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Статистикаवीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर, उत्तर प्रदेश, भारत नैक द्वारा मान्यता प्राप्त उत्तर प्रदेश का राज्य विश्वविद्यालय Instagram I'd https://www.instagram.com/invites/contact/?i=zg60zpm8vynm&utm_content=ku9aa4o
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अपने जीवन का पल-पल और शरीर का कण-कण नि:स्वार्थ भाव से राष्ट्र की सेवा में लगा देने वाले, देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर करने वाले यशस्वी प्रधानसेवक श्री @narendramodi जी को समस्त देशवासियों की ओर से जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
संवेदना से ही वेदना की पीड़ा को समझा जा सकता है: डॉ. रसिकेश "परिवार, मित्र और समाज की आत्महत्या रोकथाम में भूमिका" विषयक परिचर्चा का आयोजन जौनपुर.वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के संकाय भवन के कॉन्फ्रेंस हॉल में विश्व आत्महत्या रोकथाम सप्ताह के अंतर्गत एक सार्थक और विचारोत्तेजक पैनल डिस्कशन का आयोजन किया गया। इसका विषय था – “परिवार, मित्र और समाज की आत्महत्या रोकथाम में भूमिका।” इस अवसर पर वक्ताओं ने मानसिक स्वास्थ्य, युवा वर्ग में बढ़ती निराशा, सोशल मीडिया के प्रभाव और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की। एचआरडी विभागाध्यक्ष डॉ. रसिकेश ने कहा कि वर्तमान समय में युवा आभासी दुनिया में इतना उलझ गया है कि वह वास्तविक जीवन और संबंधों से कटता जा रहा है। यह सामाजिक अलगाव नकारात्मकता और आत्मघाती प्रवृत्ति को जन्म देता है। उन्होंने सुझाव दिया कि व्यक्ति को अपनी वेदना से संवेदना की ओर बढ़ना चाहिए, जिससे मानसिक लचीलापन और सहनशक्ति विकसित हो सके। प्रो. अजय प्रताप सिंह ने आत्महत्या रोकथाम में परिवार और मित्रों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि एकाकी जीवन की बढ़ती प्रवृत्ति मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। प्रारंभिक स्तर पर संवाद, समझ और सहयोग आत्महत्या रोकने में सहायक हो सकते हैं। छात्र प्रतिनिधि अभिनव कीर्ति पाण्डेय (बीएएलएलबी) ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि उन्हें कभी भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। उन्होंने भारतीय संस्कृति से प्रेरणा लेने और जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता पर बल दिया। परिचर्चा का संचालन डॉ. जान्हवी श्रीवास्तव ने किया और आभार प्रदर्शन डॉ. अन्नू त्यागी ने किया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर अपनी जिज्ञासाएं और विचार साझा किए।
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विश्वविद्यालय में दीक्षोत्सव एवं इंजीनियर्स डे पर हुईं तकनीकी कार्यशालाएं, छात्रों को मिला एआई और डेटा एनालिटिक्स का व्यावहारिक ज्ञान जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में 29वें दीक्षांत समारोह से पूर्व दीक्षोत्सव के अंतर्गत इंजीनियरिंग संकाय द्वारा तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण आयोजनों का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस अवसर पर आई ट्रिपल ई स्टूडेंट ब्रांच के तत्वावधान में एक दिवसीय कार्यशाला "डेटा एनालिटिक्स और एआई विद मैटलैब" आयोजित की गई, जिसका उद्घाटन प्रोफेसर संतोष कुमार द्वारा किया गया। कार्यशाला में कंप्यूटर साइंस, डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए और छात्रों को मैटलैब सॉफ्टवेयर की उपयोगिता से अवगत कराया। मैथवर्क्स से आए श्री अरमान अंसारी ने मैटलैब में डेटा एनालिटिक्स और एआई के प्रयोग पर व्याख्यान दिया और छात्रों को हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग प्रदान की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. संदीप सिंह ने कहा कि छात्रों को सिर्फ शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं बल्कि उद्योग की मांग के अनुरूप तकनीकी दक्षता भी विकसित करनी चाहिए। वहीं, प्रो. रविप्रकाश ने एआई और डेटा एनालिटिक्स के बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इन क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं। प्रो. रजनीश भास्कर ने मैटलैब सॉफ्टवेयर के अनुप्रयोगों की तकनीकी जानकारी दी और डॉ. विक्रांत भटेजा ने कार्यशाला के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह आयोजन छात्रों को नवीनतम तकनीकों से परिचित कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आई ट्रिपल ई ब्रांच काउंसलर डॉ. दिव्येंदु मिश्र ने बताया कि कार्यशाला के माध्यम से छात्रों को व्यावसायिक टूल्स के प्रयोग की व्यावहारिक जानकारी दी गई। इंजीनियर्स डे पर भी हुआ विशेष आयोजन इसी क्रम में भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया की जयंती पर विश्वविद्यालय में इंजीनियर्स डे का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सर एम. विश्वेश्वरैया की प्रतिमा पर माल्यार्पण और श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। इस अवसर पर प्रो. संतोष कुमार ने उनके जीवन और योगदान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वे बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई प्रणाली और जल संसाधन प्रबंधन के विशेषज्ञ थे और आधुनिक भारत के निर्माण में उनकी भूमिका अविस्मरणीय रही है। प्रो. रविप्रकाश ने कहा कि सर एम. विश्वेश्वरैया का जीवन हर इंजीनियर के लिए प्रेरणा है और हमें उनके सिद्धांतों का अनुसरण करना चाहिए। डॉ. विक्रांत भटेजा ने इंजीनियरों की राष्ट्र निर्माण में भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि इंजीनियर ही किसी देश की आधारभूत संरचना को गढ़ते हैं। कार्यक्रम में डॉ. दिव्येंदु मिश्र, श्री दिलीप यादव, श्री मनोज यादव, श्री अशोक यादव, श्री रितेश श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।
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शहीद उमानाथ सिंह के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता: कुलपति जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय स्थित इंजीनियरिंग संस्थान में शनिवार को अमर शहीद उमानाथ सिंह की 31वीं पुण्यतिथि श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वंदना सिंह और स्वर्गीय उमानाथ सिंह के पुत्र पूर्व सांसद डॉ. के. पी. सिंह ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें याद किया। कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि शहीद उमानाथ सिंह का बलिदान, समर्पण और उनके द्वारा किए गए कार्य देश, धर्म और समाज के लिए अनमोल है। उनका योगदान हर भारतीय के लिए प्रेरणास्रोत है और उन्हें हम भुला नहीं सकते। देश की सेवा में उनके अद्भुत संघर्ष और आत्मबलिदान को आने वाली पीढ़ियां सदैव याद रखेंगी। पूर्व सांसद डॉ. के. पी. सिंह ने शहीद उमानाथ सिंह के जीवन एवं उनके राजनीतिक संघर्ष को विस्तार से प्रस्तुत करते हुए कहा कि वे 13 अगस्त 1938 को जौनपुर के महरूपुर गांव में एक संस्कारवान परिवार में जन्में। बाल्यकाल से ही उन्होंने उत्तरदायित्व, धीरता और राष्ट्रप्रेम का परिचय दिया। वर्ष 1957 में भारतीय जनसंघ से जुड़कर उन्होंने राष्ट्रसेवा का कार्य प्रारंभ किया। उन्होंने 1957 के खाद्य आन्दोलन, 1975 के आपातकाल एवं 1990 के राम जन्मभूमि आंदोलन में भाग लेते हुए जेल यात्रा भी की। उनकी ईमानदारी, सादगी और संघर्षशीलता हमेशा याद की जाएगी। कार्यक्रम में प्रो. राजकुमार, प्रो. संतोष कुमार, डॉ. राम नरेश यादव, डॉ. दिव्येंदु मिश्र, श्याम त्रिपाठी, रमेश यादव सहित बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे और शहीद उमानाथ सिंह के प्रति अपने भाव प्रकट किए।
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शहीद उमानाथ सिंह के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता: कुलपति जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय स्थित इंजीनियरिंग संस्थान में शनिवार को अमर शहीद उमानाथ सिंह की 31वीं पुण्यतिथि श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वंदना सिंह और स्वर्गीय उमानाथ सिंह के पुत्र पूर्व सांसद डॉ. के. पी. सिंह ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें याद किया। कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि शहीद उमानाथ सिंह का बलिदान, समर्पण और उनके द्वारा किए गए कार्य देश, धर्म और समाज के लिए अनमोल है। उनका योगदान हर भारतीय के लिए प्रेरणास्रोत है और उन्हें हम भुला नहीं सकते। देश की सेवा में उनके अद्भुत संघर्ष और आत्मबलिदान को आने वाली पीढ़ियां सदैव याद रखेंगी। पूर्व सांसद डॉ. के. पी. सिंह ने शहीद उमानाथ सिंह के जीवन एवं उनके राजनीतिक संघर्ष को विस्तार से प्रस्तुत करते हुए कहा कि वे 13 अगस्त 1938 को जौनपुर के महरूपुर गांव में एक संस्कारवान परिवार में जन्में। बाल्यकाल से ही उन्होंने उत्तरदायित्व, धीरता और राष्ट्रप्रेम का परिचय दिया। वर्ष 1957 में भारतीय जनसंघ से जुड़कर उन्होंने राष्ट्रसेवा का कार्य प्रारंभ किया। उन्होंने 1957 के खाद्य आन्दोलन, 1975 के आपातकाल एवं 1990 के राम जन्मभूमि आंदोलन में भाग लेते हुए जेल यात्रा भी की। उनकी ईमानदारी, सादगी और संघर्षशीलता हमेशा याद की जाएगी। कार्यक्रम में प्रो. राजकुमार, प्रो. संतोष कुमार, डॉ. राम नरेश यादव, डॉ. दिव्येंदु मिश्र, श्याम त्रिपाठी, रमेश यादव सहित बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे और शहीद उमानाथ सिंह के प्रति अपने भाव प्रकट किए।
स्वामी विवेकानन्द के शिकागो में दिए विचार आज भी प्रासंगिकः डॉ रसिकेश शिकागो में दिए 132 वीं वर्षगांठ पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के मानव संसाधन विकास ( एच आर डी) विभाग द्वारा विवेकानंद के 11 सितंबर 1893 में शिकागो में दिए 132 वीं वर्षगांठ पर विवेकानंद के दर्शन पर आधारित कार्यशाला एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि व्यवसाय प्रबंध विभाग के शिक्षक उद्देश्य सिंह ने कहा कि आज युवाओं को स्वामी जी की ही तरह निर्भीक एवं आध्यात्मिक होने की आवश्यकता है स्वामी जी का 11 सितंबर का भाषण अभूतपूर्व था जिसे आज भी याद किया जाता है। आज युवाओं को फ़िल्म और सोशल मीडिया के अभिनेताओं से नही बल्कि युवा आइकॉन स्वामी जी को अपना रोल मॉडल बनाना होगा। विभागाध्यक्ष डॉ. रसिकेश ने कहा की 132 वर्ष पूर्व दिए स्वामी जी के संछिप्त भाषण को आज की पीढ़ी न सिर्फ देशी बल्कि विदेशी भी अप्रतिम मानते है। विभाग की छात्रा अवंतिका एवं राज द्वारा मुख्य अतिथि का स्वागत पुष्प गुच्छ देकर किया गया। ततपश्चात स्वामी विवेकानन्द के 11 सितंबर 1893 को अमेरिका के शिकागो में दिए ऐतिहासिक मूल भाषण को छात्रों के लिए पावर पॉइंट आडियो वीडियो के द्वारा प्रदर्शित किया गया। भाषण प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार अनुराग तिवारी , द्वितीय पुरस्कार संजना मिश्रा , तृतीय पुरस्कार वैशाली राय , चतुर्थ पुरस्कार पूजा साहू एवं पंचम पुरस्कार अमृता सिंह ने को मिला।
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नवप्रवेशी विद्यार्थियों को विधि शिक्षा की दिशा में पहला मार्गदर्शन पूर्वांचल विश्वविद्यालय में विधि विद्यार्थियों हेतु इंडक्शन कार्यक्रम आयोजित जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय स्थित दत्तोपंत ठेंगड़ी विधि संस्थान में बी.ए.एलएल.बी. प्रथम सेमेस्टर तथा एलएलएम के विद्यार्थियों के लिए इंडक्शन कार्यक्रम गुरुवार को आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम संस्थान के मूट कोर्ट हॉल में आयोजित हुआ। कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि विद्यार्थी विश्वविद्यालय की असली पहचान होते हैं। यदि आप अनुशासन, परिश्रम और ईमानदारी को जीवन का हिस्सा बना लें, तो सफलता आपके कदम चूमेगी। उन्होंने विद्यार्थियों को कंडक्ट, पॉज़िटिविटी एवं पंक्चुअलिटी (आचरण, सकारात्मकता एवं समयनिष्ठा) को जीवन का हिस्सा बनाने की प्रेरणा दी। कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि इंडक्शन कार्यक्रम छात्रों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं व्यावहारिक यात्रा की पहली झलक देता है। यह अवसर है जब विद्यार्थी अपने सपनों को सही दिशा देने का संकल्प लें। विभागाध्यक्ष एवं निदेशक प्रो. विनोद कुमार ने कहा कि विधि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का मार्ग है। हम चाहते हैं कि हमारे विद्यार्थी ज्ञान, कौशल और नैतिकता तीनों में उत्कृष्ट हों। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनुराग मिश्र ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार के शिक्षक मंगला प्रसाद यादव, डॉ. दिनेश सिंह, डॉ. राहुल कुमार राय, डॉ. अंकित कुमार, डॉ. राजित राम सोनकर, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. राजन तिवारी, डॉ. शुभम सिंह, प्रगति सिंह, जीशान अली सहित अन्य प्राध्यापकगण, लाइब्रेरियन अवधेश कुमार, सुषमा मिश्रा, शैलेश कुमार, सुषमा मिश्रा, संतोष पांडे, छात्र-छात्राएँ एवं गणमान्यजन भी मौजूद रहे
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आज की युवा पीढ़ी में संक्रमण की तरफ फैल रहा है तनाव- सीमा सिंह विश्वविद्यालय में तनाव प्रबंधन कार्यशाला का हुआ आयोजन जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर में व्यावहारिक मनोविज्ञान विभाग एवं वेलनेस सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में संकाय भवन के कांफ्रेंस हाल में विश्व आत्महत्या रोकथाम सप्ताह के दूसरे दिन तनाव प्रबंधन कार्यशाला एवं काउंसलिंग कैम्प “सुनना और समझना” का आयोजन हुआ । वक्ताओं ने जीवन में तनाव मुक्त रहने के टिप्स भी दिए. विश्व आत्महत्या रोकथाम सप्ताह की थीम "आत्महत्या के विषय पर दृष्टिकोण और संवाद को बदलना" है। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता जिला महिला अस्पताल की काउंसलर सीमा सिंह ने कहा कि एचआईवी पीड़ितों में आत्महत्या की प्रवृत्ति आजकल बहुत अधिक देखने को मिल रही है । इसके बचाव के लिए उनकी निरंतर काउंसलिंग की जा रही है ताकि उनकी सोच में परिवर्तन लाया सके । पीड़ितों को काउंसलिंग के दौरान खुश रहने की भी टिप्स दिए जाते हैं और उसके सुखद परिणाम सामने आ रहे हैं । उन्होंने एक शोध का हवाला देते हुए कहा कि 40 प्रतिशत लोगों के जीवन में कभी न कभी एक बार आत्महत्या करने का विचार जरूर आता है । उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी में तनाव संक्रमण की तरफ फैल रहा है जिसका मुख्य कारण परिवार और समाज में पारंपरिक संस्कारों के प्रवाह का विकृत रूप होना है । अनुप्रयुक्त सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो.मनोज मिश्र ने विद्यार्थियों से श्री रामचरितमानस के विभिन्न संदर्भो की याद दिलाते हुए जीवन में सकारात्मकता लाने की सलाह दी।उन्होंने कहा कि यह देश युवाओं का है और विकसित भारत तब और बुलंदी पर होगा जब हमारे युवा सकारात्मकता एवं प्रसन्नता से परिपूर्ण होंगे । नोडल अधिकारी प्रो. अजय प्रताप सिंह ने कहा कि आजकल युवाओं में विभिन्न कारणों से तनाव तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। पारिवारिक समस्याएं, आपसी संबंधों में दरार, परीक्षा परिणाम का दबाव और बढ़ती प्रतिस्पर्धा उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। केवल विद्यार्थी ही नहीं, आम आदमी भी आर्थिक समस्याओं और रोजमर्रा की जटिलताओं के कारण तनावग्रस्त होता जा रहा है। संदेश दिया कि सकारात्मक सोच कभी नकारात्मकता से हारती नहीं है। कार्यक्रम का संचालन व्यवहारिक मनोविज्ञान विभाग की शिक्षिका एवं परामर्श केंद्र की प्रभारी डॉ. जान्हवी श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर डॉ. अन्नू त्यागी, डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, ज्योति सिंह, सविता सहित विभिन्न विभागों के विद्यार्थी उपस्थित रहे ।
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