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  • विज्ञापन संख्या-19-परीक्षा/2026, अवर अभियंता (कृषि) मुख्य परीक्षा (प्रा0अ0प0-2025)/19 का विज्ञापन।

  • वेटेनरी फार्मासिस्ट विज्ञापन जारी

  • Lower pcs एग्जाम city ऑनलाइन चेक कर सकते है।

  • ▪️166 दिन जेल काटने वाले निर्दोष सिपाही की आखिरकार हुए ज्वाइनिंग.......!!!

  • ▪️ महाकुंभ में ड्यूटी में रहे पुलिस वालों को 10 हजार रुपए मिलेंगे.......!!!

  • ▪️ उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले तोहफा देकर आधी आबादी को साधने की तैयारी......!!! ▪️ महिलाओं को 10 से 30 हजार रुपए देने की विचार चल रहा.....!!! ▪️ उत्तर प्रदेश में 13.40 करोड़ मतदाताओं में से 6.09 करोड़ महिला मतदाता है......!!!

  • ▪️ उत्तर प्रदेश में बीजेपी के पास चुनाव जीतने के लिए पैसे के अलावा कुछ नहीं बचा.......!!! ▪️ अखिलेश यादव जी✔️

  • ▪️ शिक्षा सेवा चयन आयोग की नियमावली में शैक्षिक गुणांक नहीं है जबकि बेसिक शिक्षा परिषद ने नियमावली 1981 के आधार पर शैक्षिक गुणांक का उल्लेख है......!!! ▪️ प्रयाग राज में बैठक करके जिस स्तर पर संशोधन करने में आसानी व तेजी होगी वहीं संशोधन होगा......!!!

  • ▪️देश में 84 हजार सरकारी और सहायता स्कूल बंद हुए.......!!! ▪️विद्यालय में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या भी करीब 1.5 करोड़ घट गई...!!✔️

  • हर दिन खुद को सिर्फ 1% बेहतर बनाने का प्रयास कीजिए। बदलाव हमेशा बड़ा और अचानक नहीं होता; छोटी-छोटी आदतें ही समय के साथ बड़ी सफलता बनाती हैं। आज कल से थोड़ा ज्यादा पढ़िए, थोड़ा बेहतर सोचिए, थोड़ा अनुशासित रहिए और अपनी किसी एक कमजोरी पर काम कीजिए। अगर आप रोज़ केवल 1% सुधार करते हैं, तो कुछ महीनों बाद आप अपने पुराने रूप से काफी आगे होंगे। दूसरों से तुलना करने के बजाय अपने कल के स्वरूप से प्रतिस्पर्धा करें। याद रखिए, सफलता एक दिन में नहीं मिलती, लेकिन हर दिन की छोटी प्रगति एक दिन आपको बड़ी सफलता तक जरूर पहुंचाती है। शुभ रात्रि

  • 5. समितियां, गरीबी और कल्याणकारी योजनाएं (Committees, Poverty & Schemes) 81. तेंदुलकर समिति (2009): कैलोरी के स्थान पर प्रति व्यक्ति मासिक उपभोग व्यय (MPCE) के आधार पर गरीबी का आकलन करने वाली समिति। 82. रंगराजन समिति (2014): तेंदुलकर समिति की समीक्षा के लिए गठित, जिसने गरीबी रेखा के निर्धारण के मानकों को थोड़ा संशोधित किया। 83. नरसिम्हन समिति I और II: भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण, संरचनात्मक सुधारों और स्वायत्तता से संबंधित। 84. केलकर समिति: भारत में कर सुधारों (Tax Reforms) और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के विकास से संबंधित। 85. राजा चेलैया समिति: भारत में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को आधुनिक और तर्कसंगत बनाने की सिफारिशें देने वाली समिति। 86. विमल जालान समिति: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आर्थिक पूंजी ढांचे (Economic Capital Framework) की समीक्षा के लिए गठित। 87. उर्जित पटेल समिति: भारत में मौद्रिक नीति समिति (MPC) के गठन और मुद्रास्फीति के लक्ष्यीकरण (Inflation Targeting) की सिफारिश करने वाली समिति। 88. नाचिकेत मोर समिति: वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) और छोटे व्यवसायों तक बैंकिंग पहुंच बढ़ाने से संबंधित। 89. प्रच्छन्न बेरोजगारी (Disguised Unemployment): वह स्थिति जिसमें किसी कार्य में आवश्यकता से अधिक लोग लगे हों और उनकी सीमांत उत्पादकता शून्य हो (जैसे भारतीय कृषि)। 90. संरचनात्मक बेरोजगारी: देश के औद्योगिक ढांचे में बदलाव और श्रमिकों के कौशल व उपलब्ध नौकरियों के बीच बेमेल (Mismatch) होने के कारण उत्पन्न बेरोजगारी। 91. घर्षण जनित बेरोजगारी (Frictional Unemployment): एक नौकरी छोड़कर दूसरी नई नौकरी तलाशने के बीच की अवधि में रहने वाली अस्थाई बेरोजगारी। 92. चक्रीय बेरोजगारी (Cyclical Unemployment): अर्थव्यवस्था में आने वाली मंदी या व्यापार चक्र (Business Cycle) के उतार-चढ़ाव के कारण उत्पन्न होने वाली बेरोजगारी। 93. बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI): नीति आयोग और UNDP द्वारा जारी, जो केवल आय नहीं बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के अभावों को मापता है। 94. लीड बैंक योजना की समीक्षा समिति: गाडगिल समिति की सिफारिशों के आधार पर भारत में लीड बैंक योजना की शुरुआत की गई थी। 95. प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY): वित्तीय समावेशन के लिए दुनिया की सबसे बड़ी योजना, जिसका उद्देश्य हर परिवार का बैंक खाता खोलना है। 96. मनरेगा (MGNREGA): ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों के गारंटीकृत कुशल/अकुशल शारीरिक श्रम के रोजगार का कानूनी अधिकार। 97. मेक इन इंडिया (Make in India): भारत को एक वैश्विक विनिर्माण (Manufacturing) हब में बदलने के उद्देश्य से शुरू किया गया कार्यक्रम। 98. पीएम-किसान योजना: देश के सभी भूमिधारक किसान परिवारों को प्रति वर्ष ₹6,000 की प्रत्यक्ष आय सहायता प्रदान करने वाली केंद्रीय योजना। 99. स्टैंडअप इंडिया योजना: अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और महिला उद्यमियों के बीच ग्रीनफील्ड उद्यमों के लिए ऋण की सुविधा देना। 100. नवरत्न और महारत्न: केंद्र सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSEs) को उनके वित्तीय प्रदर्शन और स्वायत्तता के आधार पर दी जाने वाली विशेष श्रेणियां।

  • 4. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक संस्थाएं (External Sector & Global Orgs) 61. भुगतान संतुलन (BoP): एक देश का शेष विश्व के साथ एक वित्तीय वर्ष में होने वाले सभी आर्थिक लेन-देन का व्यवस्थित विवरण। 62. व्यापार संतुलन (BoT): भुगतान संतुलन का वह हिस्सा जो केवल दृश्य वस्तुओं के निर्यात और आयात के अंतर को दर्शाता है। 63. विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI): किसी विदेशी कंपनी द्वारा घरेलू देश के व्यवसायों या उत्पादन संपत्तियों में किया जाने वाला दीर्घकालिक निवेश। 64. विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI): विदेशी निवेशकों द्वारा देश के शेयर या बॉन्ड बाजार में किया जाने वाला अल्पकालिक और अस्थिर निवेश (इसे 'हॉट मनी' भी कहते हैं)। 65. चालू खाता पूर्ण परिवर्तनीयता: भारत में व्यापार और सेवाओं के लेनदेन के लिए विदेशी मुद्रा को भारतीय रुपये में बदलने की पूरी आजादी है (1994 से लागू)। 66. पूंजी खाता आंशिक परिवर्तनीयता: भारत में पूंजी संपत्तियों (जैसे विदेश में जमीन या कंपनी खरीदना) के लिए रुपया पूरी तरह परिवर्तनीय नहीं है। 67. मुद्रा का अवमूल्यन (Devaluation): सरकार द्वारा जानबूझकर अपनी मुद्रा का मूल्य विदेशी मुद्रा की तुलना में कम करना, जिससे निर्यात सस्ते और आयात महंगे होते हैं। 68. डंपिंग (Dumping): किसी देश द्वारा अपने घरेलू बाजार की कीमत से बहुत कम दाम पर वस्तुओं को दूसरे देश में निर्यात करना। 69. एंटी-डंपिंग ड्यूटी: डंपिंग से घरेलू उद्योगों को बचाने के लिए आयातित सस्ती वस्तुओं पर लगाया जाने वाला सुरक्षात्मक कर। 70. टैरिफ (Tariff): आयातित वस्तुओं पर लगाया जाने वाला सीमा शुल्क, जिसका उद्देश्य घरेलू उद्योगों को संरक्षण देना होता है। 71. गैर-टैरिफ बाधाएं (Non-Tariff Barriers): करों के अलावा अन्य तरीके (जैसे कोटा प्रणाली या गुणवत्ता मानक) जिनसे आयात को हतोत्साहित किया जाता है। 72. विश्व व्यापार संगठन (WTO): 1995 में गेट (GATT) के स्थान पर स्थापित वैश्विक व्यापार का नियमन करने वाली संस्था। 73. आईएमएफ (IMF): सदस्य देशों के भुगतान संतुलन के संकट (BoP Crisis) को दूर करने के लिए अल्पकालिक ऋण देने वाली संस्था। 74. विश्व बैंक (World Bank): विकासशील देशों में गरीबी कम करने और दीर्घकालिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए ऋण देने वाली संस्था। 75. अंबर बॉक्स, ग्रीन बॉक्स, ब्लू बॉक्स: ये शब्दावलियां विश्व व्यापार संगठन (WTO) के कृषि समझौते (AoA) के तहत दी जाने वाली सब्सिडी से संबंधित हैं। 76. ट्रिप्स (TRIPS): बौद्धिक संपदा अधिकारों (जैसे पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क) के व्यापार से संबंधित वैश्विक समझौता। 77. विदेशी वाणिज्यिक उधारी (ECB): भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी स्रोतों से लिया जाने वाला व्यावसायिक ऋण। 78. मसाला बॉन्ड: भारतीय संस्थाओं द्वारा विदेशों में रुपये के मूल्यवर्ग (Rupee-denominated) में जारी किए जाने वाले बॉन्ड। 79. पार्टिसिपेटरी नोट्स (P-Notes): विदेशी ब्रोकरेज द्वारा उन विदेशी निवेशकों को जारी किए जाने वाले वित्तीय साधन जो सेबी के पास पंजीकृत हुए बिना भारतीय शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं। 80. टॉबिन टैक्स (Tobin Tax): अल्पकालिक विदेशी मुद्रा सट्टेबाजी को हतोत्साहित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा लेनदेन पर लगाया जाने वाला कर।

  • 3. राष्ट्रीय आय, संवृद्धि और मुद्रास्फीति (National Income, Growth & Inflation) 41. सकल घरेलू उत्पाद (GDP): एक वित्तीय वर्ष में देश की भौगोलिक सीमा के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य। 42. सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP): GDP में विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय (NFIA) को जोड़ने पर प्राप्त मूल्य। 43. शुद्ध घरेलू उत्पाद (NDP): GDP में से पूंजीगत संपत्तियों के मूल्य ह्रास (Depreciation) को घटाने पर प्राप्त मूल्य। 44. प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income): देश की कुल राष्ट्रीय आय को कुल जनसंख्या से भाग देकर निकाली जाने वाली औसत आय। 45. जीडीपी डिफ्लेटर: नॉमिनल (चालू कीमतों पर) जीडीपी और रियल (स्थिर कीमतों पर) जीडीपी का अनुपात, जो समग्र मूल्य स्तर को मापता है। 46. थोक मूल्य सूचकांक (WPI): यह केवल वस्तुओं की थोक कीमतों में बदलाव को मापता है (इसमें सेवाएं शामिल नहीं होतीं)। 47. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI): यह खुदरा स्तर पर वस्तुओं और सेवाओं दोनों की कीमतों में बदलाव को मापता है (आरबीआई मौद्रिक नीति के लिए इसे आधार बनाता है)। 48. हैडलाइन इन्फ्लेशन: उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में शामिल सभी वस्तुओं (खाद्य और ईंधन सहित) के कुल मूल्य में होने वाला समग्र बदलाव। 49. कोर इन्फ्लेशन: हैडलाइन मुद्रास्फीति में से अत्यधिक अस्थिर कीमतों वाली मदों (जैसे खाद्य और तेल) को हटाकर मापी गई मुद्रास्फीति। 50. फिलिप्स वक्र (Phillips Curve): अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी की दर और मुद्रास्फीति की दर के बीच विपरीत (Inversely) संबंध दर्शाने वाला वक्र। 51. स्टैगफ्लेशन (Stagflation): वह आर्थिक स्थिति जहाँ विकास दर ठप हो, बेरोजगारी चरम पर हो और साथ ही मुद्रास्फीति भी बहुत उच्च हो। 52. हाइपरइन्फ्लेशन: जब किसी देश में मुद्रास्फीति की दर अत्यधिक तीव्र और अनियंत्रित (सैकड़ों या हजारों प्रतिशत प्रति वर्ष) हो जाती है। 53. गिनी गुणांक (Gini Coefficient): समाज में आय या धन के वितरण की असमानता को मापने का पैमाना (मान 0 से 1 के बीच होता है)। 54. लोरेंज वक्र (Lorenz Curve): समाज में फैली आर्थिक असमानता को ग्राफिक रूप से प्रदर्शित करने वाला वक्र। 55. हिंदू विकास दर (Hindu Growth Rate): प्रोफेसर राजकृष्ण द्वारा प्रयुक्त शब्द, जो 1950 से 1980 के दशक के दौरान भारत की धीमी आर्थिक विकास दर (लगभग 3.5%) को दर्शाता है। 56. हरित जीडीपी (Green GDP): आर्थिक विकास के आकलन में पर्यावरण को हुए नुकसान और प्राकृतिक संसाधनों के क्षय को घटाकर निकाली गई जीडीपी। 57. क्रय शक्ति समता (PPP): विभिन्न देशों की मुद्राओं की क्रय शक्ति की तुलना करने की विधि (इस आधार पर भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है)। 58. आधार वर्ष (Base Year): रियल जीडीपी की गणना के लिए उपयोग किया जाने वाला तुलनात्मक वर्ष (वर्तमान में भारत में यह 2011-12 है)। 59. फैक्टर कॉस्ट (Factor Cost): किसी वस्तु के उत्पादन में लगने वाली वास्तविक लागत (मजदूरी, किराया, ब्याज और लाभ का योग)। 60. मार्केट प्राइस (Market Price): फैक्टर कॉस्ट में अप्रत्यक्ष करों को जोड़ने और सब्सिडी को घटाने पर प्राप्त बाजार मूल्य।

  • 2. बजट, घाटा और कर प्रणाली (Budget, Deficit & Taxation) 21. राजकोषीय घाटा: सरकार के कुल व्यय और उधार को छोड़कर कुल प्राप्तियों का अंतर। 22. राजस्व घाटा: सरकार के कुल राजस्व व्यय और कुल राजस्व प्राप्तियों का अंतर। 23. प्राथमिक घाटा: राजकोषीय घाटे में से ब्याज भुगतान को घटाने पर प्राप्त राशि। 24. प्रभावी राजस्व घाटा: राजस्व घाटे में से राज्यों को पूंजीगत संपत्ति बनाने के लिए दिए गए अनुदान को घटाकर निकाला जाता है। 25. प्रत्यक्ष कर (Direct Tax): ऐसा कर जिसका आघात (Impact) और भार (Incidence) एक ही व्यक्ति पर पड़ता है (जैसे- आयकर, निगम कर)। 26. अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax): ऐसा कर जिसका भार अंतिम उपभोक्ता पर स्थानांतरित किया जाता है (जैसे- GST, सीमा शुल्क)। 27. जीएसटी परिषद (GST Council): इसके अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री होते हैं और यह संविधान के अनुच्छेद 279A के तहत गठित है। 28. प्रतिगामी कर (Regressive Tax): वह कर प्रणाली जिसमें आय बढ़ने के साथ कर की दर घटती जाती है, जिससे गरीबों पर अधिक बोझ पड़ता है। 29. प्रगामी कर (Progressive Tax): वह कर प्रणाली जिसमें आय बढ़ने के साथ कर की दर भी बढ़ती है (जैसे भारत का आयकर)। 30. उपकर (Cess): किसी विशिष्ट उद्देश्य (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य) के लिए कर के ऊपर लगाया जाने वाला अतिरिक्त कर। 31. अधिभार (Surcharge): कर योग्य आय के ऊपर लगाया जाने वाला कर (Tax on Tax), जो मुख्य रूप से उच्च आय वर्ग पर लगता है। 32. लाफर वक्र (Laffer Curve): कर की दरों और सरकार को प्राप्त होने वाले कुल कर राजस्व के बीच संबंध दर्शाने वाला वक्र। 33. पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure): ऐसा सरकारी खर्च जिससे संपत्तियों का निर्माण होता है या देनदारियां कम होती हैं (जैसे सड़क, पुल निर्माण)। 34. राजस्व व्यय (Revenue Expenditure): ऐसा सरकारी खर्च जिससे न तो संपत्तियों का निर्माण होता है और न ही देनदारियां कम होती हैं (जैसे वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान)। 35. वित्त आयोग (Finance Commission): अनुच्छेद 280 के तहत राष्ट्रपति द्वारा गठित, जो केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे की सिफारिश करता है। 36. क्राउडिंग आउट प्रभाव (Crowding Out Effect): सरकार द्वारा बाजार से अत्यधिक उधार लेने के कारण निजी क्षेत्र के लिए ऋण की कमी और ब्याज दरों का बढ़ना। 37. जीरो-बेस्ड बजटिंग: बजट बनाने की वह पद्धति जिसमें प्रत्येक नए वित्त वर्ष के लिए सभी खर्चों का नए सिरे से मूल्यांकन (शून्य से) किया जाता है। 38. जेंडर बजटिंग: बजट में महिलाओं के विकास, कल्याण और सशक्तिकरण के लिए विशेष योजनाओं और धन का आवंटन करना। 39. राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation): सरकार द्वारा अपने राजकोषीय घाटे को कम करने और वित्तीय अनुशासन लाने की नीति। 40. FRBM अधिनियम (2003): सरकारी घाटे को नियंत्रित करने और राजकोषीय प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के लिए बनाया गया कानून।

  • 1. बैंकिंग और मौद्रिक नीति (Monetary Policy & Banking) 1. रेपो रेट: वह दर जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है। 2. रिवर्स रेपो रेट: वह दर जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों से अतिरिक्त तरलता स्वीकार करता है। 3. नकद आरक्षित अनुपात (CRR): वाणिज्यिक बैंकों की कुल जमा का वह हिस्सा जो उन्हें अनिवार्य रूप से RBI के पास नकद रूप में रखना पड़ता है। 4. साविधिक तरलता अनुपात (SLR): बैंकों की जमा का वह हिस्सा जो उन्हें अपने पास नकद, सोने या सरकारी प्रतिभूतियों के रूप में रखना होता है। 5. खुला बाजार परिचालन (OMO): RBI द्वारा बाजार में तरलता को नियंत्रित करने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद और बिक्री करना। 6. सीमांत स्थायी सुविधा (MSF): बैंकों के लिए आपातकालीन स्थिति में RBI से रात भर (Overnight) के लिए ऋण लेने की खिड़की। 7. बैंक दर (Bank Rate): वह दीर्घकालिक दर जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को बिना किसी प्रतिभूति के ऋण देता है। 8. क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE): केंद्रीय बैंक द्वारा अर्थव्यवस्था में धन की आपूर्ति बढ़ाने के लिए बाजार से बड़े पैमाने पर वित्तीय संपत्तियां खरीदना। 9. प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र को ऋण (PSL): बैंकों के लिए अपने कुल ऋण का 40% हिस्सा कृषि, MSME और कमजोर वर्गों को देना अनिवार्य है। 10. गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA): ऐसा ऋण जिस पर 90 दिनों तक मूलधन या ब्याज का भुगतान न किया गया हो। 11. बैड बैंक (NARCL): बैंकों के तनावग्रस्त ऋणों (NPA) को खरीदने और उनका समाधान करने के लिए गठित विशेष संस्था। 12. पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CAR): बैंक की जोखिम-भारित संपत्तियों के मुकाबले उसकी खुद की पूंजी का अनुपात, जो बैंक की स्थिरता सुनिश्चित करता है। 13. बेसेल मानक (Basel Norms): बैंकिंग प्रणाली को वित्तीय संकटों से बचाने के लिए वैश्विक स्तर पर तय किए गए पूंजी जोखिम नियम। 14. मुद्रा स्फीति का बैंकिंग पर प्रभाव: मुद्रास्फीति बढ़ने पर कर्जदाता (Lender) को नुकसान और कर्जदार (Borrower) को लाभ होता है। 15. शीर्ष बैंक (Apex Bank): भारत में कृषि और ग्रामीण विकास के लिए वित्त उपलब्ध कराने वाली सर्वोच्च संस्था 'नाबार्ड' (NABARD) है। 16. लीड बैंक योजना: प्रत्येक जिले में एक प्रमुख वाणिज्यिक बैंक को जिला विकास की जिम्मेदारी सौंपने की योजना। 17. विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve): भारत के फॉरेक्स में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, स्वर्ण, SDR और IMF के पास सुरक्षित राशि (RTP) शामिल होती है। 18. SDR (विशेष आहरण अधिकार): इसे अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की 'कागजी मुद्रा' (Paper Gold) भी कहा जाता है। 19. फिएट मनी (Fiat Money): वह मुद्रा जिसका कोई आंतरिक मूल्य नहीं होता, बल्कि सरकार के आदेश (Decree) पर कानूनी निविदा घोषित होती है। 20. डिजिटल रुपया (e₹): भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी की गई आधिकारिक सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC)

  • योगी आदित्यनाथ सरकार 2027 के विधानसभा चुनाव होने से पहले सूबे की महिलाओं को बड़ी सौगात देने की तैयारी कर रही है.

  • #VPO अभ्यर्थी 17 अगस्त से अनिश्चितकालीन धरने पर। ❤️👍