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प्रेम, सेक्स और धोखा ( कामसूत्र )

प्रेम, सेक्स और धोखा ( कामसूत्र )

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प्रेम और काम क्या जरूरी हैं जीवन में ? एक जाल सबसे कठिन और शक्त जाल ना कोई बचा है ना कोई बचेगा। आइए जानते है...साथ में शेरों शायरी का भी आनंद लीजिए।

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  • 3 июл.13,9 тыс398

    "आपके पास जितनी अधिक यौन स्वतंत्रता होगी, उतनी ही जल्दी सेक्स अर्थहीन हो जाएगा। जितना अधिक आप सेक्स का अनुभव करेंगे, उतनी ही जल्दी वह अपना सारा महत्व खो देगा। वह बहुत साधारण-सी बात बन जाएगा। इसे याद रखिए: महात्माओं और तपस्वियों से सावधान रहिए, क्योंकि वे आपको कभी भी सेक्स से आगे नहीं जाने देंगे। यह बात आपको बहुत अजीब लगेगी, लेकिन मेरी बात सुनिए। यही वे लोग हैं जिन्होंने इस पृथ्वी पर सेक्स को जीवित बनाए रखा है। यदि मेरे जैसे लोगों को अपनी बात कहने और लोगों तक पहुँचने का अवसर मिल जाए, तो शीघ्र ही सेक्स पृथ्वी से लगभग गायब हो जाएगा। वह केवल एक जैविक (शारीरिक) प्रक्रिया बनकर रह जाएगा। उसका सारा रोमांस समाप्त हो जाएगा। आप जो निरर्थक कल्पनाएँ और भावनात्मक बोझ उस पर लादते रहते हैं, वे सब समाप्त हो जाएँगे। यह सारा निरर्थकपन दमन (Repression) से पैदा होता है।" https://whatsapp.com/channel/0029VaBZzJyEgGfMIJkv4T1I

  • 23 мая30,5 тыс8922

    पुराने युग में ऋषि मुनि स्त्रियों को ज्यादा से ज्यादा संताने होने का आशीर्वाद देते थे। स्त्रियां भी उससे प्रसन्न होती थी। उस समय क्या कारण रहा होगा कि स्त्रियां ऐसे आशीर्वाद मांगती थी। अगर आजकल के युग में कोई किसी को शतपुत्रो भव का आशीर्वाद दे दे तो स्त्री नाराज़ हो जाएगी। कि मेरी क्या कोई पर्सनल लाइफ नहीं है, क्या में बच्चे पैदा करने की मशीन हूं। शिवपुराण में कहा गया है कि स्त्री सृष्टि की रचना का आधार है। जब कोई स्त्री संतान को जन्म देती है तब उसका अपना भी एक पुनर्जन्म होता है। मतलब उसके अपने शरीर का भी पूरी तरह से नवीनीकरण हो जाता है। हर स्त्री चन्द्रमा की कलाओं की भांति हर रोज़ अपना मन विचार बदलती है, स्त्री के जीवन उसके यौवन का सबंद्ध चन्द्रमा की गति से जुड़ा है। तभी कविताओं में स्त्री के यौवन की तुलना चन्द्रमा से कि जाती है। शिवपुराण में भगवान शिव पार्वती को बताते हैं कि मनुष्य शरीर में हर स्त्री की आयु चन्द्रमा के एक साइकिल में एक माह कम हो जाती है। योगतंत्र ज्योतिष में स्त्री के monthly cycle को उसकी कुंडली में चन्द्रमा की स्थिति देख कर पता कि जाती है। आइए अब इसे आधुनिक मेडिकल साइंस से समझते हैं। हर स्त्री जब अपनी मां के गर्भ में होती है यह तभी तय हो जाता है कि उसकी ओवरी में कितने ovule (egg) हैं। मान ले की किसी लड़की के पैदा होते ही उसमे 3000 फॉलिकल हैं उनमें से सिर्फ 400 में ही ovule या egg में बदलने की संभावना हैं। इनमे कई waste भी हो जाते है। मान ले 40 waste हो गए पूरे जीवन में बीमारियों कि वजह से। बचे 360 । अब मान ले की लड़की की माहवारी शुरू हुई 13 वर्ष की आयु में। अब उसके monthly cycle में हर माह एक ovule निकल जाता है। तो इन egg का स्टॉक 30 वर्ष में समाप्त हो जाएगा और उसका मेनोपॉज मतलब बुढ़ापा शुरू हो जाएगा उसकी जवानी समाप्त हो जाएगी। उस तरह तरह के रोग लगना शुरू हो जाएंगे। इस तरह से ऐसी लड़की का बुढ़ापा 13+30=43 वर्ष से ही शुरू हो जाएगा। अब सोचिए अगर वह इस बीच एक बच्चे को जन्म देती है तो क्या होगा। 9 माह गर्भ के, 2 साल 3 माह दूध पिलाने से (अगर वह दूध पिलाएगी इतना समय तब) उसकी माहवारी नेचुरली 3 वर्ष नहीं आयेगी। इस केस में उसके eggs का तीन वर्ष का कोटा बच जाएगा । उसकी जवानी या उसके मेनोपॉज का समय तीन वर्ष आगे खिसक जाएगा। साथ में बच्चा गर्भ अवस्था के दौरान मां को तरह तरह की स्टेम cells भी देता है, जैसे लिवर ट्रांसप्लांट में स्टेम cells transplant की जाती है। इस तरह से अगर मां के शरीर में कोई ऐसी कमी है तो बच्चा उस पूरा भी कर देगा। अर्थात् ..... जैसा शिवपुराण में कहा गया है मां के शरीर का नवीनीकरण हो जाएगा। मैंने ऐसी बहुत सी स्त्रियों कि कुंडलियां देखी है जिनमे पाया कि गंभीर से गंभीर बीमारी से ग्रस्त स्त्री भी मां बनने के बाद, उन बीमारियों से मुक्त हो गई जिनका इलाज मेडिकल सांइस में भी नहीं है। दुनिया में बहुत सी सेलेब्रिटी महिलाए इस चीज का मिसयूज भी करती है अपनी जवानी कायम रखने के लिए। इसीलिए आप देखिए एक बच्चा पैदा होने से स्त्री की जवानी 3 वर्ष बढ़ जाती है। इसीलिए हमारे ऋषि मुनि स्त्रियों को अधिक से अधिक संताने होने का आशीर्वाद देते थे। अब बात करते हैं कि आप किसी स्त्री या माया या ऊर्जा को हमेशा कैसे अपने साथ प्रेम में बनाये रखने को बाधित कर सकते हैं। स्त्री या माया या ऊर्जा चाहे मनुष्य या कोई और जीव में। किसी भी स्त्री के जीवन का मूल उद्देश्य संतान उत्पन करना होता है। इसलिए हमारे उपनिषदों में स्त्री को जो सबसे बड़ा आशीर्वाद ऋषि मुनि देते थे वह यह था “ जाओ तुम्हारे दस पुत्र उत्पन्न हो और ग्यारहवाँ पुत्र तुम्हारा पति बन जाए!” इसी आशीर्वाद में स्त्री की जवानी, सुंदरता और सच्चा प्रेम हासिल करने का रहस्य छिपा हुआ है, अर्थात् जब कोई स्त्री आपको अपने पुत्र की भाँति समझ कर आपसे अपने पुत्र की तरह व्यवहार करने लग जाए तो इसका अर्थ होता है उस समय वह आपसे पूर्ण प्रेम करती है। इसलिए आपको भी अपनी पत्नी, प्रेमिका आया महिला मित्र से जितना समय सम्भव हो सके एक शरारती बच्चे की भाँति व्यवहार करना चाहिये। अर्थात् ...... हर समय जिस प्रकार एक छोटा बच्चा अपनी माँ को तंग करता रहता है शरारत करता रहता है , मार खा कर गाली सुन कर भी प्रेम से चिपटता रहता है। इस प्रकार उस स्त्री का मन भी आपके पीछे भागता रहेगा। कभी भी रौब, अपनी संपन्नता , धन सम्पति ज्ञान का दिखावा करने से कभी आप किसी स्त्री का प्रेम नहीं पा सकते। इसलिए आपको एक छोटे बच्चे की तरह मासूम शरारती बनना होगा। शक्ति पूजन का विशेष आधार यही है और पंचमी विद्या सर्वोच्च साधना इसीलिए बन जाती है। आज बस इतना ही....... https://whatsapp.com/channel/0029VaBZzJyEgGfMIJkv4T1I

  • 26 мар.54,1 тыс11817

    लिव इन रिलेशनशिप की अपार सफलता के बाद अब अनैतिक संबंधों की नई भसड़ झेलने को तैयार रहिए... जिसका नाम है... Unicorn Relationship..💞 यूनिकॉर्न रिलेशनशिप, जहां एक कपल (जोड़े) एक तीसरे व्यक्ति को अपने रिश्ते में, आमतौर पर यौन संबंधों के लिए शामिल करने की अनुमति देते हैं, । इस तीसरे व्यक्ति को "यूनिकॉर्न" कहा जाता है। साफ शब्दों में ऐसे समझिए कि कोई अपनी पत्नी संग हम बिस्तर होने के लिए किसी मित्र को भी आमंत्रित कर लिया है...अब दोनों भाई मिलकर भाभी को संतुष्ट करेंगे..!! क्या इसे भी महिला सशक्तिकरण की तरफ बढ़ता हुआ कदम माना जाए..??🧐 उम्मीद है कि बहुत जल्दी इसके लिए भी कानून बन जाएगा... वैसे भी महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की आड़ में तमाम ऐसे कानून बने हुए हैं जिनकी मदद से महिलाओं को वेश्यावृत्ति की ओर अग्रसर किया जा रहा है..!! क्योंकि, मां बाप की इच्छा के विरुद्ध किसी लड़के संग लिव इन रिलेशनशिप में रहना अपराध नहीं... देह व्यापार करना अपराध नहीं... विवाह के बाद भी अन्य पुरूषों से शारीरिक संबंध बनाना अपराध नहीं... तो फिर अपराध क्या है..?? क्या लड़कों का शादी करना...😏 ......... ...... ......... ...... ......... ...... ..... ..... ..... यूनिकॉर्न रिलेशनशिप के नाम पर स्त्रियां अपने ब्वायफ्रेंड को अपने घर बुलाएंगी और पति देव टार्च दिखाएंगे..❗ इससे पहले समाज गर्त में धकेल दिया जाए, पुरुष आयोग के गठन पर भी थोड़ा विचार कर लीजिए...और यदि खुद किसी कपल का यूनिकार्न बनने की सोच रहे हैं तो ध्यान रहें...नई पीढ़ी के दामाद या जीजू भी ऐसी फैंटेसी वाले न मिल जाएं.. विचार जरूर करिएगा🙏🌹 https://whatsapp.com/channel/0029VaBZzJyEgGfMIJkv4T1I

  • 19 мар.52 тыс13011

    #विवाहित_पुरुष_अवश्य_पढ़ें। कुछ दिन पहले मेरे पास एक फ्रेंड रिक्वेस्ट आई । यह किसी "सिम्पी शर्मा" के नाम से थी । एक्सैप्ट करने से पहले मैने आदतन उसकी प्रोफाइल को चैक किया... तो पता चला अभी तक उसकी मित्रता सूची में कोई भी नहीं है । शक हुआ कि कहीं कोई "फेक" तो नहीं है फिर सोचा नहीं...., फेक नहीं हो सकती..... हो सकता है फेसबुक ने इस यूजर को नया मानते हुए इसे मेरे साथ मित्रता करने के लिए सज्जेस्ट किया हो... प्रोफाइल फोटो नदारद देखकर मैनें अंदाजा लगाया.. शायद नई हो.......? और उसे फोटो अपलोड करनी नहीं आती या फिर वो संकोची भी हो सकती है...... खैर, मैनें रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर ली.. सबसे पहले उसकी ओर से धन्यवाद आया.. फिर मेरे हर स्टेटस को "लाईक और कमेंटस"मिलने शुरू हो गए....... मैं अपने इस नए कद्रदान को पाकर बेहद खुश हुआ.. सिलसिला आगे बढ़ा......... और अब मेरी निजी जिंदगी से संबधित कमेंटस आने लगे.... मेरी पसंद नापसंद को पूछा जाने लगा...... अब वो कुछ "रोमांटिक सी शायरी" भी पोस्ट करने लगी थी...... एक दिन मोहतरमा ने पूछा :- क्या आप अपनी "बीवी से प्यार" करते हैं ? मैनें झट से कह दिया :-हां.... . वो चुप हो गई अगले दिन उसने पूछा :- क्या आपकी मैडम "सुंदर" है ? इस बार भी मैने वही जवाब दिया :-हां, बहुत सुंदर है..... अगले दिन वो बोली :-क्या आपकी बीवी खाना अच्छा बनाती है........? "बहुत ही स्वादिष्ट" मैनें जवाब दिया फिर कुछ दिन तक वो नजर नहीं आई......... अचानक कल सुबह उसने मैसेज बाक्स में लिखा "मैं आपके शहर में आई हूँ....... क्या आप मुझसे."मिलना"चाहेंगे..? मैनें कहा :- जरूर... "तो ठीक है आ जाइये "सिने गार्डन"में मिल भी लेंगे और "मूवी" भी देख लेंगे....... मैनें कहा :- नहीं, "मैडम आप आ जाइये मेरे."घर" पर......... मेरे "बीवी-बच्चे"आपसे मिलकर खुश होंगे....... मेरी बीवी के हाथ का खाना भी खाकर देखियेगा......... बोली :- नहीं, मैं आपकी मैडम के सामने नहीं आऊंगी...... आपने आना है ,तो आ जाओ.... मैंने उसे अपने यहाँ बुलाने की काफी कोशिश की मगर वो नहीं मानी....... वो बार बार अपनी पसंद की जगह पर बुलाने की जिद पर अड़ी थी......... और मैं उसे अपने यहां....... आखिरकार वो झुंझला उठी और बोली :-ठीक है, मैं वापिस जा रही हूँ....... तुम डरपोक अपने घर पर ही बैठो.......? मैनें फिर उसे "समझाने" का प्रयास किया और सार्वजनिक स्थल पर मिलने के खतरे गिनायें पर वो नहीं मानी.......... हार कर मैंने कह दिया :-मुझसे मिलना है तो मेरे परिवार वालों के सामने मिलो, नहीं तो अपने घर जाओ..... वो "ऑफलाइन" हो गई...... शाम को घर पहुँचा,तो डायनिंग टेबल पर."लज़ीज खाना" सजा हुआ था........ मैनें पत्नी से पूछा:- कोई आ रहा है क्या खाने पर ? वो बोली... हां, "सिम्पी शर्मा" आ रही है...... मैंने कहा... क्या............? वो तुम्हें कहां मिली, तुम उसे कैसे जानती हो...? "तसल्ली रखिये साहब, वो..."मैं"....ही थी..... आप मेरे जासूसी मिशन के दौरान परीक्षा में "पास" हुए... आओ, मेरे सच्चे हमसफर, खाना खायें, ठंडा हो रहा है...! पोस्ट अच्छी लगे तो शेयर जरूर करें https://whatsapp.com/channel/0029VaBZzJyEgGfMIJkv4T1I

  • 8 мар.47,5 тыс7011

    दो पाकिस्तानी। अब्दुल मियां लंदन गया अपना बिज़नेस करने। थोड़े दिन बाद उसने अपने दोस्त गफूर को फ़ोन किया..... . "गफूर मियाँ यहाँ धंधा बहुत झकास चल रिया है। मैने 500 चादरें और 5000 चड्डी बेच के 50,000 डॉलर कमा लिए हैं।" गफूर:- "अबे तू वापस आजा .....इससे ज्यादा 1,00,000 डॉलर तो भाभी जान ने कमा लिए हैं वो भी .... एक ही चद्दर पर....और बिना चड्डी के....। https://whatsapp.com/channel/0029VaBZzJyEgGfMIJkv4T1I

  • 8 мар.45,7 тыс126

    मुझे तुमसे कोई गिला नहीं के मैं याद तुमको ना आ सका मगर इतनी बात जरूर है के तुम्हें दिल से ना भुला सका। दिल-ए-अश्क़वार को क्या कहूँ ये ना कुछ भी कर के दिखा सका ना इधर की आग बुझा सका ना उधर ही आग लगा सका । https://whatsapp.com/channel/0029VaBZzJyEgGfMIJkv4T1I

  • 6 мар.45,1 тыс235

    स्त्री दूसरे पुरुष के पास सिर्फ तब नहीं जाती जब उसकी देह अधूरी रह जाए, वह तब भी भटकती है जब उसका मन भीतर से खाली हो जाए। पुरुष औरत को दुनिया की नज़रों से तो बचाते हैं, पर अक्सर उसके दिल के खालीपन को भरना भूल जाते हैं। याद रखो… अगर उसकी भावनाओं और स्पर्श की प्यास घर में नहीं बुझी, तो वह कहीं न कहीं प्यार की तलाश में भटक ही जाएगी। इस स्थित में औरत हस्त का पजोग करती है वोह भी अल्केले में नहीं जा फोन की जरया से और दूसरे पुरुष से https://whatsapp.com/channel/0029VaBZzJyEgGfMIJkv4T1I

  • 4 мар.42,5 тыс7524

    सभी को होली 🫟 की हार्दिक शुभकामनाएं

  • 25 февр.42,7 тыс587

    *शादी हुई ...* दोनों बहुत ख़ुश थे..! स्टेज पर फ़ोटो सेशन शुरू हुआ..! दूल्हे ने अपने दोस्तों का परिचय साथ खड़ी अपनी #साली से करवाया ~ "ये है मेरी साली, #आधी_घरवाली" दोस्त ठहाका मारकर हंस दिए ! दुल्हन मुस्कुराई और अपने देवर का परिचय अपनी सहेलियो से करवाया ~ "ये हैं मेरे #देवर.. #आधे_पति_परमेश्वर" ये क्या हुआ..? अविश्वसनीय... अकल्पनीय…! भाई समान देवर के कान सुन्न हो गए…! पति बेहोश होते होते बचा…! दूल्हे, दूल्हे के दोस्तों, रिश्तेदारों सहित सबके चेहरे से मुस्कान गायब हो गयी…! लक्ष्मन रेखा नाम का एक गमला अचानक स्टेज से नीचे टपक कर फूट गया…! स्त्री की मर्यादा नाम की हेलोजन लाईट भक्क से फ्यूज़ हो गयी…! थोड़ी देर बाद एक एम्बुलेंस तेज़ी से सड़कों पर भागती जा रही थी…! जिसमे दो स्ट्रेचर थे…! एक स्ट्रेचर पर भारतीय संस्कृति कोमा में पड़ी थी... शायद उसे हार्ट अटैक पड़ गया था…! दुसरे स्ट्रेचर पर पुरुषवाद घायल अवस्था में पड़ा था...! उसे किसी ने सर पर गहरी चोट मारी थी…! ये #व्यंग उस ख़ास पुरुष वर्ग के लिए है जो खुद तो अश्लील व्यंग करना पसंद करते हैँ पर जहाँ महिलाओं कि बात आती हैं वहाँ संस्कृति कि दुहाई देते फिरते हैं…! आदर पाने के लिए आदर दीजिये महिलाओं का मजाक बनाना बंद कीजिए । https://whatsapp.com/channel/0029VaBZzJyEgGfMIJkv4T1I

  • 19 февр.39,6 тыс4615

    पुरूष इसलिए श्रेष्ठ है।/ !--अगर औरत पुरुष को संतुष्ट न करती हो तब भी घर गृहस्थी चलती रहती है।जबकि पुरूष के नपुंसक होने या संबंध बनाने में असमर्थता के चलते कोई स्त्री रूकी हो तो एकाध उदाहरण आप बताएं। !!--अगर दूसरी तीसरी औरत से नाजायज रिश्ता बन जाए तो वह पहली की हत्या नहीं करता (कुछ अपवादो को छोड़कर।)जबकि औरते 75% मामलो में प्रेमी संग मिलकर पति की हत्या कर दे रहीं हैंवह भी अत्यंत क्रूरतापूर्ण तरीको से। !!!--पुरूष नगदी लाता है तो लगभग वह परिवार की होती है,मुख्यतः पत्नी को ही देता है। अगर स्त्री कमाए तो पति जूठे टुकड़ो पर पलने वाला होता है। औरत की कमाईपर पलता है ,हालांकि मजदूर वर्ग के शराबियों पर यह लागू नही। !!!!--आईएएस बनी औरत को उस पोस्ट से नीचे वाला खुदकी बेइज्जती लगती है।औरत से कम कमाई भी चपरासी सा व्यवहार पाता है। जबकि पुरूष कमाए तो केवल घर के कामो पर ही औरत आसमान सिर पर ले लेती है। 😀 बाकी के सेंसर स्कूटी चलाते वक्त भी देखे जा सकते हैं। https://whatsapp.com/channel/0029VaBZzJyEgGfMIJkv4T1I

  • 18 февр.35,8 тыс219

    #कामवासना जीवन का एक #सहज तथ्य है 🍁❣️ ⚡केवल मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जो काम को शरीर,प्राण,मन,भाव,ऊर्जा और चेतना के तलों पर भी अनुभव करता है .यह प्रकृति का सम्मोहन है जो जीवित प्राणियों और वनस्पतियों को अपनी प्रजाति को बचाए रखने के लिए घेरता है .केवल मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जो इस प्रकृति पृदत्त सम्मोहन से क्रीड़ा करने में सक्षम है,और अपने प्रेम व ध्यान से इस सम्मोहन से बाहर होने में भी सक्षम है . काम-ऊर्जा सहज व सरल जीवन ऊर्जा है,लेकिन मनुष्य सहज और सरल नहीं रह गया है,सभ्यता की विकासयात्रा में उसका मन जटिल से जटिल होता चला गया है .और इसी जटिल मन ने कामवासना को भी विकृत कर दिया है .ऐसा मन या तो दमन की और गति करने लगता है या फिर दर्शन और धर्म की ओट लेकर भोग की ओर गति करने लगता है . मनुष्य के जीवन में जो काम-ऊर्जा है वो पशुओं के से भिन्न है,पशुओं की काम-ऊर्जा दैहिक या स्थूल तल पर ही काम करती है,लेकिन मनुष्य में यह दैहिक तल के साथ ही अन्य सूक्ष्म तलों पर भी एक साथ काम करती है,इसलिए ही यदि मनुष्य की कामवासना दैहिक तल पर ही रह जाये तो वो कुंठित,निराश और भ्रमित अनुभव करता है .भाव के बिना दैहिक क्रिया में उतरने पर वो उपयोग किये जाने या करने की पीड़ित करने वाली दशा से गुजरता है . मनुष्य जब काम-ऊर्जा को देह के साथ ही अपने पूरे प्राणों में उतरने देता है तो उसके भीतर के सूक्ष्म तल सक्रिय हो उठते हैं .यह यात्रा इस ऊर्जा से सजगता और प्रेम को जोड़ देने पर प्रारंभ होती है. और यह यात्रा उसके भीतर गहरी निष्ठा और अखंडता को गतिमान करती है .उसके भीतर के खंड जुड़ने लगते हैं और वो पाखंड से अखंड होने की और बढ़ने लगता है . मनुष्य के ही यह संभावना है कि वह अपनी काम-ऊर्जा को रूपांतरित करने की सामर्थ्य रखता है .लेकिन यह सामर्थ्य भोग और दमन से नहीं आती,यह आती है इस ऊर्जा के सहज स्वीकार और प्रेम के निष्ठापूर्ण जगत में प्रवेश करने पर .इस जगत में तुम्हारे जीवन की जड़ें जीवन की जमीन में गहरे से गहरे पहुँचती रहती हैं और तुम्हारे जीवन की शाखाएं-प्रशाखाएं जीवन के आसमान में ऊंचे से ऊंचे फैलती चली जाती हैं .... जिंदगी बहुत छोटी सी है इसमें गुरूर नहीं शौक रखिए..!! https://whatsapp.com/channel/0029VaBZzJyEgGfMIJkv4T1I

  • 18 февр.29 тыс2911

    “औरत सेक्स में बहुत अधिक रुचि नहीं रखती। वह गर्माहट, गले लगाने, मित्रता और प्रेम में ज़्यादा रुचि रखती है। पुरुष अधिकतर सेक्स में रुचि रखता है। ये गलतफ़हमियाँ बताती हैं कि भगवान ने दुनिया नहीं बनाई होगी — क्योंकि यहाँ कुछ भी मेल नहीं खाता। ऐसा लगता ही नहीं कि उसे पता था कि पुरुष और स्त्री को साथ रहना है। यदि भगवान ने बनाया होता, तो उन्हें इस तरह बनाया होता कि वे एक-दूसरे के साथ पूरी तरह फिट बैठें; लेकिन वे तो एकदम मिसफिट हैं। पुरुष की कामुकता केवल जननांगों में केंद्रित है । स्त्री का अस्तित्व पूरी तरह अलग प्रकार का है। उसका पूरा शरीर प्यार चाहता है — केवल सेक्स नहीं। उसका पूरा शरीर कामोन्मुख और उन्मादपूर्ण हो सकता है। यही कारण है कि इतनी समस्या होती है। पुरुष दो मिनट में चरमसुख तक पहुँच जाता है और स्त्री तो अभी शुरू भी नहीं हुई होती। स्त्री को समय चाहिए — उसके पूरे शरीर को तैयार होना होता है, परमानंद में भीगना होता है, उसका पूरा अस्तित्व उस नृत्य में शामिल होना चाहता है। तभी वह आनंद का विस्फोट महसूस कर सकती है। इसलिए वह केवल ‘जननांग’ में रुचि नहीं रखती। उसे आलिंगन चाहिए, निकटता चाहिए, तुम्हारे शरीर की गर्माहट चाहिए। वह चाहती है कि तुम उसे अपने प्रेम से घेर लो, और वह तुम्हें अपने प्रेम से भर दे। जैसे-जैसे अधिक से अधिक लोग महसूस करेंगे कि सेक्स स्वयं गिर रहा है, इसका मतलब यह नहीं कि जब कोई स्त्री पास आती दिखे तो तुम कमरे में बंद हो जाओ और ट्रान्सेन्डेन्टल मंत्र जपने लगो — ‘विमल, विमल, विमल।’ तुम्हें प्रेम की अपनी पुरानी धारणा बदलनी होगी, क्योंकि वह प्रेम नहीं था — वह तो केवल सेक्स था। जब सेक्स गिर जाता है, तब तुम स्त्री से एक उच्च स्तर पर मिल सकते हो — और वह हमेशा से इसी उच्च मिलन की प्रतीक्षा और पीड़ा में रही है। लाखों वर्षों से स्त्रियाँ इसलिए दुखी रही हैं क्योंकि पुरुष उन्हें वह नहीं दे पाया जिसकी उन्हें आवश्यकता थी। पुरुष ने उन्हें सिर्फ़ अपनी कामुकता के लिए इस्तेमाल किया। स्त्रियों को लगता है जैसे वे कोई वस्तु हैं — जिसका उपयोग किया गया और फिर पुरुष मुड़कर सो गया, और खर्राटे लेने लगा। यह कितना भद्दा है!” https://whatsapp.com/channel/0029VaBZzJyEgGfMIJkv4T1I

  • 17 февр.26 тыс2914

    एक बेहतरीन रात का रहस्य; आकर्षण और इंटिमेसी के कुछ अनदेखे नियम! शारीरिक संबंध (इंटिमेसी) सिर्फ दो शरीरों का मिलन नहीं है, बल्कि यह एक गहरा मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक अनुभव है। अक्सर पुरुष इस दौरान कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिससे एक खूबसूरत पल सिर्फ एक मशीनी प्रक्रिया बनकर रह जाता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका यह अनुभव केवल एक साधारण मुलाकात न होकर एक गहरा और अटूट बंधन बने, तो आपको इसके पीछे के मनोविज्ञान को समझना होगा। आइए, इंटिमेसी और आकर्षण के कुछ महत्वपूर्ण नियमों के बारे में जानते हैं, जो आपके रिश्ते को एक नई गहराई देंगे। 1️⃣सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात यह है कि शारीरिक अंतरंगता के ठीक बाद का समय सबसे अहम होता है। जब आप अपनी प्रक्रिया खत्म कर लेते हैं, तो वह बेहतरीन रात वहीं खत्म नहीं हो जाती। इसके बाद के 10 मिनट गहरे आकर्षण और मनोवैज्ञानिक जुड़ाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए, करवट लेकर अपना फोन चेक करने के बजाय उसे अपनी बाहों में लें और उसकी आँखों में देखें। यह साधारण सा कदम ऑक्सीटोसिन हार्मोन रिलीज करता है, जो एक आम अनुभव को गहरे मनोवैज्ञानिक बंधन में बदल देता है। 2️⃣इस जुड़ाव को और मज़बूत करने के लिए तालमेल का होना बहुत ज़रूरी है। जब आप अपनी पार्टनर की सांसों से अपनी सांसों का तालमेल बिठाते हैं और आपकी लय एक हो जाती है, तो यह उसके नर्वस सिस्टम में एक होने का अहसास जगाता है। इससे ऐसा लगता है जैसे दो अलग-अलग शरीर कोई टास्क नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक ही इकाई बनकर इस खूबसूरत अनुभव को जी रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान आपका आई कॉन्टैक्ट ही आपका सबसे बड़ा नियंत्रण है। जिस पल आप अपनी नज़रें हटाते हैं, आप वह मनोवैज्ञानिक पकड़ तोड़ देते हैं। आँखों में आँखें डाले रखना बहुत ही तीव्र और आदिम अहसास है, जो यह दर्शाता है कि आप सिर्फ अपनी संतुष्टि नहीं खोज रहे हैं, बल्कि आप उस पल को पूरी तरह से जी रहे हैं और उस पर अपना अधिकार जता रहे हैं। 3️⃣खामोशी को तोड़ना भी बेहद ज़रूरी है। साइलेंट मूवी की तरह बिना कुछ बोले रहने वाला तरीका अक्सर अजीब होता है और रिश्ते में दूरी ला सकता है। शांत रहने से महिला का दिमाग अपनी असुरक्षाओं की ओर भटक सकता है। इसलिए, अपनी आवाज़ से उसे वर्तमान में बांधे रखें। एक धीमी आह, कामुक फुसफुसाहट या सिर्फ उसे मिल रहे आनंद को बयां करना, उसका ध्यान पूरी तरह से उस अहसास पर केंद्रित रखता है। 4️⃣बेडरूम में बार-बार अनुमति मांगने के बजाय नेतृत्व करना ज़्यादा आकर्षक माना जाता है। क्या यह ठीक है? या क्या तुम यह करना चाहती हो? जैसे सवाल मूड को खराब कर सकते हैं। ये सवाल उसे एक मैनेजर की भूमिका में धकेल देते हैं, जबकि वह उस पल में पूरी तरह से खुद को सौंपना चाहती है। इसलिए, पूछने के बजाय स्थिति को संभालें; उसके हाथों को पकड़ें, उसे दिशा दें और गति खुद तय करें। 5️⃣इन सबके बीच जो सबसे ज़रूरी बात है, वह है उसे पूरी तरह से उत्तेजित करना। जैसे आपके लिए उत्तेजना ज़रूरी है, वैसे ही महिलाओं के लिए भी यह बेहद आवश्यक है। बिना सही उत्तेजना के एक बेहतरीन अनुभव की कल्पना नहीं की जा सकती। समस्या यह है कि ज्यादातर पुरुषों को यह नहीं पता होता कि महिला को मानसिक और शारीरिक रूप से कैसे तैयार किया जाए। 6️⃣सिर्फ ज्यादा देर तक टिकने पर ध्यान न दें। पुरुषों के लिए समय अवधि अक्सर सिर्फ एक दिखावे का पैमाना होती है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप 60 मिनट तक साथ रहते हैं, अगर वे मिनट सिर्फ उबाऊ और मशीनी घर्षण वाले हों। अगर उस दौरान उसका दिमाग किचन या घर के कामों में उलझा है, तो आपका लंबा टिकना भी किसी काम का नहीं है। असल महत्व समय का नहीं, बल्कि उस पल में महसूस की गई गहराई और आनंद का है। 7️⃣एक बेहतरीन और यादगार अंतरंग अनुभव केवल शारीरिक प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। यह दोनों पार्टनर्स के बीच के विश्वास, मनोवैज्ञानिक जुड़ाव और एक-दूसरे की ज़रूरतों को समझने की कला है। जब आप समय और प्रदर्शन की चिंता छोड़कर वर्तमान पल को पूरी शिद्दत से जीते हैं, अपनी पार्टनर को मानसिक और भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस कराते हैं, तभी एक साधारण पल जीवन भर की खूबसूरत याद बन पाता है। इन नियमों को अपनाकर आप अपने रिश्ते में एक नई और अटूट ऊर्जा का संचार कर सकते हैं। https://whatsapp.com/channel/0029VaBZzJyEgGfMIJkv4T1I

  • 15 февр.23 тыс118

    समर्थन करता है कि; साथी की उत्तेजक आवाज़ें आपके दिमाग के मिरर न्यूरॉन्स को जगा देती हैं। जब आप उन्हें आनंद लेते हुए सुनते हैं, तो आपको भी वही आनंद महसूस होता है। आवाज़ें आपके साथी के लिए सबसे बड़ा कॉम्प्लिमेंट होती हैं। यह उन्हें बताता है कि वे आपको संतुष्ट करने में सक्षम हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास और पौरुष बढ़ता है। अपनी और साथी की सांसों की लय पर ध्यान केंद्रित करना आपको बाहरी दुनिया की चिंताओं से दूर कर देता है और आप पूरी तरह उस पल में जी पाते हैं। काम-क्रीड़ा में आवाज़ें आत्मा की सबसे शुद्ध अभिव्यक्ति हैं। यह दो लोगों के बीच की उस दीवार को गिरा देती हैं। जो उन्हें अलग करती है। रति रहस्य कहता है कि एक शांत मिलन अधूरा है। इसलिए, अपनी नैसर्गिक प्रतिक्रियाओं को रोकें नहीं। अपनी सांसों, अपनी आहों और अपने शब्दों को बहने दें। यह सीत्कार और कूजित ही वह संगीत है। जो आपके रिश्ते में गहराई, विश्वास और बेपनाह इश्क भरता है। याद रखें, बेडरूम की चारदीवारी में शर्म का कोई स्थान नहीं है, वहां केवल प्रेम और आनंद का उत्सव होना चाहिए॥ https://whatsapp.com/channel/0029VaBZzJyEgGfMIJkv4T1I

  • 15 февр.25,4 тыс2515

    अक्सर हम मानते हैं कि काम-क्रीड़ा केवल… दो शरीरों के स्पर्श और दृष्टि का खेल है, लेकिन हमारे प्राचीन ऋषियों ने सदियों पहले… यह समझ लिया था कि रति का असली आनंद श्रवण यानी सुनने में भी छिपा है। जब दो प्रेमी एकांत में एक-दूसरे में खोते हैं, तो वहां सन्नाटा नहीं, बल्कि एक मधुर संगीत गूंजना चाहिए। कामसूत्र के अनुसार, रति-क्रीड़ा में मुख से निकलने वाली स्वाभाविक ध्वनियां चाहे वह दबी हुई आहें हों, तीखी सिसकियाँ हों, या बेकाबू होकर निकलती आवाज़ें केवल शोर नहीं, बल्कि कामाग्नि को धधकाने वाला ईंधन हैं। मौन जहाँ शांति देता है, वहीं बेडरूम में आवाज़ जीवन और ऊर्जा का संचार करती है। कामसूत्र के रचयिता महर्षि वात्स्यायन ने रति क्रीड़ा को केवल एक शारीरिक मिलन नहीं, बल्कि एक कलात्मक अभिव्यक्ति माना है। इस कला में स्पर्श और दृष्टि के साथ-साथ श्रवण का भी गहरा महत्व है। जब दो प्रेमी मिलन की चरम अवस्था की ओर बढ़ते हैं, तो भाषा पीछे छूट जाती है और केवल ध्वनि ही संवाद का माध्यम रह जाती है। कामसूत्र में इन स्वाभाविक ध्वनियों को सीत्कार और विरुत कहा गया है। यह वह संगीत है जो दो आत्माओं के मिलन से उत्पन्न होता है। कामसूत्र के अनुसार कामध्वनियों के प्रकार; वर्ण मूलक ध्वनियां वात्स्यायन ने सबसे पहले उन ध्वनियों का उल्लेख किया है जो अक्षरों या वर्णों पर आधारित होती हैं। जब रति का आरंभ होता है या मध्य अवस्था होती है, तब ये ध्वनियां निकलती हैं:- १) हिंकार यह एक गंभीर और गहरी ध्वनि है, जैसे गले के भीतर से हूँ... हूँ... की गूंज। यह अक्सर तब निकलती है जब स्पर्श सुखद हो। लेकिन बहुत तीव्र न हो। यह एक तरह की सहमति है। २) स्तनित जैसे बादलों की गड़गड़ाहट होती है, वैसे ही काम के वेग के बढ़ने पर हिंकार का स्वर भी भारी और तेज़ हो जाता है। इसे स्तनित कहा गया है। यह साथी को संकेत देता है कि उत्तेजना बढ़ रही है। ३) कूजित यह कबूतर के गुटरगूँ करने जैसी मधुर, लयबद्ध और लगातार निकलने वाली आवाज़ है। यह तब होती है जब साथी अत्यधिक प्रेम, कोमलता और सुख का अनुभव कर रहा हो। ४) रुदित इसे रोने जैसी ध्वनि कहा गया है। लेकिन यह दुख के आंसू नहीं, बल्कि आनंदाश्रु हैं। जब सुख की सीमा पार हो जाती है और गला भर आता है, तब निकलने वाली यह आवाज़ परमानंद की निशानी है। वायु मूलक ध्वनियां जब रति क्रीड़ा में दंत-क्षत या नख-क्षत का प्रयोग होता है, तब दर्द और सुख के मिश्रित भावों को व्यक्त करने के लिए विशेष ध्वनियां निकलती हैं। इन्हें वायु के प्रवाह के आधार पर बांटा गया है; १) सीत्कार जब साथी को हल्का दर्द और तीव्र सुख एक साथ महसूस होता है, तो वह दातों को भींचकर हवा को अंदर की ओर खींचता है। इससे सी-सी की आवाज़ आती है। यह ध्वनि बताती है कि स्पर्श बहुत गहरा और असरदार है। २) फूत्कृत यह सीत्कार का विपरीत है। जब उत्तेजना इतनी अधिक हो जाए कि उसे अंदर रोकना मुश्किल हो, तो होठों को गोल करके हवा को बाहर की ओर जोर से छोड़ा जाता है, जिससे फू-फू की आवाज़ आती है। यह एक तरह से शरीर की गर्मी और तनाव को बाहर निकालने की प्रक्रिया है। प्रकृति का अनुकरण कामसूत्र का सबसे सुंदर पहलू यह है। कि यह मनुष्य को प्रकृति से अलग नहीं मानता। वात्स्यायन लिखते हैं कि रति के चरम क्षणों में प्रेमी-प्रेमिका सुध-बुध खो बैठते हैं। और उनकी आवाज़ें पक्षियों की तरह हो जाती हैं। इसे विरुत कहा गया है। १) पारावत कबूतर की तरह कोमल और लगातार गुटरगूँ करना, जो रति की निरंतरता और लय को दर्शाता है। २) कोकिल कोयल की तरह मीठी और तीखी कूक, जो अचानक उठी उत्तेजना की लहर को व्यक्त करती है। ३) भ्रमर भौंरे की तरह गुंजन करना। यह ध्वनि तब निकलती है जब साथी आंखें बंद करके एक गहरे आनंद की अवस्था में होता है। https://whatsapp.com/channel/0029VaBZzJyEgGfMIJkv4T1I ४) हंस हंस की तरह गंभीर और मादक ध्वनि, जो रति की समाप्ति और संतुष्टि की ओर इशारा करती है। कामसूत्र यह स्पष्ट करता है। कि ये सभी ध्वनियां भाव-विह्वल अवस्था में अपने आप निकलनी चाहिए। यदि ये बनावटी हैं, तो इनका कोई प्रभाव नहीं होता। रति रहस्य के अनुसार, ये आवाज़ें पुरुष साथी की शक्ति और उत्साह को बढ़ाने के लिए मंत्र का काम करती हैं। यह शर्म का नहीं, बल्कि मुक्ति का विषय है। जब आप अपनी आवाज़ को स्वतंत्र छोड़ देते हैं, तो आप न केवल अपने आनंद को स्वीकार करते हैं, बल्कि अपने साथी को भी यह विश्वास दिलाते हैं। कि उनका प्रयास सफल है। आधुनिक मनोविज्ञान भी कामसूत्र की इस बात का

  • 15 февр.23,6 тыс1613

    प्रेम और सेक्स के संदर्भ में, ,,,,,,, ,, अगर साइकिल चलाने की कहानी झूंठी नहीं होती यानी सील उससे टूटी तो कई रिश्ते तो सुहागरात के दिन ही टूट जाते। ,, रिलेशनशिप में रहने का मजा तब आता है जब बायफ्रेंड दिमाग चाटने की जगह कुछ और ही चाटने लगता है! ,,, आजकल अनमैरिड लड़कियों के बायफ्रेंड बेशक ना हो लेकिन शादीशुदा औरतों के बायफ्रेंड जरूर मिलेंगे! ,,,,माना प्यार करना और यार बनना जरूरी नहीं, मगर हो तो अच्छा है क्योंकि संभोग क्रिया में अर्पण और समर्पण भाव से मौज मस्ती मजा आता है। ,,, प्यार ईश्वर की इबादत है और यार भी ईश का तौहफा है। संभोग क्रिया जरुरत है और इसे ईश्वर का प्रसाद मानकर लुफ्त उठाया जाना चाहिए। ,,,, हमें और हमारे प्यार को क्यों नहीं समझते हो हम वही हैं जिसे तुम चाहते रहे और जान लुटाते रहे। हमने संभोग क्रिया को अपनाया और उसे जश्न की मनाते रहे। ,,, काहे का गम है काहे को आंख नम है।जब पास में सनम है तो ये क्या कम है।आओ प्यार करें और यार बनें और सब कुछ संभोग क्रिया में न्यौछावर कर चरमसुख परमसुख प्राप्त करें! ,,,,,,,, लाइफ आइडिया https://whatsapp.com/channel/0029VaBZzJyEgGfMIJkv4T1I

  • 15 февр.25,3 тыс2113

    यह सोचना कि मैं सब जानता हूँ या उसकी इच्छाओं का सिर्फ अंदाजा लगाना अक्सर गलत साबित होता है। इसके बजाय, प्यार से पूछें, तुम्हें यह कैसा लग रहा है? या क्या तुम कुछ और चाहती हो? जब आप उसकी बात ध्यान से सुनते हैं, तो उसे महसूस होता है कि उसकी राय मायने रखती है, जिससे वह ज्यादा रिलैक्स होकर आपके करीब आती है॥ 6️⃣अनुभव में वैरायटी और नयापन:- चाहे रूटीन कितना भी अच्छा क्यों न हो, एक ही चीज बार-बार करने से वह उबाऊ हो जाती है। सेक्शुअल प्लेजर पर हुए राष्ट्रीय सर्वे बताते हैं। कि महिलाएँ अलग-अलग तरीकों, पोज़ीशन और प्रयोगों से ज्यादा आनंद महसूस करती हैं। सेक्स में वैरायटी रिश्ते में लंबे समय तक बनी रहने वाली संतुष्टि की गारंटी है। बोरियत इच्छा को खत्म कर देती है, जबकि नए मूव्स, नई जगहें, किसिंग के अलग तरीके या टॉयज का इस्तेमाल उस चिंगारी को जिंदा रखता है। रूटीन सेक्स उसे घर के किसी काम जैसा लगने लग सकता है, इसलिए उसे अच्छे और सुरक्षित तरीकों से सरप्राइज करते रहना बेहद जरूरी है॥ 7️⃣उसे आकर्षक और वांछित महसूस कराना:- दुनिया की हर महिला अपने पार्टनर की नजरों में सबसे खूबसूरत और आकर्षक दिखना चाहती है। उसे इमोशनली और फिजिकली यह महसूस कराना। कि आप उसे टूटकर चाहते हैं, किसी भी मेकेनिकल या तकनीकी मूव से ज्यादा बड़ी बात है। सालों के सर्वे बताते हैं। कि महिलाओं के लिए वांछित होना सबसे बड़ा टर्न-ऑन है। एक परफेक्ट परफॉर्मेंस से कहीं ज्यादा आपका सच्चा जुनून मायने रखता है। अंतरंग पलों के बीच में जब आप उसकी आँखों में देखकर उसकी खूबसूरती की तारीफ करते हैं, तो वह बात सीधे उसके दिल पर असर करती है। चाहत संक्रामक होती है:- जितना ज्यादा आप उसे चाहेंगे, वह भी उतनी ही शिद्दत से आपकी तरफ आकर्षित होगी॥ 8️⃣अपनी नहीं, उसकी खुशी को प्राथमिकता देना:- एक बेहतरीन लवर की पहचान यही है। कि वह अपने पार्टनर के चरम सुख को प्राथमिकता देता है। जब पुरुष महिलाओं की संतुष्टि पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो ऑर्गेज़्म गैप अपने आप कम हो जाता है। सिर्फ अपनी संतुष्टि देखकर सो जाना केवल रिश्ते में नाराजगी पैदा करता है। जबकि दरियादिली एक लत बन जाती है। स्टडीज भी यही बताती हैं कि दोनों की खुशी और एक-दूसरे की परवाह ही लंबे समय की खुशी तय करती है। मजे की बात यह है कि जब आप उसकी खुशी को प्राथमिकता देते हैं और वह पहले संतुष्ट होती है, तो उसके बाद का अनुभव आपके लिए भी कहीं ज्यादा जबरदस्त और रोमांचक हो जाता है॥ आंकड़े झूठ नहीं बोलते। जहाँ पुरुषों के संतुष्ट होने की दर 95% है, वहीं महिलाओं का 65% पर अटक जाना यह बताता है कि हमारे तरीकों में सुधार की बहुत गुंजाइश है। लेस्बियन महिलाओं का 86% संतुष्टि का आंकड़ा इस बात का सबूत है कि जब तकनीक, फोकस और परवाह सही हो, तो शरीर पूरी तरह से साथ देता है। सेक्स केवल एक शारीरिक जरूरत नहीं है, बल्कि दो लोगों के बीच का सबसे गहरा संवाद है। जब आप उसकी खुशी और उसकी भावनाओं को अपनी प्राथमिकता बना लेंगे, तो आप देखेंगे कि न सिर्फ बेडरूम में, बल्कि आपके पूरे रिश्ते में कैसे एक जादुई बदलाव आता है। क्योंकि सच तो यही है कि वह इसकी हकदार है॥ https://whatsapp.com/channel/0029VaBZzJyEgGfMIJkv4T1I

  • 15 февр.17,6 тыс2421

    #महिलाओं की असली चाहत बेडरूम के राज…. जो हर पुरुष को जानने चाहिए। { विज्ञान और रिसर्च पर आधारित } ज्यादातर पुरुषों के बीच एक बहुत ही आम और पुरानी गलतफहमी है। कि बेड में अच्छा होने का सीधा मतलब घंटों तक टिके रहना ? या हर रोज नए और अजीबोगरीब करतब दिखाना है। लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। विज्ञान, रिसर्च और खुद महिलाओं के अनुभव बताते हैं। कि वे शारीरिक प्रदर्शन से कहीं ज्यादा एक गहरा कनेक्शन, आपके हुनर और यह महसूस करना चाहती हैं। कि आप उन्हें सच में चाहते हैं। जब बात चरम सुख की आती है, तो हेटेरोसेक्सुअल { पुरुष के साथ संबंध बनाने वाली } महिलाओं की संतुष्टि का प्रतिशत केवल 65% है, जबकि पुरुषों का 95% यह बहुत बड़ा अंतर किसी शारीरिक कमी की वजह से नहीं है, बल्कि तकनीक, फोकस और परवाह की कमी का नतीजा है। आइए विस्तार से जानते कुछ वह बातें जो हर महिला वास्तव में चाहती है॥ 1️⃣ भावनात्मक_जुड़ाव:- किसी भी बेहतरीन शारीरिक अनुभव की शुरुआत दिमाग और दिल से होती है। एक महिला के लिए सिर्फ शरीर का मिलना काफी नहीं है; उसे सुरक्षित और भावनात्मक रूप से वांछित महसूस करने की जरूरत होती है। आर्काइव्स ऑफ सेक्सुअल बिहेवियर { Archives of Sexual Behavior } की स्टडीज़ बताती हैं। कि चरम सुख की गिनती से कहीं ज्यादा , भावनात्मक जुड़ाव महिलाओं की सेक्शुअल संतुष्टि को तय करता है। जो महिलाएँ एक मजबूत और भरोसेमंद रिश्ते में होती हैं, वे कैज़ुअल हुकअप्स के मुकाबले कहीं अधिक संतुष्टि का अनुभव करती हैं। 2024 के डेटा भी यही साबित करते हैं कि अगर वह आपके साथ भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस नहीं करती, तो आपकी बेहतरीन तकनीक भी उसे खोखली लगेगी। इसलिए, सबसे पहले दिल से दिल का कनेक्शन बनाएँ, शरीर खुद-ब-खुद जुड़ जाएगा॥ 2️⃣ फोरप्ले में जल्दबाज़ी न करें:- जल्दी शुरू और जल्दी खत्म वाला रवैया महिलाओं के लिए बहुत निराशाजनक होता है। महिलाओं के शरीर को उत्तेजित होने और वार्म-अप होने के लिए पुरुषों की तुलना में अधिक समय चाहिए होता है। किन्से इंस्टीट्यूट और हालिया सर्वे के अनुसार, फोरप्ले को प्राथमिकता देने से महिलाओं के चरम सुख तक पहुँचने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। कई महिलाओं को पूरी तरह से उत्तेजित होने के लिए कम से कम 15 से 20 मिनट या उससे ज्यादा के फोरप्ले की जरूरत होती है। जब आप जल्दबाजी करते हैं, तो वह हताश महसूस करती है, जिससे ऑर्गेज़्म गैप और बढ़ जाता है। इसके विपरीत, जब आप धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं, तो उसे लगता है कि आप उसकी परवाह करते हैं। और केवल अपने मतलब के लिए जल्दी में नहीं हैं॥ 3️⃣क्लिटोरल_स्टिम्यूलेशन पर पूरा ध्यान:- यह एक ऐसा वैज्ञानिक सच है जिसे अक्सर नजर अंदाज कर दिया जाता है। ज्यादातर महिलाएँ सिर्फ पेनिट्रेशन से संतुष्ट नहीं होती हैं। जर्नल ऑफ सेक्स एंड मैरिटल थेरेपी की एक स्टडी के अनुसार, 36% से अधिक महिलाओं को चरम सुख तक पहुँचने के लिए सीधे क्लिटोरल टच की जरूरत होती है। केवल 18% महिलाएँ ही ऐसी हैं। जो सिर्फ वैजाइनल पेनिट्रेशन से संतुष्ट हो पाती हैं। वहीं लगभग 75% का मानना है कि क्लिटोरल स्टिम्यूलेशन से उनका अनुभव कहीं ज्यादा बेहतर हो जाता है। 50,000 से अधिक लोगों पर किए गए सर्वे में.. यह सामने आया कि लेस्बियन महिलाएँ { 86% } इसलिए ज्यादा ऑर्गेज़्म का अनुभव करती हैं। क्योंकि उनका फोकस क्लिटोरिस पर अधिक होता है। सीधे शब्दों में कहें तो, क्लिटोरिस को अनदेखा करना उसकी खुशी को अनदेखा करने के बराबर है॥ 4️⃣ओरल_सेक्स का सही तरीका और उत्साह:- ओरल सेक्स महिलाओं की सबसे बड़ी चाहतों में से एक है, बशर्ते इसे सही तरीके से और पूरे उत्साह के साथ किया जाए। एक बड़े सर्वे में 90.9% महिलाओं ने स्वीकार किया है। कि उन्हें ओरल सेक्स का आनंद लेना बहुत पसंद है, और 78% ने कभी न कभी इसके जरिए ऑर्गेज़्म महसूस किया है। यहाँ सबसे जरूरी बात आपका उत्साह है। उसे यह महसूस होना चाहिए। कि आप इसे एक काम की तरह नहीं कर रहे हैं, बल्कि आप सच में इसे एन्जॉय कर रहे हैं। औसतन 20 मिनट की अवधि इसके लिए आदर्श मानी जाती है। उंगलियों और जीभ का सही तालमेल 92% महिलाओं को पसंद आता है॥ https://whatsapp.com/channel/0029VaBZzJyEgGfMIJkv4T1I 5️⃣खुलकर_बातचीत_करना:- बिस्तर पर खामोशी अक्सर केमिस्ट्री को खत्म कर देती है। आप क्या कर रहे हैं और वह कैसा महसूस कर रही है, इस पर खुलकर बात करना एक औसत अनुभव को शानदार बना सकता है। किन्से-समर्थित स्टडीज दिखाती हैं कि सेक्सुअलिटी पर खुलकर बात करना और अपनी पसंद-नापसंद साझा करना ज्यादा ऑर्गेज़्म रेट से जुड़ा है।

  • 14 февр.15,2 тыс1816

    फोरप्ले (Foreplay) की योजना मुख्य रति-क्रिया से पहले, कम से कम 10-15 मिनट उस दिन के विशेष अंग को समर्पित करें। #उदाहरण: यदि आज 'दशमी' है, तो रति रहस्य कहता है कि कामुकता 'गले' में है। आप गले को चूमने, सहलाने या हल्के दंत-प्रयोग पर ध्यान दें। आप देखेंगे कि साथी की प्रतिक्रिया सामान्य दिनों से अधिक तीव्र है। स्पर्श की कला रति रहस्य केवल छूने के लिए नहीं कहता, बल्कि भाव के साथ छूने को कहता है। शुक्ल पक्ष में (जब ऊर्जा ऊपर चढ़ रही हो) स्पर्श थोड़ा अधिक ऊर्जावान हो सकता है, जबकि कृष्ण पक्ष में (जब ऊर्जा नीचे उतर रही हो) स्पर्श अधिक कोमल और शांत होना चाहिए। #सावधानी #अमावस्या के दिन ऊर्जा सबसे निचले स्तर पर होती है। रति रहस्य और कामशास्त्र, दोनों ही इस दिन संभोग से बचने या बहुत संयमित रहने की सलाह देते हैं, ताकि शरीर की ऊर्जा संचित रहे। रति रहस्य और इसके चंद्रकला सिद्धांत का अध्ययन करने पर हम पाते हैं कि हमारे पूर्वज न केवल शरीर विज्ञान के ज्ञाता थे, बल्कि वे मानव मनोविज्ञान की भी गहरी समझ रखते थे। कोक्कोक का यह सिद्धांत हमें सिखाता है कि प्रेम और रति-क्रीड़ा कोई हड़बड़ी में किया जाने वाला कृत्य नहीं, बल्कि धैर्य और संवेदना का एक अनुष्ठान है। जब हम अपनी जीवनशैली और अंतरंगता को प्रकृति की लय के साथ जोड़ते हैं, तो रिश्ते में ऊर्जा का प्रवाह सहज और सुखद हो जाता है। इस प्राचीन ज्ञान को अंधविश्वास मानकर त्यागने के बजाय, इसे एक जीवन जीने की कला के रूप में अपनाना चाहिए। जब आप अपने साथी के शरीर और भावनाओं के इस चक्र को समझकर व्यवहार करते हैं, तो आपका रिश्ता केवल शारीरिक नहीं रह जाता, बल्कि वह आत्मिक गहराई और परम आनंद की ओर अग्रसर होता है। यही रति रहस्य का वास्तविक सार है। क्या आप अपनी दिनचर्या में तिथियों और चंद्रकलाओं पर ध्यान देते हैं? भारतीय ज्ञान परंपरा के इस अद्भुत विज्ञान को अपने जीवन में उतारें और बदलाव स्वयं महसूस करें। https://whatsapp.com/channel/0029VaBZzJyEgGfMIJkv4T1I

  • 14 февр.14,3 тыс2631

    *शरीर चंद्रमा और कामुकता;* चंद्रकला और कामुकता का अद्भुत विज्ञान! भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में, मानव शरीर को ब्रह्मांड का ही एक सूक्ष्म रूप माना गया है "यथा पिण्डे तथा ब्रह्माण्डे"(जो शरीर में है, वही ब्रह्मांड में है)। जिस प्रकार आकाश में स्थित चंद्रमा अपनी कलाओं से विशाल समुद्र में ज्वार-भाटा उत्पन्न करने की शक्ति रखता है, उसी प्रकार वह मानव शरीर के भीतर बहने वाले रसों और भावनाओं को भी गहराई से प्रभावित करता है। 11वीं शताब्दी रचित ग्रंथ रति रहस्य में पंडित कोक्कोक ने इस संबंध को और अधिक स्पष्टता से समझाया। इस ग्रंथ ने यौन संबंधों को केवल शारीरिक आवश्यकता से ऊपर उठाकर एक #मनोवैज्ञानिक_कला का दर्जा दिया। रति रहस्य का सबसे क्रांतिकारी सिद्धांत #चंद्रकला_सिद्धांत है, जो यह बताता है कि स्त्री की कामुकता स्थिर नहीं होती, बल्कि चंद्रमा की गति के साथ शरीर के विभिन्न अंगों में भ्रमण करती है। आधुनिक दौर में, जहाँ रिश्ते अक्सर तनाव और यांत्रिक जीवनशैली का शिकार हो रहे हैं, यह प्राचीन विज्ञान हमें अपने साथी को बेहतर समझने और दांपत्य जीवन में नवीनता लाने का एक अद्भुत मार्ग दिखाता है। इस लेख में, हम रति रहस्य के उसी दुर्लभ ज्ञान, चंद्रकला और मर्मस्थानों(erotic zone) के रहस्य को विस्तार से जानेंगे। #रति_रहस्य के अनुसार, कामदेव (कामुकता) का वास स्त्री के शरीर में एक जगह नहीं रहता। यह चंद्रमा की कलाओं (तिथियों) के अनुसार, शरीर के अंगों में ऊपर चढ़ता और नीचे उतरता है। इसे दो पक्षों में विभाजित किया गया है। #शुक्ल_पक्ष जब चाँद बढ़ता है (अमावस्या से पूर्णिमा तक), तो कामुकता पैरों से शुरू होकर सिर की ओर चढ़ती है। #कृष्ण_पक्ष जब चाँद घटता है (पूर्णिमा से अमावस्या तक), तो कामुकता सिर से शुरू होकर पैरों की ओर उतरती है। रति रहस्य में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि किस तिथि को कामुकता (कास-वास) किस अंग में होती है। इसे जानकर आप रति-क्रीड़ा को अधिक प्रभावी बना सकते हैं। #शुक्ल_पक्ष(बढ़ता चाँद नीचे से ऊपर) #प्रतिपदा पैर का अंगूठा शुरुआत यहाँ से होती है। #द्वितीया तलवे/पंजे मालिश या गुदगुदी से आनंद मिलता है। #तृतीया टखने (Ankles) यहाँ स्पर्श संवेदनशील होता है। #चतुर्थी घुटने (Knees) घुटनों के पीछे का हिस्सा। #पंचमी जांघें (Thighs) यह एक प्रमुख कामुक क्षेत्र है। #षष्ठी नाभि (Navel) यहाँ चुंबन या स्पर्श गहरा असर करता है। #सप्तमी कटि/कमर (Waist) आलिंगन का महत्व बढ़ जाता है। #अष्टमी वक्षस्थल/छाती स्पर्श और मर्दन के लिए उपयुक्त। #नवमी कक्षा/बगल (Armpits) यहाँ गुदगुदी या चुंबन उत्तेजक होता है। #दशमी कंठ/गला (Throat) गले पर चुंबन (Love bites) का दिन। #एकादशी गाल (Cheeks) कोमल स्पर्श और चुंबन। #द्वादशी होंठ (Lips) गहरा चुंबन (Deep Kissing)। #त्रयोदशी आँखें (Eyes) पलकों पर चुंबन। #चतुर्दशी ललाट/माथा (Forehead) माथे को चूमना और सहलाना। #पूर्णिमा सिर/केश (Head/Hair) इस दिन कामुकता पूरे शरीर में चरम पर होती है, जिसका केंद्र सिर होता है। बालों में उंगलियां फेरना बहुत सुखदायी होता है। #कृष्ण_पक्ष (घटता चाँद ऊपर से नीचे) कृष्ण पक्ष में यह क्रम उल्टा हो जाता है। पूर्णिमा के बाद पहले दिन (प्रतिपदा) कामुकता वापस सिर/बालों में होती है और अमावस्या तक धीरे-धीरे पैरों के अंगूठे में वापस चली जाती है। https://whatsapp.com/channel/0029VaBZzJyEgGfMIJkv4T1I *चंद्रकला के विज्ञान का महत्व* रति रहस्य का यह ज्ञान केवल शारीरिक सुख के लिए नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक जुड़ाव के लिए भी महत्वपूर्ण है। ▪️आधुनिक समय में रति-क्रिया अक्सर केवल जननांगों (Genitals) तक सीमित रह जाती है। चंद्रकला का सिद्धांत सिखाता है कि पूरा शरीर कामुक है। यह दृष्टिकोण साथी को यह महसूस कराता है कि आप उनके पूरे अस्तित्व को प्रेम करते हैं। ▪️यदि आप रोज एक ही तरह का व्यवहार करेंगे, तो संबंध नीरस हो जाएगा। चंद्रकला आपको हर दिन एक नया फोकस पॉइंट देती है। एक दिन पैरों की मालिश, तो दूसरे दिन गले पर ध्यान; यह विविधता (Variety) बनाए रखता है।▪️यदि आप सही तिथि पर सही अंग को स्पर्श करते हैं, तो साथी बहुत कम समय में उत्तेजित हो जाता है और पूर्ण संतुष्टि प्राप्त करता है। #व्यावहारिक_प्रयोग इस प्राचीन ज्ञान को आज के जीवन में लागू करने के लिए आप निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं; ▪️तिथि की जानकारी रखें आपको ज्योतिषी बनने की जरूरत नहीं है। आजकल मोबाइल एप्स या कैलेंडर में आसानी से पता चल जाता है कि आज कौन सी तिथि (शुक्ल पक्ष की पंचमी है या कृष्ण पक्ष की दशमी) है।