आदिशक्ति पीठम् - Adishakti peetham
Статистикаतंत्र मंत्र यंत्र साधना संबंधी अनेक विषय यहां रखे जाते हैं, जिनके माध्यम से व्यक्ति अपना कल्याण करें अपने भौतिक व आध्यात्मिक जीवन में उन्नति कर ईष्ट कृपा प्राप्त करें। Owner - @devyansh108
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इस प्रकार से सभी महादेव के निम्मित त्रिशूलाकृति, वृत्ताकार अथवा अर्धचंद्राकार त्रयोदश दीपदान किया करें। (साधकों द्वारा श्रावणी अमावस्या पर सुंदर दीपदान)
भवानी भवानी भवानी त्रिवारम्- उदारम् मुदा सर्वदा ये जपन्ति । न शोकम् न मोहम् न पापं न भीतिः कदाचित्कथंचित्कुतश्चज्जनानाम् ।। जो कोई भी खुशी से 'भवानी' नाम को तीन बार दोहराता है, उसे कोई दुख नहीं होगा, कोई भ्रम नहीं होगा, कोई पाप नहीं होगा, कभी भी या वैसे भी या किसी भी हिस्से से कोई डर नहीं होगा
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श्री विंध्यवासिनी जगद्धात्री महादुर्गा🙏
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आदिशक्ति पीठम् - Adishakti peetham pinned «आज 06:30 पर वीसी की जाएगी। सभी अवश्य जुड़ें।»
आज 06:30 पर वीसी की जाएगी। सभी अवश्य जुड़ें।
मां आदिशक्ति भुवनेश्वरी 🙏❤️
त्र्यक्षरी महामंत्र🙏
वीर जी का आवाहन कर उन सभी शक्तियों को विपरीत प्रक्षेपित कर दिया गया उसी तांत्रिक पर। अब अगर खाली उन्हीं शक्तियों को विपरीत चालित किया जाता जो विरोधी पक्ष के तांत्रिक द्वारा प्रक्षेपित की गई थी तो संभवतः उसके पास उसकी काट होती, पर यहां लां... वीर जी को आगे कर उन्हें पलटा गया तो न उससे रोकथाम हुई न ही स्वयं का रक्षण। इधर साधक मित्र ने पुनः आवाहित शक्तियों को बलि देकर संतुष्ट कर विसर्जन किया तथा घर से निकारी कर बंधन लगा दिया गया। घर के सभी सदस्यों को अभिमंत्रित रुद्राक्ष धारण करवाए गए जिससे उनके शरीर पर पुनः किसी नकारात्मक शक्ति का प्रभाव न पड़ें । सारा समाचार प्राप्त कर हम भी झोला उठाकर कर निकल पड़े स्वस्थान हेतु। पता चला तांत्रिक महोदय को पैरिलेसिस का अटैक पड़ा और अब हॉस्पिटल में हैं जहां अब हाथ ओर जिह्वा हिलना ही बंद हो गया है। जिन व्यक्ति ने ईर्ष्या वश अभिचार करवाया था उनकी सच्चाई जानकर उनसे अधिकतर सभी लोगों ने मेल जोल बंद कर दिया। आज अभिचार ग्रसित वह परिवार पूरी तरह से ठीक है, तीनों बालक स्वस्थ होकर ...यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई कर रहे हैं, सभी ने अपने कुलदेवी कुलदेवता की उपासना आरंभ कर दी और धार्मिक कार्यों में अत्यधिक संलग्न हो गये। यह बात पिछले वर्ष की है। आज गुरुभाई से भेंट हुई तो यह घटना स्मरण हो आई। सभी को एक बात का अवश्य ध्यान रखना चाहिए आपके साथ अत्याचार हुआ हो, आपसे अधिक शक्तिशाली व्यक्ति ने आपके साथ भले ही बुरा किया हो पर फिर भी प्रतिशोध की भावना में कभी भी तंत्र का इस प्रकार से सहारा नहीं लेना चाहिए। हां आप अपने इष्ट की उपासना कीजिए साधना कीजिए उनसे न्याय की गुहार लगाएं, पर अभिचार आदि करना करवाना आज नहीं तो कल आपके जीवन को अंधकार में ही धकेलेगा। ।।नमश्चण्डिकायै।।
ईर्ष्या एक ऐसा विकार है जो अच्छे भले व्यक्ति को राक्षस बना देता है और इस ईर्ष्या का परिणाम अंत में सदैव भयानक ही होता है। एक स्वभाव के अति उत्तम व्यक्ति हैं, कोई विशेष दुर्गुण नहीं परन्तु केवल ईर्ष्या का बीज जब हृदय में पनप कर वृक्ष बना तो वही सज्जन व्यक्ति दैत्य बन गया। अपने पड़ोसी से किसी बात को लेकर गलत फहमी हो गई। बेचारे पड़ोसी का कोई दोष था भी नहीं पर इन्होंने जैसा देखा उसी को सच मान लिया। अब सामने वाला धन बल से संपन्न था इसलिए प्रत्यक्ष रूप से तो कोई प्रहार कर नहीं सकते थे, ऐसे में इन्होंने सहारा लिया तंत्र का और अपने एक मित्र तांत्रिक से इनपर प्रबल अभिचार करवाया। अभिचार इस स्तर का था कि घर में अचानक उठा पटक चालू, बर्तन गिरना, बस्तर से सोते हुए व्यक्ति को पलट देना, बालकों को घर में अजीब छवियाँ व परछाइयाँ दिखाई देना। इसके अगले स्तर में जब अभिचार बढ़ा तो घर के बालक बीमार और इसे होने में अधिक समय नहीं लगा। इसका कारण कदाचित यह भी था कि जिन व्यक्ति पर अभिचार हुआ वह कोई पूजा पाठ करते नहीं थे किसी बाबा को मानते थे। अब जब अभिचार सर पड़ा तो कोई बाबा सहायता हेतु नहीं आया। जब नास्तिक व्यक्ति भी अचानक से और प्रत्यक्ष ऐसी भयावह स्थिति देख ले तो इन चीजों पर विश्वास करना ही पड़ता है तथा इनसे मुक्ति पाने हेतु जहां तक बन सके व्यक्ति करता है। अब इन्होंने खोजना शुरू किया तांत्रिकों को कुछ को घर पर भी बुलाया गया अच्छा धन व्यय करके उन तांत्रिकों द्वारा तंत्र काट भी करवाई पर अधिक से अधिक ४ याम तक आराम रहता। इसके बाद पुनः वह प्रक्षेपित शक्तियां घर पर आतंक मचाने लगती। घर में दो बालक और एक पुत्री थी। दोनों पुत्र .... यूनिवर्सिटी के पढ़ाई कर रहे थे और बालिका कॉलेज के अंतिम वर्ष में थी और तीनों पढ़ाई में बहुत अच्छे। पर अभिचार से उत्पन्न बीमारी से पढ़ाई इत्यादि छूट गई। अनेक प्रयास किए गए अभिचार को काटने हेतु पर आराम नहीं मिला। अब बात पहुंची हमारे एक गुरु भाई तक जो शैव परम्परा के एक अच्छे साधक हैं। उनसे इस अभिचार से निपटने हेतु प्रार्थना की गई तो उन्होंने सहायता करने का निर्णय लिया। साधक महोदय ने अभिचार ग्रसित घर में जाने से पूर्व अपनी शक्तियों के माध्यम से शोधन का प्रयास किया, जिसमें अनेक चौकियां सामने आई। उनमें श्मशान संबंधी अनेक शक्तियां चलाई गई थी वह भी ....की बलि देकर और सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई उन्हीं सज्जन व्यक्ति की पत्नी ने जो कि जिनपर अभिचार हुआ था उनकी पत्नी की अच्छी मित्र और रिश्तेदार भी थीं। इन्होंने अपने पति के प्रभाव में आकर श्मशान से जगाई हड्डी का चुरा, चिता भस्म, उड़द ओर कुछ अन्य सामग्रियां आदि लाकर उनके घर की चौखट, रसोई और घर के अनेक स्थानों में बड़ी चालाकी से डाल दी। वहीं से खेल आरंभ हुआ.... अब साधक मित्र के समक्ष जितना तंत्र खेल पारदर्शी था, उस अनुसार उन्होंने योजना बनाई और हमसे तथा एक और गुरु भाई से इस विषय में चर्चा की। निर्धारित हुआ साधक मित्र घर में जाकर जो विषय करना है वह करेंगे तथा हम और अन्य गुरु भाई रक्षण व अतिरिक्त प्रक्षेपण का विषय पीछे से देखेंगे। दो दिन में सब विषय करने का निर्णय लिया गया। साधक मित्र पहुंचे उनके घर और हम और हमारे गुरु भाई भगवती ज्वाला के दर्शन हेतु जाने का कहकर घर से निकल गए एक विशेष स्थान हेतु। इधर हम निर्धारित स्थान पर पहुंच कर स्थान को बढ़ाकर मंडल आदि निर्मित करके बैठें उधर साधक मित्र उनके घर के समीप पहुंचे। अपने स्थान से अपनी शक्तियों को धार देकर तथा क्षेत्रपाल भैरव जी को बलि निवेदित कर सारा बाहरी विधान पहले से संपन्न कर लिया गया था। साधक महोदय के घर में करने से पूर्व ही अभिचार में चली कुछ शक्तियां तुरंत वहां से निकल कर अपने स्वामी को समाचार देने भाग गई। इधर मित्र चौखट के कुछ विषय करके घर के एक कमरे में बैठें सभी सदस्यों को बुलाकर सामने बैठा दिया। साधक ने जैसे ही मंडल निर्माण करना आरम्भ किया उधर से तांत्रिक महोदय ने अलग से मसानिक शक्तियों को भेजना आरम्भ किया। इसका पता चलते ही जालंधर पीठ के एक स्थान पर बैठे हम और हमारे मित्र ने अपना कार्य करना आरम्भ किया। बाहरी किसी भी शक्ति को घर के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया और साधक मित्र ने मंडल आदि निर्माण कर अपनी सिद्ध की हुई भगवती महामनसा की उग्र योगिनी का आवाहन किया, आवाहन कर उन्हें अर्घ्य दिया गया। उनके आवाहन के साथ ही प्रक्षेपित अभिचारिक शक्तियां दोनों बालकों और कन्या पर आवेशित हो गई। अब सामने जिन शक्ति का आवाहन हुआ है उनके समक्ष तो किसी की चलने वाली नहीं तो सब उगल दिया किसने भेजा है क्यों भेजा है। अब समय था अंतिम चोट का, भगवती मनसा की अत्योग्र शक्ति द्वारा घर पर उपस्थित सभी नकारात्मक शक्तियों का बंधन किया गया और लाँ....
जिन्होंने भी श्री सौम्य काली अप्सरा साधना हेतु दक्षिणा शुल्क प्रदान किया है और उन्हें सामग्री भेज दी गई है वह सभी संपर्क करें। उन्हें विधान भेज दिया जाएगा - @devyansh108
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आदिशक्ति पीठम् - Adishakti peetham pinned «कुछ देर में वीसी करेंगे। सभी अवश्य जुड़ें।»
कुछ देर में वीसी करेंगे। सभी अवश्य जुड़ें।