शायरी और ज़िंदगी...
Статистика"कैसे कहें कि तुझ को भी हम से है वास्ता कोई , तू ने तो हम से आज तक कोई गिला नहीं किया " @peacefulshayari
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मिला है हुस्न तो इस हुस्न की हिफ़ाज़त कर, सँभल के चल तुझे सारा जहान देखता है कनीज़ हो कोई या कोई शाहज़ादी हो, जो इश्क़ करता है कब ख़ानदान देखता है..!!
ज़िंदगी की ये घड़ी टूटता पुल हो जैसे, कि ठहर भी न सकूँ और गुज़र भी न सकूँ मेहरबाँ हैं तेरी आँखें मगर ऐ मूनिस-ए-जाँ, इन से हर ज़ख़्म-ए-तमन्ना तो नहीं भर सकता..!!
आज का दिन भी ऐश से गुज़रा, सर से पा तक बदन सलामत है..!!
हाल उस का तेरे चेहरे पे लिखा लगता है, वो जो चुप-चाप खड़ा है तेरा क्या लगता है यूँ तिरी याद में दिन रात मगन रहता हूँ, दिल धड़कना तेरे क़दमों की सदा लगता है यूँ तो हर चीज़ सलामत है मिरी दुनिया में, इक तअल्लुक़ है कि जो टूटा हुआ लगता है जाने मैं कौन सी पस्ती में गिरा हूँ 'शहज़ाद', इस क़दर दूर है सूरज कि दिया लगता है..!!
Ques.UPSC or Berozgari ?? Answer. "UPSC" Berozgari follows my brother 😄
अब बने हैं पत्थर के तो हैरत कैसी है फ़राज़, जब थे मोम के तो जलाए बहुत गए..!!
यूँ नहीं है कि फ़क़त मैं ही उसे चाहता हूँ, जो भी उस पेड़ की छाँव में गया बैठ गया उस की मर्ज़ी वो जिसे पास बिठा ले अपने, इस पे क्या लड़ना फुलाँ मेरी जगह बैठ गया..!!
अब उसका नाम भी कब याद होगा, जिसे हर दम भुलाया जा रहा है चराग़ इस तरह रोशन कर रहा हूँ, कि जैसे घर जलाया जा रहा है..!!
ख़्वाहिशें दिल का साथ छोड़ गईं, ये अज़िय्यत बड़ी अज़िय्यत है लोग मसरूफ़ जानते हैं मुझे, याँ मेरा ग़म ही मेरी फ़ुर्सत है..!!
❤️
लफ़्ज़ टूटे लब-ए-इज़हार तक आते आते, मर गए हम तेरे मयार तक आते आते ऐसा कोई भी शख़्स दिल का मक़ीन न हो, जो हर जगह मौजूद हो, फिर भी कहीं न हो हसरत से सोचते हैं तुझे देखकर ये हम, बंदा वफ़ा-परस्त होना चाहे, हसीन न हो..!!
Beautiful girls of dominant fathers are naturally arrogant..!!
रोज़ वो ख़्वाब में आते हैं गले मिलने को, मैं जो सोता हूँ तो जाग उठती है क़िस्मत मेरी..!!
उसे समझने का कोई तो रास्ता निकले, मैं चाहता भी यही था वो बेवफ़ा निकले मैं तुझ से मिलता तो तफ़्सील में नहीं जाता, मेरी तरफ़ से तिरे दिल में जाने क्या निकले..!!
जब तक किसी दीवार से धक्का नहीं लगा, तब तक मैं अपने आप को अंधा नहीं लगा आँखों को इंतज़ार में चश्मे लगे मगर, खिड़की पे आज तक कोई पर्दा नहीं लगा इक आपके न देखने से मर गया हूँ मैं, ये देखकर भी आपको सदमा नहीं लगा फुर्सत मिले अगर तो किसी रोज़ आइये, सदियों से मेरे गाँव में मेला नहीं लगा इस मुफलिसी ने छीन ली लज़्ज़त जुबान से, मेहनत का फल चखा भी तो मीठा नहीं लगा..!!
ज़ख़्म-ए-हिज्र भरने से याद तो नहीं जाती, कुछ निशाँ तो रहते हैं दिल रफ़ू भी हो जाए दीन-ओ-दिल तो दे बैठे अब 'फ़राज़' क्या ग़म है, कू-ए-यार में ग़ारत आबरू भी हो जाए..!!
Never Trust A Man After 12 A.M 😄 #Friends
तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ से, तू किसी और ही मंज़र की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेंरे, और तू मुट्ठियाँ भर भर के नमक लाई थी और ही तरह की आँखें थीं तिरे चेहरे पर, तू किसी और सितारे से चमक लाई थी तेरी आवाज़ ही सब कुछ थी मुझे मोनिस-ए-जाँ, क्या करूँ मैं कि तू बोली ही बहुत कम मुझ से तेरी चुप से ही ये महसूस किया था मैं ने, जीत जाएगा किसी रोज़ तिरा ग़म मुझ से शहर आवाज़ें लगाता था मगर तू चुप थी, ये त'अल्लुक़ मुझे खाता था मगर तू चुप थी वही अंजाम था जो 'इश्क़ का आग़ाज़ से है, तुझ को पाया भी नहीं था कि तुझे खोना था चली आती है यही रस्म कई सदियों से, यही होता है यही होगा यही होना था..!!
वो अब अपने नए महबूब से भी पूछता होगा, कभी सोचा तुझे कुछ हो गया तो मेरा क्या होगा मैं कहता था कि पहली झील एक पर्वत से निकली है, वो कहती थी कि शिव की आँख से आँसू गिरा होगा..!!