UPP PET with CCP 🚨
Статистикаयह चैनल पूरी तरह से UPSI की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स के लिए समर्पित है।
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Notice उत्तर प्रदेश होमगार्ड के पदों पर एनरोलमेंट-2025 शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) की प्रक्रिया
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भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties) नागरिकों के नैतिक और नागरिक उत्तरदायित्वों को रेखांकित करते हैं। यह प्रतियोगी परीक्षा (UPSSSC PET) के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। 11 मौलिक कर्तव्यों का विवरण...! 🔥 1. संवैधानिक विवरण ✔️…
भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties) नागरिकों के नैतिक और नागरिक उत्तरदायित्वों को रेखांकित करते हैं। यह प्रतियोगी परीक्षा (UPSSSC PET) के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। 11 मौलिक कर्तव्यों का विवरण...! 🔥 1. संवैधानिक विवरण ✔️ संविधान का भाग भाग IV-A, अनुच्छेद अनुच्छेद 51A, प्रेरणा पूर्व सोवियत संघ (USSR) का संविधान सिफारिशकर्ता समिति - सरदार स्वर्ण सिंह समिति (1976) संवैधानिक संशोधन - 42वां संशोधन (1976) एवं 86वां संशोधन (2002) कुल संख्या 11 (प्रारंभ में 10 थे) प्रकृति (Nature) गैर -** न्यायसंगत, केवल भारतीय नागरिकों पर लागू **2. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विकास मूल संविधान (26 जनवरी 1950)** ✔️ मूल संविधान में केवल मौलिक अधिकारों और नीति निदेशक तत्वों का समावेश था; मौलिक कर्तव्यों का कोई उल्लेख नहीं था। 42वां संविधान संशोधन अधिनियम 1976 सरदार स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर संविधान में भाग IV-A और अनुच्छेद 51A जोड़कर 10 मौलिक कर्तव्य शामिल किए गए। (नोट: स्वर्ण सिंह समिति ने 8 कर्तव्यों की सिफारिश की थी तथा कर भुगतान को भी कर्तव्य बनाने का सुझाव दिया था, जिसे अस्वीकार कर दिया गया)। जस्टिस वर्मा समिति का गठन 1999 मौलिक कर्तव्यों के प्रभावी क्रियान्वयन और उनसे संबंधित कानूनी प्रावधानों की पहचान के लिए वर्मा समिति का गठन किया गया। 86वां संविधान संशोधन अधिनियम 2002 अनुच्छेद 51A(k) के तहत 11वां मौलिक कर्तव्य जोड़ा गया, जो 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए शिक्षा का अवसर प्रदान करने से संबंधित है। 3. 11 मौलिक कर्तव्यों की विस्तृत सूची (अनुच्छेद 51A) ✔️ भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह - (a) संविधान का पालन: संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे। (b) राष्ट्रीय आंदोलन के आदर्श: स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखे और उनका पालन करे। (c) संप्रभुता व अखंडता: भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे और उसे अक्षुण्ण रखे। (d) देश की रक्षा: देश की रक्षा करे और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करे। (e) भ्रातृत्व एवं महिला सम्मान: भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करे जो धर्म, भाषा, प्रदेश या वर्ग आधारित सभी भेदभावों से परे हो, तथा स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध प्रथाओं का त्याग करे। (f) सामासिक संस्कृति: हमारी सामासिक संस्कृति (Composite Culture) की समृद्ध विरासत का महत्व समझे और उसका परिरक्षण करे। (g) पर्यावरण संरक्षण: प्राकृतिक पर्यावरण की (जिसके अंतर्गत वन, झील, नदी और वन्यजीव शामिल हैं) रक्षा करे, उसका संवर्धन करे तथा प्राणिमात्र के प्रति दयाभाव रखे। (h) वैज्ञानिक दृष्टिकोण: वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करे। (i) सार्वजनिक संपत्ति: सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखे और हिंसा से दूर रहे। (j) व्यक्तिगत व सामूहिक उत्कर्ष: व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करे जिससे राष्ट्र निरंतर उपलब्धि की नई ऊंचाइयों को छू सके। (k) प्राथमिक शिक्षा का अवसर (2002 में जोड़ा गया): 6 से 14 वर्ष तक की आयु के अपने बच्चे या प्रतिपाल्य (Ward) को शिक्षा के अवसर प्रदान करे (माता-पिता/संरक्षक का कर्तव्य)। 4. प्रमुख विशेषताएं एवं कानूनी स्थिति ✔️ केवल नागरिकों के लिए: मौलिक अधिकार विदेशी नागरिकों को भी प्राप्त हो सकते हैं, परंतु मौलिक कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों पर लागू होते हैं। गैर-न्यायसंगत (Non-justiciable): यदि कोई नागरिक अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करता है, तो उसे सीधे अदालत द्वारा सजा नहीं दी जा सकती (जब तक कि संसद ने उस विषय पर विशेष कानून न बनाया हो)। कानूनी प्रवर्तन (Legal Enforcement): यद्यपि ये स्वतः लागू नहीं होते, लेकिन संसद को कानून बनाकर इन्हें लागू करने की पूर्ण शक्ति है। वर्मा समिति (1999) द्वारा रेखांकित प्रमुख कानून: राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971: राष्ट्रध्वज, संविधान व राष्ट्रगान के अपमान पर दंड का प्रावधान। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951: धर्म या जाति के आधार पर वोट मांगने वाले जनप्रतिनिधियों को अयोग्य घोषित करने का प्रावधान। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: दुर्लभ व संकटग्रस्त जीवों के व्यापार व शिकार पर रोक। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986: पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने पर दंडात्मक कार्रवाई। 5. आलोचनाएं एवं सीमाएं ✔️ महत्वपूर्ण कर्तव्यों का अभाव: कर भुगतान (Tax payment), मतदान (Voting) और परिवार नियोजन जैसे विषयों को इसमें शामिल नहीं किया गया।
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अगला टॉपिक मौलिक अधिकार से जुड़ा हुआ रहेगा।
इस नोट्स को अच्छे से पढ़ जाइए। सीधे सीधे इससे प्रश्न आते हैं, इस नोट्स से...!
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भारतीय संविधान दुनिया का सबसे विशाल और अनूठा लिखित संविधान है। इसे तैयार करने में संविधान सभा को 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा। यह दस्तावेज केवल देश चलाने की नियमावली नहीं है, बल्कि भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधताओं का संतुलन है। भारतीय…
भारतीय संविधान दुनिया का सबसे विशाल और अनूठा लिखित संविधान है। इसे तैयार करने में संविधान सभा को 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा। यह दस्तावेज केवल देश चलाने की नियमावली नहीं है, बल्कि भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधताओं का संतुलन है। भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं ✔️ 1. सबसे बड़ा और लिखित संविधान 📈 मूल संविधान में 395 अनुच्छेद, 8 अनुसूचियां और 22 भाग थे। वर्तमान में संशोधनों के बाद इसमें लगभग 470 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां और 25 भाग शामिल हैं। भारत का वृहद आकार, विविधता और केंद्र व राज्यों के लिए एक ही संविधान होना इसके विशाल होने का मुख्य कारण है। 2. कठोरता और लचीलेपन का अनूठा मिश्रण ✔️ भारतीय संविधान न तो पूरी तरह कठोर (ब्रिटेन की तरह सरल) है और न ही अत्यधिक कठोर (अमेरिका की तरह) लचीला हिस्सा: संविधान के कई प्रावधान साधारण बहुमत से बदले जा सकते हैं। कठोर हिस्सा: अनुच्छेद 368 के तहत कुछ बदलावों के लिए संसद के विशेष बहुमत (2/3) के साथ-साथ आधे से अधिक राज्यों की सहमति की आवश्यकता होती है। 3. विभिन्न स्रोतों का समावेश (आंतरिक एवं बाह्य) ✔️ संविधान सभा ने दुनिया भर के बेहतरीन संविधानों के श्रेष्ठ तत्वों को अपनाकर भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल ढाला: भारत सरकार अधिनियम 1935: ढांचागत संरचना (लगभग 250 प्रावधान)। ब्रिटेन: संसदीय शासन प्रणाली, एकल नागरिकता और विधि का शासन। अमेरिका: मौलिक अधिकार और न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review)। आयरलैंड: राज्य के नीति निर्देशक तत्व (DPSP)। 4. एकात्मक पूर्वाग्रह के साथ संघीय व्यवस्था ✔️ संविधान में भारत को "राज्यों का संघ" (Union of States) कहा गया है। संघीय लक्षण: केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन (तीन सूचियां: संघ, राज्य, समवर्ती) और स्वतंत्र न्यायपालिका। एकात्मक लक्षण: मजबूत केंद्र, एकीकृत न्यायपालिका, एकल नागरिकता और आपातकालीन प्रावधान। 5. संसदीय शासन प्रणाली ✔️ अमेरिका की राष्ट्रपति प्रणाली के बजाय भारत ने ब्रिटेन का वेस्टमिंस्टर मॉडल (संसदीय प्रणाली) अपनाया। इसमें कार्यपालिका (मंत्रिपरिषद) अपनी नीतियों और कार्यों के लिए विधायिका (संसद/लोकसभा) के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। 6. स्वतंत्र और एकीकृत न्यायपालिका ✔️ भारत में न्यायपालिका का ढांचा एकीकृत है, जिसमें सबसे ऊपर सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court), फिर उच्च न्यायालय (High Court) और निचले स्तर पर अधीनस्थ अदालतें आती हैं। न्यायपालिका को कार्यपालिका से स्वतंत्र रखा गया है ताकि वह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा कर सके। 7. मौलिक अधिकार, कर्तव्य और नीति निर्देशक तत्व ✔️ भाग 3 मौलिक अधिकार (Art. 12-35) नागरिकों को 6 मौलिक अधिकार प्राप्त हैं। ये अदालतों द्वारा प्रवर्तनीय (Enforceable) हैं। भाग 4 नीति निर्देशक तत्व (Art. 36-51) सरकार को लोक कल्याणकारी राज्य बनाने के लिए दिए गए निर्देश। भाग 4A मौलिक कर्तव्य (Art. 51A) 42वें संशोधन (1976) द्वारा नागरिकों के लिए 11 मूल कर्तव्य जोड़े गए। 8. धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी स्वरूप ✔️ 42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा प्रस्तावना में 'धर्मनिरपेक्ष' (Secular) और 'समाजवादी' (Socialist) शब्द जोड़े गए। राज्य का अपना कोई आधिकारिक धर्म नहीं है; यह सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार करता है। 9. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार ✔️ भारत का प्रत्येक नागरिक जो 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का है, बिना किसी जाति, धर्म, लिंग या संपत्ति के भेदभाव के मतदान करने का अधिकार रखता है। 10. एकल नागरिकता (Single Citizenship) ✔️ अमेरिका जैसे देशों के विपरीत, जहाँ दोहरी नागरिकता (देश और राज्य की अलग) होती है, भारत में केवल एक ही नागरिकता प्राप्त है - "भारतीय"। यह राष्ट्र की एकता और अखंडता को मजबूत करती है। 11. त्रिस्तरीय सरकार की व्यवस्था ✔️ 73वें और 74वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा विश्व में पहली बार स्थानीय स्तर पर शासन प्रणाली को संवैधानिक दर्जा दिया गया: केंद्र सरकार राज्य सरकार स्थानीय स्वशासन (पंचायती राज और नगरपालिका) संक्षेप में: भारतीय संविधान का मूल ढांचा लोकतंत्र, समानता, स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्षता के स्तंभों पर आधारित है, जो इसे गतिशील और जीवंत दस्तावेज (Living Document) बनाता है। ज्वॉइन करें 🔜 https://t.me/CAREERCOACHINGPONT
आज इस विषय जो कवर किया जाएगा। काफी विस्तृत रूप से...! 🔥
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