हिंदी दोहे ( कबीर , तुलसीदास , मीराबाई , सूरदास..) By
Статистикаइस चैनल की वजह से आप जीवन की कुछ अच्छी और कड़वी सच्चाई जानकर खुदकी और अपने चाहनेवालों की सच्चाई पढ़ सकते हो ।। By @vaibhavBidave @englishthoughtsandbestlines @marathishayari @hindidohe
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Jamana beet gaya, Tumse baat karne ke liye , Lekin dosti jinda rhi , Aankhri sans tak , Pyar mohabbat ye sab dhoka hai , Esme kuch nahi ye sab dikhava hai , Ek din akhbar mein chap jayega, Hamara silsila yuhi chalta jayega , Hum pehle nahi hai , Ishq ki samandar mein , Aaj tak karodo ne jaam pi rakha hai , Ek ka utrta hai nasha ,to dusre ka Chadta hai , Andhi ho ya bilkul saf aasman , Aakash ka rang bas kuch pal ke liye bdal jata he.. Kuch pal ke liye badal jata he .... By Vaibhav Bidave ✍ good night
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पर नारी के राचनै, सीधा नरकै जाये तिनको जम छारै नहि, कोटिन करै उपाये। अर्थ- परायी स्त्री से कभी प्रेम मत करो। वह तुम्हे सीधा नरक ले जायेगी। उसे यम देवता भी नहीं छोड़ता है चाहे तुम कड़ोरो उपाय करलो।
पर नारी पैनी छुरी, मति कौई करो प्रसंग रावन के दश शीश गये, पर नारी के संग। अर्थ- दुसरो की स्त्री तेज धार वाली चाकू की तरह है। उसके साथ किसी प्रकार का संबंध नहीं रखो। दुसरे के स्त्री के साथ के कारण ही रावण का दश सिर चला गया।
परनारी पैनी छुरी, बिरला बंचै कोये ना वह पेट संचारिये, जो सोना की होये। अर्थ- दुसरो की नारी तेज धार वाली चाकू की तरह है। इस के वार से सायद ही कोई बच पाता है। उसे कभी अपने हृदय में स्थान मत दें-यदि वह सोने की तरह आकर्षक और सुन्दर ही क्यों न हो।
नारी सेती नेह, बुधि विवेक सभी हरै बृथा गबावै देह, कारज कोई ना सरै। अर्थ- स्त्री से वासना रुपी प्रेम करने में बुद्धि और विवके का हरण होता है। शरीर भी बृथा बेकार होता है और जीवन के भलाई का कोई भी कार्य सफल नहीं होता है।
नारी मदन तलाबरी, भव सागर की पाल नर मच्छा के कारने, जीवत मनरी जाल। अर्थ- नारी वासना का तालाव और इस भव सागर में डूबने से रक्षा हेतु पाल है। यह नर रुपी मछली को फंसाने का जाल डाला गया है।
नारी निरखि ना देखिये, निरखि ना कीजिये दौर देखत ही ते बिस चढ़ै, मन आये कछु और। अर्थ- नारी को कभी घूर कर मत देखो। देख कर भी उसके पीछे मत दौड़ो। उसे देखते ही बिष चढ़ने लगता है और मन में अनेक प्रकार के बिषय विकार गंदे विचार आने लगते है।
नारी निन्दा ना करो, नारी रतन की खान नारी से नर होत है, ध्रुब प्रहलाद समान। अर्थ- नारी की निन्दा मत करो। नारी अनेक रत्नों की खान है। नारी से ही पुरुष के उत्पत्ति होती है। घ्रुब और प्रहलाद भी किसी नारी की ही देन है।
नारी नरक ना जानिये, सब सौतन की खान जामे हरिजन उपजै, सोयी रतन की खान। अर्थ- नारी को नरक मत समझो। वह सभी संतों की खान है। उन्हीं के द्वारा भगवत पुरुषों कि उत्पत्ति होती है और वे ही रत्नों की खान है। प्रभु भक्तों को नारी ही जन्म देती है।
छोटी मोटी कामिनि, सब ही बिष की बेल बैरी मारे दाव से, येह मारै हंसि खेल। अर्थ- स्त्री छोटी बड़ी सब जहर की लता है। दुश्मन दाव चाल से मारता है पर स्त्री हंसी खेल से मार देती है।
चलो चलो सब कोये कहै, पहुचै बिरला कोये ऐक कनक औरु कामिनि, दुरगम घाटी दोये। अर्थ- परमात्मा तक जाने के लिये सभी चलो-चलो कहते है पर वहाॅ तक शायद ही कोई पहूँच पाता है। धन और स्त्री रुपी दो अत्यंत खतरनाक बीहड़ घाटियों को पार कर के ही कोई परमात्मा की शरण में पहूँच सकता है।