- Последний пост
- 15 авг.
- Последнее чтение
- 15 авг.
- Постов за неделю
- 7
- Всего постов
- 24
- Тип
- открытый
- Язык
- хинди
- Категория
- Развлечения (по похожим)
- В каталоге с
- 13 авг.
- 1/24сутки в ленте
- 96
- 1/48двое суток
- 110
- 1/72трое суток
- 118
Оценка по просмотрам недавних постов: пост набирает почти всё за первые сутки.
Посты
࿗ भारतवर्ष 🔱 Bharatvarsh 🚩 pinned a photo
🔴Now the signal is available to everyone! 🔴 ❗️Read the post to the end and follow the instructions carefully. 🤗 I'm sharing something you normally wouldn't have access to—especially not in a free channel. 🫡You supported me in the past, and now it's my turn to give back and help you. 🟠Step 1: Buy ETH on Binance or any other exchange. 🟠 Step 2: Sell ETH on bitnax.io ✅The current price difference for ETH is approximately 9.5%.
࿗ भारतवर्ष 🔱 Bharatvarsh 🚩 pinned a photo
🔴Now the signal is available to everyone! 🔴 ❗️Read the post to the end and follow the instructions carefully. 🤗 I'm sharing something you normally wouldn't have access to—especially not in a free channel. 🫡You supported me in the past, and now it's my turn to give back and help you. 🟠Step 1: Buy ETH on Binance or any other exchange. 🟠 Step 2: Sell ETH on bitnax.io ✅The current price difference for ETH is approximately 9.5%.
श्रीहरिः श्रीमद्भगवद्गीता द्वितीयोऽध्यायः श्लोक २२ वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि । तथा शरीराणि विहाय जीर्णा-न्यन्यानि संयाति नवानि देही ।। भावार्थ :- जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रोंको त्यागकर दूसरे नये वस्त्रोंको ग्रहण करता है, वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीरोंको त्यागकर दूसरे नये शरीरोंको प्राप्त होता है। सम्बंध :- तत्त्वको जाननेवाले महापुरुषोंद्वारा 'असत्' और 'सत्' का विवेचन करके जो यह निश्चय कर लेता है कि जिस वस्तुका परिवर्तन और नाश होता है, जो सदा नहीं रहती, वह असत् है- अर्थात् असत् वस्तुका विद्यमान रहना सम्भव नहीं और जिसका परिवर्तन और नाश किसी भी अवस्थामें किसी भी निमित्तसे नहीं होता, जो सदा विद्यमान रहती है, वह सत् है- अर्थात् सत्का कभी अभाव होता ही नहीं - यही तत्त्वदर्शी पुरुषोंद्वारा उन दोनोंका तत्त्व देखा जाना है। हर हर महादेव 🌺
श्रीमन्नारायण 🌺 पाँच हेतु ऐसे हैं, जिनके कारण मनुष्य अधर्मसे बचता है और धर्मको सुरक्षित रखनेमें समर्थ होता है - ईश्वरका भय, शास्त्रका शासन, कुलमर्यादाओंके टूटनेका डर, राज्यका कानून और शारीरिक तथा आर्थिक अनिष्टकी आशंका। इनमें ईश्वर और शास्त्र सर्वथा सत्य होनेपर भी वे श्रद्धापर निर्भर करते हैं, प्रत्यक्ष हेतु नहीं हैं। राज्यके कानून प्रजाके लिये ही प्रधानतया होते हैं; जिनके हाथोंमें अधिकार होता है, वे उन्हें प्रायः नहीं मानते। शारीरिक तथा आर्थिक अनिष्टकी आशंका अधिकतर व्यक्तिगत रूपमें हुआ करती है। एक कुल-मर्यादा ही ऐसी वस्तु है, जिसका सम्बन्ध सारे कुटुम्बके साथ रहता है। जिस समाज या कुलमें परम्परासे चली आती हुई शुभ और श्रेष्ठ मर्यादाएँ नष्ट हो जाती हैं, वह समाज या कुल बिना लगामके मतवाले घोड़ोंके समान यथेच्छाचारी हो जाता है। यथेच्छाचार किसी भी नियमको सहन नहीं कर सकता, वह मनुष्यको उच्छृंखल बना देता है। जिस समाजके मनुष्योंमें इस प्रकारकी उच्छृंखलता आ जाती है, उस समाज या कुलमें स्वाभाविक ही सर्वत्र पाप छा जाता है। हर हर महादेव 🌺
आ गए घूम फिर कर ऋग्वेद पर ही 😂
मृत्यु के बाद कहाँ जाते हैं ?
࿗ भारतवर्ष 🔱 Bharatvarsh 🚩 pinned Deleted message
भौतिक समृद्धि श्रेष्ठता का पैमाना नहीं होती है क्योंकि यह किसी भी क्षण आपके शरीर की भाँति ही नष्ट हो सकती है। जो आप एक जन्म से लेकर आगामी जन्मों तक नहीं ले जा सकते हैं, वह पैमाना नहीं हो सकता। विस्मृति के पटल खुलते हैं, सब संजोया हुआ याद आ जाता है, यह धन समृद्धि संचय से अधिक है। हर हर महादेव
ईश्वर आपको जो कुछ भी देते है, वह आपका नहीं होता है वह प्राणी मात्र के कल्याण के लिए होता है - धन, विद्या, ज्ञान, कला, सृजनात्मकता आदि। यदि आप वह स्वयं तक ही रख लेते हैं, तो वह स्वतः लुप्त हो जाता है। आप बस निमित्त मात्र थे, अब कोई और होगा। स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ मत समझें!! हर हर महादेव 🚩
समाज की उतनी ही नकारात्मकता घर और अपने मन में लानी चाहिए, जिससे अधिक आपकी तपश्चर्या है .. अन्यथा यह शनैः शनैः मन में विकार करके आपके घर के वातावरण को दूषित करेगी। समाज देखने पर जितना संस्कारी और धार्मिक लगता है, उसका दशांश भी नहीं है, दूषित हो चुका है अब। शुभ रात्रि 🙌🏻 हर हर महादेव
एक पापी नैतिकता एवं धार्मिक मान्यताओं को नहीं मानता और अंततः दण्डित होता कष्ट भोगता है। बार बार यही करने के पश्चात, आत्मा अपनी सीख ले लेती है और नए जन्मों में, व्यक्ति को पुनः ऐसा करने से सचेत करती है। सीख गए तो ठीक नहीं फिर से वही चक्र चलता है जब तक मान न जाओ, पूर्वाभास यही हैं।
श्रावण मास-2026, प्रथम सोमवार पावन अवसर पर भगवान श्री विश्वेश्वर की मंगला आरती दर्शन। हर हर महादेव! 🔱
"धावन् धावन्नेव अवगतं यद्—एकाकित्वमपि गन्तव्यमेव।" कदाचित् जीवनयात्रा जनसमूहतः अस्मान् दूरं नयति, न तु परित्यागाय, अपितु स्वस्वरूपस्य साक्षात्काराय। प्रत्येका एकाकिनी रजनी दृढतरस्य प्रभातस्य पूर्वपीठिका भवति। अतः यदि अद्य भवतः समीपे कश्चिदपि नास्ति, तर्हि धैर्यं मा त्यजत, साहसं मा मुञ्चत। सम्भवम्—दैवमेव भवतः जीवनस्य परमसुन्दरं गन्तव्यं प्रति भवन्तं नयति। अतः प्रशान्तेन चेतसा विश्राम्यताम्। कः जानाति—श्वः उदेति यः सूर्यः, स एव भवतः जीवने नूतनाम् आशां, नूतनम् आलोकं, नूतनां प्रभां च प्रसारयेत्। शुभरात्रिः। सर्वेभ्यः शान्तिः, प्रसन्नता च भवतु। 🌌✨
यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति । तस्याहं न प्रणश्यामि स च मे न प्रणश्यति ॥ "He who sees Me everywhere and sees everything in Me is never separated from Me, nor am I separated from him." - 𝘉𝘩𝘢𝘨𝘢𝘷𝘢𝘥 𝘎𝘪𝘵𝘢 6.30
देवों के देव महादेव की असीम कृपा आप और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे। हर हर महादेव! 🚩🔱
श्रावणस्य प्रथमदिने। शिवकृपा सर्वदा भवेत्॥ हर हर महादेव 🌺🚩
नाम - श्रावण मास माहात्म्य भाषा - हिन्दी, संस्कृत पृष्ठ संख्या - 286 गीताप्रेस गोरखपुर Source - archive.org
без подписи