Agri Coaching Chandigarh
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📅 14 अगस्त ⏰ सुबह 11 बजे 📱 Twitter (X) #PashudhanPrasarAdhikariyougyta
https://youtube.com/shorts/9Yho7oYYbXE?si=G_lmubzhO6bQiWFo
https://youtube.com/shorts/eTEVlKwcrW8?si=2UjxCDKM2RW_U8S2
https://youtube.com/live/vn7huePQFzQ?feature=share Session is live now
https://youtube.com/live/vn7huePQFzQ?feature=share Session will be live at 2:30 PM.
सभी विद्यार्थियों से विनम्र अपील 🙏 देशभर के सभी Agriculture Students से अनुरोध है कि 14 अगस्त को सुबह 11 बजे Twitter (X) पर आयोजित अभियान में अधिक से अधिक संख्या में जुड़ें और Agri Community की आवाज़ को मजबूत करें। आइए, एकजुट होकर पशुधन प्रसार अधिकारी पद की शैक्षणिक योग्यता में B.Sc. Agriculture एवं संबंधित Allied Science विषयों को शामिल करने की मांग का समर्थन करें। आपका एक Tweet इस अभियान को मजबूत आवाज़ दे सकता है। 📅 14 अगस्त ⏰ सुबह 11 बजे 📱 Twitter (X) आइए, साथ आएँ और Agri Community की आवाज़ बुलंद करें। #PashudhanPrasarAdhikariyougyta
https://youtube.com/shorts/J_-0-zu705I?si=T0pLmMUpv4bWcavW
https://youtube.com/live/3wRqYhPfFWU?feature=share Session will be live at 12 PM
https://youtube.com/live/ZqBcn9PXUxY?feature=share Session will be LIVE @ 9:09AM
आज एक बात दिल से कहना चाहता हूँ— आयोग से या कोर्ट में लड़ाई हम तभी लड़ पाएँगे, जब आपस में लड़ना बंद करेंगे। जब भी मैं इस मुद्दे पर कोई वीडियो या मैसेज करता हूँ, तो दो तरह की प्रतिक्रियाएँ आती हैं। कुछ लोग बहुत अच्छा लिखते हैं, समर्थन करते हैं और अपनी बात रखते हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, जिन्हें पढ़कर सच में बहुत दुख होता है। कई बार समझ नहीं आता कि आखिर किसकी बात सुनूँ? उन लोगों की, जो अच्छे शब्दों में अपनी बात रखते हैं? या उन लोगों की, जो बिना सोचे-समझे लिख देते हैं कि “दुकान नहीं चलेगी”? सच कहूँ तो बहुत अफसोस होता है। जब अपने ही हक की बात उठाने की कोशिश करो और लोग उसकी नीयत पर सवाल उठाने लगें, तो बहुत तकलीफ होती है। सबसे ज्यादा दुख तब होता है, जब कोई यह समझता है कि हम हर बात सिर्फ कोर्स बेचने के लिए कर रहे हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं है। हर वीडियो, हर मैसेज और हर आवाज उठाने का उद्देश्य कोर्स बेचना नहीं होता। हमारी ऑर्गनाइजेशन में भी हम एक बहुत सरल सिद्धांत के साथ चलते हैं— जब पढ़ाना है, तो सिर्फ पढ़ाना है। जब कोर्स प्रमोट करना है, तो सिर्फ प्रमोट करना है। हम जानबूझकर दोनों चीजों को एक साथ नहीं मिलाते, क्योंकि हमारे लिए पढ़ाना एक जिम्मेदारी है और कोर्स बेचना एक अलग काम। लेकिन जब हक की बात करने पर भी हमारी नीयत पर सवाल उठाए जाते हैं और घटिया शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है, तो सच में दिल दुखता है। असहमति रखिए, सवाल पूछिए, आलोचना कीजिए— लेकिन एक-दूसरे का सम्मान बनाए रखिए। क्योंकि अगर हम आपस में ही लड़ते रहेंगे, एक-दूसरे को नीचा दिखाते रहेंगे, तो आयोग या कोर्ट के सामने अपने हक की लड़ाई आखिर किस ताकत से लड़ेंगे? लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं है। लड़ाई अपने हक के लिए है। और इस लड़ाई में सबसे बड़ी ताकत हमारी एकता होनी चाहिए।