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UPSC Exam tips & motivational dose

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  • ✅ कुछ ऐसा काम करो कि आपके माता–पिता अपनी प्रार्थना में कहें.. हे प्रभु, हमें हर जन्म में ऐसी ही संतान देना।

  • 12 авг.1 132544

    🇮🇳🇮🇳

  • 9 авг.1 9565125

    ✨✨

  • 7 авг.2 2565520

    असली खुशी यहीं मिलती है - परिवार - व्यायाम - स्वतंत्रता - अच्छा आहार - एक उद्देश्य होना - लगातार सीखना - खुद को चुनौती देना - अपने जुनून का पालन करें - अपने अजीब शौक को अपनाना - स्तर बढ़ाना और आत्म-सुधार करना - दोस्तों और लोगों का एक अच्छा नेटवर्क

  • 3 авг.2 9716616

    अभी ज़िन्दगी में थक्के हैं तो क्या हुआ, तू बस अपने इरादे पक्के रख। लक्ष्य जिनके ऊँचे और मस्त होते हैं इम्तिहान भी उनके ज़बरदस्त होते हैं।🚨⛲️

  • 1 авг.3 0216523

    मैं वो लड़की हूँ जो हार मानना नहीं जानती थक जाती हूँ... लेकिन रुकती नहीं रो लेती हूँ... लेकिन झुकती नहीं क्योंकि मुझे पता है एक दिन मेरी मेहनत मेरे माँ–पापा का सपना और मेरा आत्मसम्मान सबका सिर ऊंचा करेगा... मैं आज पढ़ रही हूँ ताकि कल सिर्फ मेरी नहीं मेरे सपनों की भी जीत हो सके...❤️

  • 29 июл.3 561449

    📚 "तपस्या, त्याग और धैर्य का महापर्व: गुरु पूर्णिमा" 🎯 UPSC केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि एक कठिन साधना है। इस यात्रा में हमारे सच्चे गुरु हमारे माता-पिता, शिक्षक, हमारा सिलेबस, और हमारी हर वो असफलता है जिसने हमें एक नया सबक सिखाया। इस गुरु पूर्णिमा पर खुद से एक वादा करें: • सिलेबस को अपना सबसे बड़ा मार्गदर्शक (Guide) बनाएं। • हर असफलता को एक सीख (Lesson) मानकर आगे बढ़ें। • धैर्य और निरंतरता (Consistency) को अपना गुरु मंत्र बनाएं। जब तक लबासना (LBSNAA) का रास्ता तय नहीं हो जाता, तब तक रुकना नहीं है। खुद पर और अपनी मेहनत पर भरोसा रखिए। आप सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं! Let's Crack It! ✍️💼🏆

  • 28 июл.3 222387

    "क्षमा करने से बीता हुआ कल तो नहीं बदलता, लेकिन आने वाला कल सुरक्षित और सुंदर हो जाता है।" "गलती करना मनुष्य का स्वभाव है, लेकिन उस गलती को क्षमा कर देना ईश्वरीय गुण है।"

  • 28 июл.3 2865320

    हर दिन सुबह उठकर, कहीं जाना हो या ना जाना हो, पर सुबह-सुबह अच्छे से तैयार हो जाने के के पीछे भी एक सकारात्मक मानसिकता काम करती है, जो आपको ये सोचने पर मजबूर करती है की आज क्या-क्या काम हैं जो किए जा सकते हैं। ये आदत ना सिर्फ़ आपका आत्मविश्वास बढ़ाती है बल्कि आपके भविष्य की दिशा भी निर्धारित करती है। तो अगर जीवन में बड़े बदलाव नहीं हो रहे हैं, तो ज़रा ये छोटे-छोटे बदलाव करके देखिए। 🥰

  • 27 июл.2 59011

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  • 27 июл.2 4895215

    . सुनो स्त्री... तुम न आना किसी भी तरह के बहकावे में, ये दुनियां तुम्हें छल के सिवा कुछ भी नहीं देगी...!

  • 26 июл.2 6004511

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  • 25 июл.3 0576612

    ..

  • 24 июл.2 832389

    अधिक IQ वाले लोग औसतन सामाजिक रूप से अधिक उदार (Social liberal) विचार रखते थे.. ✨💯

  • 23 июл.2 8493316

    आधी जिंदगी तो लोग दूसरों की जिंदगी में झांकने में गुजार देते हैं, और आधी अपनी जिंदगी और किस्मत को लेकर रोने में, एक अच्छा विकल्प और है... अपनी जिंदगी में ध्यान दो, खुद का विस्तार करो, जो है जितना है उतने का संतोष रखो और आगे उन्नत होने का प्रयास करो..!

  • 21 июл.3 068234

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  • 19 июл.3 6097530

    एक दिन... तुम्हारा selection हो जाएगा। लोग तुम्हारा optional पूछेंगे, strategy पूछेंगे, booklist पूछेंगे। लेकिन कोई ये नहीं पूछेगा - उस एक साल में, तुमने कितनी बार हार मानने का फैसला बदल दिया था। और शायद... तुम्हारी असली strategy वही थी।" ✨

  • 18 июл.3 4802910

    ✅अतीत के पूर्वाग्रहों से परे: वर्तमान भारत की ज़मीनी हकीकत और जागरूक नागरिक का कर्तव्य आज हमारे देश का राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहाँ निष्पक्ष वैचारिक मंथन की अत्यधिक आवश्यकता है। अक्सर समाज में यह प्रवृत्ति देखी जा रही है कि लोग वर्तमान सरकार की नीतियों और फैसलों का आँख बंद करके समर्थन कर रहे हैं। इस अंधसमर्थन के पीछे का सबसे बड़ा तर्क यह दिया जाता है कि अतीत की सरकारें या कांग्रेस नीत शासन व्यवस्था पूरी तरह विफल और भ्रष्ट थी। यह सच हो सकता है कि पुरानी व्यवस्थाओं में कमियां थीं और इसी जन-आक्रोश के कारण देश की जनता ने एक बड़े राजनीतिक बदलाव को चुना। परंतु, लोकतंत्र का यह कतई नियम नहीं है कि हम अतीत की बुराइयों के डर से वर्तमान की गंभीर गलतियों और नाकामियों पर मौन धारण कर लें। एक जीवंत लोकतंत्र में किसी भी नागरिक को 'अतीत के बंधक' बनकर नहीं जीना चाहिए, बल्कि उसे वर्तमान की परिस्थितियों के आधार पर सरकार की जवाबदेही तय करनी चाहिए। यदि हम बिना किसी राजनीतिक चश्मे के आज के भारत का वस्तुनिष्ठ विश्लेषण करें, तो हमें सिक्के के दो पहलू स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। एक तरफ सरकार के विकासात्मक दावों की एक लंबी सूची है, जिसमें आधुनिक बुनियादी ढांचा (Infrastructure), हाईवे का जाल, डिजिटल क्रांति और वैश्विक मंच पर देश की मजबूत छवि शामिल है। इन प्रयासों की सराहना निश्चित रूप से होनी चाहिए। लेकिन दूसरी तरफ, सिक्का पलटते ही एक बेहद चिंताजनक और डरावनी तस्वीर भी सामने आती है। आज देश के भीतर भ्रष्टाचार के नए और संस्थागत रूप देखने को मिल रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर से लेकर राज्यों तक सरकारी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाएं आम हो चुकी हैं, जिसने देश के करोड़ों होनहार युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है। इसके साथ ही, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते जघन्य अपराध, बलात्कार और समाज के कमजोर वर्गों पर हो रहे अन्याय व अत्याचार की घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि कानून व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर गंभीर खामियां हैं। इस सामाजिक संकट के साथ-साथ देश की आर्थिक नीतियां भी आम जनता की कमर तोड़ रही हैं। आज भारत का युवा डिग्री हाथ में लेकर दर-दर भटकने को मजबूर है, क्योंकि रोजगार के नए अवसर पैदा होने के बजाय लगातार कम हो रहे हैं। बेरोजगारी का आंकड़ा ऐतिहासिक रूप से उच्च स्तर पर पहुंच चुका है। इसके ऊपर से बेकाबू होती महंगाई ने गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों का जीना मुहाल कर दिया है। रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल और राशन से लेकर बुनियादी आवश्यकताओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। आर्थिक विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच आम आदमी की जेब लगातार खाली होती जा रही है, जो सरकार की आर्थिक नीतियों की विफलता को साफ दर्शाता है। ऐसी स्थिति में, प्रत्येक नागरिक को खुद से यह सवाल पूछना होगा कि क्या केवल चमचमाती सड़कों और डिजिटल प्रगति से एक स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है, जहाँ देश का युवा और महिलाएं खुद को असुरक्षित, बेरोजगार और ठगा हुआ महसूस करें? कोई भी सरकार हो—चाहे वह भाजपा की हो या किसी अन्य दल की—सत्ता में आने के बाद यदि उसकी नीतियां आम जनता के लिए कष्टकारी साबित हो रही हैं, तो उसके खिलाफ आवाज उठाना किसी भी प्रकार का देशद्रोह या विरोध नहीं, बल्कि परम नागरिक कर्तव्य है। लोकतंत्र की आत्मा सरकारों से सवाल पूछने में बसती है, उनका अंधानुकरण करने में नहीं। जब जनता अपनी चुनी हुई सरकार की कमियों पर पर्दा डालने लगती है, तो सत्ता निरंकुश होने लगती है। अतः आज समय की मांग है कि हम राजनीतिक दलों के प्रति अपनी व्यक्तिगत निष्ठाओं से ऊपर उठें। विकास के आंकड़ों और विज्ञापनों की तुलना ज़मीनी स्तर पर हो रहे अपराध, पेपर लीक, रिकॉर्ड तोड़ बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार की कड़वी हकीकत से करें। सरकारें और राजनीतिक दल आते-जाते रहेंगे, लेकिन यह देश, इसका सामाजिक ताना-बाना और हमारे युवाओं का भविष्य हमेशा रहेगा। यदि हम आज सही को सही और गलत को गलत कहने का साहस नहीं जुटा पाए, तो हम आने वाली पीढ़ियों को एक कमजोर और दिशाहीन भारत सौंपेंगे। आइए, पूर्वाग्रहों को छोड़कर देशहित में जागरूक बनें और वर्तमान परिस्थितियों पर गहराई से विचार करें। इस गंभीर विषय पर चर्चा की शुरुआत के लिए, हमें खुद से और अपने आसपास के लोगों से कुछ सीधे सवाल पूछने होंगे: 1. क्या पूर्ववर्ती सरकारों की नाकामियां आज की सरकार को हर मोर्चे पर क्लीन चिट देने का बहाना बन सकती हैं? 2. यदि पेपर लीक से युवाओं का भविष्य और अपराध से महिलाओं की सुरक्षा खतरे में है, तो हम विकास की किस परिभाषा पर जश्न मना रहे हैं? 3. महंगाई और बेरोजगारी के इस दौर में क्या एक आम नागरिक के अधिकार और उसकी आवाज को दबाया नहीं जा रहा है? 4. एक सच्चे देशभक्त का कर्तव्य सरकार के हर फैसले पर ताली बजाना है या उसकी गलतियों पर सवाल उठाना?

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