भगवान ही बताएगा। धीरे धीरे वह वहाँ पर उगे झाड-पत्ते खाकर दिन बिताने लगा। अब धीरे-धीरे उसकी श्रध्दा टूटने लगी, भगवान पर से उसका विश्वास उठ गया। उसको लगा कि इस दुनिया मे भगवान है ही नही। फिर उसने सोचा कि अब पूरी जिंदगी यही इस टापू पर ही बितानी है तो क्यूँ ना एक झोपडी बना लूँ ......? फिर उसने झाड की डालियो और पत्तो से एक छोटी सी झोपडी बनाई। उसने मन ही मन कहा कि आज से झोपडी मे सोने को मिलेगा आज से बाहर नही सोना पडेगा। रात हुई ही थी कि अचानक मौसम बदला बिजलियाँ जोर जोर से कड़कने लगी.! तभी अचानक एक बिजली उस झोपडी पर आ गिरी और झोपडी धधकते हुए जलने लगी। यह देखकर वह आदमी टूट गया आसमान की तरफ देखकर बोला तू भगवान नही, राक्षस है। तुझमे दया जैसा कुछ है ही नही तू बहुत क्रूर है। वह व्यक्ति हताश होकर सर पर हाथ रखकर रो रहा था। कि अचानक एक नाव टापू के पास आई। नाव से उतरकर दो आदमी बाहर आये और बोले कि हम तुमे बचाने आये हैं। दूर से इस वीरान टापू मे जलता हुआ झोपडा देखा तो लगा कि कोई उस टापू पर मुसीबत मे है। अगर तुम अपनी झोपडी नही जलाते तो हमे पता नही चलता कि टापू पर कोई है। उस आदमी की आँखो से आँसू गिरने लगे। उसने ईश्वर से माफी माँगी और बोला कि मुझे क्या पता कि आपने मुझे बचाने के लिए मेरी झोपडी जलाई थी. दिन चाहे सुख के हों या दुख के, हिम्मत कभी नही हारनी चाहिए!! कर्तव्य पथ पर एक विश्वाश और ऊर्जा के साथ बढ़ते रहे🙏

  • 24 мар.6 971245

    आरव ने जैसे ही ऑफिस से बाहर कदम रखा, उसका फोन बज उठा। स्क्रीन पर काव्या का नाम चमक रहा था। उसने कॉल उठाई— काव्या: आरव, तुम कहाँ हो? मैं कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी। आज तो हमें मूवी देखने जाना था, याद है ना? आरव: काव्या, मैं ऑफिस के काम में इतना उलझ गया कि सब कुछ भूल ही गया। तुम कहाँ हो? मैं अभी तुम्हें पिक करता हूँ। आरव ने जल्दी से गाड़ी में बैठकर बैग पीछे की सीट पर रखा और गाड़ी स्टार्ट की। काव्या: रहने दो, अब मूड नहीं है। मैं पिछले दो घंटे से तैयार होकर तुम्हारा इंतजार कर रही थी। कभी तो मेरा ध्यान रखा करो। आरव: देखो, काव्या, मैंने कहा ना भूल गया। अब इतनी सी बात पर मूड खराब मत करो। चलो, हम बाहर डिनर कर लेते हैं। काव्या: नहीं, अब मैं कहीं नहीं जाऊंगी, और खाना भी नहीं बनाउंगी। जो मंगाना हो, खुद मंगा लेना। आरव को भी गुस्सा आ रहा था, लेकिन वह खुद को शांत रखते हुए बोला— आरव: ठीक है, बताओ क्या ऑर्डर करना है? काव्या: जो करना है, खुद कर लो। मुझसे पूछने की जरूरत नहीं। कहकर काव्या ने फोन काट दिया। आरव को बहुत गुस्सा आ रहा था। पूरे दिन ऑफिस में बॉस की चिकचिक, और घर पहुंचते ही बीवी के नखरे। आरव घर पहुंचा और काव्या को मनाने की बहुत कोशिश की, लेकिन उसने उसकी एक नहीं मानी। आखिरकार, आरव भी बिना खाना खाए सोने चला गया। शादी की शुरुआत: आरव और काव्या की शादी को अभी सिर्फ दो साल ही हुए थे। उनकी अरेंज मैरिज थी। शादी के पहले साल में दोनों बहुत खुश थे, लेकिन धीरे-धीरे हालात बदलने लगे। आरव को गुरुग्राम की एक बड़ी कंपनी में नौकरी मिल गई थी, और पैकेज भी अच्छा था। शुरुआती छह महीने बहुत अच्छे से गुजरे। आरव ने मेहनत की और उसे प्रमोशन भी मिल गया। उसने एक अच्छा सा फ्लैट खरीद लिया, लेकिन फ्लैट की ईएमआई बहुत ज्यादा थी। वह सोचता था कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतने लगा, उसे महसूस हुआ कि इतनी महंगी ईएमआई चुकाने के लिए उसे दिन-रात काम करना पड़ता था। आरव ने एक बार अपने बॉस को नए फ्लैट की पार्टी में बुला लिया था। उसके बाद से बॉस ने उसे और ज्यादा काम देना शुरू कर दिया। दूसरी तरफ, काव्या भी धीरे-धीरे गुरुग्राम के हाई-सोसायटी लाइफस्टाइल में ढलने लगी थी। वह अक्सर दोस्तों के साथ शॉपिंग, मूवी, और डिनर पर जाती थी। उसे यह नया जीवन बहुत पसंद आने लगा था। तंगहाली और तनाव: आरव की जिंदगी अब एक जाल बन चुकी थी—ऑफिस में बॉस का दबाव और घर में काव्या की ऊंची उम्मीदें। वह जितना कमाता, उससे ज्यादा खर्च हो जाता। हर महीने की सैलरी खत्म होने से पहले ही क्रेडिट कार्ड का सहारा लेना पड़ता था। आरव ने कई बार काव्या से कहा कि खर्चे कम करने होंगे, लेकिन काव्या का जवाब हमेशा वही होता— काव्या: बाकी लोग भी तो इसी सोसाइटी में रह रहे हैं। तुम ही क्यों पीछे रहना चाहते हो? बस सोच का फर्क है, तुम सोचो कि सब हो जाएगा, तो हो जाएगा। आरव: लेकिन उनकी आमदनी हमसे बहुत ज्यादा है। हमें 20 साल तक ईएमआई चुकानी है। खर्चे कम करना जरूरी है। काव्या: तो तुम दूसरी नौकरी क्यों नहीं ढूंढते? हो सकता है, कहीं और अच्छा पैकेज मिल जाए। आरव ने थककर कहा— आरव: नौकरी बदलने के लिए सेविंग होनी चाहिए। हम महीने के अंत तक कर्ज में डूबे रहते हैं। मेरी बात मानो, कुछ वक्त के लिए ये खर्चे बंद करो। काव्या ने नाराजगी से कहा— काव्या: तुमने ये सब बातें यहां आने से पहले क्यों नहीं सोची? मेरी कितनी बेज्जती होगी! मैंने सोसाइटी में तुम्हारी कितनी तारीफ की है, और अब तुम ये कह रहे हो कि कुछ भी मत करो? आरव चुप रह गया। वह अंदर ही अंदर घुट रहा था। शादी से पहले वह एक छोटे शहर में कंप्यूटर इंस्टीट्यूट चलाता था, और कितना सुखी था। वह सुबह काम करता, दोपहर को घर आता, और शाम को फिर आराम से काम पर जाता। तब जीवन आसान और सुकून भरा था। तरक्की की चाह में उसने सब कुछ छोड़ दिया था—अपने माता-पिता, अपने छोटे भाई, यहां तक कि अपने पुराने जीवन की सादगी भी। अब उसे अहसास हो रहा था कि उसने क्या खोया था। बड़ा फैसला: एक दिन, जब आरव ऑफिस में था, उसे बॉस ने एक और टारगेट दिया, जो लगभग असंभव था। बॉस ने कहा— बॉस: आरव, मुझे तुम पर पूरा विश्वास है। तुम यह टारगेट जरूर पूरा कर लोगे। आरव ने बिना सोचे अपना इस्तीफा टेबल पर रख दिया— आरव: सर, ये रहा मेरा इस्तीफा। एक महीने का नोटिस पूरा करके मैं चला जाऊंगा। बॉस: ये तुम क्या कर रहे हो? तुम्हारे घर की ईएमआई का क्या होगा? आरव: सर, यही ईएमआई मेरी सारी परेशानियों की जड़ है। मैं फ्लैट बेच रहा हूँ, और अपनी पुरानी जिंदगी में वापस लौट रहा हूँ। आरव ने ऑफिस से निकलकर फ्लैट बेचने के लिए प्रॉपर्टी डीलर से संपर्क किया। काव्या का सामना: शाम को जब आरव घर पहुंचा, तो काव्या ने उसे देखते ही कहा— काव्या: आरव, हम कल कहीं घूमने चलें क्या? तुम एक दिन की छुट्टी ले लो।

  • 19 февр.9 7803618

    ☑️“हाय परीक्षा आई"☑️ खेल-कूद में दिन बीता, सोने में रात गँवाई। हाय परीक्षा आई, अब क्या होगा रे भाई ।। आ जाती है हर वर्ष, साज तक इसे नहीं आती। जब से आती है, आँखों से नींद चली जाती है।। कोई ऐसा वीर नहीं, जो टोक सके इसको। स्कूल, कॉलेजों में आने से रोक सके इस को ।। सब मरते हैं इसकी, अब तक मौत नहीं आई। हाय परीक्षा आई, अब क्या होगा रे भाई ।। डरते नहीं कभी हम बन्दूकों तलवारों से डरते नहीं कभी हम शोलों से अंगारों से। क्या कारण है किन्तु समझ में बात नहीं आई। नाम परीक्षा का सुनते ही नानी याद आई ।। हार मानकर भागे इससे कितने बलदाई। हाय परीक्षा आई, अब क्या होगा रे भाई। बिन बादल बरसात, रात-भर बिजली से कड़के ज्यों-ज्यों आये पास परोक्षा, त्यों-त्यों दिल धड़के ।। बाथरूम में अब न फिल्म के गाने हम गते । जो कुछ पढ़ा रात को, उसको ही हैं दोहराते ।। JOIN US

  • 19 февр.8 88193

    All the problems are stuck between Mind and Matter. If you don’t Mind, it doesn’t Matter!

  • 19 дек.15,2 тыс10830

    तुम आज के युग की नारी हो, तुम्हारा सुन्दर होने से ज्यादा शिक्षित होना जरूरी है..❤️😍

  • 15 дек.14,6 тыс449

    ✍बारिश की बूदें भले ही छोटी हो लेकिन उनका लगातार बरसना बडी़-बडी़ नदियों का बहाव बन जाता है। ऐसे ही हमारे छोटे-छोटे प्रयास यदि लगातार हो तो निश्चित ही जिन्दगी में बडा़ परिवर्तन लाने में सक्षम रहते है। आज से हम लगातार प्रयास करते रहेंगे 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿 Raindrops may be small in size, but with incessant pouring, they become big rivers. Likewise if our little efforts are continuous, then they are capable of bringing about big changes! 🌻TODAY ONWARDS LET'S keep on making efforts consistently.

  • 15 дек.12,8 тыс299

    ✍🏻 *पहचान तुम्हारी सिर्फ काबिलियत से ही होगी.* . *यूं शीशे में खुद को सवार कर वक्त जाया न करो* ..!

  • 4 сент. 2025 г.22,1 тыс9821

    जब भी कोई परेशानी हो तो यह कभी मत सोचो कि भगवान ने यह परेशानी मुझे ही क्यों दी है? यदि इस बात को इस तरह से देखा जाए कि ईश्वर ने ये कष्ट हमें शायद इसीलिए दिया है, क्योंकि हम दूसरों के मुकाबले इसका हल बेहतर तरीके से निकाल सकते हैं और इस परेशानी को देखकर कभी घबराएंगे नहीं।✌️❤️

  • 21 авг. 2025 г.19,8 тыс6530

    हर परिस्तिथि एक सौगात हैं और हर अनुभव एक खजाना | केवल ज्ञान ही ऐसा अक्षर तत्व है जो कहीं भी, किसी अवस्था और किसी काल में भी मनुष्य का साथ नहीं छोड़ता l ❤️🌿

  • 17 авг. 2025 г.18,7 тыс8030

    . ◾'प्रेरणादायक कहानी- ध्यान से पढ़िए' ________ बहुत पहले आप ने एक चिड़िया की कहानी सुनी होगी..जिसका एक दाना पेड़ के कंदरे में कहीं फंस गया था. चिड़िया ने पेड़ से बहुत अनुरोध किया उस दाने को दे देने के लिए लेकिन पेड़ उस छोटी सी चिड़िया की बात भला कहां सुनने वाला था... हार कर चिड़िया बढ़ई के पास गई और उसने उससे अनुरोध किया कि तुम उस पेड़ को काट दो, क्योंकि वो उसका दाना नहीं दे रहा... भला एक दाने के लिए बढ़ई पेड़ कहां काटने वाला था..फिर चिड़िया राजा के पास गई और उसने राजा से कहा कि तुम बढ़ई को सजा दो क्योंकि बढ़ई पेड़ नहीं काट रहा और पेड़ दाना नहीं दे रहा... राजा ने उस नन्हीं चिड़िया को डांट कर भगा दिया कि कहां एक दाने के लिए वो उस तक पहुंच गई है। चिड़िया हार नहीं मानने वाली थी... वो महावत के पास गई कि अगली बार राजा जब हाथी की पीठ पर बैठेगा तो तुम उसे गिरा देना,क्योंकि राजा बढ़ई को सजा नहीं देता..बढ़ई पेड़ नहीं काटता...पेड़ उसका दाना नहीं देता..महावत ने भी चिड़िया को डपट कर भगा दिया... चिड़िया फिर हाथी के पास गई और उसने अपने अनुरोध को दुहराया कि अगली बार जब महावत तुम्हारी पीठ पर बैठे तो तुम उसे गिरा देना क्योंकि वो राजा को गिराने को तैयार नहीं... राजा बढ़ई को सजा देने को तैयार नहीं...बढ़ई पेड़ काटने को तैयार नहीं...पेड़ दाना देने को राजी नहीं। हाथी बिगड़ गया...उसने कहा, ऐ छोटी चिड़िया..तू इतनी सी बात के लिए मुझे महावत और राजा को गिराने की बात सोच भी कैसे रही है? चिड़िया आखिर में चींटी के पास गई और वही अनुरोध दोहराकर कहा कि तुम हाथी की सूंढ़ में घुस जाओ...चींटी ने चिड़िया से कहा, "चल भाग यहां से...बड़ी आई हाथी की सूंढ़ में घुसने को बोलने वाली। अब तक अनुरोध की मुद्रा में रही चिड़िया ने रौद्र रूप धारण कर लिया...उसने कहा कि "मैं चाहे पेड़, बढ़ई, राजा, महावत, और हाथी का कुछ न बिगाड़ पाऊं...पर तुझे तो अपनी चोंच में डाल कर खा ही सकती हूँ... चींटी डर गई...भाग कर वो हाथी के पास गई...हाथी भागता हुआ महावत के पास पहुंचा...महावत राजा के पास कि हुजूर चिड़िया का काम कर दीजिए नहीं तो मैं आपको गिरा दूंगा....राजा ने फौरन बढ़ई को बुलाया उससे कहा कि पेड़ काट दो नहीं तो सजा दूंगा...बढ़ई पेड़ के पास पहुंचा...बढ़ई को देखते ही पेड़ बिलबिला उठा कि मुझे मत काटो.मैं चिड़िया को दाना लौटा दूंगा...!! "निष्कर्ष....👨‍✈️ आपको अपनी ताकत को पहचानना होगा...आपको पहचानना होगा कि भले आप छोटी सी चिड़िया की तरह होंगे, लेकिन ताकत की कड़ियां कहीं न कहीं आपसे होकर गुजरती होंगी...हर शेर को सवा शेर मिल सकता है, बशर्ते आप अपनी लड़ाई से घबराएं नहीं... आप अगर किसी काम के पीछे पड़ जाएंगे तो वो काम होकर रहेगा यकीन कीजिए. हर ताकत के आगे एक और ताकत होती है और अंत में सबसे ताकतवर आप होते हैं. हिम्मत, लगन और पक्का इरादा ही हमारी ताकत की बुनियाद है..!! बड़े सपनो को पाने वाले हर व्यक्ति को सफलता और असफलता के कई पड़ावों से गुजरना पड़ता है. पहले लोग मजाक उड़ाएंगे,फिर लोग साथ छोड़ेंगे, फिर विरोध करेंगे फिर वही लोग कहेंगे हम तो पहले से ही जानते थे की एक न एक दिन तुम कुछ बड़ा करोगे! रख हौंसला वो मंज़र भी आयेगा, प्यासे के पास चलकर समंदर भी आयेगा..! थक कर ना बैठ, ऐ मंजिल के मुसाफ़िर मंजिल भी मिलेगी और जीने का मजा भी आयेगा !!

  • 6 июл. 2025 г.17,7 тыс15414

    Are You Agree ? Yes 👍🏼 No 😎

  • 27 июн. 2025 г.17,9 тыс10324

    . 💫 जो बोओगो वहीं काटोगो.💫 एक गांव में एक किसान रहता था जो दूध से दही और मक्खन बनाकर बेचने का कार्य करता था ! एक दिन उसकी बीवी ने उसे मक्खन तैयार करके दिया वह उसे बेचने शहर गया वह मक्खन गोल पेड़े की शक्ल में था तथा हर पेड़े का वजन 1 किलो था ! शहर में किसान ने उस मक्खन को हमेशा की तरह एक दुकानदार को बेच दिया और दुकानदार से चाय चीनी तेल साबुन वगैरह खरीदकर अपने गांव रवाना हो गया किसान के जाने के बाद दुकानदार ने एक पेड़े का वजन किया तो पेड़ा 900 ग्राम का निकला फिर तो उस दुकानदार ने हर पेड़े का वजन किया परंतु सभी 900 ग्राम के निकले अगले हफ्ते किसान फिर से हमेशा की तरह मक्खन लेकर दुकानदार की दहलीज पर चढ़ा तो दुकानदार ने चिल्लाते हुए किसान से कहा दफा हो जाओ किसी बेईमान और धोखेबाज शख्स से मुझे कारोबार नहीं करना 900 ग्राम मक्खन को 1 किलो बताकर बेचने वाले शख्स की शक्ल भी नहीं देखना चाहता हूँ. तब किसान बड़ी विनम्रता से बोला भाई हम तो गरीब,बेचारे लोग हैं हमारे पास माल तोलने के लिए बाट (वजन) खरीदने की हैसियत कहां है ! मैं तो आपसे जो 1 किलो चीनी लेकर जाता हूं ! उसी को तराजू के एक पलड़े में रखकर दूसरे पलड़े में उतने ही वजन का मक्खन तोल कर ले आता हूं. भाइयों.. हम जो दूसरों को देंगे वही लौटकर आएगा चाहे वह इज्जत हो,मान-सम्मान हो या चाहे धोखा हो !

  • 19 июн. 2025 г.18,7 тыс5917

    без подписи

  • 27 мая 2025 г.24,4 тыс111

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