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Статистикаअंतः अस्ति प्रारंभः ✍ अंत से ही एक नई शुरुआत होती है। 𝗧𝗵𝗲 𝗘𝗻𝗱 𝗶𝘀 𝘁𝗵𝗲 𝗕𝗲𝗴𝗶𝗻𝗻𝗶𝗻𝗴. Contact Buy ads: https://telega.io/c/upscstatus
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सच्चा पुरुष वह नहीं होता जो हर गुजरती लड़की की तरफ मुड़कर देखता है... सच्चा पुरुष वह होता है जिसकी आँखों में संस्कार, मर्यादा और आदर दिखाई देता है। हर स्त्री की तरफ आकर्षण के रूप में देखना मर्दानगी नहीं होती, बल्कि खुद की नज़र पर नियंत्रण न होने की निशानी होती है। जिसके विचारों में सभ्यता होती है, उसकी नज़र कभी भी किसी को असहज नहीं करती। क्योंकि उसे पता होता है कि सामने वाला व्यक्ति सिर्फ एक चेहरा नहीं, बल्कि भावना और सम्मान वाला एक इंसान है। आजकल कुछ लोग "स्टाइल" या "कूल" दिखने के चक्कर में महिलाओं की तरफ गलत नज़र से देखना सामान्य समझते हैं। लेकिन असली अकड़ नज़र में नहीं, चरित्र में होती है। जो पुरुष खुद के व्यवहार से दूसरों को सुरक्षित और आदर के साथ रखता है, उसका व्यक्तित्व अलग ही दिखाई देता है। क्योंकि इंसान का कद उसके कपड़ों या बोलने से नहीं, बल्कि वह दूसरों से कितने सम्मान से पेश आता है, इस पर तय होता है। स्त्री का आदर करना कोई उपकार की बात नहीं होती, वह इंसानियत की पहचान है। जो पुरुष हर स्त्री को साफ़ नज़र से देखता है, वही असल में अपने घर के संस्कारों की कीमत समझता है। क्योंकि सच्चे मर्द की पहचान उसके गुस्से या आवाज़ में नहीं... बल्कि उसकी आँखों के संयम और व्यवहार की सभ्यता में होती है। ऐसी अकड़ वाले लोग ही असल में समाज में आदर से पहचाने जाते हैं। - Pavan ✨
✅कुछ फैसले दिल को दुखाते जरूर हैं, लेकिन वे आने वाले कल को सुरक्षित और शांत बनाने के लिए बेहद जरूरी होते हैं। समझदारी इसी में है कि हम बिना किसी शिकायत के सही रास्ते का चुनाव करें।
✅Tips उन लोगों से दूर चले जाओ जो तुम्हें नीचा दिखाते हैं। उन बहसों या लड़ाइयों से दूर चले जाओ जिनका कभी कोई हल नहीं निकलने वाला। उन लोगों को खुश करने की कोशिश छोड़ दो जो कभी तुम्हारी कीमत नहीं समझेंगे तुम उन चीज़ों से जितना दूर जाओगे जो तुम्हारी आत्मा को ज़हर देती हैं, तुम अंदर से उतने ही स्वस्थ और खुश रहोगे।
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"हमारा एक गलत फैसला माता-पिता के सालों के मान-सम्मान को दांव पर लगा देता है, और समाज के लोग उन्हें नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ते। इसलिए हमेशा ऐसा काम करें जिससे माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा रहे।" ❤️🥹
सुबह उठकर बाबू सोना करने से अच्छा है एक बार हनुमान चालीसा पढ़ लो गारंटी लेती हूं की आपका दिन अच्छा जायेगा 🥳🥳
🍂 अकेलेपन का मजाक बनाने वालों जरा ये तो बताओ जिस भीड़ में तुम खड़े हो उसमें कौन तुम्हारा है !!!
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मेरी प्रिय स्त्री, तुम खुद से प्यार करो, तुम खुद को चाँद कहो, तुम खुद को आसमाँ कहो दिन भर की थकान के बाद जब भी तुम आईना देखो, तो तुम देखना आत्मविश्वास से परिपूर्ण सुंदरता, और संघर्षता से भरी तुम्हारे पिता की चाँद सी खूबसूरत लड़की को।🧿❤️
तुम्हारा संघर्ष ही एक दिन तुम्हारी पहचान बनेगा, और तुम्हारी पहचान किसी परिचय की मोहताज नहीं होगी। ✨🇮🇳
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आज से 15-20 साल पहले लोग सांई बाबा को पूजते थे. फिर ट्रेंड आया महादेव का, उसके बाद नंबर आया खाटू श्याम जी का, और वर्तमान में ट्रेंड चल रहा है सेठ सांवरिया का मेरा मकसद किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाना नहीं है। लेकिन जब समय बदलता है, तो लोग अपना भगवान भी बदल देते हैं, और तुम तो फिर भी इंसान हो। 🌹
जीवन में सही मार्ग दिखाने वाले सभी गुरुजनों को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं एवं शत-शत नमन। 🌸🙏
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भूल और क्षमा: मानवीय स्वभाव का संतुलन संसार में कोई भी मनुष्य पूर्ण नहीं है। अज्ञानता, तात्कालिक आवेग या सही-गलत की समझ न होने के कारण जीवन में किसी न किसी स्तर पर हर व्यक्ति से भूल या त्रुटि हो ही जाती है। ऐसे में सामने वाले व्यक्ति की गलती पर निरंतर क्रोधित रहना या मन में प्रतिशोध की भावना पालना, स्वयं अपने मानसिक स्वास्थ्य को नष्ट करने जैसा है। इसके विपरीत, 'क्षमा' एक ऐसा मानवीय मूल्य है जो न केवल सामने वाले को सुधरने और आत्मनिरीक्षण करने का एक अवसर प्रदान करता है, बल्कि क्षमा करने वाले व्यक्ति को भी मानसिक शांति और आंतरिक स्वतंत्रता देता. है। क्रोध और द्वेष मनुष्य को अतीत के कड़वे अनुभवों में बांधकर रखते हैं, जबकि क्षमा का एक निर्णय व्यक्ति को भविष्य की ओर बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करता है। जीवन की सार्थकता इसी बात में है कि हम गलतियों से सीखें, दूसरों की भूलों को बड़प्पन के साथ स्वीकार करें और समाज में नकारात्मकता के स्थान पर प्रेम और सद्भावना का विस्तार करें।