🌹 Pyari ju ka Pyara Barsana🌹
Статистика- Последний пост
- 14 авг.
- Последнее чтение
- 15 авг.
- Постов за неделю
- 1
- Всего постов
- 20
- Тип
- открытый
- Язык
- хинди
- Категория
- Видео (по похожим)
- В каталоге с
- 14 авг.
- 1/24сутки в ленте
- 56
- 1/48двое суток
- 64
- 1/72трое суток
- 69
Оценка по просмотрам недавних постов: пост набирает почти всё за первые сутки.
Посты
без подписи
без подписи
без подписи
без подписи
श्री राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा
без подписи
।। श्रीहरि:।। *भगवान के सामने दीनता* साधकों के लिये एक बहुत उत्तम उपाय है *परमेश्वर के सामने आर्त होकर दीनभाव से हृदय खोलकर रोना। यह साधन एकान्त में करने का है।* सबके सामने करनेसे लोगोंमें उद्वेग होने और साधन के दम्भ रूप में परिणत हो जानेकी सम्भावना है। प्रातःकाल, सन्ध्या -समय, रात को, मध्यरात्रि के बाद या उषाकाल में जब सर्वथा एकान्त मिले, तभी आसन पर बैठकर *मन में यह भावना करनी चाहिये कि ' भगवान् यहाँ मेरे सामने उपस्थित हैं, मेरी प्रत्येक बात को सुन रहे हैं और मुझे देख भी रहे हैं।'* यह बात सिद्धान्त से भी *सर्वथा सत्य है कि भगवान्* *हर समय हर जगह हमारे सभी कामों को देखते और हमारी प्रत्येक बात सुनते हैं।* भावना बहुत दृढ़ होनेपर, भगवान् के जिस स्वरूप का इष्ट हो, वह स्वरूप साकार रूप में सामने दीखने लगता है एवं प्रेम की वृद्धि होने पर तो भगवत्कृपा से भगवान् के साक्षात् दर्शन भी हो सकते हैं। अस्तु। नियत समय और यथासाध्य नियत स्थान में प्रतिदिन नित्य की भाँति आसन या जमीन पर बैठकर भगवान को अपने सामने उपस्थित समझकर दिनभर के पापों का स्मरण कर *उनके सामने अपना सारा दोष रखना चाहिये और महान्* *पश्चात्ताप करते हुए आर्तभाव से क्षमा तथा फिर पाप न बने, इसके लिये बल की भिक्षा माँगनी चाहिये ।* नारायण नारायण नारायण नारायण *परम श्रद्धेय श्रीभाईजी हनुमानप्रसादजी पोद्दारजी*
без подписи
श्री राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा
без подписи
без подписи
без подписи
без подписи
без подписи
без подписи
Pad 801 जय राधे, जय जय राधे। जय राधे, जय जय राधे॥ रावल में छायौ आनंद। प्रगटी राधा आनँद-कंद॥ जय० नंदीसुर तें आये नंद। लीन्हे सँग उपनंद, सनंद॥ जय० जसुदा मैया रोहिनि संग। दाऊ-कान्हा लिये उछंग॥ जय० रैंदा-पैंदा, तोक-सुदाम। मधुमंगल, मनसुख, सुखराम॥ जय० दधि-माखन कौ लै उपहार। पहुँचे सब सज-सज सिंगार॥ जय० नृप बृषभानु मुदित भए देख। स्वागत कर मन हरष बिसेष॥ जय० जसुदा-रोहिनि भीतर जाय। मिली कीर्तिदा अति हरषाय॥ जय० लाली कौं अति लाड़ लड़ात। जसुदा-मन नहिं मोद समात॥ जय० लाला के मुख मोद अपार। निरख करत सब जै-जैकार॥ जय०
без подписи
श्री राधा राधा बधाई हो आप सभी साधकों को हरि प्रेमियों को श्री राधामहाभाव निमग्न श्री राधा बाबा जी के जन्मोत्सव की बहुत बहुत मंगल बधाई। 🙏🙏 श्री राधा बाबा जी की कृपा दृष्टि हम सब पर सदा बनी रहे और हम सब श्री राधा-माधव प्रेम के पथ के अनुगामी बने, यहीं उनके श्रीचरणों में प्रार्थना है। श्री राधा राधा 🙏🙇🏻♂️
без подписи
без подписи