Brahmacharya111
Статистикаइस चैनल का उद्देश्य है कि ब्रह्मचर्य की महान शिक्षा को हर बालक तक पहुंचाये, ऋषियों के अमृत ज्ञान को जन जन तक पहुंचाने के लिए एक गिलहरी की भांति यह मेरा छोटा सा प्रयास मात्र है। आप सब इस चैनल से जुड़े, और हमारे इस कार्य में सहयोग करें परिवर्तन अब दूर नही
- Последний пост
- 15 авг.
- Последнее чтение
- 15 авг.
- Постов за неделю
- 10
- Всего постов
- 27
- Тип
- открытый
- Язык
- хинди
- Категория
- Новости и СМИ (по похожим)
- В каталоге с
- 13 авг.
- 1/24сутки в ленте
- 247
- 1/48двое суток
- 283
- 1/72трое суток
- 305
Оценка по просмотрам недавних постов: пост набирает почти всё за первые сутки.
Посты
बड़े बदलाव हमेशा बड़े ऐलानों से नहीं आते — वे शुरू होते हैं एक छोटे, ईमानदार संकल्प से। तो आज, इस स्वतंत्रता दिवस पर, एक संकल्प लीजिए — अपने कर्तव्यों से न भागने का, अपनी ऊर्जा को सही दिशा देने का, और अपने देश के प्रति उतनी ही निष्ठा निभाने का, जितनी हम अपने सबसे प्रिय व्यक्ति के प्रति निभाते हैं। तिरंगा आज भी वही पूछ रहा है, जो उसने सौ साल पहले पूछा था — "तुम मेरे लिए क्या करोगे?" उठिए, जागिए, और अपने हर कर्म से इसका उत्तर दीजिए। जय हिंद! वंदे मातरम! 🇮🇳
तिरंगा कुछ कहता है: त्याग, संकल्प और स्वाभिमान की पुकार रुकिए और सोचिए — जब हवा का एक हल्का-सा झोंका तिरंगे को छूकर उसे लहराता है, तो क्या वह सिर्फ कपड़े का फड़फड़ाना है? नहीं। वह उन करोड़ों दिलों की धड़कन है, जिन्होंने कभी इस मिट्टी के लिए अपना सब कुछ वार दिया। वह उन आँखों की चमक है, जिन्होंने आज़ाद भारत का सपना देखा और उस सपने के लिए फांसी के फंदे को चूम लिया। हर बार जब तिरंगा ऊँचा उठता है, वह हमसे कुछ पूछता है — "तुमने मेरी आज़ादी के साथ क्या किया?" वह मिट्टी, जिसने वीर पैदा किए यह वही भारत भूमि है, जिसने भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, सुभाष चंद्र बोस, रानी लक्ष्मीबाई, मंगल पांडे और तात्या टोपे जैसे असंख्य सपूत पैदा किए — जिन्होंने जवानी की दहलीज़ पर कदम रखते ही अपने प्राण देश को अर्पित कर दिए। यह वही धरती है जहाँ गांधी जी ने बिना हथियार उठाए एक साम्राज्य को घुटनों पर ला दिया, और जहाँ लाखों अनाम किसानों, मज़दूरों और स्त्रियों ने अपने घर-परिवार की चिंता किए बिना स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान दिया। फिर सवाल यह उठता है — उसी वीर भूमि की आज की संतान इतनी दिशाहीन, इतनी भटकी हुई, इतनी लक्ष्यहीन क्यों होती जा रही है? क्यों हमारी ऊर्जा, जो कभी देश बनाने में लगती थी, आज बिखराव, आलस्य और अर्थहीन भटकाव में बह जाती है? इसका उत्तर बाहर नहीं, हमारे भीतर है। हम ही अपने सबसे बड़े मित्र हैं, और हम ही, अगर सचेत न रहें, तो अपने सबसे बड़े शत्रु भी बन सकते हैं। तिरंगे के तीन रंगों की मौन शिक्षा केसरिया — त्याग का रंग। यह हमें सिखाता है कि बड़े लक्ष्यों के लिए छोटी सुविधाओं का त्याग करना पड़ता है, जैसे हमारे वीरों ने अपने आराम, अपनी जवानी, यहाँ तक कि अपने प्राणों का त्याग कर दिया। सफेद — सत्य और शांति का रंग। यह हमसे कहता है कि चाहे संघर्ष कितना भी बड़ा हो, राह ईमानदारी और शांति की ही होनी चाहिए। हरा — समृद्धि और नवजीवन का रंग। यह हमें याद दिलाता है कि आज़ादी का असली अर्थ है परिश्रम से एक समृद्ध, हरा-भरा भारत गढ़ना। अशोक चक्र, अपनी चौबीस तीलियों के साथ, बीच में स्थिर खड़ा हमसे कहता है — रुकना नहीं। जीवन में गति, कर्तव्य और निरंतरता ही सफलता का मार्ग है। आज़ादी उधार में नहीं मिली आज हम जिस खुली हवा में साँस लेते हैं, वह किसी को मुफ़्त में नहीं मिली। यह उन माँओं के आँसुओं से सींची गई है, जिन्होंने अपने बेटों को हँसते-हँसते देश के लिए विदा किया और फिर कभी उन्हें लौटते नहीं देखा। यह उन नौजवानों के अधूरे सपनों की राख से बनी है, जो आज़ादी की सुबह देखने से पहले ही मिट्टी में मिल गए। तो क्या यह उचित होगा कि हम, जिन्हें यह आज़ादी विरासत में मिली है, उसे यूँ ही व्यर्थ गँवा दें? क्या हम अपने पूर्वजों के बलिदान का यही सम्मान करेंगे — आलस्य में, दिशाहीनता में, और अपने कर्तव्यों से मुँह मोड़कर? आज के युवा से एक सीधी बात समय आ गया है ठहरकर खुद से पूछने का — मैं अपनी ऊर्जा, अपना समय, अपनी जवानी किस दिशा में लगा रहा हूँ? क्या मैं उस दिशा में बढ़ रहा हूँ जो मुझे और मेरे देश को मज़बूत बनाए, या मैं भटकाव और लक्ष्यहीनता के रास्ते पर बह रहा हूँ? हमारे स्वतंत्रता सेनानियों में एक गुण समान था, चाहे वह किसी का भी नाम लें — गांधी जी का आत्म-अनुशासन, सुभाष बाबू का अडिग संकल्प, या भगत सिंह की निडरता। किसी ने भी अपनी ऊर्जा को यूँ ही बहने नहीं दिया। हर किसी ने अपने भीतर की शक्ति को पहचाना, उसे अनुशासित किया, और उसे एक बड़े लक्ष्य की ओर मोड़ दिया। आज के युवा के पास भी वही शक्ति है — बस दिशा तय करनी बाकी है। शिक्षा में, स्वास्थ्य में, कौशल में, समाज-सेवा में — अगर हर युवा अपनी ऊर्जा को अनुशासन और संकल्प के साथ लगाए, तो कोई कारण नहीं कि यह देश फिर से वही गौरव न पाए, जो कभी इसका था। भीतर और बाहर, दोनों तरफ से सजग रहना होगा आज खतरे केवल सीमाओं पर नहीं हैं। कई बार वे हमारे भीतर भी घर कर जाते हैं — जाति, धर्म, संप्रदाय और स्वार्थ के नाम पर हुए बँटवारों के रूप में। तिरंगा हमें यही सिखाता है कि हर मज़हब, हर विचारधारा से ऊपर, पहले हम भारतीय हैं। यही एकता हमारी सबसे बड़ी ढाल है, और यही वह विरासत है जो हमें अगली पीढ़ी को सौंपनी है — बिना किसी दरार के, बिना किसी बँटवारे के। आज का संकल्प, कल की नींव याद रखिए — आज का यह क्षण आपकी ज़िंदगी की कहानी में एक नया अध्याय लिखने का अवसर है। अगर आप आज आलस्य और संकल्पहीनता को चुनते हैं, तो कल का सवेरा पछतावे में बदल सकता है। लेकिन अगर आप आज अपने भीतर की शक्ति को पहचानकर उसे अनुशासन की दिशा दे दें, तो कोई भी बाधा आपको आपके लक्ष्य से नहीं रोक सकती।
, 9: PM] acharyashyamrath: To join the meeting on Google Meet, click this link: https://meet.google.com/ysy-dzoy-dhr Or open Meet and enter this code: ysy-dzoy-dhr , 9:03 PM] acharyashyamrath: आत्म निरीक्षण कक्षा में ब्रह्मचर्य ,अध्यात्म ,उत्तम जीवन हेतु दिनचर्या , सत्यार्थ प्रकाश भूमिका में आप सभी का स्वागत है रात्रि 9:00 से 9:45 बजे
SCRPIT done 2-4 din me video aa jayegi, our is baar kuch naya hi kaam kiya hai, app support jaror karna https://youtube.com/@saarquest?si=4OGr70F4ORmzAUZd
Live stream finished (1 minute)
Live stream started
Blog#197 Popcorn brain — फोकस की तबाही हर कुछ सेकंड में एक रील से दूसरी रील पर कूदते रहने से दिमाग़ किसी एक चीज़ पर टिक ही नहीं पाता — इसी को कहते हैं "popcorn brain",यानी बिल्कुल गरम बर्तन में उछलते मक्के के दानों जैसा हाल।और इसका नतीजा ये होता है कि किताब पढ़ना, लंबी बातचीत करना, या बस चुपचाप बैठकर कुछ सोचना — असहनीय रूप से बोरिंग लगने लगता है। इसका सीधा असर पड़ता है दिमाग़ के "prefrontal cortex"(प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स) पर, यानी वो हिस्सा जो फैसले लेने और खुद पर कंट्रोल रखने के लिए ज़िम्मेदार है। लगातार स्क्रॉलिंग से ये कमज़ोर पड़ता जाता है,जिससे फोन छोड़ना और मुश्किल हो जाता है। दूसरी तरफ "amygdala" (एमिग्डाला) — डर और इमोशन्स को समझने वाला हिस्सा — ज़्यादा एक्टिव हो जाता है, जिससे तुम हर वक्त एक अनजानी चिंता में रहने लगते हो। brain-wave study में भी पाया गया कि जो लोग ज़्यादा short-video content देखते हैं, उनके attention control system पर सीधा नकारात्मक असर पड़ता है। रिसर्च ये भी बताती है कि heavy scrollers के दिमाग़ के कुछ हिस्सों में "grey matter" — यानी याददाश्त और फोकस के लिए ज़िम्मेदार टिशू — कम हो जाता है। हर बार पोस्ट बदलने पर दिमाग़ को पिछली जानकारी छोड़नी पड़ती है इसे कहते हैं "switch cost effect" और इससे फोकस करने की क्षमता 20% तक गिर सकती है। असली सच्चाई ये है कि हम पूरी तरह focus करना नहीं भूले —बल्कि बिखरी हुई कंटेंट की आदत से पढ़ाई-काम जैसी गहरी concentration वाली चीजों में दिक्कत बढ़ रही है। यही फ़र्क समझना ज़रूरी है,ताकि सही problem का सही solution निकाला जा सके।
Youtube update Ab 4000 hours ❌ 8000 hours ✔️ ho gaya hai, please support karo our subscriber jaror karo , https://youtube.com/@saarquest?si=4OGr70F4ORmzAUZd
Live stream finished (34 seconds)
Live stream started
Live stream finished (21 minutes)
लाइव जुड़े आपके प्रश्न?
Live stream started
без подписи
без подписи
वीर्य रक्षण से लाभ – शरीर में वीर्य संरक्षित होने पर आँखों में तेज, वाणी में प्रभाव, कार्य में उत्साह एवं प्राण ऊर्जा में अभिवृद्धि होती है। ऐसे व्यक्ति को जल्दी से कोई रोग नहीं होता है उसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता आ जाती है । पहले के जमाने में हमारे गुरुकुल शिक्षा पद्धति में ब्रह्मचर्य अनिवार्य हुआ करता था। और उस वक्त में यहाँ वीर योद्धा, ज्ञानी, तपस्वी व ऋषि स्तर के लोग हुए| ऋषि दयानंद ने कहा ब्रह्मचर्य ब्रत का पालन करने बाले ब्यक्ति का अपरिमित शक्ति प्राप्त होता है एक ब्रह्मचारी संसार का जितना उपकार कर सकता है दूसरा कोई नही कर सकता बुद्ध ने कहा है – ‘‘भोग और रोग साथी है और ब्रह्मचर्य आरोग्य का मूल है।’’ स्वामी ओमानंद जी ने कहा है – ‘‘जैसे दीपक का तेल-बत्ती के द्वारा ऊपर चढक़र प्रकाश के रूप में परिणित होता है, वैसे ही ब्रह्मचारी के अन्दर का वीर्य सुषुम्रा नाड़ी द्वारा प्राण बनकर ऊपर चढ़ता हुआ ज्ञान-दीप्ति में परिणित हो जाता है। पति के वियोग में कामिनी तड़पती है और वीर्यपतन होने पर योगी पश्चाताप करता है। भगवान शंकर ने कहा है- ‘इस ब्रह्मचर्य के प्रताप से ही मेरी ऐसी महान महिमा हुई है।’
भलाई दुसरो की करने से स्वयं की होती है इसी तरह दुसरो का बुरा चाहने वालों का खुद ही बुरा होता है,जैसी करनी वैसी भरनी। जो व्यक्ति स्वयं के निर्माण मे लगा है वो देर सवेरे अपनी उन्नति जरूर कर लेगा। स्वयं को मजबूत बनाओ मजबूर नहीं 🙏
Live stream finished (2 minutes)
Live stream started
Live stream finished (13 minutes)