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Strong India (सशक्त भारत 🇮🇳🐯🇮🇳 )

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नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि । जय हिंद । आओ करें हम देश से प्यार, #Rashtrabhakt #राष्ट्रप्रथम् #वसुधैव_कुटुंबकम्

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  • सोशल मीडिया ने पिछले 12-15 सालों में Mainstream मीडिया को लगभग Replace करके रख दिया है. सोशल मीडिया आज दुनिया के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक माध्यमो में से एक है.. और शायद सबसे असरदार भी. जिस पर बड़ी से बड़ी सरकारें लगाम नहीं लगा पायी. हाँ. North Korea और चीन अपवाद रहे हैं... लेकिन चीन में भी सोशल मीडिया ने हांगकांग protests और पिछले दिनों चीन के बुरे इंफ्रास्ट्रक्चर पर narrative बदलने का काम किया था. रूस में भी अमेरिकी सोशल मीडिया पर Ban है.... लेकिन रूस में कितनी ही अमेरिकी और Western देशों की companies आज की तारीख़ में अस्तित्व में हैं? शायद शून्य. सोशल मीडिया आपने आप में किसी सरकार को शायद ही कभी सत्ता से हटाने. की क्षमता रखता है, लेकिन यह बहुत तेज़ी से लोगों को संगठित कर सकता है, जानकारी (और गलत जानकारी, Narrative, प्रोपेगंडा) फैला सकता है, विरोध प्रदर्शनों का समन्वय कर सकता है और जनमत को प्रभावित कर सकता है। जब यह व्यापक जन असंतोष, आर्थिक समस्याओं या राजनीतिक विभाजन के साथ मिल जाता है, तो यह किसी सरकार के सत्ता से बाहर होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पिछले 12-17 सालों में हमने नीचे दिए गए देशों में सत्ता बदलते देखा.... और यह कोई सामान्य सत्ता बदलाव नहीं था... बल्कि थोपा गया था. ट्यूनीशिया (2010–2011): एक सड़क विक्रेता द्वारा आत्मदाह किए जाने के बाद सोशल मीडिया के माध्यम से विरोध प्रदर्शनों के वीडियो तेजी से फैले। इस आंदोलन के परिणामस्वरूप राष्ट्रपति ज़ीन एल आबिदीन बेन अली की सरकार गिर गई और इसी से "अरब स्प्रिंग" आंदोलन को भी प्रेरणा मिली। मिस्र (2011): काहिरा के तहरीर चौक पर प्रदर्शनों को संगठित करने के लिए फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और यूट्यूब का व्यापक रूप से उपयोग किया गया। लगभग 30 वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को इस्तीफा देना पड़ा। सूडान (2018–2019): प्रदर्शनकारियों ने देशभर में आंदोलन आयोजित करने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग किया, जिससे राष्ट्रपति उमर अल-बशीर को सत्ता से हटाने में योगदान मिला। श्रीलंका (2022): गंभीर आर्थिक संकट के दौरान "अरगलाया" (Aragalaya) आंदोलन को संगठित करने में सोशल मीडिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंततः राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने इस्तीफा दे दिया। कौन भूल सकता है वो FB और Insta पर stream होते Videos को.. जब जनता ने प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के निवास स्थान में घुस कर सब तहस नहस कर दिया था. बांग्लादेश (2024): छात्रों के नेतृत्व में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों, जो बाद में एक बड़े सरकार-विरोधी आंदोलन में बदल गए, के दौरान सोशल मीडिया ने जानकारी फैलाने और प्रदर्शनों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कई सप्ताह तक चले अशांति के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पद छोड़ दिया। पूरा protest Social मीडिया पर Live था..... शेख हसीना के घर में घुस कर कैसे तोड़ फोड़ और चोरी की गयी.. कैसे उनकी पार्टी के लोगों को on कैमरा मारा गया......हजारों लोगों की मौत हुई... आर्थिक रूप से बांग्लादेश बुरी तरह हिल गया और आज तक स्थिर नहीं हो पाया है नेपाल (2025): नेपाल में भी युवाओं या Gen Z के भ्रस्टाचार के प्रति बढ़ रहे गुस्से को सोशल मीडिया ने हवा दी थी.... सरकार ने सोशल मीडिया को Ban किया, जिसके बाद पूरे देश में यह विरोध दवानल की तरह फैला.... सरकार क्या और मंत्री क्या... सबको दौड़ा दौड़ा कर मारा गया.... संसद होटल और कई महत्वपूर्ण ईमारते जला दी गई.और अंततः सत्ता परिवर्तन हुआ... जिसमे जान माल की जबरदस्त हानि हुई. इरान (2025-26) - इरान ने भी सोशल मीडिया पर तमाम ban लगाए.... लेकिन फिर लोगों ने Proxy, VPN और circumvention tools का इस्तेमाल करके युद्ध के समय भी सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया था. और फिर Starlink तो है ही... यूक्रेन, बांग्लादेश, नेपाल और इरान... हर जगह Starlink का इस्तेमाल किया गया. अब तो कहीं Starlink launch होता है.... तो rumour उड़ने लगते हैं... कि Regime Change होने वाला है.... यह हमने भारत में भी देखा था किसी स्तर पर यहाँ यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि केवल सोशल मीडिया ही किसी सरकार के परिवर्तन का कारण नहीं बनता। आमतौर पर सरकारें तब गिरती हैं, जब कई कारण एक साथ मौजूद होते हैं, जैसे— - व्यापक जन असंतोष। - आर्थिक कठिनाइयाँ (महंगाई, बेरोज़गारी, टैक्स व्यवस्था, और आवश्यक वस्तुओं की कमी)। - भ्रष्टाचार या शासन से जुड़ी समस्याएँ। - बड़े और लंबे समय तक चलने वाले विरोध प्रदर्शन। - राजनीतिक नेतृत्व या सुरक्षा बलों के भीतर मतभेद। - कई मामलों में अंतरराष्ट्रीय दबाव... या बाहरी ताकतो द्वारा Regime Change Operation करना.

  • औरतों_का_त्रिया_चरित्र एक प्यासा आदमी एक कुएं के पास गया, जहां एक जवान_औरत पानी भर रही थी उस आदमी ने औरत से थोड़ा पानी पिलाने के लिए कहा खुशी से उस औरत ने उसे पानी पिलाया। पानी पीने के बाद उस आदमी ने औरत से पूछा कि आप मुझे औरतों की त्रिया चरित्र के बारे में कुछ बता सकती है??? इतना कहने पर वह औरत जोर जोर से चिल्लाने लगी बचाओ... बचाओ... उसकी आवाज सुनकर गांव के लोग कुए की तरह दौड़ने लगे तो उस आदमी ने कहा कि आप ऐसा क्यों कर रही है, तो उस औरत ने कहा ताकि गांव वाले आए और आपको खूब पीटें और इतना पीटे की आपके होश ठिकाने लग जाए। यह बात सुनकर उस आदमी ने कहा मुझे माफ करें, मैं तो आपको एक भली और इज्ज़तदार औरत समझ रहा था। तभी उस औरत ने कुएं के पास रखा मटके का सारा पानी अपने शरीर पर डाल लिया और अपने शरीर को पूरी तरह भींगा डाला। इतने देर में गांव वाले भी कुएं के पास पहुंच गए। गांव वालों ने उस औरत से पूछा कि क्या हुआ ? औरत ने कहा मैं कुएं में गिर गई थी इस भले आदमी ने मुझको बचा लिया। यदि यह आदमी यहां नही रहता तो आज मेरी जान चली जाती। गांव वालों ने उस आदमी की बहुत तारीफ की और उसको कंधों पर उठा लिया। उसका खूब आदर सत्कार किया और उसको इनाम भी दिया। जब गांव वाले चले गए तो औरत ने उस आदमी से कहा कि अब समझ में आया औरतों का त्रिया चरित्र??? अगर आप औरत को दुःख देंगे और उसे परेशान करेंगे तो वह आपका सब सुख- चैन छीन लेगी और अगर आप उसे खुश रखेंगे तो वह आपको मौत के मुंह से भी निकाल लेगी,,,त्रिया चरित्र त्रिया चरित्र शब्द महाभारत के एक श्लोक से आया है, जिसकी अर्धाली मेरे देश में बहुत प्रचलित है। त्रिया चरित्रं, पुरुषस्य भाग्यम देवो न जानाति, कुतो मनुष्य:। अर्थात स्त्री का चरित्र और पुरुष का भाग्य देवता भी नहीं जानते, मनुष्य कैसे जान सकता है? पर पूरा श्लोक निम्नवत है। नृपस्य चित्तं, कृपणस्य वित्तम; मनोरथाः दुर्जनमानवानाम्। त्रिया चरित्रं, पुरुषस्य भाग्यम; देवो न जानाति कुतो मनुष्यः॥ 'राजा का चित्त, कंजूस का धन, दुर्जनों का मनोरथ, पुरुष का भाग्य और स्त्रियों का चरित्र देवता तक नहीं जान पाते तो मनुष्यों की तो बात ही क्या है?' 'त्रिया-चरित्रम्' अर्थात तीन प्रकार के चरित्र ! १ - सात्विक, २- राजसिक , ३- तामसिक ! ब्रह्माण्ड का सञ्चालन सुचारु रूप से चलाने के लिये उन्होंने तीन प्राकृतिक गुणों की रचना की जो सत्व, राजस तथा तम नाम से जानी जाती है। साथ ही इन त्रिगुणों के 'परिचालन' हेतु, त्रि-देवों की संरचना की। निर्माण या रचना, पालन तथा संहार, ये तीनों ही सञ्चालन हेतु 'संतुलित' रूप में अत्यन्त आवश्यक हैं। त्रिगुणात्मक प्रकृति, शक्ति या बल, ‘सात्विक (सत्व), राजसिक (रजो) तथा तामसिक (तमो)’ तीन श्रेणियों में विभाजित हैं। हिन्दू वैदिक दर्शन के अनुसार संसार के प्रत्येक जीवित और निर्जीव तत्त्व, की उत्पत्ति या जन्म इन्हीं गुणों के अधीन हैं। ब्रह्मांड के सुचारु 'संचालन' हेतु, इन 'तीन गुण' अत्यंत 'अनिवार्य' हैं, इनके बिना 'ब्रह्मांड' का सञ्चालन संभव नहीं हैं। निर्माण, पालन और विनाश के बिना संभव नहीं है। किसी भी एक बल की अधिकता या न्यूनतम, संसार चक्र सञ्चालन के संतुलन को प्रभावित कर, समस्त व्यवस्था को अच्छादित, असंतुलित कर सकता हैं। विनाश के बिना नूतन उत्पत्ति या सृष्टि करने का कोई लाभ नहीं है। आद्या शक्ति, जिन्होंने समस्त जीवित तथा अजीवित तत्व का प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से निरूपण किया हैं, वे भी इन्हीं तीनों गुणों के अधीन भिन्न भिन्न रूपों में अवतरित हुई। महा काली, पार्वती, दुर्गा, सती तथा अगिनत सहचरियों के रूप में, वे ही तामसिक शक्ति हैं, महा सरस्वती, सावित्री, गायत्री इत्यादि के रूप में वे ही सात्विक शक्ति हैं, महा लक्ष्मी, कमला इत्यादि के रूप में वे ही राजसिक शक्ति हैं। साथ ही इन देवियों के भैरव क्रमशः भगवान शिव, ब्रह्मा तथा विष्णु, क्रमशः तामसिक , सात्विक और राजसिक बल से सम्बंधित हैं। शक्ति में जब 'राजसिक गुण' होता है तब यह 'दुर्गा' कहलाती है , जब 'तमोगुण' प्रखर होता होता है तब है 'काली' कहलाती है और जब 'सत्वगुण' का प्रभाव बड़ जाता है तब यह 'ब्रह्मचारिणी' कहलाती है। कोई भी स्त्री इन तीनों गुणों को 'कभी भी' धारण करने की क्षमता रखती है इसलिए कहा जाता है कि स्त्री को कोई भी, कभी भी नहीं 'समझ' सकता है। इसलिए 'त्रिया-चरित्रम्' शब्द को 'गाली' की तरह उपयोग न करें बल्कि इस शब्द का असली मतलब जानें। कोई भी स्त्री इन तीनों गुणों के बिना 'सम्पूर्ण' नहीं होती है। यही 'प्रकृति' का नियम है बस जरुरत है तो इन तीन गुणों में सही 'संतुलन' की। स्त्री में चन्द्र तत्व अधिक होता है इसलिए स्त्री इन तीनों गुणों में से परिस्थिति या संगत अनुसार इन गुणों को बहुत जल्दी से धारण कर लेती है । इसलिए परिवर्तन तेज होने से आपकी ‘समझ' से बाहर हो जाती है।

  • झारखंड पर जो खुलासा हो रहा है वह सच में बहुत बड़ा खतरनाक खुलासा है....! और झारखंड में नौकरी के नाम पर जो लूट चल रही है उसका पैसा न सिर्फ झारखंड के हुक्मरान ही नहीं बल्कि पार्टी को भी जाता होगा तभी यह लोग खुलेआम झारखंड में नौकरी लूट का रैकेट चलने दे रहे हैं....! उत्तर प्रदेश की एक कंपनी है टीडीपीएल जिसका ऑफिस लखनऊ में है, 2016 में इस कंपनी ने उत्तर प्रदेश में एक परीक्षा का ठेका लिया! इसके द्वारा आयोजित की परीक्षा में भ्रष्टाचार हुआ, उत्तर प्रदेश सरकार ने एग्जाम कैंसिल किया। अगले साल इसी कंपनी को एक और परीक्षा का ठेका मिला जो विधानसभा में भारतीयों पर था उसमें भी इस कंपनी ने जब काफी घोटाले किये तब इस कंपनी को यूपी में ब्लैक लिस्ट कर दिया गया। और इस कंपनी के मालिकों को 2 साल तक जेल में रहना पड़ा। उसके बाद उत्तर प्रदेश में ब्लैक लिस्ट यह कंपनी TDPL झारखंड चली गई और इस कंपनी को झारखंड सरकार ने एग्जाम करने के ठेके दिए। हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार ने झारखंड सरकार को पत्र भी लिखा यह कंपनी का इतिहास दागदार है यह हमारे यहां ब्लैक लिस्ट है लेकिन झारखंड सरकार इस कंपनी को कई एग्जाम आयोजित करने का ठेका दिया, और इस कंपनी ने खुलेआम सीट बेचना शुरू किया। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस कंपनी का एक पार्टनर #अभय_तिवारी खुद ही झारखंड में क्लास टू ऑफिसर बन गया यानी ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर बन गया और वही शख्स #मनोज_तिवारी के नाम से टीडीपीएल कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर भी था! और इधर अभय तिवारी के भाई भाभी बहन जीजा यानी 25 से ज्यादा रिश्तेदार झारखंड में क्लास 2 की नौकरी पा गए। और इस कंपनी के मालिकों ने भ्रष्टाचार से इतना पैसा कमाया की रांची और लखनऊ में कई होटल खरीद लिए। यह कंपनी पेपर लीक तो छोड़िए पेपर लीक तो बहुत पुराने जमाने की बात हो गई यह लोग सीधे सीट बेचते थे और 25 लाख से लेकर 50 लाख तक में पूरी नौकरी का सौदा हो जाता था। OMR सीट बदल दी जाती थी या मेरिट ही बदल दी जाती थी और सरकारी नौकरी दे दी जाती थी। अब मजे की बात यह की जो सीआईडी झारखंड सरकार को रिपोर्ट करती है झारखंड सरकार ने उसी सीआईडी से इस पूरे मामले की जांच करवा रही है। यानी कि एक चोर अपने ही खिलाफ जिससे जांच करवा रहा है वह जांच एजेंसी उसी चोर को रिपोर्ट देगी, अब आप समझ जाइए की जांच का अंजाम क्या होने वाला है....! जहां मुख्यमंत्री से लेकर बड़े-बड़े मंत्री सीट बेचकर पैसे कमा रहे हो तो वहां सीआईडी जांच का कोई मतलब नहीं है, झारखंड के छात्र चाहते हैं कि इसकी जांच सीबीआई से हो ताकि अब तक जितना भी भ्रष्टाचार हुआ है वह सामने आए और इस कंपनी ने जितने भी भर्ती परीक्षा आयोजित की है सबको निरस्त किया जाए। लेकिन जो राहुल गांधी भाजपा शासित राज्यों में छात्र-छात्र कह कर छाती कूटते हैं वहीं राहुल गांधी वही प्रियंका वाड्रा वही अखिलेश यादव वही डिंपल यादव झारखंड का नाम सुनते ही दुम दबाकर खिसक लेते हैं....! बाकी आप समझदार हो.. @highlight

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  • ‎एक कहावत है—किन्नरों के घर बच्चा हुआ, तो उन्होंने चूम-चूमकर उसे मार डाला। ‎ ‎कुछ यही हाल राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी और पूरी गैंग की है। कुछ दिन पहले एक कॉकरोची तमाशा क्या चल गया? ये मान लिए हैं कि ये सबसे बड़े वीर हैं। ‎ ‎हम मानते हैं, चंदा चोरी असल मुद्दा है, उसके बारे में हम सब ने भी खूब लिखा है, लेकिन राहुल गांधी और पप्पू यादव ने उसकी आड़ में साधु - संतों का अपमान कर डाला। ‎ जबकि सभी यह जानते हैं कि चंदा चोरी मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारियों ने की थी, न कि साधु-संतों ने। फिर भी राहुल गांधी ने इसमें साधु-संतों को घसीट लिया। ‎ ‎इनका रह-रहकर हिंदू द्रोह, भगवा द्रोह, धर्म द्रोह और साधु-संतों का अपमान सामने आता रहता है। ‎ ‎ऐसे ही किसान आंदोलन के जस्ट बाद ही अगला चुनाव ये और इनकी पूरी टीम हारी थी। अब देखिए, आगे-आगे क्या होता है?

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  • कूड़े के ढेर, व्यवस्था बदहाल... यही है 'केजरीवाल मॉडल' का कमाल! लुधियाना पूछ रहा है— कहां गए AAP के स्वच्छता के वादे... जवाब दो- केजरीवाल और भगवंत मान!

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  • दोहरे चरित्र वाले विपक्ष को ज्ञात रहे- भारत अपनी संस्कृति का अपमान कभी नहीं भूलता है।

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  • ......घोर संघी...घोर राष्ट्रवादी....हिन्दुत्व के प्रबल समर्थक...प्रहलाद जोशी को देश का अगला शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है......इनकी राजनीति की शुरुआत कर्णाटक के हुबली के ईदगाह मैदान मे तिरंगा फहराने से हुई थी.... मोदीजी ने एक तीर से कई शिकार कर दिए :- * प्रोटेस्ट खत्म * विपक्ष का संसद में काम रोकने का एजेंडा खत्म * तख्तापलट का एजेंडा खत्म * हुड़दंगीयों और दंगाइयों की पहचान हो गई....अब कार्रवाई होगी क्यूंकि तिलचट्टों के लीडर ने कह दिया कि हुड़दंग मचाने वाले....पुलिस पर पथराव करने वाले...हमारी गैंग के तिलचट्टे नहीं है. * विपक्षी राज्यों मे हुए Paper leak पर उन राज्यों मे ऐसे ही आंदोलन का रास्ता साफ़ हो गया...अब कल को पंजाब...केरल...कर्णाटक ...तेलंगाना जैसे राज्यों मे वहाँ के विपक्षी नेता ऐसा ही आंदोलन शुरू कर सकते हैं. और सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक... * एक ब्राह्मण को शिक्षामंत्री बनाकर सवर्णों की नाराजगी को भी दूर कर दी.....प्रधान से सवर्ण भी नाराज थे. ........युद्ध जीतने के लिए छोटी मोटी लड़ाइयाँ हारनी भी पड़ती हैं. जय श्रीराम 🙏🚩

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  • अंतिम संस्कार में रंजीश का मृत देह बेटे का इंतजार कर रहा था लेकिन पत्नी इसके लिए भी बेटे को वहां जाने नहीं दे रही थी। बेटे से वह कितना प्रेम करता था वो मोहल्ले के सभी जन जानते थे। और ऐसी स्थिति में बेटा उसके सामने नहीं है तो रंजीश की आत्मा कितनी कलप रही होगी ?? रंजीश के लिए परिवार और मित्र जन कोर्ट गए.. फिर कोर्ट के आदेश के बाद बेटे को रंजीश के अंतिम संस्कार में सिर्फ पांच घण्टे के लिए जाने को दिया गया। कल्पना ही कर लीजिए कि रंजीश के आत्मा पे क्या बीत रही होगी ?? क्या एक पिता बस एटीएम मशीन भर है ?? इंडियन फैमिली वेलफेयर कोर्ट पिताओं को सिर्फ एटीएम मशीन और बच्चे की देखभाल करने वाले नौकर ही समझते हैं ?? रंजीश क्षमा करना ......😢😢 🙏🙏🙏 नमस्कार। जोहार। मिसोजिनिस्ट गंगवा, पेण से।

  • ये है रंजीश राधाकृष्णन। उम्र : 38 साल। निवासी : कुमिली, केरल। पेशा : बस कंडक्टर, KSRTC। दस साल पहले इन्होंने लव-मैरिज की थी। बहुत प्यार करता था अपनी पत्नी से। पलकों पे बिठा के रखता था। जितना भी कमाता खुश रहता। बूढ़े माँ-बाप का इकलौता सहारा था। एक साल बाद इसका एक बेटा हुआ। रंजीश के खुशी ठिकाना नहीं रहा। पुत्र सुख जो प्राप्त हुआ था। अब परिवार जैसे पूर्णता को प्राप्त हो गया था। जीवन एकदम सही पटरी पे चल रही थी। बेटा अब एक साल का हो गया था... तभी इनकी पत्नी को क़तर से जॉब ऑफर आया। कोई बहुत बड़ा पोस्ट नहीं.. यही कोई वर्कर या नर्स का। पत्नी ने रंजीश से क़तर जाने की अनुमति माँगी। बोली कि परिवार की बेहतरी के लिए इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा हमें, प्लीज मुझे जाने दो। मैं भी इस परिवार की हिस्सा हूँ और परिवार की बेहतरी के लिए ही सोच रही हूं। बेटा अभी दूध पी रहा था माँ का.. और माँ को अपना करियर सामने दिख रहा था। बहुत मान-मनोव्वल के बाद रंजीश मान गया। फिर रंजीश ने अपने माता-पिता को भी मना लिया। कहा कि तुम जाओ विदेश कमाने को मैं बेटे का ख़्याल रख लूंगा। पत्नी क़तर चली गई। और इधर रंजीश बेटे के लालन पालन में लग गया। बस कंडक्टरी करता और दुधमुंहे बेटे का ध्यान भी रखता। पत्नी इधर क़तर में कमाने को आई थी। दो साल पहले रंजीश से लव-मैरिज की थी, एक बच्चे की माँ भी थी इसके बाद भी इसको यहां क़तर में किसी पुरुष से लव हो जाता है। और ऐसा लव होता है कि ये अपने बच्चे और पति को भूल जाती है। रंजीश इधर केरल में बिन माँ के रोते बिलखते बेटे को प्यार से चुप कराता और कहता कि,"चुप हो जाओ बेटा.. वो उधर देखो वो समंदर के पार तुम्हारी मम्मी है.. वहाँ काम करने गई है तुम्हारी मम्मी तुम्हारे वास्ते.. तेरे लिए ढेर सारा चॉकलेट ला के देगी.. तुम खूब खाना चॉकलेट....हां.. अब चुप हो जाओ.. सो जाओ मेरा प्यारा लल्ला..!" इसी तरह वो अपने बच्चे को मम्मी के बारे कहानी सुनाता और सुलाता। और इधर मम्मी किसी और के साथ सोने में मग्न। फिर एक दिन रंजीश को कॉल आता है कि तुम मुझे भूल जाओ रंजीश.. मैं यहां किसी और से शादी कर ली हूं। इसके बाद कोई कॉन्टेक्ट नहीं रंजीश से। टोटली डिस्कनेक्ट हो गई रंजीश और अपने बेटे से। रंजीश के ऊपर मानो जैसे हिमालय टूट के गिर पड़ा हो। जिस औरत के लिए जग से लड़ा वो अब किसी और के साथ मलयुद्ध कर रही है। जिस औरत को बाहर जाने की अनुमति दी वो सदा के लिए बाहर ही हो गई। अब बेटे को मैं कैसे चुप कराऊंगा ? किसका दिलासा दे-दे के मैं चुप कराऊंगा ?? हे भगवान! मुझसे किस जन्म का बदला ले रहे हो आप ?? ऐसे ही विचार मन में उत्पन्न होते और वह दहाड़ मार-मार के रोता। लेकिन एक मर्द भला कितना दिन तक रोयेगा ? नियति मान के इसे वह स्वीकार कर लिया। हे पुरूष! तुम बस अपने पुरुषार्थ पे ध्यान दो और बाकी चीजें नियति पे छोड़ दो। रंजीश ने भी सबकुछ छोड़-छाड़ के अपने जीवन में लौट आया। अब इसके जीवन का लक्ष्य बूढ़े माँ-बाप की सेवा और बेटे का लालन-पोषण था। इसके अलावा और कुछ नहीं। मुस्कुरा कर हर परिस्थिति का सामना करता। जीवन की गाड़ी बस की भांति ही एक्सप्रेस वे में सरपट भागने लगी। एकदम खुशमिजाज रंजीश। बस में कंडक्टरी करते हुए मुस्कुराते हुए रील्स/वीडियोज बनाता और अपनी खुशी का इजहार करता। बेटा अब आठ साल का हो गया था.. स्कूल जाने लगा था.. बस से थका-हारा रंजीश जब भी घर आता तो बेटे को देखते ही फुल रिचार्ज हो जाता। मतलब रंजीश की लाइफ मस्त कट रही थी। लेकिन तभी इनकी पत्नी अचानक से केरल वापिस आती है। पूरे आठ साल बाद। आ के कट्टप्पना फैमिली कोर्ट में पिटीशन दायर करती है बेटे के कस्टडी के लिए। रंजीश अभी एक ट्रॉमा से निकल कर जैसे ही जीवन जीना फिर से आरंभ किया था वैसे ही फिर से भूकंप आ गया इसके जीवन में। कोर्ट में रंजीश ने कहा कि, "मैं अपने बेटे को एक वर्ष की आयु से पाल रहा हूँ.. पिछले आठ साल से इसका ध्यान रख रहा हूँ.. अच्छे से पालन-पोषण कर रहा हूँ.. पढ़ा रहा हूँ.. और आगे भी ऐसा ही करूँगा। प्लीज मेरे बेटे को मुझसे जुदा मत करो। दस साल पहले मेरी पत्नी में मेरा जान बसता था लेकिन वो चली गई.. मैं मर सा गया था.. फिर मैंने अपने बेटे के लिए खुद को संभाला.. दुबारा से जीवन जीना शुरू किया.. अब मेरी जान मेरे बेटे में बसती है.. प्लीज हमको इससे अलग मत कराइये नहीं तो मेरे प्राण निकल जाएंगे.. मेरे जीवन जीने का एक मात्र कारण और उद्देश्य केवल और केवल मेरा बेटा है.. प्लीज इसे मेरे पास ही रहने दिया जाय।" लेकिन कोर्ट ने रंजीश की एक भी बात नहीं मानी और फैसला पत्नी के हक़ में सुनाया। बेटे की कस्टडी पत्नी और सौतेले बाप को सौंप दिया गया। रंजीश ने जैसा कहा था वैसा ही हो गया.. बेटे में उसका प्राण बसता था.. और अब बेटा उसके पास नहीं था। इसी ग़म में वह आत्महत्या कर परलोक को गमन कर गया।

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  • ऊपर जो चढ़ा था बाबरी मस्जिद पर वो वहीं चिपका रह गया- मुलायम सिंह यादव

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