CHIRAG
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Посты
Pahle lagta tha, wo kon log hote honge jo apne pasandida shakhs ko khud hi khud se dur kar dete hai..?
"तुम्हारा अंतिम व्यवहार मेरी पसंद पर सवाल छोड़ गया।"
लोग मरे को कंधा देना पुण्य समझते है ओर जिंदा को बोझ
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मुट्ठी से जैसे पानी निकल जाता है, ऐसी ही ये जीवन भी निकल जाएगा।
मैं जले हुए घर को कैसे समझू के आग ने माफी माँग ली है
इच्छाए इंसान को जीने नहीं देती ओऱ इंसान इच्छाओं को मारने नहीं देता ,,
main sochta hun isliye main hun
कभी कोई इतना दूर नहीं जाता की लोट ना सके ,
इस दुनिया का सबसे बड़ा पापी ये भगवान ही हैं,,, जो खुद ही ये दुनिया बनाता है फिर खुद ही लोगों के कर्म लिखता है ,, फिर खुद ही उनको सजा देता है,, मतलब उनको इसकी जरूरत ही क्या हैं? क्यों वो ये सब करते है ? जब लास्ट मै हम सबको उनमें ही मिल जाना हैं,,, तो वो क्यों खेल रहे है ये खेल,,,?
Koi tum sa bhi kaash tumko mile, Mudda.a ham ko intiqaam se hai.
ये मेरे ख़ाबो की दुनिया नहीं सही लेनिक, अब आ गया हु तो दो दिन कायम करता चालू हुज़ूर आपका भी एहतराम करता चलू
हर धर्म business है अगर आपको बस अपना धर्म सही लगता है तो आप business के शिकार हो ,
मुझे आज तक ये बात समझ नहीं आई के भगवान ने ये करा क्या हैं,,, मतलब भगवान को जरूरत क्या थी ये दुनिया बनाने की , क्या भगवान इतने खाली बैठे थे? या भगवान को कोई ऐसा चाहिए था जो उनकी पूजा करे ,, मतलब कोई उनसे कमजोर,,,
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सत्य सुन्दर है पर सुन्दर सत्य नहीं ,
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