LAL KITAB KE SARAL UPAY BY PRASHANT
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अमावस्या : वर्ष के मान से उत्तरायण में और माह के मान से शुक्ल पक्ष में देव आत्माएं सक्रिय रहती हैं तो दक्षिणायन और कृष्ण पक्ष में दैत्य आत्माएं ज्यादा सक्रिय रहती हैं। जब दानवी आत्माएं ज्यादा सक्रिय रहती हैं, तब मनुष्यों में भी दानवी प्रवृत्ति का असर बढ़ जाता है इसीलिए उक्त दिनों के महत्वपूर्ण दिन में व्यक्ति के मन-मस्तिष्क को धर्म की ओर मोड़ दिया जाता है। अमावस्या के दिन भूत-प्रेत, पितृ, पिशाच, निशाचर जीव-जंतु और दैत्य ज्यादा सक्रिय और उन्मुक्त रहते हैं। ऐसे दिन की प्रकृति को जानकर विशेष सावधानी रखनी चाहिए। प्रेत के शरीर की रचना में 25 प्रतिशत फिजिकल एटम और 75 प्रतिशत ईथरिक एटम होता है। इसी प्रकार पितृ शरीर के निर्माण में 25 प्रतिशत ईथरिक एटम और 75 प्रतिशत एस्ट्रल एटम होता है। अगर ईथरिक एटम सघन हो जाए तो प्रेतों का छायाचित्र लिया जा सकता है और इसी प्रकार यदि एस्ट्रल एटम सघन हो जाए तो पितरों का भी छायाचित्र लिया जा सकता है। ज्योतिष में चंद्र को मन का देवता माना गया है। अमावस्या के दिन चंद्रमा दिखाई नहीं देता। ऐसे में जो लोग अति भावुक होते हैं, उन पर इस बात का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है। लड़कियां मन से बहुत ही भावुक होती हैं। इस दिन चंद्रमा नहीं दिखाई देता तो ऐसे में हमारे शरीर में हलचल अधिक बढ़ जाती है। जो व्यक्ति नकारात्मक सोच वाला होता है उसे नकारात्मक शक्ति अपने प्रभाव में ले लेती है। धर्मग्रंथों में चंद्रमा की 16वीं कला को 'अमा' कहा गया है। चंद्रमंडल की 'अमा' नाम की महाकला है जिसमें चंद्रमा की 16 कलाओं की शक्ति शामिल है। शास्त्रों में अमा के अनेक नाम आए हैं, जैसे अमावस्या, सूर्य-चंद्र संगम, पंचदशी, अमावसी, अमावासी या अमामासी। अमावस्या के दिन चंद्र नहीं दिखाई देता अर्थात जिसका क्षय और उदय नहीं होता है उसे अमावस्या कहा गया है, तब इसे 'कुहू अमावस्या' भी कहा जाता है। अमावस्या माह में एक बार ही आती है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि का स्वामी पितृदेव को माना जाता है। अमावस्या सूर्य और चंद्र के मिलन का काल है। इस दिन दोनों ही एक ही राशि में रहते हैं। मुख्य अमावस्या : भौमवती अमावस्या, मौनी अमावस्या, शनि अमावस्या, हरियाली अमावस्या, दिवाली अमावस्या, सोमवती अमावस्या, सर्वपितृ अमावस्या। चेतावनी : इस दिन किसी भी प्रकार की तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन शराब आदि नशे से भी दूर रहना चाहिए। इसके शरीर पर ही नहीं, आपके भविष्य पर भी दुष्परिणाम हो सकते हैं। जानकार लोग तो यह कहते हैं कि चौदस, अमावस्या और प्रतिपदा उक्त 3 दिन पवित्र बने रहने में ह
. #ज्योतिष_शास्त्र_में_शिक्षा_के_योग : . दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण करते ही उच्च शिक्षा हेतु ‘कौन-सा विषय चुनें’ यह यक्ष प्रश्न विद्यार्थियों के सामने आ खड़ा होता है ! शिक्षा के वर्ग/विषय का चुनाव करने से पहले माता-पिता को अपनी महत्वाकांक्षाओं को परे रखकर एक नजर बालक की कुण्डली पर भी डाल लेनी चाहिए ! बच्चे किस विषय में सिद्धहस्त होंगे, यह तथ्य कुण्डली में स्थित ग्रह स्पष्ट रूप से बताते है ! आज जीवन के हर मोड़ पर आम आदमी स्वयं को खोया हुआ महसूस करता है ! विशेष रूप से वह विद्यार्थी जिसने हाल ही में दसवीं या बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है, उसके सामने सबसे बड़ा संकट यह रहता है कि वह कौन से विषय वर्ग का चयन करे जो उसके लिए लाभदायक हो ! . इस समस्या के समाधान के लिए एक अनुभवी ज्योतिषी आपकी अच्छी मदद कर सकता है ! जन्मपत्रिका में पंचम भाव से शिक्षा तथा नवम भाव से उच्च शिक्षा तथा भाग्य के बारे में विचार किया जाता है ! सबसे पहले जातक की कुण्डली में पंचम भाव तथा उसका स्वामी कौन है तथा पंचम भाव पर किन-किन ग्रहों की दृष्टि है, यह ग्रह शुभ-अशुभ है अथवा मित्र-शत्रु, अधिमित्र हैं, बली हैं, कमजोर हैं, अस्त हैं, या वक्री हैं इसका विचार कर लेना चाहिए ! . दूसरी बात नवम भाव एवं उसका स्वामी, नवम भाव में स्थित ग्रह, नवम भाव पर ग्रह दृष्टि आदि शुभाशुभ का जानना ! तीसरी बात जातक का सुदर्शन चक्र स्थित श्रेष्ठ लग्न के दशम भाव का स्वामी नवमांश कुण्डली में किस राशि में किन परिस्थितियों में स्थित है, ज्ञात करना, तीसरी स्थिति से जातक की आय एवं आय के स्त्रोत का ज्ञान होगा ! . जन्मकुण्डली में जो सर्वाधिक प्रभावी ग्रह होता है, सामान्यत: व्यक्ति उसी ग्रह से सम्बंधित कार्य-व्यवसाय करता है ! यदि हमें कार्य व्यवसाय के बारे में जानकारी मिल जाती है तब शिक्षा भी उसी से सम्बंधित होगी ! जैसे यदि जन्म कुण्डली में गुरु सर्वाधिक प्रभावी है तब जातक को चिकित्सा, लेखन, शिक्षा, खाद्य पदार्थ के द्वारा आय होगी ! यदि जातक को चिकित्सक योग है तब जातक जीव विज्ञान विषय लेकर चिकित्सक बनेगा ! यदि पत्रिका में गुरु कमजोर है तब जातक आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक, रैकी या इनके समकक्ष ज्ञान प्राप्त करेगा ! श्रेष्ठ गुरु होने पर एमबीबीएस की पढ़ाई करेगा ! यदि गुरु के साथ मंगल का श्रेष्ठ योग बन रहा है तब शल्य चिकित्सक, यदि सूर्य से योग बन रहा है तब नेत्र चिकित्सा या सोनोग्राफी या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण से सम्बंधित विषय की शिक्षा, यदि शुक्र है तब महिला रोग विशेषज्ञ, बुद्ध है तो मनोरोग तथा राहु है तो हड्डी रोग विशेषज्ञ बनेगा ! . चंद्र की श्रेष्ठ स्थिति में किसी विषय पर गहन अध्ययन करेगा - लेखक, कवि, श्रेष्ठ विचारक बनेगा तथा बीए, एमए कर श्रेष्ठ चिंतनशील, योजनाकार होगा ! सूर्य के प्रबल होने पर इलेक्ट्रॉनिक से सम्बंधित शिक्षा ग्रहण करेगा ! यदि मंगल अनुकूल है तब ऐसा जातक कला, भूमि, भवन, निर्माण, खदान, केमिकल आदि से सम्बंधित विषय शिक्षा ग्रहण करेगा ! बुद्ध प्रधान कुण्डली वाले जातक बैंक, बीमा, कमीशन, वित्तीय संस्थान, वाणी से सम्बंधित कार्य, ज्योतिष-वैद्य, शिक्षक, वकील, सलाहकार, चार्टड अकाउंटेंट, इंजीनियर, लेखपाल आदि का कार्य करते हैं ! अत: ऐसे जातक को साइंस, गणित की शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए किंतु यदि बुद्ध कमजोर हो तब वाणिज्य विषय लेना चाहिए ! बुद्ध की श्रेष्ठ स्थिति में चार्टड अकाउंटेंट की शिक्षा ग्रहण करना चाहिए ! शुक्र की अनुकूलता से जातक साइंस की शिक्षा ग्रहण करेगा ! शुक्र की अधिक अनुकूलता होने से जातक फैशन, सुगंधित व्यवसाय, श्रेष्ठ कलाकार तथा रत्नों से सम्बंधित विषय को चुनता है ! शनि ग्रह की मजबूती प्रबंध, लौह तत्व, तेल, मशीनरी आदि विषय का कारक है ! अत: ऐसे जातकों की शिक्षा व्यवधान के साथ पूर्ण होती है ! शनि के साथ बुद्ध होने पर जातक एमबीए फाइनेंस में करेगा ! यदि शनि के साथ मंगल भी कारक है तब सेना-पुलिस अथवा शौर्य से सम्बंधित विभाग में अधिकारी बनेगा ! राहु की प्रधानता कुटिल ज्ञान को दर्शाती है ! केतु – तेजी मंदी तथा अचानक आय देने वाले कार्य शेयर, तेजी मंदी के बाजार, सट्टा, प्रतियोगी क्वीज, लॉटरी आदि सम्बन्धी कार्य करेगा ! कभी-कभी एक ही ग्रह विभिन्न विषयों के सूचक होते हैं तब ऐसी स्थिति में जातक एवं ज्योतिषी दोनों ही अनिर्णय की स्थिति में आ जाते हैं ! उसका सही अनुमान लगाना ज्योतिषी का कार्य है ! ऐसी स्थिति में देश, काल एवं पात्र को देखकर निर्णय लेना उचित रहेगा ! जैसे नवमांश में बुद्ध का स्वराशि में स्थित होना ज्योतिष, वैद्य, वकील, सलाहकार का सूचक है ! अब यहां जातक के पिता का व्यवसाय (स्वयं की रुचि) जिस विषय की होगी, वह उसी विषय का अध्ययन कर धनार्जन करेगा !
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पढाई में एकाग्रता के लिए माता सरस्वती की पूजा-अर्चना और आराधना करनी चाहिए. अगर आप सुबह उठकर माता सरस्वती की पूजा करके उनका स्मरण करते हैं. तो पढाई में एकाग्रता बनती हैं. पढाई में एकाग्रता के लिए आप पीपल के पेड़ की पूजा कर सकते हैं. पढाई में एकाग्रता लाने के लिए आपको तीन गुरुवार पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए. इसके बाद पीपल के पेड़ को पांच प्रकार की अलग-अलग मिठाई अर्पित करके दो इलायची चढ़ाए. लाल किताब के इस उपाय से पढाई में एकाग्रता बनती हैं. अगर किसी बच्चे का पढाई में मन नही लगता हैं. या फिर पढाई में एकाग्रता नही बनती हैं. ऐसे बच्चो के माता-पिता को किसी जरूरतमंद या फिर गरीब बच्चो को पढाई की वस्तु दान करनी चाहिए. अगर आप चाहे तो किसी गरीब बच्चे की पढाई का पूरा खर्चा भी उठा सकते हैं. लाल किताब के इस उपचार से आपके बच्चे की पढाई में एकाग्रता बनेगी. कई बार हम देखते है की काफी बच्चे पढाई तो करते हैं. लेकिन पढाई करने के बाद उन्हें याद नही रहता हैं. और इस वजह से निराश होकर बैठ जाते हैं. ऐसे बच्चे को तुलसी के रस के साथ शहद मिलाकर खिलाना चाहिए. इससे बच्चे की यादशक्ति में वृद्धि होती हैं. अगर आप लाल किताब का यह उपचार करते है. तो आपके बच्चे की एकाग्रता शक्ति में कुछ ही दिनों में वृद्धि होती हैं. पढाई में एकाग्रता बढाने के लिए गायत्री मंत्र काफी प्रभावशाली माना जाता हैं. जिन बच्चो की एकाग्रता शक्ति कमजोर होती हैं. उन बच्चो को रोजाना सुबह के समय 21 बार गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए. गायत्री मंत्र से बच्चो के दिमाग पर काफी अच्छा प्रभाव पड़ता हैं. इसलिए पढाई में एकाग्रता पाने के लिए गायत्री मंत्र का जाप करे. भगवान गणेश की आराधना से भी पढाई में एकाग्रता बढती हैं. पढाई में एकाग्रता लाने के लिए आपको भगवान गणेश के मंदिर जाना हैं. और भगवान गणेश की पूजा अर्चना करनी हैं. साथ-साथ आपको मूंगदाल और थोड़ी सी इलायची भगवान गणेश को अर्पित करनी हैं. लाल किताब के इस उपाय से बच्चे की एकाग्रता शक्ति में वृद्धि होती हैं. कई बार बुध ग्रह के बुरे प्रभाव के कारण बच्चो का पढाई में मन नहीं लगता हैं. ऐसे में आपको अपने बच्चे की कुंडली किसी अच्छे से ज्योतिष को दिखानी चाहिए. और बुध ग्रह को शांत करने के उपाय करने चाहिए. इससे एकाग्रता शक्ति में वृद्धि होती हैं.
1. वाहन सुख :- शिव पूजा में चमेली के फूल चढ़ाने पर कामना पूरी होती है। 2. धन की प्राप्ति :- भगवान शिव को चावल अर्पित करे। कमल, शंखपुष्प, और बिल्वपत्र भगवान पर अर्पित करे। 3. किसी भी तरह का रोग :- तिल चढ़ाने से रोगों का नाश हो जाता है। 4. वस्त्रों की कमी :- कनेर के फूलों से पूजा करे। 5. जीवन में सुख :- जौ अर्पित करने से सुख में वृद्धि होती है। मूंग दाल अर्पित करें। 6. पुत्र कामना :- लाल फूल वाला धतूरा अर्पित करे। (अभाव में सामान्य धतूरा भी चढ़ा सकते हैं। ), गेहूं चढ़ाने से संतान में वृद्धि होती है। 7. विवाह :- मक्का अर्पित करे। 8. सेहत व लंबी उम्र :- दूर्वा चढ़ाए। 9. अन्न प्राप्ति :- जूही के फूलों से पूजा करे। 10. सम्मान प्राप्ति :- अगस्त्य के फूल अर्पित करें। 11. दिमाग तेज :- शक्कर मिला हुआ दूध अर्पित करें। 12. अशांति और तनाव :- शेफालिका के फूल अर्पित करें। 13. आनन्द प्राप्ति :- गन्ना के रस से पूजा करे। 14. मोक्ष प्राप्ति :- गंगाजल और सफेद कमल के फूलों को अर्पित करें। 15. सभी मनोकामनाएं :- शिवलिंग पर प्रतिदिन कच्चा गाय का दूध अर्पित करें। गाय को माता माना गया है अत: गौमाता का दूध पवित्र और पूजनीय है।
तंत्र क्रिया, जादू टोने या फिर भूत प्रेत, ऊपरी हवाओं से बचने के लिए करें ये उपाय- 1- ऊपरी हवाओं से मुक्ति पाने के लिए, हनुमान चालीसा का पाठ 7 बार पढ़कर जल अभिमंत्रित करें औऱ पीड़ित व्यक्ति को पीला दे। 2- 108 बार गायत्री का जप करने के बाद गाय के घी से गायत्री यज्ञ करने से तुरंत लाभ मिलता है। 3- सूर्यास्त के समय स्नान करके एक साफ-सुथरे बर्तन में आधा किलो गाय के कच्चे दूध में शुद्ध शहद की नौ बूंदें मिलावें। अब घर की छत से नीचे तक प्रत्येक कमरे, जीने, गैलरी आदि सभी जगहों पर उस दूध के छींटे हनुमान चालीसा का पाठ या गायत्री मंत्र का उच्चारण करते रहे। बचे हुए दूध को मुख्य द्वार के बाहर गिरा दें। 4- रविवार के दिन सुबह दाहिने हाथ की बांह पर काले धतूरे की जड़ बांधने से ऊपरी हवाओं से तुरंत मुक्ति मिलती है। 5- लहसुन के रस में हींग घोलकर आंख में डालने या सुंघाने से पीड़ित व्यक्ति को ऊपरी हवाओं तुरंत मुक्ति मिलता है। 6- ष् ओम नमो भगवते रुद्राय नमः कोशेश्वस्य नमो ज्योति पंतगाय नमो रुद्राय नमः सिद्धि स्वाहा। श्श 7- घर के मुख्य द्वार के पास सफेद अकाव का पौधा लगाने से भूत-प्रेत, ऊपरी हवाओं से हमेशा रक्षा होती है। 8- ऊपरी बलाओं से मुक्ति के लिए प्रातः काल इस बीज मंत्र "झ्क्लींश्" का उच्चारण करते हुए काली मिर्च के नौ दाने सिर पर से घुमाकर दक्षिण दिशा की ओर फेंक दें। 9- रविवार स्नान के बाद सुबह काले कपड़े की छोटी थैली में तुलसी के आठ पत्ते, आठ काली मिर्च और सहदेई की जड़ बांधकर गले में धारण करें, नजर दोष बाधा से आजीवन बचाएं रखेगी।
1- रविवार का दिन- अगर किसी की कुंडली में सूर्य के कमज़ोर होने पर व्यक्ति को अपने जीवन में किसी भी क्षेत्र में सफलता नहीं मिल पाती । सूर्य को प्रसन्न करने के लिए नियमित जल अर्पित करें । रविवार का उपाय- किसी गरीब अथवा जरूरतमंद व्यक्ति को गुड़ का दान करें । 2- सोमवार का दिन- अगर किसी की कुंडली में चंद्र दोष है या चंद्रमा कमज़ोर स्थिति में है तो व्यक्ति को हमेशा कोई न कोई बीमारी लगी रहती है । सर्दी-जुकाम, नेत्र संबंधी रोग और अर्थराइटिस से आप परेशान रहते हैं । चंद्र ग्रह को शांत करने के लिए आपको सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करना चाहिए । सोमवार का उपाय- हो सके तो किसी गरीब परिवार को भोजन करायें । भोजन में दूध से बने पदार्थ होने चाहिए । 3- मंगलवार का दिन- कहा जात है कि मंगल कई प्रकार की शारीरिक बीमारियां देता है । कुंडली में मंगल को मजबूत करने के लिए आपको मंगलवार के दिन हनुमान जी और मां काली की आराधना करना चाहिए । मंगलवार का उपाय- छोटी कन्याओं को उड़द, मूंग या तुअर की दाल से बना भोजन खिलाएं 4- बुधवार का दिन- अगर कुंडली में बुध कमज़ोर हो तो उसे मजबूत करने के लिए बुधवार के दिन भगवान गणेश जी को 11 लड्डूओं का भोग लगाएं और दूर्वा चढ़ाएं । बुधवार का उपाय- बुधवार के दिन शाम के समय गणेश मंदिर के सामने कोई भिखारी दिखाई दे तो उसे पीली रूमाल या कपड़ा जरूर दान करें । 5- गुरुवार का दिन- गुरुवार का दिन देवों के गुरु बृहस्पति देव की आराधना का दिन माना जाता हैं । अगर किसी की कुंडली में गुरु नीच या कमज़ोर स्थान में हो तो उसे अवनति मिलती है । इस दिन भगवान विष्णु को खीर का भोग लगाने से गुरु को मजबूती मिलती हैं । गुरुवार का उपाय- इस दिन पीली वस्तुओं, पीले रंग के वस्त्रों और जनेऊ का दान करें ।
कठिन परिस्थितियों में - दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।' कार्य सिद्धि के लिये - और मनोरथ जो कोई लावै, सोई अमित जीवन फल पावै।' ऐश्वर्य प्राप्ति के लिये - अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता।' संपत्ति की प्राप्ति के लिए - जे सकाम नर सुनहि जे गावहि। सुख संपत्ति नाना विधि पावहि।। हर प्रकार के संकट दूर करने के लिए - दीनदयाल बिरिदु सम्भारी। हरहु नाथ मम संकट भारी। मुकदमा जीतने के लिए - पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना।। संतान प्राप्ति के लिये- प्रेम मगन कौसल्या निसिदिन जात न जान। सुत सनेह बस माता बाल चरित कर गान।। मनोकामनाओं की पूर्ति के लिये- भव भेषज रघुनाथ जसु,सुनहि जे नर अरू नारि। तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहि त्रिसिरारि।। कठिन से कठिन कार्य के लिये - कवन सो काज कठिन जग माही! जो नहीं होइ तात तुम पाहीं!! सुख संपत्ति के लिये - जे सकाम नर सुनहि जे गावहि! सुख संपत्ति नाना विधि पावहि!!
गुरु दीक्षा के नियम नियम 1: कभी भी गुटका, तंबाकू, शराब आदि और व्यसन न खाएं और कभी दुर्व्यवहार न करें। नियम 2: कभी गुरु की निंदा न करें और हमेशा उसकी आज्ञाओं का पालन करें। नियम 3: ऑनलाइन वीडियो द्वारा कान में गुरु मंत्र को सुनो और बताये गयी विधि की तरह संकल्प लो । नियम 4: गुरुमन्त्र को किसी को भी नहीं बताना चाहिए (जैसे उसके माता-पिता, पति-पत्नी, भाई-भाई आदि)। नियम 5: हर सुबह और शाम को, बैठकर गुरु मंत्र को नियमित रूप से कम से कम 5 मिनट या 1 माला के लिए नियमित रूप से जप करना जरूरी है। नियम 6: हर समय, हमेशा गुरु मंत्र का जप करते हैं, हर पल में हर जगह। नियम 7: किसी भी परिस्थिति में मंत्र मंत्र को मत छोड़ो जैसे कि किसी की मौत, या स्त्री धर्म आदि। ध्यान, पूजा, पूजा, मंत्र मंत्र न छोड़ें। नियम 8: एक वर्ष में एक बार, गुरु-पूर्णिमा के समय या गुरु द्वारा बुलाए जाने पर कम से कम एक बार गुरुजी के आश्रम पर जाएं। दूर रहने वाले ऑनलाइन दर्शन करें नियम 9: किसी भी खुशी या त्यौहार के अवसर पर, गुरु को गुरु भाग के रूप में एक दक्षिणा दें। इसे पवित्र दान भी कहते हैं क्यूंकि यह गलत तरीके से कमाए धन को भी शुद्ध करता है नियम 10: सभी मनुष्यों से प्यार करो और अपने गुरु के साथ कभी नहीं छोड़ें। नियम 11: जो लोग भी शाकाहारी भोजन नही खाते हैं उन्हें राजसी पूजा का ही संकल्प लेना होगा सात्विक का नहीं संकल्प लेते समय इस प्रकार से कहे – हे माँ सांसारिक आवश्यकताओं, पारिवारिक बन्धनों और परिस्थितियों के अनुकूल न होने कारण आपकी सात्विक पूजा नहीं कर सकती/सकता हूँ इसलिए अपने इस साधक/साधिका पुत्र/पुत्री को राजसिक साधना करने की अनुमति प्रदान करे l
नमक से जुड़ी कुछ बातो की जानकारियां और सावधानी – 1. नमक को कभी भी स्टील के पात्र में नहीं रखना चाहिए। क्योंकि हमारे ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नमक को शुक्र और चंद्र का प्रतिनिधि माना गया है। अगर आप नमक को स्टील के पात्र में रखते हैं तो शनि और चंद्र का मिलन होता है जो रोग और शोक का कारक होता है इससे घर में दरिद्रता भी बनी रहती है। नमक को हमेशा कांच के पात्र में रखनी चाहिए इससे नमक के कोई बुरे परिणाम नहीं होते हैं। 2. एक बात का हमेशा ध्यान रखें कि घर के भीतर कभी भी नमक जमीन पर ना गिरे ऐसा होने पर यह घर के भीतर दुर्भाग्य और रोग लेकर आता है। 3. कभी भी घर के किसी सदस्य को नमक सीधे हाथ में नहीं देना चाहिए अगर उनको देना भी है तो किसी टेबल पर रख दे। 1. घर में खुशहाली के लिए .. अपने बेडरूम के चारों कोनों में से एक कोने में हमेशा एक सेंधा नमक का टुकड़ा रख दें और महीने में एक बार उस टुकड़े को बदलकर पुराने टुकड़े को पानी में प्रवाह कर दें, ऐसा करने से पति पत्नी के बीच में प्यार बना रहता है और घर में खुशहाली भी आती है। 2. घर में धन की बरकत बढ़ाने के लिए – अगर आप चाहते हैं कि आपके घर में धन का प्रभाव बना रहे तो एक कांच के गिलास में थोड़ा सा नमक डाले और उसमें थोड़ा पानी मिला लें और अपने घर के दक्षिण पूर्व कोने मैं उसे रख दें और उसके ऊपर एक लाल बल्ब लगा दे। इस टोटके को करने से आपके घर में धन का प्रभाव हमेशा बना रहेगा और कोई बुरी नजर भी नहीं लगेगी। 3. किसी भी प्रकार का वास्तु दोष समाप्त करने के लिए – अगर आपको लगता है कि आपके घर में किसी भी प्रकार का वास्तु दोष है तो एक कांच की कटोरी में थोड़ा सा सेंधा नमक डाले और अपने टॉयलेट के किसी भी एक कोने में रख दे और महीने में एक बार उसे बदल दे इससे वास्तु दोष समाप्त हो जाएगा और अगर हो सके तो हर गुरुवार को थोड़ा सा पानी में नमक मिलाकर घर में पोछा कर दें इससे नकारात्मक उर्जा भी समाप्त हो जाएगी। 4. नमक से रोगों के मुक्ति – अगर आपके घर का कोई सदस्य लंबी बीमारी से ग्रसित है तो उसके सर के पास एक कांच की कटोरी में थोड़ा सा सादा नमक रख दें और हर हफ्ते उसे बदल दे ऐसा करने से उसकी सेहत में बहुत जल्द सुधार आ जाएगा। 5. मन में शांति लाने के लिए अगर आपका मन अशांत रहता है या मन में कोई भय है तो आपको हफ्ते में दो-तीन बार नमक मिले पानी से स्नान करना चाहिए स्नान करने के लिए सादे नमक का उपयोग करें ऐसा करने से आपके मन का भय और अशांति दोनों समाप्त हो जाएगी। 6. बुरी नजर या ऊपरी बाधा दूर करने के लिए – अगर आपको लगता है कि आपके घर के किसी सदस्य को बुरी नजर लगी है या कोई ऊपरी बाधा है तो एक मुट्ठी नमक लेकर उसके ऊपर से 3 बार उतार लें और घर के टॉयलेट में उसे फ्लश कर दें, ऐसा 3 दिन तक लगातार करें बुरी नजर या ऊपरी बाधा होगी तो दूर हो जाएगी। 7. कुंडली में चंद्र और मंगल मजबूत करने के लिए अगर किसी की जातक की कुंडली में चंद्र कमजोर है तो उसे कभी भी सामान्य नमक का उपयोग नहीं करना चाहिए बल्कि हमेशा सेंधा नमक का उपयोग करना चाहिए। और अगर किसी जातक की कुंडली में मंगल कमजोर है तो उसे हमेशा सामान्य नमक का उपयोग करना चाहिए और सेंधा नमक से दूर रहना चाहिए।
हर पूर्णिमा को शिवालय जाकर भोलेनाथ से अपने परिवार को निरोग रखने की प्रार्थना करें। उसके बाद गरीबों में फल, मिठाई अौर नकद दान करें। * पीपल के वृक्ष की सेवा करने से सभी रोगों से मुक्ति मिलती है। रविवार को छोड़कर अन्य सभी दिन सुबह स्नानादि कार्यों से निवृत होकर नियमित रूप से पीपल के वृक्ष पर मीठा जल अर्पित करें अौर उसकी जड़ को छूकर अपने माथे से लगाएं। पुरुष पीपल की 7 परिक्रमा करें, महिलाएं न करें। इसके बाद रोग को दूर करने की प्रार्थना करें, शीघ्र लाभ होगा। * लंबे समय से रोग से ग्रस्त लोगों को हर माह कम से कम एक बार अपने सार्थ्यनुसार किसी अस्पताल में जाकर दवा अौर फलों का वितरण करना चाहिए। इससे रोगी अौर उसके पारिवारिक सदस्य निरोग रहेंगे। * बीमार व्यक्ति को पान में गुलाब की सात पंखुड़ियां खिलाएं। इससे नजर दोष दूर होगा अौर दवा भी शीघ्र असर करेगी। * जटा वाले सात नारियल लेकर शुक्ल पक्ष को सोमवार के दिन ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करते हुए नदी में प्रवाहित करें। इससे रोग अौर दरिद्रता का नाश होगा। * जल में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर रोगी को पीने के लिए दें। इससे शीघ्र स्वास्थ्य लाभ होगा। * रोगी व्यक्ति को मंगलवार अौर शनिवार किसी भी दिन हनुमान जी की प्रतिमा से सिंदूर लेकर लगाएं। ऐसा करने से रोगी का दिल मजबूत होगा अौर वह शीघ्र ठीक होगा। * प्रतिदिन सुबह अशोक के वृक्ष की ताजा तीन पत्तियां चबाने से चिंताअों से मुक्ति मिलती है अौर स्वास्थ्य भी ठीक रहता है।
सोना पहनने के नियम *------------------------------* 1. आपका लग्न मेष, कर्क, सिंह और धनु है तो आपके लिए सोना धारण करना उत्तम होगा। 2. वृषभ, मिथुन, कन्या और कुंभ लग्न के लिए सोना धारण करना उत्तम नहीं होता है। 3. तुला और मकर लग्न के लोगों को सोना कम ही पहनना चाहिए। 4. वृश्चिक और मीन लग्न के लोगों के लिए सोना पहनना मध्यम है। 5. जिनकी कुंडली में बृहस्पति खराब हो या किसी भी प्रकार से दूषित हो ऐसे लोगों को भी सोने के प्रयोग से बचना चाहिए। 6.पैरों में सोने की बिछियां या पायल नहीं पहनना चाहिए क्योंकि यह बहुत ही पवित्र धातु है। यह बृहस्पति की धातु है। पैरों में पहनने से दांपत्य जीवन में परेशानी आती है। 7.यदि आपने सोना धारण कर रखा है तो आप शराब और मांसाहार का सेवन न करें। ऐसा करने से आप समस्याओं से घिर सकते हैं। सोना बृहस्पति की पवित्र धातु है और इसकी पवित्रता बनाए रखना जरूरी है। 8.गले में सोना पहने का अर्थ है कि आपका बृहस्पति ग्रह कुंडली के लग्न भाव में बैठ जाएगा या वहां का असर देगा। 9. हाथ में सोना पहनने का अर्थ है कि आपके पराक्रम अर्थात तीसरे भाव में बृहस्पति सक्रिय भूमिका में रहेगा। 10.जो लोग लौहे का, कोयले का या शनि संबंधित किसी धातु का व्यापार करते हों उनको भी सोना धारण नहीं करना चाहिए। 11.ईशान या नैऋत्य कोण में सोने को लाल कपड़े में बांधकर रखें। इससे बृहस्पति को मंगल की सहायता मिलने लगेगी और आपकी समृद्धि बढ़ती जाएगी। 12. सोने के साथ नकली आभूषण या लौहा न रखें। कुछ लोग सिक्के रख देते हैं तो यह भी उचित नहीं। ऐसा करने से बृहस्पति अशुभ होकर अपना शुभ प्रभाव देना छोड़ देता है। 1.सोना एक गर्म धातु है और चांदी ठंडी। अब आपको यह देखना होगा कि आपकी तासीर कैसी है। यदि गर्म है तो सोना पहनने से आपको स्वास्थ्य की समस्या हो सकती है। 2. कमर में सोना धारण नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे आपका पाचन तंत्र खराब हो सकता है। पेट के अलावा गर्भाशय, यूट्रस आदि संबंधी समस्याएं भी हो सकती है। 3.जिन लोगों को पेट या मोटापे की समस्या हो उनको सोना धारण नहीं करना चाहिए। 4.जो लोग बहुत क्रोधी, वाचाल और व्यग्र (अधैर्य) हैं उनको सोना धारण नहीं करना चाहिए। 5.जो महिलाएं गर्भवती हैं और जो महिलाएं वृद्ध हैं उनको भी सोना धारण नहीं करना चाहिए। थोड़ा बहुत सोना पहन सकते हैं लेकिन ज्यादा सोना पहनने से समस्याएं शुरू हो सकती है। 6.सोने को सोते वक्त सिरहाने न रखें। बहुत से लोग अपनी अंगुठी या चैन निकालकर तकिये के नीचे रख देते हैं। इससे नींद संबंधी समस्या तो होगी ही साथ अन्य समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती है। 7.अगर सर्दी जुकाम या सांस की बीमारी हो तो कनिष्ठा अंगुली में सोना धारण करें। 8.यदि आप दुबले हैं तो आपको सोना पहनना चाहिए। 9. सोना धारण करने से गले, कान, हाथ, पैर और छाती का दर्द समाप्त हो जाता है। 10.सोना बाएं हाथ में नहीं पहनना चाहिए। बाएं हाथ में तभी पहने जब विशेष आवश्यकता हो। बाएं हाथ में सोना पहनने से परेशानियां शुरू हो सकती है। सोना धारण करन से सम्मान और राज पक्ष से सहयोग मिलता है। एकाग्रता चाहते हैं तो तर्जनी अंगुली में सोना पहने। दांपत्य जीवन को खुशहाल बनाना चाहते हैं तो गले में सोने की चैन पहनें। यदि संतान नहीं हो रही है तो अनामिका अंगुली में सोना धारण करना चाह
अगर आपको घर में हमेशा थकान, सर में चक्कर और भ्रमित जैसा महसूस होता है, तो ये घर में नकारात्मकता बढ़ने का इशारा है. ऐसे में नियमित रूप से घर में घंटी और शंख का प्रयोग करना चाहिए. चांदी के हाथी को घर में लाने से मान सम्मान में वृद्धि होती है. वहीं यह इच्छाशक्ति भी मजबूत करता है। यदि आपकी कुंडली के 5वें या 12वें भाग में राहु बैठा है तो ऐसे में हाथी की मूर्ति से राहु शांत हो सकता है.। यदि व्यापार और करियर में तरक्की पाना चाहते हैं तो हाथियों के जोड़े को घर में रखें। बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं लगता है तो चांदी के हाथी की मूर्ति स्टडी रूम में रखें। धन की कमी है तो अपने मुख्य द्वार के सामने चांदी के हाथी की मूर्ति रखें. इससे अलग बेडरूम में हाथी की मूर्ति जोड़े में रखी जाए तो पति पत्नी के रिश्ते में मधुरता आती है। ध्यान रहे हाथी की मूर्ति कभी भी दक्षिण या पश्चिम दिशा में नहीं रखनी चाहिए इससे नकारात्मक ऊर्जा आती है। इससे अलग यदि आप धन लाभ के लिए घर या दुकान में हाथी की मूर्ति रखना चाहते हैं तो उसकी सूंड ऊपर की तरह होनी चाहिए यदि आप चांदी का हाथी किसी कारणवश नहीं रख पा रहे हैं तो ऐसे में हाथी की पीतल की मूर्ति रख सकते हैं। इससे अलग यदि आप पीतल की मूर्ति भी नहीं रख पा रहे हैं ऐसे में आप पत्थर की मूर्ति रख सकते हैं. लेकिन प्लास्टिक की मूर्ति रखना मना है। घर के उत्तर दिशा में देवी लक्ष्मी की ऐसी तस्वीर लगाएं, जिसमें वह कमलासन पर विराजमान हों और स्वर्ण मुद्राएं गिरा रही हों। ऐसी तस्वीर लगाना शुभ माना जाता है, इससे घर में समृद्धि का वास होता है। साथ ही अगर आप उत्तर दिशा में तोता की तस्वीर लगाएंगे तो पढ़ाई करने वाले बच्चों के लिए काफी फायदेमंद होगा। घर का मुखिया अगर भगवान शिव और चंद्र देव के मंत्रों का हर रोज जप करता है तो उसके यहां सुख और शांति का वास रहता है। वास्तु के नियमानुसार घर के बड़ों को नियमित शिवजी के मंत्रों का जप करना चाहिए, इससे घर में बरकत आती है।
*#तांबे_की_अंगूठी_के_लाभ-* जानिए तांबे की अंगूठी पहनने से कौन-कौन से शारीरिक और मानसिक लाभ मिलते हैं l 1. तांबे की अंगूठी लगातार हमारे शरीर के संपर्क में रहती है। जिससे तांबे के औषधीय गुण शरीर को मिलते हैं। इससे खून साफ होता है। 2. जिस प्रकार तांबे के बर्तन में रखा पानी स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाता है, ठीक उसी प्रकार तांबे की अंगूठी से भी फायदा मिलता है। 3. तांबे की अंगूठी के असर से पेट से जुड़ी बीमारियों में भी राहत मिल सकती है। 4. तांबा लगातार त्वचा के संपर्क में रहता है, जिससे त्वचा की चमक बढ़ती है। 5. आयुर्वेद के अनुसार तांबे के बर्तनों का उपयोग करने से हमारी रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यही लाभ तांबे की अंगूठी पहनने से भी मिलता है। 6. तांबे की अंगूठी पेट से संबंधित सभी समस्याओं में काफी फायदेमंद है यह पेट दर्द, पाचन में गड़बड़ी और एसिडिटी की समस्याओं में फायदा पहुंचाती है। इसके अलावा अगर आप पेचिश की समस्या से परेशान हैं तो तांबे की अंगूठी इस समस्या में आपकी काफी मदद कर सकती है। 7. तांबे की अंगूठी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है। ये हाई ब्लड प्रेशर या लो ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों के लिए बहुत फायदेमंद होती है। इसके अलावा इस अंगूठी को पहनकर आप शरीर के सूजन को भी कम कर सकते हैं। 8. तांबे की अंगूठी शरीर की गर्मी को कम करने में मदद करता है। इसे पहनने से शारीरिक और मानसिक तनाव कम होता है, ये अंगूठी तन और मन दोनों को शांत रखने में मदद करता है l 9. तांबे की अंगूठी सूर्य की उंगली यानी रिंग फिंगर में पहननी चाहिए। इससे कुंडली में सूर्य के दोषों का असर कम हो सकता है। 10. सूर्य के साथ ही तांबे की अंगूठी से मंगल के अशुभ असर भी कम हो सकते हैं। 11. तांबे की अंगूठी के प्रभाव से सूर्य का बल बढ़ता है, जिससे हमें सूर्य देव की कृपा से घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान मिलता है। 12 . यदि आपके हाथों के नाखून खराब हो रहे हैं , तो उसमे भी लाभ होगा l नोट:- जिनकी मकर और कुम्भ लग्न या राशि है, कृपा वह ना पहने ! उनको छल्ला सूट करने की संभावना बहुत कम है l छल्ला रविवार शुक्ल पक्ष (अमावस्या ) के बाद सुबह गंगाजल से धोकर पहने l यदि आपको छल्ला पहनने के बाद बेचैनी घबराहट महसूस हो तो छल्ला उतार दें, जबकि छल्ला अधिकांश लोगों को सूट ही करता है l जिनको गुस्सा जायदा आता हो वह चांदी का छल्ला अँगूठे में या सबसे छोटी कनिष्का उंगली में पहन सकते है , वैसे चांदी के गिलास में, रात्रि के समय पानी भरकर रखें और, सुबह सुबह उठ कर, पीयें!
9 ग्रहों के 9 भोजन, उचित समय पर खाएं और बुरे प्रभाव से बचें आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि आप ग्रह-नक्षत्रों के अशुभ फल को कुछ खाकर शुभ फल में बदल सकते हैं। कहते हैं कि अन्न ही जहर है और अन्न ही अमृत है। अत: उचित तिथि और समय पर निम्निलिखित भोज्य पदार्थ खाकर आप सभी ग्रहों के अच्छे फल प्राप्त कर सकते हैं।* 1. सूर्य ग्रह :–* सूर्य की अनुकूलता प्राप्त करने के लिए जातक को अपने आहार में गेहूं, आम, गुड़ आदि का उपयोग करना चाहिए। 2. चन्द्र ग्रह :–* चन्द्रमा मन का कारक है अत: चन्द्रमा की अनुकूलता के लिए गन्ना, शकर, दूध और दूध से बने पदार्थ, आइसक्रीम और मिठाइयों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए। 3. मंगल ग्रह :–* आपकी कुंडली में यदि मंगल अशुभ है तो अपने आहार में गुड़, मसूर की दाल, अनार, जौ और शहद का उपयोग कर सकते हैं। 4. बुध ग्रह :–* बुध ग्रह हमारे व्यापार और उद्योग को संचालित करता है। यदि यह कुंडली के नीच भाव में बैठकर अशुभ फल दे रहा है तो मटर, जुवार, कुलपी, हरी दालें, मूंग, हरी सब्जियां आहार में लेनी चाहिए। 5. गुरु ग्रह :–* यदि गुरु या बृहस्पति ग्रह आपकी कुंडली में अशुभ फल दे रहा है तो चना, चना दाल, बेसन, मक्का, केला, हल्दी, सेंधा नमक, पीली दालें और फलों को अपने भोजन में शामिल करें। 6. शुक्र ग्रह :–* शुक्र ग्रह जब नीच का होकर अशुभ फल देने लगे तो त्रिफला, दाल चीनी, कमलगट्टा, मिश्री, मूली और सफेद शलजम का प्रयोग करना चाहिए। 7. शनि ग्रह :–* शनि ग्रह का अशुभ फल जातक को पीड़ा देता है। इसकी अनुकुलता के लिए भोजन में तिल, उड़द, कालीमिर्च, मूंगफली का तेल, अचार, लौंग, तेजपत्ता तथा काले नमक का उपयोग करना चाहिए। 8. और 9. वां छाया ग्रह राहु और केतु :–* राहु और केतु की पीड़ा से बचने के लिए उड़द, तिल और सरसों का प्रयोग लाभदायक रहता है। अन्य उपाय :–* रविवार को चना, सोमवार को खीर अथवा दूध, मंगलवार को चूरमा तथा हलवा, बुधवार को हरी सब्जी, गुरुवार को चने की दाल अथवा बेसन का प्रयोग, शुक्रवार को मीठा दही और शनिवार को उड़द का सेवन करने से सभी ग्रह प्रसन्न रहते हैं।
किन भगवान की पूजा करें जिसने सब कुछ प्राप्त हो - ज्योतिषी नियम- 1-अगर आप मेष लग्न है तो भगवान विष्णु की पूजा कीजिए। 2-अगर आप वृषभ लग्न के है तो भगवान गणेश की पूजा कीजिए। 3-अगर आप मिथुन लग्न के है तो महामाई माँ जगदंबा का पूजन कीजिए 4-अगर आप कर्क लग्न के है तो श्री राम दरबार और भगवान कार्तिकेय का पूजन कीजिए। 5-अगर आप सिंह लग्न के है तो भगवान कृष्ण का पूजन कीजिए। 6-अगर आप कन्या लग्न के है तो आप भगवान बजरंगबली और शनिदेव का पूजन कीजिए। 7-अगर आप तुला लग्न के है तो भगवान शंकर और शनिदेव का पूजन कीजिए। 8-अगर आप वृश्चिक लग्न के है तो भगवान शंकर और भगवान विष्णु का पूजन कीजिए। 9-अगर आप धनु लग्न के है तो आप भगवान बजरंगबली का पूजन कीजिए। 10-अगर आप मकर लग्न के है तो आप गरुण मे सवार माँ लक्ष्मी का पूजन कीजिए 11-अगर कुम्भ लग्न के है तो आप शिव परिवार का पूजन कीजिए। 12-अगर आप मीन लग्न के है तो आप भगवान शंकर का पूजन कीजिए ,यदि ऐसा कोई शिवलिंग है तो सफेद है और भी ज्यादा लाभदायक है
अटका हुआ धन वापस प्राप्त करने के उपाय पहला उपाय :- शनिवार को दक्षिण मुखी हनुमान जी की प्रतिमा के आगे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उस दीपक पर सरसों के कुछ दाने, 2 लौंग और एक कपूर डालें। फिर वहीं बैठकर तीन बार बजरंग बाण का पाठ करें। फिर हनुमान जी से अटके हुये धन को प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें। अब दीपक में से 2 चम्मच तेल निकालें और उसका काजल बनाएं। अब किसी कोमल वस्त्र पर उस व्यक्ति का नाम लिखें जिसको आपने धन दिया है। अब इस कपड़े की बाती बनाएं। आटे के दीपक में तिल का तेल डाल कर इस बत्ती को पुनः हनुमान जी के सामने जलाएँ और दोबारा 5 बार बजरंग बाण का पाठ करें। अटका हुआ धन आपको मिल जाएगा। दूसरा उपाय:- दो राजा कौड़ी यह किसी भी पूजा की दुकान पर मिल जाएगी उस व्यक्ति के घर के सामने डाल दें जिसको आपने धन उधार दिया है। इस टोटके से वह आपको आपके पैसे वापस कर देगा। यह अटका हुआ धन पाने का बहुत आसान उपाय है। तीसरा उपाय:- ऐसा माना जाता है कि पीली कौड़ी माँ लक्ष्मी जी का प्रतिनिधित्व करती है। इसलिए पाँच पीली कौड़ी पूजा के स्थान पर रख दें। इससे आपका फंसा हुआ धन वापस आने लगेगा। चौथा उपाय:- शुक्रवार के दिन कपूर जलाकर उसका काजल बना लें। अब एक भोजपत्र पर उस व्यक्ति का नाम लिखें जिसको आपने धन दिया है। अब इस भोजपत्र पर सात बार थपकी देकर इसे अपनी तिजोरी में दबाकर रख लें। इस उपाय से आपका रुका हुआ धन वापस आने लगेगा। पांचवा उपाय:- 11 लौंग, 11 साबुत नमक की डली को नीले कपड़े में बांध दें और उस व्यक्ति का ध्यान करते हुए रात्रि 10 बजे के आस-पास किसी चौराहे पर जाकर चुपचाप इसे रख कर आ जाए। ऐसा करने से उधार दिया हुआ धन वापिस मिलने लगेगा। यह अटका हुआ धन प्राप्ति का सरल उपाय है। छठवा उपाय:- - मंगल एवं बुधवार को उधारी का लेनदेन न करें। शास्त्रों में ऐसा कहा जाता है कि मंगलवार को कभी कर्ज नहीं लेना चाहिए। इस दिन कर्ज लेने वाला व्यक्ति सदा कर्ज के बोझ तले दबा रहता है। वहीं बुधवार के दिन कभी उधार नहीं देना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन दी गई उधारी के वापस आने के योग कम होते हैं।
9 ग्रहों के 9 भोजन, उचित समय पर खाएं और बुरे प्रभाव से बचें आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि आप ग्रह-नक्षत्रों के अशुभ फल को कुछ खाकर शुभ फल में बदल सकते हैं। कहते हैं कि अन्न ही जहर है और अन्न ही अमृत है। अत: उचित तिथि और समय पर निम्निलिखित भोज्य पदार्थ खाकर आप सभी ग्रहों के अच्छे फल प्राप्त कर सकते हैं।* 1. सूर्य ग्रह :–* सूर्य की अनुकूलता प्राप्त करने के लिए जातक को अपने आहार में गेहूं, आम, गुड़ आदि का उपयोग करना चाहिए। 2. चन्द्र ग्रह :–* चन्द्रमा मन का कारक है अत: चन्द्रमा की अनुकूलता के लिए गन्ना, शकर, दूध और दूध से बने पदार्थ, आइसक्रीम और मिठाइयों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए। 3. मंगल ग्रह :–* आपकी कुंडली में यदि मंगल अशुभ है तो अपने आहार में गुड़, मसूर की दाल, अनार, जौ और शहद का उपयोग कर सकते हैं। 4. बुध ग्रह :–* बुध ग्रह हमारे व्यापार और उद्योग को संचालित करता है। यदि यह कुंडली के नीच भाव में बैठकर अशुभ फल दे रहा है तो मटर, जुवार, कुलपी, हरी दालें, मूंग, हरी सब्जियां आहार में लेनी चाहिए। 5. गुरु ग्रह :–* यदि गुरु या बृहस्पति ग्रह आपकी कुंडली में अशुभ फल दे रहा है तो चना, चना दाल, बेसन, मक्का, केला, हल्दी, सेंधा नमक, पीली दालें और फलों को अपने भोजन में शामिल करें। 6. शुक्र ग्रह :–* शुक्र ग्रह जब नीच का होकर अशुभ फल देने लगे तो त्रिफला, दाल चीनी, कमलगट्टा, मिश्री, मूली और सफेद शलजम का प्रयोग करना चाहिए। 7. शनि ग्रह :–* शनि ग्रह का अशुभ फल जातक को पीड़ा देता है। इसकी अनुकुलता के लिए भोजन में तिल, उड़द, कालीमिर्च, मूंगफली का तेल, अचार, लौंग, तेजपत्ता तथा काले नमक का उपयोग करना चाहिए। 8. और 9. वां छाया ग्रह राहु और केतु :–* राहु और केतु की पीड़ा से बचने के लिए उड़द, तिल और सरसों का प्रयोग लाभदायक रहता है। अन्य उपाय :–* रविवार को चना, सोमवार को खीर अथवा दूध, मंगलवार को चूरमा तथा हलवा, बुधवार को हरी सब्जी, गुरुवार को चने की दाल अथवा बेसन का प्रयोग, शुक्रवार को मीठा दही और शनिवार को उड़द का सेवन करने से सभी ग्रह प्रसन्न रहते हैं।
सामान्य वास्तु दोषों के उपाय के जरिए घर में सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित करें घर की सारी नकारात्मक शक्तियों को सोखने के लिए कच्चा समुद्री नमक रखें. इसके अलावा, आप फर्श को साफ करने के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी में एक चुटकी समुद्री नमक मिला सकते हैं. अगर आपको ऐसा लग रहा है कि आपका काम रुक रहा है या फिर प्लान के मुताबिक आपके काम नहीं हो रहे हैं तो घर में दो कपूर के गोले या क्यूब्स रखें और जब वे सूख जाएं तो उन्हें बदल दें. अगर आपको लगता है कि घर में वास्तु दोष है तो छह या आठ खोखली छड़ों वाली विंड चाइम्स का इस्तेमाल करें, क्योंकि इससे अच्छी ऊर्जा बढ़ती है. घोड़े की नाल को ऊपर की तरफ पॉइंट करते हुए लटकाएं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यह सभी अच्छी ऊर्जाओं को आकर्षित और समाहित करता है. इसके लिए मेन गेट सही जगह है. लिविंग रूम में अपने परिवार की तस्वीरें लगाने से रिश्तों में मजबूती और सकारात्मकता आ सकती है. ऐसी तस्वीरें घर में सकारात्मक ऊर्जा क़ी निशानी हैं। बेडरूम में सकारात्मक ऊर्जा के लिए बेडरूम के प्रवेश द्वार पर खुशनुमा पेंटिंग रखें। कमरे में एक्वेरियम या बिस्तर को प्रतिबिंबित करने वाले दर्पणों को न रखें