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CGPSC & CgVyapam

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  • हिंदी मीडियम से पढ़ाई, प्रतापगढ़ से शुरुआत और फिर Caltech तक का सफर! Professor Deepak Dhar की कहानी बताती है कि बड़े सपनों के लिए शुरुआत बड़ी होना जरूरी नहीं। बचपन में उनके पिता घर पर Science Magazines लाते थे और इन्हीं को पढ़ते-पढ़ते उनके मन में विज्ञान को समझने की जिज्ञासा पैदा हुई। यही जिज्ञासा उन्हें Allahabad University, IIT Kanpur और फिर Caltech तक ले गई, जहां उन्होंने PhD की और महान वैज्ञानिक Richard Feynman के Teaching Assistant के तौर पर भी काम किया। विदेश में शानदार मौके होने के बावजूद दीपक धर ने भारत लौटने का फैसला किया। TIFR में उन्होंने दशकों तक Theoretical Physics के क्षेत्र में काम किया और कई पीढ़ियों के युवा वैज्ञानिकों को मार्गदर्शन दिया। अब 74 साल की उम्र में उन्हें Statistical Mechanics में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए 2026 का प्रतिष्ठित Dirac Medal मिला है। इससे पहले 2022 में वे Boltzmann Medal पाने वाले पहले भारतीय बने थे और 2023 में उन्हें Padma Bhushan से सम्मानित किया गया। जिस बच्चे की विज्ञान के प्रति जिज्ञासा पिता की लाई Science Magazines से शुरू हुई थी, वही जिज्ञासा आज उन्हें दुनिया के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक सम्मानों तक ले आई है। उनकी कहानी हमें याद दिलाती है कि सपनों की शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन सवाल पूछने की हिम्मत और सीखते रहने का जुनून हो, तो मंज़िल की कोई सीमा नहीं होती। कभी-कभी एक छोटी-सी जिज्ञासा ही एक असाधारण सफर की शुरुआत बन जाती है।

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  • 18 साल की उम्र में फांसी के फंदे तक पहुंचे, लेकिन चेहरे पर डर नहीं था… 11 अगस्त 1908 को खुदीराम बोस ने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। जिस उम्र में एक युवा अपनी ज़िंदगी के सपने बुनता है, उस उम्र में खुदीराम ने आज़ाद भारत का सपना देखा और उसके लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया। एक माँ ने अपना बेटा खोया, लेकिन भारत ने एक ऐसा वीर पाया, जिसकी कहानी आने वाली पीढ़ियों को साहस, देशभक्ति और बलिदान की सीख देती रहेगी। खुदीराम बोस सिर्फ़ इतिहास का एक नाम नहीं—वो उस जज़्बे का नाम हैं, जो देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करना सिखाता है। आज उनकी शहादत को नमन करें और याद रखें— आज़ादी हमें विरासत में नहीं, बल्कि ऐसे अनगिनत वीरों के बलिदान से मिली है।

  • 9 अगस्त International Day of The World's Indigenous Peoples पर आप सभी को ढेर सारी बधाई व शुभकामनाएं💐 🙏🙏🙏

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  • भारत में "हरित क्रांति के जनक" प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन ने 1960 के दशक में भारत में हरित क्रांति का नेतृत्व किया; गेहूँ और चावल की उच्च उपज वाली किस्मों का विकास किया जिससे देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बना। भारतीय कृषि को वैज्ञानिक आधार, नई फसल किस्में, और किसानों के लिए स्थायी नीति सुझाव दिए जिससे देश हमेशा के लिए खाद्यान्न संकट से बाहर निकल पाया और कृषि क्षेत्र में नया युग शुरू हुआ। जयंती पर सादर नमन🙏

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