● Th̷o̷u̷g̷h̷t̷s̷ Of The Day●
Статистика╔═══════ - ════════╗ ɪ̷ ᴀ̷ᴍ̷ ɴ̷ᴏ̷ᴛ̷ ᴀ̷ɴ̷ɢ̷ʀ̷ʏ̷ ᴡ̷ɪ̷ᴛ̷ʜ̷ ᴀ̷ɴ̷ʏ̷ᴏ̷ɴ̷ᴇ̷,̷ ɪ̷ ʜ̷ᴀ̷ᴠ̷ᴇ̷ ᴊ̷ᴜ̷s̷ᴛ̷ ʟ̷ᴏ̷s̷ᴛ̷ ᴍ̷ʏ̷ ʟ̷ɪ̷ғ̷ᴇ̷ ╚═══════ - ════════╝ ༺¢นtē khนŞhi༻ Love thoughts, thoughts, Love,sad poetry, Poetry , Sayari , motivational poetry ,
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खूबसूरत रिवाज होता है प्यार में कभी न मिलने वालों की भी राहें देखी जाती है...
Na jane ku wo yaad aa rha h mujhe phir se.... Apni unn jhuti baato me fasa rha h mujhe phir se... 🥺🥲
मुस्कुराने के अब बहाने नहीं ढूंढने पड़ते तेरा नाम आते ही मुस्कुराहट चेहरे पर आ जाती है...
तुम ना पढ़ो कसूर तुम्हारा है हम तो हर लज़्फ़ में तुम्हे ही लिखते हैं...
मिर्जा ग़ालिब मुझे मालूम था गालिब वो मेरा हो नहीं सकता मगर देखो मुझे फिर भी मोहब्बत हो गई उससे जॉन इलिया वो कहता है के सोच लेना था मोहब्बत करने से पहले उसे क्या पता के सोचकर साजिश की जाती है मोहब्बत नहीं अहमद फ़राज़ इंतजार तो उनका किया जाता है जिन्हें वापस आना हो फ़राज़ जो खुदगर्ज हो उनके लिए मरा नहीं करते...
बिन बुलाए आ जाता है ख्याल नहीं करता तुम्हारा ख्याल क्यूँ मेरा ख्याल नहीं रखता...
ना कर अपने दर्द–ए–दिल को शायरी में बयान ग़ालिब लोग और टूट जाते है हर अल्फ़ाज़ को अपनी दास्तान समझ कर...
किस खत में रखकर भेजूँ अपने इंतजार को बेजुबां है इश्क़ ढूंढता है खामोशी से तुझे...
तवज्जो दे अपनी तालीम पर ना पड़ इश्क़ के आजाबों में अक्सर वो लोग बर्बाद होते है जो रखते है फूल किताबों में...
तेरे आंखों के सामने ये शहर कौन देखेगा तू दरिया सी है ये लहरे कौन देखेगा तू खूबसूरत से भी ज़्यादा खूबसूरत है तुझे देखने के बाद ताजमहल कौन देखेगा...
और वफाओं के सिले कम ही मिले खुशी के बदले गम ही मिले और एक बात समझ नहीं आई साहब क्या सब को दिल दुखाने को हम ही मिले...
https://t.me/Mehfil_e_Shayris
बोल चाल जारी है सब से पर अब महफिलों में रहता नहीं मैं किस्से खूब सुनता हूं सब के अपने किसी से कहता नहीं मैं...
मेरे लिखने से क्या तुम पढ़ो तो कोई बात बने मेरे सोचने से क्या तुम समझो तो कोई बात बने मैं चुप हूं तो क्या तुम कुछ बोलो तो कोई बात बने मैं फूल हूं तो क्या तुम खुशबू बनो तो कोई बात बने मेरे चाहने से क्या तुम एहसास करो तो कोई बात बने मैं बेरंग हूं तो क्या तुम रंग भरो तो कोई बात बने...
मैं पूछता रहता हूं तुम से चले जाने का सबब मगर सवाल तो ये है कि तुम आए ही क्यों थे तन्हाई में ही रखना था तुमने हमको अगर फिर इस महफिल में हम बुलाए ही क्यों थे इतना क्यों घबराते हो इन भंवरों को देख के इतना डर था तो गुल–बाग लगाए ही क्यों थे बाद इतना ही रुलाना था तुमको हमको अगर तो पहले–पहल हम इतना हंसाए ही क्यों थे यार तुम्हारी बेवफाई पर मुझे अब रंज कैसा आखिर वफ़ा के सपने मैने सजाए ही क्यों थे इतना ही डरते थे अगर इन राहों से फिर इन राहों में आशियाने बनाए ही क्यों थे...
तेरे ना होने का मुझको मलाल एक तरफ तू मेरा क्यूँ ना हुआ ये सवाल एक तरफ यकीन मान मै खुश हूं मगर जब तू संग था वो पल वो दिन वो महीना वो साल एक तरफ गुलाब पर ये चटख रंग चढ़ेगा कैसे भला मै बैठा सोचने रख के गुलाल एक तरफ जहांन भर के है मंजर मेरी नजर में मगर उस एक शख्स का दिल में ख्याल एक तरफ हजार शिकवे शिकायते मुझे है तुझसे मगर वो कुछ दिनों की तेरी देखभाल एक तरफ...
याद नहीं कुछ उस बात के बाद मिले नहीं कभी उस मुलाकात के बाद गायब हो गया ज़िंदगी से यूं जुगनू हो जाते है जैसे रात के बाद सुखी सी रहे गयी जमी दिल की दरारें पड़ गई हो जैसे बरसात के बाद आंख ने तलाशा उनको लंबे वक्त तक कोई चेहरा ही नहीं चढ़ा आंखों पर उस चेहरे के बाद एक बार मिले थे किसी रोज जब उसने कहा था निखर से गए हो मेरे जाने के बाद खूब हंसा ये बात सुनकर बहुत रोया मगर घर आने के बाद...
दिखानी पड़े तो मोहब्बत कैसी समझनी पड़े तो शायरी कैसी दूर से ही तकते है सब उसको मिल जाए जिसे वो उसको कमी कैसी...