tgindex
TRISANKALP IAS

TRISANKALP IAS

Статистика

🏆Success का मूल मंत्र मेहनत,बलिदान,संघर्ष,जुनून सब्र,विश्वास।😊✍️🥇🏅 https://t.me/TRISANKALP_IAS_HindiLit https://www.youtube.com/@TrisankalpIAS

Последний пост
12 авг.
Последнее чтение
13 авг.
Постов за неделю
4
Всего постов
26
Тип
открытый
Язык
und
В каталоге с
13 авг.
Подписчики
595
0 за 2 дн.
Сутки
0
0,00%
Неделя
 
Месяц
 
Просмотров на пост
158
26 постов
Вовлечённость
26,6%
к подписчикам
Постов в день
0,6
всего 26
Упоминаний
0
каналов
Охват размещения
оценка
1/24сутки в ленте
121
1/48двое суток
138
1/72трое суток
149

Оценка по просмотрам недавних постов: пост набирает почти всё за первые сутки.

Посты

  • Finally the wait is over 😂😂😂

  • без подписи

  • без подписи

  • “ बहारों (पुलिसवालों) फूल बरसाओ मेरा महबूब (काँवरिया) आया है… ज़रा फूल बरसाओ!” 🌸 गजब का लोकतंत्र है साहब! यही पुलिस जब छात्र अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरते हैं, तो हाथों में लाठियाँ आ जाती हैं। नागरिक सवाल पूछता है तो बैरिकेड खड़े हो जाते हैं। लेकिन धार्मिक जुलूस सामने आते ही वही व्यवस्था श्रद्धा में सिर झुका देती है— फूल बरसाओ, रास्ता खाली कराओ और बाकी जनता को किनारे लगाओ! सवाल काँवरिया या उनकी आस्था का नहीं है। सवाल उस दोहरे मापदंड का है, जिसमें तर्क और अधिकारों से ज्यादा महत्व भीड़ और धार्मिक भावनाओं को मिलने लगता है। छात्र के सवाल पर लाठी, नागरिक की आवाज़ पर पुलिसिया सख्ती, और धार्मिक जुलूस पर फूलों की बारिश— फिर हम किस दिशा में जा रहे हैं? आस्था निजी विश्वास हो सकती है, लेकिन जब शासन-प्रशासन भीड़ की धार्मिक पहचान देखकर अपना व्यवहार बदलने लगे, तो यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं रह जाता—यह लोकतांत्रिक सोच और वैज्ञानिक चेतना का सवाल बन जाता है। “जो सवाल पूछे, उसे हटाओ… जो अधिकार माँगे, उसे मिटाओ… और जो धार्मिक भीड़ लेकर आए— उस पर फूल बरसाओ!” 🌸

  • "Why IAS? Why IPS?" किसी के लिए सबसे बड़ा सुकून क्या होता है? मेरे लिए हर सप्ताह एक और होरी की जान बचा लेना। हाँ वही होरी... जो कर्ज़ में डूबा है, जो अपने बच्चे को पढ़ाने का सपना लेकर जीता है, जो सिस्टम की गलियों में दम तोड़ देता है। अगर IAS या IPS बनना है सिर्फ इसलिए कि ब्रीफकेस भर सको, बोली लगवा सको, या रौब झाड़ सको तो मत बनो यार! दुनिया में पैसे कमाने के हज़ार रास्ते हैं बिज़नेस करो, स्टार्टअप करो, यूट्यूबर बनो कमाओ, पर समाज का गला न दबाओ। अगर IPS इसलिए बनना है कि तुम दूसरों को धमका सको, तो रुक जाओ। तुम्हारे होने से समाज सुरक्षित नहीं, डर में जिएगा। "लेकिन अगर..." ...अगर तुम IAS इसलिए बनना चाहते हो कि किसी आदिवासी गाँव में पहली बार स्कूल खुले, किसी महिला को पहली बार उसकी आवाज़ मिले, किसी किसान को पहली बार उसकी फ़सल का सही मूल्य मिले तो बनो! और पूरे जुनून से बनो। क्योंकि एक सच्चे IAS या IPS के पास वो ताकत होती है... जो किसी की ज़िंदगी की दिशा बदल सकती है, जो सिस्टम को इंसानियत दे सकती है, जो एक छोटे से हस्ताक्षर से एक पूरे गाँव का भविष्य बदल सकती है। लोकसेवा, दबाव नहीं अवसर है। लोग कहते हैं "दबाव होता है..." मैं कहता हूँ "जिसके इरादे साफ़ हों, उसके लिए हर दबाव सेवा का अवसर होता है।" सोचिए... क्या आप सच्चे अर्थों में IAS/IPS बनना चाहते हैं? अगर हाँ , तो किताबें खोलिए, मन साफ़ करिए, और उस होरी की मुस्कान के लिए तैयारी शुरू करिए जो आज भी उम्मीद लगाए बैठा है कि कोई अफसर उसकी दुनिया बदल देगा। जय हिंद लोकसेवा के लिए समर्पित

  • मुझे एहसास हुआ कि मैंने उससे प्यार करके, उसका जीवन पूरी तरह से बर्बाद कर दिया। अगर मैं उसके जीवन में न आया होता, तो शायद वो मेरे बिना ज़्यादा खुश रहती ।।! गुनाहों का देवता

  • इक रात वो गया था जहाँ बात रोक के अब तक रुका हुआ हूँ वहीं रात रोक के

  • https://www.youtube.com/live/FcjRwRJfSwI?si=gcsDyN5-ahNjNKPi

  • без подписи

  • без подписи

  • без подписи

  • 8 авг.164131

    🎉💐 स्वाती जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं 💐🎉 मेरी प्यारी भांजी को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएँ! 🎂🎉🎈 भगवान तुम्हें हमेशा स्वस्थ, खुश और मुस्कुराता हुआ रखे। तुम्हारी जिंदगी रंग-बिरंगी खुशियों, प्यार और सफलता से भरी रहे। तुम यूँ ही अपनी प्यारी मुस्कान से सबका दिल जीतती रहो। हैप्पी बर्थडे मेरी गुड़िया रानी स्वाति! 🥰🎂🎁 मामा की तरफ से ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद। ❤️

  • https://youtube.com/shorts/Rp33PDDgY2U?si=KXOuLItlprDtrqXa

  • सामान्य और असामान्य समय में प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। उनकी भी प्राथमिकता बदल गई। अब वह उन कार्यों और विचारों से हटकर करते और सोचते हैं, जो सामान्य समय में उनके लिए सबसे जरूरी लगता था। उन्होंने तय किया कि पहले वाली प्राथमिकताएं 'दूसरों के लिए ही कार्य करना और सोचना' से हटकर अब पहले स्वयं को सुरक्षित रखने और स्वयं के बारे में सोचने को प्राथमिकता देंगे। यह प्राथमिकता जब उन्होंने बनाई, तो उन्हें असहज तो लगा, पर यह करना अपने जीवन और परिवार-समाज की सुरक्षा के लिए जरूरी था। असामान्य काल में नियम-सिद्धांत किस तरह से बदल जाते हैं और बदल देने चाहिए, उन्होंने बखूबी समझ लिया था। इस समझ की वजह से आज वह खुद ही नहीं, बल्कि उनका परिवार और आस-पड़ोस भी सुरक्षित है। महान विचारक पं गंगाप्रसाद उपाध्याय ने अपनी पुस्तक आस्तिकवाद में लिखा है, असामान्य काल और स्थितियों में ईश्वर पर विश्वास करते हुए जो स्वयं को शक्तिशाली और सुरक्षित रखने के लिए संकल्पित होता है, वह असामान्य काल में भी सामान्य काल की तरह सुखी रहता है। शरीर, अवचेतन और प्राणों को शक्तिशाली व निरोग बनाने के लिए संकल्प और आत्मविश्वास का होना जरूरी है। जब शरीर, अवचेतन को हम समझा लेते हैं कि तुम्हें किसी भी तरह नकारात्मक नहीं होना है, तो शरीर और अवचेतन में पड़ी नकारात्मक चीजें धीरे-धीरे बाहर निकल जाती हैं। मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक, मानव की सबसे बड़ी हार उसका स्वयं से हार जाना है। जीवन-योद्धा कभी हारते नहीं। वे हर परिस्थितियों का मुकाबला करते हैं और विजयी होते हैं।

  • राज्यसभा में विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, साल 2026 में (अभी तक) प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर ख़र्च का ब्योरा कुछ ये है।

  • без подписи

  • दोस्तों, आज मैं आपको अपने जीवन की एक ऐसी घटना बताना चाहता हूँ जिसने शायद मुझे जितना सिखाया, उतना किसी किताब ने नहीं सिखाया। मैं उस समय पाँचवीं या छठी कक्षा में पढ़ता था। हमारे गाँव के पास एक नया निजी स्कूल खुला था। गाँव के लगभग 25–30 बच्चे रोज़ वहाँ पढ़ने जाते थे। उन्हें देखकर मेरे मन में भी इच्छा होती थी कि काश मैं भी उस स्कूल में पढ़ पाता। एक दिन बिना किसी को बताए मैं भी उन बच्चों के पीछे-पीछे स्कूल पहुँच गया। मेरे पास न टिफिन था, न बैग था और न ही किसी को पता था कि मैं वहाँ हूँ। लंच के समय सभी बच्चे अपना टिफिन खोलकर खाना खाने लगे, लेकिन मेरे पास खाने के लिए कुछ नहीं था। मैं पूरे दिन भूखा रहा। बाहर कड़क धूप थी और उधर घर पर मेरे माता-पिता मुझे ढूँढते-ढूँढते परेशान हो रहे थे। उस समय न मोबाइल था और न ही घर में घड़ी। शाम लगभग तीन बजे जब मैं घर पहुँचा तो सबकी जान में जान आई। उस दिन मैंने घर पर जिद की कि मुझे भी उसी स्कूल में पढ़ना है। लेकिन जीवन हमेशा हमारी इच्छाओं के अनुसार नहीं चलता। उस स्कूल की फीस लगभग 300 रुपये महीना थी। आज यह रकम बहुत बड़ी नहीं लगती, लेकिन उस समय मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह फीस दे सके। मेरा सपना वहीं रुक गया। मैं उस स्कूल में कभी नहीं पढ़ पाया। उस उम्र में शायद मुझे निराशा हुई होगी, लेकिन आज सोचता हूँ कि कभी-कभी जीवन हमें वह नहीं देता जो हम चाहते हैं, बल्कि वह हमें उस दिशा में ले जाता है जहाँ हमें पहुँचना होता है। समय बीतता गया। मैंने पढ़ाई जारी रखी, संघर्ष जारी रखा और हार नहीं मानी। फिर एक दिन ऐसा आया जब जिन बच्चों के साथ कभी मैं पढ़ना चाहता था, उन्हीं में से कई बच्चों को पढ़ाने का अवसर मुझे मिला। उनके छोटे भाइयों को पढ़ाया, उनके बड़े भाइयों को पढ़ाया, कई बच्चों को मुफ्त में पढ़ाया और कई बच्चों को अपने पैसों से किताबें और कॉपियाँ खरीदकर दीं। मैंने कोचिंग की फीस इतनी कम रखी कि गरीब परिवारों के बच्चे भी पढ़ सकें। वर्ष 2014 से आज तक लगभग 500 विद्यार्थियों को पढ़ाने का अवसर मिला। उनमें से अनेक आज नौकरी कर रहे हैं, अपने परिवार का सहारा बने हुए हैं और समाज में अपनी पहचान बना रहे हैं। हाँ, यह भी सच है कि समय के साथ बहुत से लोगों का व्यवहार बदल जाता है। जिन लोगों के लिए हम बहुत कुछ करते हैं, वे भी कभी-कभी हमें भूल जाते हैं। लेकिन अब समझ में आता है कि जीवन का उद्देश्य लोगों से प्रशंसा या धन्यवाद प्राप्त करना नहीं है। सच्ची सफलता यह है कि आपकी वजह से किसी का जीवन बेहतर हो सके। यदि आपके कारण किसी बच्चे को शिक्षा मिली, किसी परिवार को आशा मिली और किसी युवा को अपने सपनों तक पहुँचने का रास्ता मिला, तो यही सबसे बड़ी उपलब्धि है। आज पीछे मुड़कर देखता हूँ तो लगता है कि उस दिन भूखा बैठा हुआ वह छोटा-सा बच्चा यदि परिस्थितियों के आगे हार मान लेता, तो शायद सैकड़ों बच्चों तक शिक्षा नहीं पहुँच पाती। इसलिए यदि आज आपकी परिस्थितियाँ कठिन हैं, संसाधन सीमित हैं, लोग आपका मज़ाक उड़ाते हैं या आपको लगता है कि आपके सपने बहुत बड़े हैं, तो एक बात हमेशा याद रखिए—आपकी वर्तमान स्थिति आपकी अंतिम पहचान नहीं है। गरीबी एक परिस्थिति हो सकती है, लेकिन वह आपकी क्षमता की सीमा नहीं है। अभाव आपकी कहानी का एक अध्याय हो सकता है, पूरी कहानी नहीं। संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता। हो सकता है आज आप जिस दरवाज़े के बाहर खड़े हों, कल उसी दरवाज़े को खोलने की चाबी आपके हाथ में हो। इसलिए अपने सपनों को परिस्थितियों के हवाले मत कीजिए। संकल्प रखिए, संयम रखिए और साधना करते रहिए। समय बदलता है, हालात बदलते हैं और कभी-कभी एक भूखा बच्चा भी सैकड़ों बच्चों का शिक्षक बन जाता है। TRISANKALP IAS संकल्प • संयम • साधना "योगस्थः कुरु कर्माणि"

  • https://youtu.be/af8OaGppprU?si=y4mwIQyG0xZiBfVt

  • https://youtu.be/ZCN27WUEjIQ?si=BTjNmjkOJRaU3X2y

  • https://www.youtube.com/live/5XyLxcJRwCg?si=gtKRMcOou2BxWzs9