The Narrative
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15 अगस्त: भारतीय स्वाधीनता दिवस लगभग 800 वर्षों तक आक्रमणकारी इस्लामिक एवं ईसाई शक्तियों के विरुद्ध व्यापक संघर्ष के पश्चात अंततः 15 अगस्त, 1947 को भारत स्वाधीन हुआ. शताब्दियों तक लाखों - करोड़ों भारतीयों ने आक्रमणकारियों के साथ युद्ध लड़ें, क्रांति की और भारतीय अस्मिता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी. क्रांतिकारियों और वीरांगनाओं के साथ-साथ सर्व समाज के प्रयासों के कारण अंग्रेजों ने भारत छोड़ा और हमें स्वतंत्रता प्राप्त हुई. > स्वाधीनता दिवस की आप सभी को अनंत शुभकामनाएं !! मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🇮🇳 The Narrative के अपडेट्स के लिए अपने नाम एवं स्थान के साथ 9589045439 पर व्हाट्सएप करें
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The Narrative Graphical Document भारत की स्वाधीनता के लिए जब 'भारत छोड़ो आंदोलन' किया जा रहा था, तब कम्युनिस्ट समूह इसका विरोध कर रहे थे. ब्रिटिश हुकूमत का पक्ष लेने वाले यही वामपंथी आज स्वतंत्रता पर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं. आखिर क्या चाहते थे कम्युनिस्ट? पढ़िए द नैरेटिव की विशेष ग्राफिकल रिपोर्ट में! > THE QUIT INDIA QUESTION - WHEN COMMUNISTS OPPOSED INDIA'S FREEDOM STRUGGLE ✒️ The Narrative
The Narrative भारत - विचार > एक तरफ गालियाँ, अराजकता और कैमरों के सामने हंगामा; दूसरी तरफ बिना पत्थर उठाए अनुशासित छात्र आंदोलन! आखिर किसका प्रतिरोध अधिक शक्तिशाली है और क्यों? पढ़िए पूरा विश्लेषण! https://tinyurl.com/96t6zhkb The Narrative के नियमित अपडेट्स के लिए अपने नाम एवं स्थान के साथ 9589045439 पर व्हाट्सएप करें!
स्वदेशी आंदोलन - आत्मनिर्भरता से जागा राष्ट्रीय स्वाभिमान > भारत की स्वाधीनता के लिए किए गए संघर्षों की गाथा वर्ष 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध से उभरा स्वदेशी आंदोलन, केवल विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार तक सीमित नहीं था. यह भारतीयों में आत्मनिर्भरता, स्वाभिमान और राष्ट्रीय चेतना जगाने वाला व्यापक जनआंदोलन बन गया. लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल, लाला लाजपत राय और अरविंद घोष जैसे नेताओं ने स्वदेशी के विचार को जन-जन तक पहुँचाया. इस आंदोलन ने विद्यार्थियों, महिलाओं, व्यापारियों, श्रमिकों और सामान्य नागरिकों को स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़ा. स्वदेशी की वह चेतना आगे चलकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की एक महत्वपूर्ण आधारशिला बनी और आज भी आत्मनिर्भरता तथा राष्ट्रीय स्वाभिमान की प्रेरणा देती है. मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩 The Narrative के अपडेट्स के लिए अपने नाम एवं स्थान के साथ 7587396911 पर व्हाट्सएप करें
Video Story by The Narrative > हिन्दू विरोधी पन्नालाल का सच! 📍 ईसाई पादरी अरुण पन्नालाल का आपत्तिजनक बयान! 📍 पहलगाम पोस्ट पर पहले भी हो चुकी है FIR! 📍 आखिर बार-बार क्यों हिन्दू विरोधी बयान? YouTube Link - https://youtu.be/cuGOVkIUr4c Like, Share & Subscribe
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The Narrative Graphical Document भारत की स्वाधीनता के समय कम्युनिस्टों ने इसे "झूठा" बता दिया था, क्योंकि भारत में कम्युनिस्ट तानाशाही की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक सरकार स्थापित हुई. आखिर क्या चाहते थे कम्युनिस्ट? पढ़िए द नैरेटिव की विशेष ग्राफिकल रिपोर्ट में! > YE AZADI JHOOTHI HAI - THE COMMUNIST BETRAYAL ✒️ The Narrative
The Narrative कम्युनिज़्म - प्रोपेगेंडा > जनजातीय अधिकारों के नाम पर खड़ा हुआ संगठन, जिसके पीछे है ईसाइयों की Liberation Theology और वामपंथी नेटवर्क! पीटर उर्फ प्रदीप के पुराने कनेक्शन और नेटवर्क की पूरी कहानी, पढ़िए इस लेख में! https://tinyurl.com/mw9fnzxh The Narrative के नियमित अपडेट्स के लिए अपने नाम एवं स्थान के साथ 9589045439 पर व्हाट्सएप करें!
श्रावण मास में कांवड़ यात्रा प्रत्येक वर्ष श्रावण मास में लाखों शिवभक्त गंगा जल लेकर पवित्र तीर्थों से पैदल चलकर शिवलिंग पर जल अर्पण करते हैं, यही है कांवड़ यात्रा. इस यात्रा में भक्तगण कंधे पर कांवड़ उठाकर, नंगे पाँव चलते हैं और “बोल बम!” के जयघोष से वातावरण को गुंजायमान कर देते हैं. पौराणिक आख्यानों के अनुसार भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण जी ने भी कांवड़ में गंगाजल चढ़ाकर भगवान शिव की आराधना की थी. कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, यह भारतीय जनमानस में महादेव से जुड़ने की जीवंत परंपरा है, जहाँ भक्ति और कठोर तप एक साथ चलते हैं. मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩 The Narrative के अपडेट्स के लिए अपने नाम एवं स्थान के साथ 7587396911 पर व्हाट्सएप करें
☘️ हरेली तिहार – छत्तीसगढ़ का लोक पर्व श्रावण अमावस्या को मनाया जाने वाला हरेली तिहार केवल पर्व नहीं, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का उत्सव है. ‘हरेली’ यानी हरियाली , यही जीवन है, यही प्रकृति की आत्मा. किसान इस दिन अपने कृषि उपकरणों की पूजा कर मिट्टी और परिश्रम दोनों को प्रणाम करते हैं. गेड़ी खेल, उपकरणों की आरती, और नैसर्गिक प्रसाद, हर परंपरा में छिपा है लोक जीवन का विज्ञान. यह छत्तीसगढ़ का पहला पर्व माना जाता है, जहाँ खेत भी पूज्य हैं, और खलिहान भी. जहाँ हर हरियाली में ईश्वर है, वही है हरेली… मेरी संस्कृति….मेरा देश….मेरा अभिमान 🚩 The Narrative के अपडेट्स के लिए अपने नाम एवं स्थान के साथ 9589045439 पर व्हाट्सएप करें
Video Story by The Narrative > Rahul Gandhi’s Selective Outrage! 📍 Silence on Jharkhand & Punjab 📍 Strong Speeches at Jantar Mantar 📍 Rahul Gandhi’s Political Duality YouTube Link - https://youtu.be/K2MFb-439nA Like, Share & Subscribe
The Narrative Bharat - Internal Security > New FCRA rules exclude proselytisation from permitted religious activities, tightening India’s oversight of foreign funding and its utilisation by registered organisations. https://shorturl.at/SiV0L The Narrative के नियमित अपडेट्स के लिए अपने नाम एवं स्थान के साथ 9589045439 पर व्हाट्सएप करें!
The Narrative China in Focus - Mainland China > China’s intelligence laws, surveillance system, and opaque state-corporate ties raise serious concerns over data security and digital sovereignty. Read the full story. https://shorturl.at/d5kBx The Narrative के नियमित अपडेट्स के लिए अपने नाम एवं स्थान के साथ 9589045439 पर व्हाट्सएप करें!
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आजाद हिंद फौज: स्वाधीनता संग्राम में शामिल भारतीय क्रांतिकारियों की सेना > भारत की स्वाधीनता के लिए किए गए संघर्षों की गाथा ब्रिटिश ईसाइयों से भारत को स्वतंत्र कराने के लिए अक्टूबर 1943 में 'आजाद हिंद फौज' का गठन किया गया था, जिसमें कैप्टन मोहन सिंह, रासबिहारी बोस एवं निरंजन सिंह गिल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. तत्पश्चात नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने इसकी कमान संभाली और ब्रिटिश ईसाई सत्ता के विरुद्ध संघर्ष किया. जापान द्वारा युद्धबंदी बनाए गए भारतीय सैनिकों की सहायता से नेताजी ने फौज को आगे बढ़ाया और भारत को स्वतंत्र कराने के लिए क्रांतिकारी गतिविधियों को अंजाम दिया. आजाद हिंद फौज का मुख्यालय सिंगापुर एवं रंगून में बनाया गया. 30 दिसंबर 1943 को अंडमान-निकोबार द्वीप पर स्वतंत्र भारत का ध्वज लहराकर आजाद हिंद फौज ने स्वाधीनता की ओर पहला कदम रखा. मेरी संस्कृति….मेरा देश….मेरा अभिमान 🚩 The Narrative के अपडेट्स के लिए अपने नाम एवं स्थान के साथ 9589045439 पर व्हाट्सएप करें
1857 की क्रांति: भारतीय स्वातंत्र्य समर > भारत की स्वाधीनता के लिए किए गए संघर्षों की गाथा ब्रिटिश ईसाई सत्ता की विभिन्न कुनीतियों के कारण वर्षों तक अपने भीतर आक्रोश लिए बैठे भारतीयों को क्रांति के लिए एक चिंगारी मिल गई थी. 'गाय की चर्बी' लगे कारतूस का विरोध करते हुए 10 मई 1857 को मेरठ से इसकी शुरुआत हुई. इस क्रांति का विस्तार बंगाल से होते हुए लखनऊ, मेरठ से दिल्ली पहुंचा. इसके बाद राजस्थान से लेकर बिहार और मध्यप्रदेश तक क्रांतिकारियों की बाढ़ सी आ गई, जिसने ब्रिटिश ईसाई सत्ता की जड़ें हिला दी. नाना साहेब, तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई, बाबू कुंवर सिंह, मंगल पांडे ने प्रमुख रूप से इस स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों एवं क्रांतिकारी घटनाओं का नेतृत्व किया. स्वाधीनता के इस महान संग्राम को 'वीर सावरकर' ने भारतीय स्वाधीनता का पहला संग्राम कहा था. मेरी संस्कृति….मेरा देश….मेरा अभिमान 🚩 The Narrative के अपडेट्स के लिए अपने नाम एवं स्थान के साथ 9589045439 पर व्हाट्सएप करें
The Narrative Podcast > भारत में मूलनिवासी दिवस क्यों? 📍सुप्रीम कोर्ट के वकील क्या कह रहे? 📍युवाओं में भ्रम कौन फैला रहा? 📍देखें पूरा वीडियो! यूट्यूब लिंक - https://youtu.be/5xjiHr0h1fU Like, Share & Subscribe
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