ISHWAR CSE 2023, AIR 555 , RAS Rank 22
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वर्षावनों के पहाड़ ,बादल , आसमान , भीगे दरख्तों के जंगल, घाटियों से बहते झरने। कुदरती खूबसूरती के जितने रूप हो सकते है वो Dzukou Valley (Nagaland)में देखे जा सकते है । एक किलोमीटर की सीधी चढ़ाई और फिर आठ किलोमीटर की पगडंडी जो छ -सात फ़िट ऊँची बाँस की झाड़ियों से गुज़रती है। हर आधे घंटे में बदलता मौसम । कभी धूप तो कभी तेज बारिश । मैंने अभी तक इससे अधिक विराट, और खूबसूरत कुछ नहीं देखा ।
खैर वो सब ठीक था लेकिन यह बात घर पर दादा जी को समझाने का साहस और सामर्थ्य मुझमें नहीं था। मैं जानता था की उनके मन में मुझे पढाने की बहुत तीव्र इच्छा थी। इसलिए छठी कक्षा से ही वो गाहे बगाहे स्कूल में बिना कुछ विशेष कारण के आ जाते और कक्षा में पढ़ा रहे sir को मेरी तरफ़ इशारा करके कह देते थे की “यह अपना ही छोरा है न पढ़े तो खूब पीटो, माकी तरफ़ मु कई मनाई कौने“ वो कभी स्कूल नहीं गए लेकिन समझते थे की नहीं पढ़ने वाले को पढाने का एक ही तरीका है “क़ायदे से कूटो, तराप रखो” (डर के ज़ोर पर पढ़ाओ)। उनके स्कूल आने और कक्षा में आकर मास्टर जी को मेरी पिटाई करने का निर्बाध अधिकार देने की घटनाओं से मुझे बहुत शर्म आती और कक्षा के लड़के- लड़कियों के बीच हँसी का पात्र बनता देख मन ही मन कोसता रहता था कि यह स्कूल में क्यों आ जाते है। लेकिन मुझ पर उनका ख़ौफ़ आसमान जैसा था। आधी छुट्टी में स्कूल से भागकर जीमने और तालाबों में नहानें के कारण कई बार उनके हाथ और पैजार की मार खा चुका था। अब उन्हें यदि यह पता चला कि मैं लगभग फेल हो गया हूँ तो मेरी खैर नहीं। मेरी स्थिति ख़ुशी और ग़म से परे की थी। ना मुझे बहुत दुख हुआ हो ऐसा ही मुझे याद है और ख़ुशी का तो कोई सवाल था ही नहीं। अभी मुझे ठीक याद नहीं की मैंने कैसा महसूस किया लेकिन अपमान ,आत्मतरस, अलग-थलग और पीछे छूट जाने का भाव जरूर था। जैसे अधबीच राह में खड़े व्यक्ति का मन न घर जाने को करे और ना वही रुकने को हो। स्कूल से गांव जाने के बीच कई दिलासे थे । कैसे समझाऊँगा? क्या बताऊंगा ? इस ऊहापोह पर फिर और किसी दिन विस्तार से लिखूँगा।
Part -1 वो निपट जेठ महीने की गर्मियों के तपते हुए दिन थे।नीम की निबोलियाँ पक्क रही थी और दसवीं का रिजल्ट आने वाला था। रिजल्ट स्कूल में आता था और अखबार में प्रकाशित होता। अखबार में रोल नंबर ढूँढने पड़ते थे। बाद में तो इंटरनेट से सीधा वेबसाइट पर ही प्रकाशित होने लगा। लेकिन बोर्ड एग्जाम का ख़ौफ़ सामूहिक होता है। हर कोई घबराया हुआ। वहाँ लड़ाई 90 या 95% की नहीं थी। बल्कि पास और फेल दो ही पैमाने थे। कौन पास हुआ और कौन फेल? फिर भले ही पास होने वाला बाई ग्रेस से हुआ हो या फेल होने वाला सप्लीमेंट्री लगाकर फेल हुआ हो। फेल मतलब फेल। और जो फेल हुआ उसका स्कूल छूट जाना लगभग तय था। किसमें इतनी जान होती थी की फिर से वही किताबें उसी दर्जे में पढ़े। फिर पढ़ना कोई मजेदार बात नहीं लगती थी। जीमणे जाना , खेतों में फसल की रुकाली करने और काकड़ (चराई जंगल) में गाय भैंस बकरियाँ चराना पढ़ने से कई ज़्यादा रोचक काम लगता। वैसे भी फेल होने के बाद ज़्यादातर घर वालों का धैर्य पहले ही जवाब दे चुका होता। और फिर दो की मति का उधार लिया हुआ कर्जा उतारने के लिए किसी को तो सूरत , बैंगलोर काम करने जाना ही पड़ेगा। इसलिए तब दसवीं में विद्यार्थी थोक के भाव फेल होते थे और पढ़ाई छोड़ देते। दसवीं में फेल हो कर काम धंधों और मजदूरियों में लग जाने वाली पूरी पीढी हमसे पहले पढ़कर निपट चुकी थी। एक भरी-पूरी पीढ़ी जिनसे दसवीं की बोर्ड परीक्षा कभी पास नहीं हुई। उन्होंने आइसक्रीम की लाड़ियों, किराना की दुकानों और दूसरे काम धंधों में आजीविका के साधन अपनाए। क्षेत्र में बोर्ड कक्षाओं ( 8 वी, दसवी, बारहवीं) में पढ़ाई छोड़ने के उदाहरण और किस्से हर घर में है। हाँ तो वो रिजल्ट का दिन था …..। गर्मियों की छुट्टियाँ पहले ही पड चुकी थी….। दिन उबाऊ और गर्म थे। अब ठीक से याद नहीं की पहले किसने आकर बताया की रिजल्ट आ गया है लेकिन मालूम हुआ की रिजल्ट अच्छा नहीं रहा; कुछ फेल हो गये और थोड़े ज़्यादा जैस-तैसे पास हो गए; लेकिन एक तीसरी कैटेगरी और थी जो न पास हुए थे और ना ही फेल। जैसे आसमान से गिरा व्यक्ति खजूर पर अटक कर कौतूहल का विषय बन जाता है; वैसा ही कुछ मेरे साथ हुआ था। इंग्लिश और गणित में सप्लीमेंट्री आ गई (यानी इन दो सब्जेक्ट में पास होने के लिए कुछ नंबर कम पड गए ); कुछ दिनों बाद इन दोनों की परीक्षा वापस होगी। उसमें पास हुए तो पास नहीं तो परमानेंट फेल। कोई पूछता कि क्या हुआ रिजल्ट का ? फेल या पास ? तो कहना पड़ता अभी मेरी परीक्षा बाक़ी है; आधो में पास हो गया एक दो विषय रह रहे है उनका पेपर अब होगा। लेकिन कहते हुए ही लगता की बात कुछ जची नहीं। मझधार में फंसे लोग जानते है की डूब जाना उतना बुरा नहीं होता जितना फँसे रहे जाना होता है। खजूर पर अटके हुए लोगों को वैसे भी यह दुनिया गंभीरता से नहीं लेती है । जो फेल हो गए या जिन्हें फेल हो जाने की आशंका थी उन्हें जिंदगी में क्लीयरिटी आ गई की अब पढ़ाई-वढ़ाई करनी है नहीं सो वो पहले ही कमाने बाहर दुकानों और लाड़ियों पर गर्मी की छुट्टियों में चले गए। और जो पास हो गए उन्होंने तो करीब करीब इतिहास ही बना दिया। उनमें बहुतेरे ऐसे भी थे जो अपने घर के पहले दसवीं पास थे। उनके लिए ग्यारहवीं की कक्षा तैयार थी। लेकिन जो न हारे और ना ही जीते; उनकी दयनीय स्थिति थी। अनिर्णय लाचारी, बेचारगी , मजबूरी का अहसास कराता है । उससे भी बुरा था कि परीक्षा दुबारा देनी पड़ेगी। वो भी इंग्लिश और गणित की । जिन लोगों की प्राइमरी एजुकेशन अच्छी हुई या जिनके आसपास पढ़ने-पढाने का परिवेश रहा उन्हें यह बात थोड़ी अजीब जरूर लग सकती है लेकिन जिस क्षेत्र , परिवेश में पढ़ना प्राथमिकता में कभी रहा ही नहीं और गणित में पहाड़ों तथा इंग्लिश में बात A B C D से आगे कभी बढ़ी ही नहीं वहाँ इस तरह की वारदातें हर तीसरे चौथे विद्यार्थी की सच्चाई थी। ख़ुदसे कोई इंग्लिश , गणित कैसे पढ़े ? वो भी दसवीं बोर्ड एग्जाम की ?
शब्द वही है बस साल और समय बदल गया। इस बार UPSC CSE 2024 का रिजल्ट आया है । मेरी रैंक AIR 483 है। लेकिन यह पोस्ट उसको लेकर नहीं है ।शुरुआती असफलताओं के बाद लगातार तीन बार (IRS, IPS, …483*) UPSC की परिणाम सूची में अपना नाम देखना और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) का हिस्सा बनने का गर्व और संतोष मेरे लिए कम नहीं है। 2020 से लेकर आजतक की इस यात्रा की कितनी ही यादें है ;कितनी ही सीखे है। इस प्रिपरेशन में बहुत शानदार दोस्त मिले जिन्होंने जिंदगी की कहानी के एक अंश को बुनने में बहुत मदद की ; बहुत अच्छे शिक्षकों और ढेरों किताबों से सामना हुआ जिन्होंने भीतर के खालीपन को भरा; बहुत हितैषी मिले जिन्होंने अपनी शुभकामनाओं से नियति को मेहरबान करवाया। मेरी वाइफ़ जिसने मेरे बड़े सपने के लिए अपने ख़्वाब ,अपनी खुशियों को ग़ैर जरूरी बताकर मुझे निश्चित हो कर पढ़ने के लिए कहा । परिवार और मददगार साथियों ने असफलताओं में सहारा दिया। कितना कुछ …..। कई परीक्षाओं के कई पेपर, कई शहर , कई ढाबे और चाय की बैठके इस सफ़र की गवाह रही। खूब भटके , ख़ूब रोये । इस एक परीक्षा ने खुदकों माँझने, संवारने में बहुत मदद की , बहुत तजुर्बे दिए। उन सबकों इत्मीनान से किसी और दिन दर्ज करूँगा ; लेकिन आज यह सब लिखने की वजह दूसरी है । मैं सोचता हूँ कि अगर मैं सफल नहीं होता तो क्या मुझे यह सिविल सेवा की यात्रा इतनी ही सुहानी लगती ? या एक त्रासदी की याद बन जाती? पता नहीं । लेकिन मैं सफल नहीं होता तो भी कभी आत्मतरस या हीनता से नहीं भरता , खुदको नहीं कोसता । अफ़सोस ज़रूर होता लेकिन उस अफ़सोस को मैं ज़िन्दगी भर नहीं ढोता। मैं इस असफल कोशिश से जो भी सीखता उससे अपने जीवन को बेहतर बनाने में लगता। मैं प्राइमरी स्कूल टीचर होता और खुश होता। ऐसे बहुत से एग्जाम्पल है जो बताते है की UPSC की परीक्षाओं में असफल लोगो ने अपने अपने क्षेत्रों में कमाल किया है। मेरे लिए UPSC की यात्रा आज समाप्त हुई।जीवन अब एक नहीं राह के मुहाने पर है और अब भारतीय पुलिस सेवा(IPS) ….ही स्वधर्म है । लेकिन जिन के लिए यह सफ़र अधूरा है या जिन्हें कामयाबी नहीं मिली उनके लिए एक बात जो मैंने UPSC CSE 2023 के रिजल्ट के समय लिखी थी - वही बात दोहराता हूँ … लिस्ट में 1016 उम्मीदवारों का सिलेक्शन हुआ है। हर नाम के पीछे एक कहानी होगी। हर कहानी का एक संघर्ष होगा। लेकिन इन 1016 सफ़ल कहानियों के बाहर इसी एग्जाम की अनगिनत अनाम कहानियाँ है। जो अंतिम चयन सूची में दर्ज नहीं है। रिज़ल्ट के बाद का शोर जब आपके लिये सन्नाटे में बदलता है तो कोई मोटिवेशनल कहानी काम नहीं आती। तब ख़ुद पर एतबार और सख़्त दिली बहुत ज़रूरी होती है। ऐसे बहुत से उदाहरण है जो बताते हैं कि इस परीक्षा की असफलता जीवन की असफलता नहीं बनती है। मेरे बहुत से दोस्त है जो एक नंबर, दो नंबर , तीन नंबर ….। से इस एग्जाम की प्रक्रिया से बाहर हुए है। मैं भी इसी तरह से कई बार अलग-अलग एग्जाम में असफल हुआ। सिविल सर्विस के एग्जाम में भी इंटरव्यू देने के बाद जब एक नंबर से प्रिलियम्स नहीं हुआ तो समझ आया कि कोई दिलासा काम नहीं आता। भीतर सब बिखर जाता है। सुझता नहीं कुछ। कई बार यह घुटन बहुत गहरी होती है जब आप सफलता के बहुत नज़दीक होकर भी चूक जाते है तो। ऐसे में सफलता और असफ़लता के बीच की दूरी को कम करना बहुत ज़रूरी होता है। हम सब के लिये सफलता के पैमाने आत्मनिष्ठ हो सकते है। और होते भी है। लेकिन मैंने यह महसूस किया है कि आपकी सफलता चाहे कितनी ही भव्य क्यों ना हो या फिर आपकी असफ़लता कितनी ही विनाशकारी क्यों ना हो। दुनिया को कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ता है। यह सब ऐसे ही चलता रहता है। साल दर साल रिज़ल्ट आते है…..। सदियों से यही चल रहा है। सारी लड़ाइयाँ व्यक्तिगत होती है। इसलिए अपने सपने , अपने चयन , अपने ख़्याल बचा के रखो। उन्हें सफलता के बोझ से बोझिल न होने दो। और ना ही नाकामयाबियों को नाकामयाबियाँ ही समझा । यह सब इसलिए क्योंकि कोई है जिसे फिर उठना है, पढ़ना है। वही चीजे बार बार दोहरानी है। उन्हीं किताबों से राबता करना। मुश्किल है। लेकिन बनने के लिए किसी को लड़ते, झूंझते संघर्ष करते देखने से खूबसूरत भी कुछ नहीं है। तो बस एक बार और……….।
6. ख़ुद पर ऐतबार- सोचता था सफल नहीं हुए तो क्या करेंगे । तो ख्याल आता था की इतना पढ़ लिए है देश दुनिया के बारे में तो कुछ बड़ा काम तो करेंगे । पत्रकार , लेखक, शिक्षा, अकादमिक जगत में, बिजनेस, नहीं तो राजनीति । कुछ तो कर ही लेंगे । इस सोच के कारण पढ़ने में मजा आता था कि यह सब जानकारी और ज्ञान कहीं काम आयेगा । इससे कभी UPSC को सब कुछ नहीं बनाया । होगा तो ठीक नहीं होगा तो ठीक.
UPSC CSE का अंतिम एटेम्पट , CSE 2024 तक चार मेन्स, चार इंटरव्यू और लगातार तीन सिलेक्शन। दो बार प्रीलियम्स फेल । इस पूरे सफ़र में कुछ चीजों ने बहुत मदद की जैसे - 1.भाषा(language)- मैंने अपने एग्जाम के माध्यम कि भाषा (हिंदी) को बहुत अच्छे से लिखना और बोलना सीखा। अच्छी भाषा हमेशा काम आती है । उसके लिए अच्छा बोलने वालों और अच्छा लिखने वालों को सुना और पढ़ा। 2. किताबें- साहित्य, जीवनियाँ और आत्मकथाएं फिक्शन और नॉन फिक्शन बुक्स को पढ़ने के शौक ने आंसर राइटिंग में बहुत मदद की । किताबों ने बहुत सी गलतफहमियों को दूर किया और व्यक्तित्व विकास में सहायता की जिससे कॉन्फिडेंस आया 3. संप्रेषण कौशल (communication skill) - बात करने और अपनी बात को सलीके से प्रस्तुत करने के हुनर के कारण हमेशा इंटरव्यू में अच्छे मार्क्स आए है और समय के साथ मार्क्स बढ़ते गए ( जैसे - 168, 160, 195 और इस बार 200) अगर मैं सफल हो पाया तो उसमें सबसे बडा रोल इंटरव्यू मार्क्स का ही है । यह अच्छे शब्दों के साथ अपने व्यक्तिगत जीवन के अनुभवों और कंटेंट को बिना किसी हीन भावना के पूरे कॉन्फ़िडेंस के साथ बताने के कारण संभव हुआ 4. अच्छें दोस्त और उनसे सीखना - किसी ने हैंडराइटिंग सुधरवा दी , किसी ने इंग्लिश में कॉंफिडेंस दिया , किसी ने ऑप्शनल तैयार करवाया तो किसी ने कुछ न करके भी विश्वास कर हिम्मत दी किसी की विध्वंसक आलोचना को अपने पर हावी नहीं होने दिया , नकारात्मकता से दूर रहने के लिए अच्छे लोगों से मार्गदर्शन लेते रहे , लिखते पढ़ते खुद को बहेतर बनाते रहे 5. इंटरनेट और यूट्यूब ना होता तो मैं शायद कभी सफल नहीं होता । विकिपीडिया से खूब कंटेंट पढ़ने को मिला , कोचिंग्स के नोट्स और वेबसाइट कंटेंट, टॉपर्स कॉपीज़ से बहुत मदद मिली
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UPSC IFS 2025 Notification Vacancy- 150
Civil Service Examination- Notification 2025 अगर आपने पढ़ाई में अपने समय का निवेश किया है या लोक सेवक बनने का सपना देखा है तो CSE 2025 का फॉर्म भरिए। कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि आपकी परिस्थितियाँ कैसी है, नौकरी है या नहीं है, मीडियम कौनसा है, उम्र और एटेम्पट ? RAS दे रहे है या REET की तैयारी कर रहे है ? यह एग्जाम आपको बहुत कुछ सिखाएगा यदि आप इसे नौकरी की तरह ना देखे और बोझ ना बनने दे तो। LAST DATE FOR RECEIPT OF ONLINE APPLICATIONS : 11.02.2025 till 6 PM Vacancies- 979
"कुछ भी बाद के लिए मत छोड़ो। बाद में, कॉफी ठंडी हो जाती है। बाद में, तुम्हारी रुचि खत्म हो जाती है। बाद में, दिन रात में बदल जाता है। बाद में, लोग बड़े हो जाते हैं। बाद में, लोग बूढ़े हो जाते हैं। बाद में, ज़िंदगी गुजर जाती है। बाद में, तुम पछताते हो कि कुछ क्यों नहीं किया... जब तुम्हारे पास मौका था। ज़िंदगी एक क्षणभंगुर नृत्य है, एक नाज़ुक संतुलन, जो हमारे सामने खुलने वाले पलों से बनी है, जो फिर कभी उसी तरह लौटकर नहीं आते। पछतावा एक कड़वी दवा है, एक बोझ जो आत्मा पर भारी पड़ता है, छूटे हुए अवसरों और अनकहे शब्दों के साथ। तो, कुछ भी बाद के लिए न छोड़ें। पलों को उसी समय थाम लें, जब वे आएं, खुले दिल और फैलाए हुए हाथों से उन संभावनाओं को गले लगाएं, जो आपके सामने हैं। क्योंकि अंत में, हमें उन चीज़ों का पछतावा नहीं होता, जो हमने कीं, बल्कि उन चीज़ों का होता है, जो हमने नहीं कीं, उन शब्दों का, जो अनकहे रह गए, और उन सपनों का, जो अधूरे रह गए।" ~ तोशीकाजु कावागुची पुस्तक: बिफोर द कॉफी गेट्स कोल्ड
RAS mains result
मैंने 2018 का RAS मेंस एग्जाम लिखा था; मेंस का जब तक रिजल्ट नहीं आया तब तक मैं बहुत कॉन्फ़िडेंट था कि मैं कम से कम इंटरव्यू के लिए सिलेक्ट हो जाऊँगा। बहुत ख़्याली पुलाव पकाता, बहुत सपने देखे, कि RAS मेंस क्लियर होगा तो इंटरव्यू ऐसा दूँगा की BDO या तहसीलदार तो बन ही जाऊँगा। उस समय मेंस का रिजल्ट आने में बहुत महीने लगे ; और जब रिजल्ट आया तो PDF में मेरा नाम नहीं था। 40-42 नंबर कम थे cut off 341-343 गई थी और मेरे नंबर 303 थे। मैं स्वीकार ही नहीं कर पा रहा था कि मेरा मेंस क्लियर नहीं हुआ। सारे सपने धरे रहे गये; ख़ुद को समझाने और दूसरों को बताने के लिए बहाने बनाता कि कॉपी ढंग से चेक नहीं हुई, RPSC यह करती है, आंदोलन, HC में रीट। ख़ुद को सांत्वना देने के लिए कई तरीक़े होते है। उस समय लग रहा था कि ग़लत हुआ लेकिन बहुत बाद में जाकर एहसास हुआ कि इससे अच्छा और कुछ हो ही नहीं सकता था। भगवान ने ठीक किया कि मेरे को RAS मेंस में फेल कर दिया RAS 2018 की भर्ती के बाद अगली वैकेंसी बहुत बाद में 2021 में आयी तब तक मैं SI और थोड़ा बहुत UPSC की तैयारी करता रहा। समय खूब था तो दूसरी किताबें पढ़ी, यूट्यूब से UPSC के बारे में सारा ABCD पता किया। कोरोना काल में UPSC CSE 2020 का प्री दिया। जोग संजोग से प्री क्लियर हो गया तो तीन महीने की तैयारी से मेंस लिखा। पहली बार UPSC मेंस लिखकर बहुत मज़ा आया। मैं अपने प्रयासों से खुश था। मुझे सिलेक्शन की उम्मीद नहीं थी। लेकिन संजोग से UPSC का इंटरव्यू कॉल आ गया। दिल्ली इंटरव्यू देने गया। फिर खूब सपने देखे। हिन्दी माध्यम टॉप करने के सपने आते थे। लेकिन हुआ वही जो होना था। फिर से 39 नंबर से फाइनल सिलेक्शन नहीं हुआ। और फाइनल रिजल्ट के दस दिन बाद ही upsc cse 2021 का प्री एग्जाम था। तनाव , टेंशन के कारण वो भी क्लियर नहीं हुआ। 2018 से 2021 तक कुछ हाथ नहीं लगा। फिर RAS 2021 की भर्ती फिर आयी। मैंने उसमें सब कुछ झोंक दिया। प्री और तीन चार महीने में मेंस लिखा और फ़ाइनली 22 वी रैंक आयी। यह सब इसलिए साझा कर रहा हूँ कि आप इस बात को समझेंगे कि यदि मैं RAS 2018 मेंस फेल नहीं होता तो शायद उतनी अच्छी रैंक नहीं लगा पाता और ना ही upsc कभी निकलता। कभी कभी आंशिक सफलताओं से असफलताएँ ज़्यादा अच्छी और मददगार होती है। इसलिए यदि आपका RAS का मेंस क्लियर हुआ है तो ज़्यादा उत्साहित ना हो , आत्मविश्वास में रहो पर उम्मीद ज़्यादा मत लगाओ और आपका मेंस क्लियर नहीं हुआ है तो आप सबसे अच्छी स्थिति में हो की एक महीने बाद RAS प्री का एग्जाम है और जून में मेंस। आपके पास बहुत अच्छी रैंक लगाने का मौक़ा है। आप टॉप 10 में आ सकते है। इसलिए हर स्थिति में RAS प्री एग्जाम पर फ़ोकस करो। रिजल्ट आते जाते रहेंगे। अभी बहुत एग्जाम देने है। 💐
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First day in Khaki. Beginning of life in Khaki; felt very proud. Life will show many faces but such moments come very rarely when a dream seen with open eyes comes true. Thanks to everyone who gave me the courage and inspiration to move forward.💐
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जब भी जीवन से भरे हुए, उत्कट जीवटता वाले किसी व्यक्ति के बारे में सोचता हूँ, तो उसका चेहरा सबसे पहले याद आता है। आर्थिक अभाव, पारिवारिक ज़िम्मेदारियाँ, आलोचनाएँ, अनुत्तरित प्रश्नों की श्रृंखला, भावनात्मक धक्के, असफलताएँ; दुर्भाग्य का कोई ऐसा चेहरा नहीं जो उसने नहीं देखा, खूब गिरा, कई बार हारा, फेल हुआ, तिरस्कृत हुआ पर हताश नहीं; उदास नहीं। लाचार और बेचारागी उसने अपने चेहरे पर नहीं ओढ़ी। वो जानता है कि कई बार मज़बूत होने से ज़्यादा ज़रूरी मज़बूत दिखना होता है। मुफ़लिसी और यतीम होने के दुःख को जैसे वो पी गया। ऐसा बहुत कुछ था जिसकी शिकायत वो विधाता से कर सकता था, भाग्य को कोसता या समझौते कर सकता था पर उसने अभावों और चुनौतियों में भी अपनी मस्ती को ज़िंदा रखा। आत्मविश्वास उसे बहुत था, चेहरे पहचानता था, दुनिया की चाल उसने देखी थी। वो हँसता रहा ताकि लोग उसे सहानुभूति की नज़र से ना देखे। वो पढ़ता रहा क्योंकि लौट जाने के रास्ते उसने ख़ुद बंद किए। उसने ख़ुद को गढ़ा, बोलने, जीने , पढ़ने , बढ़ने के बारे में बेहतर बनता रहा। UP PCS का इंटरव्यू दिया पर फाइनल नहीं हुआ, BPSC मेंस दिया, पर चूक गया। UPSC प्री फेल हुआ; फिर से शुरू किया इस बार UPSC मेंस दिया। प्राइवेट बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर LLB किया, गाँव से इलाहाबाद , इलाहाबाद से दिल्ली। कितने कमरे बदले; कितनी खुशामदें की; दुनिया जैसे मैला पर मन अकेला। सारी लड़ाइयाँ बाहरी जगत में नहीं लड़ी जाती, कुछ संघर्ष मन में , मन से भी होते है। आज BPSC में उसकी 153 रैंक लगी है और वो अधिकारी बना। ईदगाह का हामिद जैसे तीन आने की क़ीमत जानता था; चिमटा ख़रीदने भर से परिस्थितियाँ नहीं बदलती लेकिन वो एक भावनात्मक सहारा तो बन सकता है। यह और बात है कि जीवन में कई परीक्षाएँ और होनी है; बहुत परिणाम अभी आने है। लेकिन वो कैसे बताए कि रिज़ल्ट अम्मा के लिए कितना ज़रूरी था।
प्रश्न- UPSC क्यों करे, या कुछ और करे?? उत्तर- ज़रूरी नहीं है कि आप ही UPSC करे, आप कुछ भी करने के लिए स्वतंत्र है।