Granth vachan (ग्रंथ वचन)
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🔸 चतुर्मास में योगाभ्यास करने वाला मनुष्य ब्रह्मपद को प्राप्त होता है । ‘नमो नारायणाय’ का जप करने से सौ गुने फल की प्राप्ति होती है । यदि मनुष्य चतुर्मास में भक्तिपूर्वक योग के अभ्यास में तत्पर न हुआ तो निःसंदेह उसके हाथ से अमृत का कलश गिर गया । जो मनुष्य नियम, व्रत अथवा जप के बिना चौमासा बिताता है वह मूर्ख है । 🔸बुद्धिमान मनुष्य को सदैव मन को संयम में रखने का प्रयत्न करना चाहिए । मन के भलीभाँति वश में होने से ही पूर्णतः ज्ञान की प्राप्ति होती है । 🔸 ‘एकमात्र सत्य ही परम धर्म है । एक सत्य ही परम तप है । केवल सत्य ही परम ज्ञान है और सत्य में ही धर्म की प्रतिष्ठा है । अहिंसा धर्म का मूल है । इसलिए उस अहिंसा को मन, वाणी और क्रिया के द्वारा आचरण में लाना चाहिए ।’ (स्कं. पु. ब्रा. 2.18-19) 🌹देवशयनी एकादशी - 25 जुलाई 2026🌹 🔹एकादशी व्रत के लाभ🔹 🔸 एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है । 🔸 जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है । 🔸 जो पुण्य गौ-दान, सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है । 🔸 एकादशी करने वालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं । इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है । 🔸 धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है । 🔸 कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है । 🔸 इस दिन भूलकर भी चावल नही खाएं। 🌞🚩🚩 " ।। जय श्री राम ।। " 🚩🚩🌞 ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ (हमारे मनोबल को बनाये रखने के लिए एवं पञ्चाङ्ग का लाभ सभी को मिल सके इसके लिए यह पञ्चाङ्ग अपने सभी परिचितों को एवं सभी ग्रुपों में शेयर अवश्य करें।)
🌞 दैनिक पंचांग 🌞 🌥️ दिनांक - 25 जुलाई 2026 🌥️ दिन - शनिवार 🌥️ विक्रम संवत् - 2083 🌥️ संवत्सर - विश्वावसु 🌥️ अयन - दक्षिणायन 🌥️ ऋतु - वर्षा 🌥️ मास - आषाढ़ 🌥️ पक्ष - शुक्ल 🌥️ सूर्य राशि - कर्क 🌥️ चंद्र राशि - वृश्चिक 🌥️ सूर्योदय - 05:47 🌥️ सूर्यास्त - 07:04 (समस्त मूहुर्त नर्मदापुरम मानक समयानुसार) 🌥️तिथि - एकादशी दिन 11:34 तक तद्पश्चात द्वादशी 🌥️नक्षत्र - ज्येष्ठा प्रातः 07:34 तक तद्पश्चात मूल 🌥️योग - ब्रह्म रात्रि 09:09 तक तद्पश्चात इन्द्र 🌥️राहुकाल - दिन 09:06 से दिन 10:46 तक 🌥️भद्रावास - स्वर्ग 👉🏻 दिन 11:34 तक 🌥️गण्डमूल - रात्रि 04:36 से 27 जुलाई दिन 10:28 तक 🌥️दिशा शूल 👉🏻 पूर्व दिशा में 🌥️अग्निवास: 👉🏻 पृथ्वी - शुभ 🌥️चन्द्र वास: 👉🏻 उत्तर 🌥️शिववास: 👉🏻 क्रीड़ा में - सन्ततिकष्ट दिन 11:34 तक तद्पश्चात कैलाश पर - सौख्य 🌥️ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:22 से प्रातः 05:04 तक 🌥️अभिजीत मुहूर्त - दिन 11:59 से दिन 12:52 तक 🌥️निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:04 जुलाई 26 से रात्रि 12:47 जुलाई 26 तक ⛅व्रत,पर्व आदि विवरण- भद्रावास, गण्ड मूल, रविगौरी व्रत प्रारम्भ, देवशयनी एकादशी व्रत, चातुर्मास प्रारम्भ ⛅ आजके अन्य मुहूर्त - कोई नहीं 🌥️विशेष - एकादशी को चावल एवं सेम फली खाना वर्जित है एवं द्वादशी को पूतिका (पोई) का शाक खाना वर्जित है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34) 🌹शनिवार के दिन विशेष प्रयोग 🌹 🌹शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव कम हो जाता है । (ब्रह्म पुराण) 🌹हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है । (पद्म पुराण) 🔹आर्थिक कष्ट निवारण हेतु🔹 🔹एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र जपते हुए पीपल की ७ बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है । 🌹 चातुर्मास्य व्रत की महिमा🌹 🔸 चतुर्मास में प्रतिदिन एक समय भोजन करने वाला पुरुष अग्निष्टोम यज्ञ के फल का भागी होता है । पंचगव्य सेवन करने वाले मनुष्य को चन्द्रायण व्रत का फल मिलता है । यदि धीर पुरुष चतुर्मास में नित्य परिमित अन्न का भोजन करता है तो उसके सब पातकों का नाश हो जाता है और वह वैकुण्ठ धाम को पाता है । चतुर्मास में केवल एक ही अन्न का भोजन करने वाला मनुष्य रोगी नहीं होता । 🔸 जो मनुष्य चतुर्मास में केवल दूध पीकर अथवा फल खाकर रहता है, उसके सहस्रों पाप तत्काल विलीन हो जाते हैं । 🔸 पंद्रह दिन में एक दिन संपूर्ण उपवास करने से शरीर के दोष जल जाते हैं और चौदह दिनों में तैयार हुए भोजन का रस ओज में बदल जाता है । इसलिए एकादशी के उपवास की महिमा है । वैसे तो गृहस्थ को महीने में केवल शुक्लपक्ष की एकादशी रखनी चाहिए, किंतु चतुर्मास की तो दोनों पक्षों की एकादशियाँ रखनी चाहिए । 🔸 जो बात करते हुए भोजन करता है, उसके वार्तालाप से अन्न अशुद्ध हो जाता है । वह केवल पाप का भोजन करता है । जो मौन होकर भोजन करता है, वह कभी दुःख में नहीं पड़ता । मौन होकर भोजन करने वाले राक्षस भी स्वर्गलोक में चले गये हैं । यदि पके हुए अन्न में कीड़े-मकोड़े पड़ जायें तो वह अशुद्ध हो जाता है । यदि मानव उस अपवित्र अन्न को खा ले तो वह दोष का भागी होता है । जो नरश्रेष्ठ प्रतिदिन ‘ॐ प्राणाय स्वाहा, ॐ अपानाय स्वाहा, ॐ व्यानाय स्वाहा, ॐ उदानाय स्वाहा, ॐ समानाय स्वाहा’ – इस प्रकार प्राणवायु को पाँच आहुतियाँ देकर मौन हो भोजन करता है, उसके पाँच पातक निश्चय ही नष्ट हो जाते हैं । 🔸चतुर्मास में जैसे भगवान विष्णु आराधनीय हैं, वैसे ही ब्राह्मण भी । भाद्रपद मास आने पर उनकी महापूजा होती है । जो चतुर्मास में भगवान विष्णु के आगे खड़ा होकर ‘पुरुष सूक्त’ का पाठ करता है, उसकी बुद्धि बढ़ती है । 🔸 चतुर्मास सब गुणों से युक्त समय है । इसमें धर्मयुक्त श्रद्धा से शुभ कर्मों का अनुष्ठान करना चाहिए । सत्संगे द्विजभक्तिश्च गुरुदेवाग्नितर्पणम् । गोप्रदानं वेदपाठः सत्क्रिया सत्यभाषणम् । । गोभक्तिर्दानभक्तिश्च सदा धर्मस्य साधनम् । 🔸 ‘सत्संग, भक्ति, गुरु, देवता और अग्नि का तर्पण, गोदान, वेदपाठ, सत्कर्म, सत्यभाषण, गोभक्ति और दान में प्रीति – ये सब सदा धर्म के साधन हैं ।’ 🔸 देवशयनी एकादशी से देवउठी एकादशी तक उक्त धर्मों का साधन एवं नियम महान फल देने वाला है । चतुर्मास में भगवान नारायण योगनिद्रा में शयन करते हैं, इसलिए चार मास शादी-विवाह और सकाम यज्ञ नहीं होते । ये मास तपस्या करने के हैं ।
अगर आप ईमानदार हो तो कुदरत आप को कभी भी निराश नहीं करेगा इस विडीयो के माध्यम से आपको बहुत सीख मिल सकती है - "मनु की विचारधारा"
🌞 दैनिक पंचांग 🌞 🌥️ दिनांक - 16 जुलाई 2026 🌥️ दिन - गुरुवार 🌥️ विक्रम संवत् - 2083 🌥️ संवत्सर - विश्वावसु 🌥️ अयन - दक्षिणायन 🌥️ ऋतु - वर्षा 🌥️ मास - आषाढ़ 🌥️ पक्ष - शुक्ल 🌥️ सूर्य राशि - मिथुन रात्रि 11:45 तक तद्पश्चात कर्क 🌥️ चंद्र राशि - कर्क सायं 07:52 तक तद्पश्चात सिंह 🌥️ सूर्योदय - 05:43 🌥️ सूर्यास्त - 07:07 (समस्त मूहुर्त नर्मदापुरम मानक समयानुसार) 🌥️तिथि - द्वितीया सुबह 08:52 तक तद्पश्चात तृतीया 🌥️नक्षत्र - आश्लेषा रात्रि 07:52 तक तद्पश्चात मघा 🌥️योग - सिद्धि रात्रि 01:22 जुलाई 17 तक तद्पश्चात व्यतिपात 🌥️राहुकाल - दिन 02:06 से दिन 03:46 तक 🌥️गण्डमूल - अहोरात्रि (दिन/रात) 17 जुलाई सायं 06:34 तक 🌥️दिशा शूल 👉🏻 दक्षिण दिशा में 🌥️अग्निवास: 👉🏻 पृथ्वी - शुभ सुबह 08:52 तक तद्पश्चात आकाश - अशुभ 🌥️चन्द्र वास: 👉🏻 उत्तर 🌥️शिववास: 👉🏻 गौरी के साथ - शुभ सुबह 08:52 तक तद्पश्चात सभा में - सौख्य 🌥️ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:19 से प्रातः 05:01 तक 🌥️अभिजीत मुहूर्त - दिन 11:58 से दिन 12:52 तक 🌥️निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:04 जुलाई 17 से रात्रि 12:47 जुलाई 17 तक ⛅व्रत,पर्व आदि विवरण- गण्ड मूल, रवि योग, विडाल योग, जगन्नाथ रथ यात्रा, कर्क संक्रांति ⛅ आजके अन्य मुहूर्त - कोई नहीं 🌥️विशेष - तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34) 🌹गुप्त नवरात्रि : 15 जुलाई से 23 जुलाई🌹 🌹 नवरात्रि की द्वितीया तिथि (15 जुलाई) पर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। देवी ब्रह्मचारिणी ब्रह्म शक्ति यानी तप की शक्ति का प्रतीक हैं । इनकी आराधना से भक्त की तप करने की शक्ति बढ़ती है । साथ ही, सभी मनोवांछित कार्य पूर्ण होते हैं । 🌹 नवरात्रि की द्वितीया तिथि यानी दूसरे दिन माता दुर्गा को शक्कर का भोग लगाएं । इससे उम्र लंबी होती है । 🔹लक्षमी प्राप्ति साधना🔹 🌹 श्रीमद् देवीभागवत में वर्णित नवरात्रि में जप से श्रेष्ठ लक्ष्मीप्राप्ति का दुर्लभ मंत्र । 🌹 नवरात्रि में मंत्र जप से श्रेष्ठ लक्ष्मी - प्राप्ति होती है । इस मंत्र से लक्ष्मी जी महालक्ष्मी होकर भोग और मोक्ष देने वाली बनती है । मंत्र - "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा" 🔹गृहस्थ-जीवनोपयोगी बातें🔹 🔹महाभारत में आता है : १] जो धर्म एवं कल्याण-मार्ग में तत्पर हैं और मोक्ष के विषय में जिनका निरंतर अनुराग है वे विवेकी हैं । २] जो अपने घर पर आ जाय उसे आत्मीयताभरी दृष्टी से देखें, उठकर उसके लिए आसन दें, मन से उसके प्रति उत्तम भाव रखें, मधुर वचन बोले । यह गृहस्थियों का सनातन धर्म है । अतिथि को आते देख उठकर उसकी अगवानी और यथोचित रीति से आदर-सत्कार करें । ३] प्यासे को पानी, भूखे को भोजन, थके-माँदे को बैठने के लिए आसन और रोग आदि से पीड़ित मनुष्य के लिए सोने हेतु शय्या देनी चाहिए । ४] गृहस्थ के भोजन में देवता, पितर, मनुष्य एवं समस्त प्राणियों का हिस्सा रखा जाता है । ५] नित्य प्रात: एवं सायंकाल कुत्तों और कौओं के लिए पृथ्वी पर अन्न डाल दें । ६] निकम्मे पशुओं की भी हिंसा न करें और जिस वस्तु को विधिपूर्वक देवता आदि के लिए अर्पित न करें, उसे स्वयं भी न खायें । ७] यज्ञ, अध्ययन, दान, तप, सत्य, क्षमा, मन और इन्द्रियों का संयम तथा लोभ का परित्याग – ये धर्म के ८ मार्ग हैं । 🔸पूर्णतया संकल्पों को एक ध्येय में लगा देने से, इद्रियों को भली प्रकार वश में कर लेने से, अहिंसा आदि व्रतों का अच्छी प्रकार पालन करने से, भली प्रकार सदगुरु की सेवा करने से, कर्मों को भलीभाँति भगवतसमर्पण करने से और चित्त का भली प्रकार निरोध करने से मनुष्य परम कल्याण को प्राप्त होता है । 🔔 दुर्गासप्तशती सीखने के लिए संपर्क करें - https://t.me/Granth_Vachan_Shiksha_Kendra 🌞🚩🚩 " ।। जय श्री राम ।। " 🚩🚩🌞 ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ (हमारे मनोबल को बनाये रखने के लिए एवं पञ्चाङ्ग का लाभ सभी को मिल सके इसके लिए यह पञ्चाङ्ग अपने सभी परिचितों को एवं सभी ग्रुपों में शेयर अवश्य करें।)
🔸 पहला फुटकर पाठ, दुर्गासप्तशती का नौ दिन में पाठ किया जाता है। जिससे नवरात्रि में मात्र एक आवृत्ति होती है। यह पाठ हीन माना जाता है। 🔸 दूसरा साधारण पाठ, दुर्गासप्तशती का प्रतिदिवस एक आवृति पारायण किया जाता है। इसे मध्यम माना जाता है। 🔸तीसरा सम्पुटित पाठ, यह पाठ कामना की शीघ्र सिद्धि के लिए किया जाता है। कामनाओं के अनुसार श्लोक से पुनर पुनरावृत्ति पाठ किया जाता है जिसमें दुर्गासप्तशती के प्रत्येक श्लोक के आगे एवं श्लोक के पीछे कामना के अनुसार चयनित श्लोक का पाठ किया जाता है। जो कि प्रतिदिवस का एक सम्पुटित पारायण, बारह पाठ के बराबर एवं नौ दिन के नौ सम्पुटित पारायण 108 पारायण के बराबर माने जाते हैं। 🔔 दुर्गासप्तशती सीखने के लिए संपर्क करें - https://t.me/Granth_Vachan_Shiksha_Kendra 🌞🚩🚩 " ।। जय श्री राम ।। " 🚩🚩🌞 ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ (हमारे मनोबल को बनाये रखने के लिए एवं पञ्चाङ्ग का लाभ सभी को मिल सके इसके लिए यह पञ्चाङ्ग अपने सभी परिचितों को एवं सभी ग्रुपों में शेयर अवश्य करें।)
🌞 दैनिक पंचांग 🌞 🌥️ दिनांक - 14 जुलाई 2026 🌥️ दिन - मंगलवार 🌥️ विक्रम संवत् - 2083 🌥️ संवत्सर - विश्वावसु 🌥️ अयन - दक्षिणायन 🌥️ ऋतु - वर्षा 🌥️ मास - आषाढ़ 🌥️ पक्ष - कृष्ण 🌥️ सूर्य राशि - मिथुन 🌥️ चंद्र राशि - मिथुन सायं 06:48 तक तद्पश्चात कर्क 🌥️ सूर्योदय - 05:43 🌥️ सूर्यास्त - 07:07 (समस्त मूहुर्त नर्मदापुरम मानक समयानुसार) 🌥️तिथि - अमावस्या दिन 03:12 तक तद्पश्चात प्रतिपदा 🌥️नक्षत्र - पुनर्वसु रात्रि 12:09 जुलाई 15 तक तद्पश्चात पुष्य 🌥️योग - व्याघात रात्रि 11:57 तक तद्पश्चात हर्षण 🌥️राहुकाल - दिन 03:46 से दिन 05:27 तक 🌥️दिशा शूल 👉🏻 उत्तर दिशा में 🌥️अग्निवास: 👉🏻 पाताल/आकाश- अशुभ 🌥️चन्द्र वास: 👉🏻 पश्चिम सायं 06:48 से उत्तर 🌥️शिववास: 👉🏻 गौरी के साथ - शुभ दिन 03:12 तक तद्पश्चात श्मशान में - मृत्युकारक 🌥️ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:18 से प्रातः 05:00 तक 🌥️अभिजीत मुहूर्त - दिन 11:58 से दिन 12:52 तक 🌥️निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:04 जुलाई 15 से रात्रि 12:46 जुलाई 15 तक ⛅व्रत,पर्व आदि विवरण- आडल योग, दर्श अमावस्या, आषाढ़ अमावस्या, अन्वाधान, हलहारिणी, स्ना.दा. अमावस्या ⛅ आजके अन्य मुहूर्त - कोई नहीं 🌥️विशेष - अमावस्या के दिन स्त्री - सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है एवं प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाएं क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34) 🌹गुप्त नवरात्रि : 15 जुलाई से 23 जुलाई तक🌹 🌹आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवमी तिथि तक 9 दिनों को द्वितीय गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। इस बार आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ 15 जुलाई, बुधवार से हो रहा है, जिसका समापन 23 जुलाई, गुरुवार को होगा। इस नवरात्रि में भी हर तिथि पर माता के एक विशेष रूप की पूजा की जाती है। 🔹गुप्त नवरात्रि महत्व🔹 🔸गुप्त नवरात्रि (माघ और आषाढ़ मास) का उद्देश्य देवी के नौ रूपों के बजाय उनकी दस महाविद्याओं की गुप्त साधना करना है। 🔸इसे तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक सिद्धियों की प्राप्ति के लिए अत्यंत शक्तिशाली और गोपनीय काल माना जाता है, जहाँ सार्वजनिक उत्सव के बजाय आंतरिक और रहस्यमयी साधना पर जोर दिया जाता है। 🔸जहाँ सामान्य नवरात्रि (चैत्र और शारदीय) में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है, वहीं गुप्त नवरात्रि में माँ काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी नामक दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। 🔸यह अवधि गुप्त इच्छाओं, तंत्र साधनाओं और आध्यात्मिक शक्तियों की प्राप्ति के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है। इसमें माता की पूजा पूर्ण गोपनीयता और कठिन नियमों के साथ की जाती है। 🔸गुप्त नवरात्रि में देवी की आराधना जितनी छिपी हुई होगी, उसका प्रभाव और फल उतना ही अधिक प्राप्त होता है। 🔹सिद्धि साधना🔹 🔸आप घटस्थापना (कलश) कर रहे हैं, तो इसे ब्रह्म मुहूर्त में स्थापित करें। साधना के दौरान गाय के घी का अखंड दीपक जलाना अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है। 🔸साधना का स्थान और समय: घर के मंदिर या किसी शांत एकांत स्थान को चुनें। गुप्त साधना हमेशा रात्रि में (विशेषकर मध्य रात्रि) करना सर्वोत्तम माना जाता है। 🔸साधना के समय लाल, पीले या गुलाबी रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें और लाल रंग के ऊनी या कुशा के आसन पर बैठें। 🔸यदि आप किसी विशेष महाविद्या या तांत्रिक साधना की शुरुआत कर रहे हैं, तो इसे किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करें। सामान्य साधक माता के बीज मंत्र (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे) या 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' का लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से 5, 11 या 21 माला का जाप कर सकते हैं। 🔸माता को दोनों समय पूजा में लाल फूल अर्पित करें और लौंग-बताशे का भोग लगाएं। 🔸गुप्त नवरात्रि में जितना संभव हो मौन रहकर या कम बोलकर मंत्रों का मानसिक जप करें, इससे साधना की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। 🔸गुप्त नवरात्रि का अर्थ ही है 'छिपा हुआ'। इसलिए आपकी पूजा का स्थान, समय, और आपका मंत्र हमेशा गुप्त रहना चाहिए। 🔹सरल विधि🔹 🔸ब्रह्म मुहूर्त या रात्रि में लाल आसन पर बैठकर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करें। घी का दीपक जलाएं और 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' मंत्र या श्रीदुर्गा सप्तशती का पाठ करें। 🔸 ध्यान रखें देवी की साधना अशुद्ध भूलकर भी न् करें। यदि आपसे दुर्गा सप्तशती का पाठ नही बनता तो किसी योग्य विद्वान ब्राह्मण से यह अनुष्ठान कर वायें। 🔹दुर्गासप्तशती पाठ के प्रकार🔹
🌞 दैनिक पंचांग 🌞 🌥️ दिनांक - 13 जुलाई 2026 🌥️ दिन - सोमवार 🌥️ विक्रम संवत् - 2083 🌥️ संवत्सर - विश्वावसु 🌥️ अयन - दक्षिणायन 🌥️ ऋतु - वर्षा 🌥️ मास - आषाढ़ 🌥️ पक्ष - कृष्ण 🌥️ सूर्य राशि - मिथुन 🌥️ चंद्र राशि - मिथुन 🌥️ सूर्योदय - 05:42 🌥️ सूर्यास्त - 07:07 (समस्त मूहुर्त नर्मदापुरम मानक समयानुसार) 🌥️तिथि - चतुर्दशी सायं 06:49 तक तद्पश्चात अमावस्या 🌥️नक्षत्र - आद्रा रात्रि 02:51 जुलाई 14 तक तद्पश्चात पुनर्वसु 🌥️योग - ध्रुव दिन 04:00 तक तद्पश्चात व्याघात 🌥️राहुकाल - प्रातः 07:23 से प्रातः 09:03 तक 🌥️भद्रावास -स्वर्ग में👉🏻 प्रातः 08:39 तक 🌥️दिशा शूल 👉🏻 पूर्व दिशा में 🌥️अग्निवास: 👉🏻 पृथ्वी- शुभ सायं 06:49 तक तद्पश्चात आकाश - अशुभ 🌥️चन्द्र वास: 👉🏻 पश्चिम 🌥️शिववास: 👉🏻 श्मशान में - मृत्युकारक सायं 06:49 तक तद्पश्चात गौरी के साथ - शुभ 🌥️ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:18 से प्रातः 05:00 तक 🌥️अभिजीत मुहूर्त - दिन 11:58 से दिन 12:52 तक 🌥️निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:04 जुलाई 14 से रात्रि 12:46 जुलाई 14 तक ⛅व्रत,पर्व आदि विवरण- भद्रावास, आडल योग ⛅ आजके अन्य मुहूर्त - कोई नहीं 🌥️विशेष - चतुर्दशी एवं अमावस्या के दिन स्त्री - सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34) 🔹दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन के नियम🔹 🔸प्रत्येक मनुष्य दीर्घ, स्वस्थ और सुखी जीवन चाहता है । यदि स्वस्थ और दीर्घजीवी बनना हो तो कुछ नियमों को अवश्य समझ लेना चाहिए । 🔸आसन-प्राणायाम, जप-ध्यान, संयम-सदाचार आदि से मनुष्य दीर्घजीवी होता है । 🔸मोटे एवं सूती वस्त्र ही पहनें। सिंथेटिक वस्त्र स्वास्थ्य के लिए हितकर नहीं हैं । 🔸विवाह तो करें किंतु संयम-नियम से रहें, ब्रह्मचर्य का पालन करें । 🔸आज जो कार्य करते हैं, सप्ताह में कम-से-कम एक दिन उससे मुक्त हो जाइये । मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि जो आदमी सदा एक जैसा काम करता रहता है उसको थकान और बुढ़ापा जल्दी आ जाता है । 🔸चाय-कॉफी, शराब-कबाब, धूम्रपान बिल्कुल त्याग दें । पानमसाले की मुसीबत से भी सदैव बचें । यह धातु को क्षीण व रक्त को दूषित करके कैसंर को जन्म देता है। अतः इसका त्याग करें । 🔸लघुशंका करने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए, न ही पानी पीने के तुरंत बाद लघुशंका जाना चाहिए । लघुशंका करने की इच्छा हुई हो तब पानी पीना, भोजन करना, मैथुन करना आदि हितकारी नहीं है । क्योंकि ऐसा करने से भिन्न-भिन्न प्रकार के मूत्ररोग हो जाते हैं । ऐसा वेदों में स्पष्ट बताया गया है । 🔸मल-मूत्र का वेग (हाजत) नहीं रोकना चाहिए, इससे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है व बीमार भी पड़ सकते हैं । अतः कुदरती हाजत यथाशीघ्र पूरी कर लेनी चाहिए । 🔸प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठ जाना, सुबह-शाम खुली हवा में टहलना उत्तम स्वास्थ्य की कुंजी है । 🔸दीर्घायु व स्वस्थ जीवन के लिए प्रातः कम से कम 5 मिनट तक लगातार तेज दौड़ना या चलना तथा कम से कम 15 मिनट नियमित योगासन करने चाहिए । 🔹कौनसा चित्र घर के लिए अशुभकारक🔹 🔸निम्नलिखित चित्र घरकी दीवार आदि में नहीं लगाने चाहिये और न किवाड़ आदि में अंकित कराने चाहिये । 🔸सिंह, सियार, सूअर, साँप, गिद्ध, उल्लू, कबूतर, कौआ, बाज, बगुला, गोह, बन्दर, ऊँट, बिल्ली आदि के चित्र । मांसभक्षी पशु-पक्षियों के चित्र । रामायण, महाभारत आदि के युद्धके चित्र । खड्गयुद्ध के चित्र इन्द्रजालिक चित्र, राक्षसों, भूत-प्रेतोंके भयंकर चित्र, रोते हुए मनुष्यके चित्र - ये सभी चित्र अशुभ फलदायक हैं । (समराङ्गण० ३८ । ७१-७२ ) 🔸इन ५ कारणों से आयुष्य नष्ट होता है🔸 (१) अति शारीरिक परिश्रम* (२) भय (३) चिंता (४) कामविकार का अधिक भोग (५) अंग्रेजी दवाइयाँ, कैप्सूल, इंजेक्शन, ऑपरेशन आदि की गुलामी 🌞🚩🚩 " ।। जय श्री राम ।। " 🚩🚩🌞 ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ (हमारे मनोबल को बनाये रखने के लिए एवं पञ्चाङ्ग का लाभ सभी को मिल सके इसके लिए यह पञ्चाङ्ग अपने सभी परिचितों को एवं सभी ग्रुपों में शेयर अवश्य करें।)8
🌞 दैनिक पंचांग 🌞 🌥️ दिनांक - 11 जुलाई 2026 🌥️ दिन - शनिवार 🌥️ विक्रम संवत् - 2083 🌥️ संवत्सर - विश्वावसु 🌥️ अयन - दक्षिणायन 🌥️ ऋतु - वर्षा 🌥️ मास - आषाढ़ 🌥️ पक्ष - कृष्ण 🌥️ सूर्य राशि - मिथुन 🌥️ चंद्र राशि - वृषभ 🌥️ सूर्योदय - 05:41 🌥️ सूर्यास्त - 07:08 (समस्त मूहुर्त नर्मदापुरम मानक समयानुसार) 🌥️तिथि - एकादशी प्रातः 05:22 तक तद्पश्चात द्वादशी रात्रि 02:04 जुलाई 12 तक तद्पश्चात त्रयोदशी 🌥️नक्षत्र - कृतिका दिन 11:03 तक तद्पश्चात रोहिणी 🌥️योग - गण्ड रात्रि 12:05 जुलाई 12 तक तद्पश्चात वृद्धि 🌥️राहुकाल - दिन 09:03 से दिन 10:44 तक 🌥️त्रिपुष्कर योग 👉🏻 प्रातः 05:41 से दिन 11:03 तक 🌥️सर्वार्थसिद्धि योग 👉🏻 दिन 11:03 से प्रातः 05:42 जुलाई 12 तक 🌥️अमृतसिद्धि योग 👉🏻 दिन 11:03 से प्रातः 05:42 जुलाई 12 तक 🌥️दिशा शूल 👉🏻 पूर्व दिशा में 🌥️अग्निवास: 👉🏻 पृथ्वी- शुभ 🌥️चन्द्र वास: 👉🏻 दक्षिण 🌥️शिववास: 👉🏻 नंदी पर - अभिष्टसिद्धि रात्रि 02:04 जुलाई 12 तक तद्पश्चात भोजन में - पीणा 🌥️ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:17 से प्रातः 04:59 तक 🌥️अभिजीत मुहूर्त - दिन 11:58 से दिन 12:51 तक 🌥️निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:04 जुलाई 12 से रात्रि 12:46 जुलाई 12 तक ⛅व्रत,पर्व आदि विवरण- त्रिपुष्कर योग, सर्वार्थसिद्धि योग, अमृतसिद्धि योग, योगिनी एकादशी, वैष्णव एकादशी ⛅ आजके अन्य मुहूर्त - विवाह संस्कार 🌥️विशेष - एकादशी को चावल एवं सेम फली खाना वर्जित है एवं द्वादशी को पूतिका (पोई) का शाक खाना वर्जित है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34) 🔹वर्षा ऋतु का खास प्रयोग🔹 🔸 ५०० ग्राम हरड़ चूर्ण व ५० ग्राम सेंधा नमक का मिश्रण बना लें । (उसमें १२५ ग्राम सोंठ भी मिला सकते हैं ।) २-४ ग्राम यह मिश्रण दिन में १-२ बार लेने से 'रसायन' के लाभ प्राप्त होते हैं । 🔸 नागरमोथा, बड़ी हरड़ और सोंठ तीनों को समान मात्रा में लेकर बारीक पीस के चूर्ण बना लें । इस चूर्ण से दुगनी मात्रा में गुड़ मिलाकर बेर समान गोलियाँ बना लें । दिन में ४-५ बार १-१ गोली चूसने से कफयुक्त खाँसी में राहत मिलती है । 🔸 १ से ३ लौंग भूनकर तुलसी पत्तों के साथ चबाकर खाने से सभी प्रकार की खाँसी में लाभ होता है । 🔸 वर्षा ऋतु में दमे के रोगियों की साँस फूले तो १०-२० ग्राम तिल के तेल को गर्म करके पीने से राहत मिलती है । ऊपर से गर्म पानी पियें । 🔸 भोजन के पूर्व नींबू और अदरक के रस में सेंधा नमक डालकर पीने से मंदाग्नि व अजीर्ण में लाभ होता है । 🔸 कब्ज की तकलीफ होने पर रात में त्रिफला चूर्ण लें । रात का रखा हुआ आधा से एक लीटर पानी सुबह बासी मुँह पीने से कब्ज का नाश होता है । 🔹बढ़े सा बड़ा संकट पल भर में दूर करने के लिए🔹 🔸गजेन्द्र मोक्ष का नित्य पाठ करने से किसी भी प्रकार का संकट पल भर में टल जाता है। यहाँ तक कि जीवन के अंत समय में श्रीहरि याद आ जाते हैं। 🔸ग्रंथ कहते हैं जीवन के अंत समय में जिसने हरि स्मरण कर लिया, हरि का नाम ले लिया उसकी सद्गति हो जाती है। जबकि "जनम जनम मुनि जतन कराहिं। अंत राम कहिं आबत नाही॥" लेकिन गजेन्द्र मोक्ष के नित्य पाठ करने से अंत समय में अवश्य हरि नाम एवं स्मरण हो जाता है। 🔸 सरलतम पद्धति से किसी भी प्रकार के स्तोत्र का पाठ या पूजन-अनुष्ठान सीखने के लिए - "ग्रंथ वचन शिक्षा केन्द्र" से जुड़ें → https://t.me/Granth_Vachan_Shiksha_Kendra 🌞🚩🚩 " ।। जय श्री राम ।। " 🚩🚩🌞 ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ (हमारे मनोबल को बनाये रखने के लिए एवं पञ्चाङ्ग का लाभ सभी को मिल सके इसके लिए यह पञ्चाङ्ग अपने सभी परिचितों को एवं सभी ग्रुपों में शेयर अवश्य करें।)
🔔एकादशी अपडेट🔔 योगिनी एकादशी 11 जुलाई को मनाई जाएगी। वैष्णवों के लिए दशमी युक्त एकादशी त्याज्य है। अतः 11 जुलाई को एकादशी व्रत रखें। एकादशी पारण रात्रि में कर लें।
🌞 दैनिक पंचांग 🌞 🌥️ दिनांक - 10 जुलाई 2026 🌥️ दिन - शुक्रवार 🌥️ विक्रम संवत् - 2083 🌥️ संवत्सर - विश्वावसु 🌥️ अयन - दक्षिणायन 🌥️ ऋतु - वर्षा 🌥️ मास - आषाढ़ 🌥️ पक्ष - कृष्ण 🌥️ सूर्य राशि - मिथुन 🌥️ चंद्र राशि - मेष सायं 06:44 तक तद्पश्चात वृषभ 🌥️ सूर्योदय - 05:41 🌥️ सूर्यास्त - 07:08 (समस्त मूहुर्त नर्मदापुरम मानक समयानुसार) 🌥️तिथि - दशमी प्रातः 08:16 तक तद्पश्चात एकादशी 🌥️नक्षत्र - भरणी दिन 01:15 तक तद्पश्चात कृतिका 🌥️योग - धृति प्रातः 07:15 तक तद्पश्चात शूल रात्रि 03:51 जुलाई 11 तक तद्पश्चात गण्ड 🌥️राहुकाल - दिन 10:44 से दिन 12:24 तक 🌥️भद्रावास 👉🏻 प्रातः 08:16 तक 🌥️दिशा शूल 👉🏻 पश्चिम दिशा में 🌥️अग्निवास: 👉🏻 पृथ्वी- शुभ प्रातः 08:16 तक तद्पश्चात आकाश - अशुभ 🌥️चन्द्र वास: 👉🏻 पूर्व 🌥️शिववास: 👉🏻 क्रीड़ा में - सन्ततिकष्ट प्रातः 08:16 तक तद्पश्चात कैलाश पर - सौख्य प्रातः 05:22 जुलाई 11 तक तद्पश्चात नंदी पर - अभिष्टसिद्धि 🌥️ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:17 से प्रातः 04:59 तक 🌥️अभिजीत मुहूर्त - दिन 11:58 से दिन 12:51 तक 🌥️निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:04 जुलाई 11 से रात्रि 12:46 जुलाई 11 तक ⛅व्रत,पर्व आदि विवरण- भद्रावास, विडाल योग ⛅ आजके अन्य मुहूर्त - कोई नहीं 🌥️विशेष - दशमी को कलम्बी का शाक खाना त्याज्य है एवं एकादशी को चावल एवं सेम फली खाना वर्जित है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34) 🔹वर्षा ऋतु में विशेष लाभदायी🔹 🔹पेट के व अन्य विकारों में लाभकारी अजवायन 🔸अजवायन उष्ण, तीक्ष्ण, जठराग्निवर्धक, उत्तम वायु कफनाशक, आमपाचक व पित्तवर्धक है । वर्षा ऋतु में होनेवाले पेट के विकारों, जोड़ों के दर्द, कृमि- रोग तथा कफजन्य विकारों में अजवायन खूब लाभदायी है । 🔹औषधीय प्रयोग🔹 🔸 भोजन से आधे घंटे पहले अजवायन में थोड़ा-सा काला नमक मिलाकर गुनगुने पानी के साथ लेने से मंदाग्नि, अजीर्ण, अफरा (gas), पेट के दर्द एवं अम्लपित्त (hyperacidity) में राहत मिलती है । 🔸भोजन के पहले कौर के साथ अजवायन खाने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है । 🔸अजवायन और तिल समभाग मिलाकर दिन में १-२ बार खाने से अधिक मात्रा में व बार-बार पेशाब आने की समस्या में राहत मिलती है । 🔸अजवायन और एक लौंग का चूर्ण शहद मिलाकर चाटने से उलटी में लाभ होता है । 🔸१५ से ३० दिनों तक भोजन के बाद या बीच में गुनगुने पानी के साथ अजवायन लेने से मासिक धर्म के समय होनेवाली पीड़ा में राहत मिलती है । (यदि मासिक अधिक आता हो, गर्मी अधिक हो तो उक्त प्रयोग न करें । सुबह खाली पेट २ से ४ गिलास पानी पीने से अनियमित मासिक स्राव में लाभ होता है ।) 🔹उपरोक्त सभी प्रयोगों में अजवायन की सेवन मात्रा: आधा से २ ग्राम । 🔹अजवायन का तेल🔹 🔸लाभ: अजवायन के तेल की मालिश संधिवात (arthritis) और गठिया में खूब लाभदायी है । 🔸तेल बनाने की विधि : २५० मि.ली. तिल के तेल को गरम करके नीचे उतार लें । इसमें १५ से २० ग्राम अजवायन डालकर कुछ देर ढक के रखें फिर छान लें । अजवायन का तेल तैयार ! इससे दिन में २ बार मालिश करें । 🔹सावधानी : ग्रीष्म व शरद ऋतु में तथा पित्त प्रकृति वालों को अजवायन का उपयोग अत्यल्प मात्रा में करना चाहिए । 🌞🚩🚩 " ।। जय श्री राम ।। " 🚩🚩🌞 ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ (हमारे मनोबल को बनाये रखने के लिए एवं पञ्चाङ्ग का लाभ सभी को मिल सके इसके लिए यह पञ्चाङ्ग अपने सभी परिचितों को एवं सभी ग्रुपों में शेयर अवश्य करें।)
🔸 देवशयनी एकादशी से देवउठी एकादशी तक उक्त धर्मों का साधन एवं नियम महान फल देने वाला है । चतुर्मास में भगवान नारायण योगनिद्रा में शयन करते हैं, इसलिए चार मास शादी-विवाह और सकाम यज्ञ नहीं होते । ये मास तपस्या करने के हैं । 🔸 चतुर्मास में योगाभ्यास करने वाला मनुष्य ब्रह्मपद को प्राप्त होता है । ‘नमो नारायणाय’ का जप करने से सौ गुने फल की प्राप्ति होती है । यदि मनुष्य चतुर्मास में भक्तिपूर्वक योग के अभ्यास में तत्पर न हुआ तो निःसंदेह उसके हाथ से अमृत का कलश गिर गया । जो मनुष्य नियम, व्रत अथवा जप के बिना चौमासा बिताता है वह मूर्ख है । 🔸बुद्धिमान मनुष्य को सदैव मन को संयम में रखने का प्रयत्न करना चाहिए । मन के भलीभाँति वश में होने से ही पूर्णतः ज्ञान की प्राप्ति होती है । 🔸 ‘एकमात्र सत्य ही परम धर्म है । एक सत्य ही परम तप है । केवल सत्य ही परम ज्ञान है और सत्य में ही धर्म की प्रतिष्ठा है । अहिंसा धर्म का मूल है । इसलिए उस अहिंसा को मन, वाणी और क्रिया के द्वारा आचरण में लाना चाहिए ।’ 🌞🚩🚩 " ।। जय श्री राम ।। " 🚩🚩🌞 ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ (हमारे मनोबल को बनाये रखने के लिए एवं पञ्चाङ्ग का लाभ सभी को मिल सके इसके लिए यह पञ्चाङ्ग अपने सभी परिचितों को एवं सभी ग्रुपों में शेयर अवश्य करें।)
🌞 दैनिक पंचांग 🌞 🌥️ दिनांक - 09 जुलाई 2026 🌥️ दिन - गुरुवार 🌥️ विक्रम संवत् - 2083 🌥️ संवत्सर - विश्वावसु 🌥️ अयन - दक्षिणायन 🌥️ ऋतु - वर्षा 🌥️ मास - आषाढ़ 🌥️ पक्ष - कृष्ण 🌥️ सूर्य राशि - मिथुन 🌥️ चंद्र राशि - मेष 🌥️ सूर्योदय - 05:41 🌥️ सूर्यास्त - 07:08 (समस्त मूहुर्त नर्मदापुरम मानक समयानुसार) 🌥️तिथि - नवमी दिन 10:27 तक तद्पश्चात दशमी 🌥️नक्षत्र - अश्विनी दिन 02:56 तक तद्पश्चात भरणी 🌥️योग - सुकर्मा दिन 10:12 तक तद्पश्चात धृति 🌥️राहुकाल - दिन 02:05 से दिन 03:46 तक 🌥️भद्रावास 👉🏻 रात्रि 09:31 से जुलाई 10 की प्रातः 08:16 तक 🌥️सर्वार्थसिद्धि योग 👉🏻 प्रातः 05:41 से दिन 02:56 तक 🌥️गण्डमूल 👉🏻 दिन 02:56 तक 🌥️दिशा शूल 👉🏻 दक्षिण दिशा में 🌥️अग्निवास: 👉🏻 पाताल- अशुभ दिन 10:37 तक तद्पश्चात पृथ्वी - शुभ 🌥️चन्द्र वास: 👉🏻 पूर्व 🌥️शिववास: 👉🏻 सभा में - कष्टकारक दिन 10:37 तक तद्पश्चात क्रीड़ा में - सन्ततिकष्ट 🌥️ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:16 से प्रातः 04:58 तक 🌥️अभिजीत मुहूर्त - दिन 11:57 से दिन 12:51 तक 🌥️निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:03 जुलाई 10 से रात्रि 12:46 जुलाई 10 तक ⛅व्रत,पर्व आदि विवरण- भद्रावास, गण्डमूल, सर्वार्थसिद्धि योग, आडल योग, विडाल योग ⛅ आजके अन्य मुहूर्त - मुण्डन संस्कार, नामकरण संस्कार, अन्नप्राशन संस्कार, व्यापार प्रारम्भ 🔶 चौघड़िया, दिन 🔶 (शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी) शुभ 05:41 AM से 07:22 AM तक उत्तम रोग 07:22 AM से 09:02 AM तक अमंगल उद्वेग 09:02 AM से 10:43 AM तक अशुभ चर 10:43 AM से 12:24 PM तक सामान्य लाभ 12:24 PM से 02:05 PM तक उन्नति अमृत 02:05 PM से 03:46 PM तक सर्वोत्तम काल 03:46 PM से 05:27 PM तक हानि शुभ 05:27 PM से 07:08 PM तक उत्तम 🔶 रात्रि का चौघड़िया 🔶 अमृत 07:08 PM से 08:27 PM तक सर्वोत्तम चर 08:27 PM से 09:46 PM तक सामान्य रोग 09:46 PM से 11:05 PM तक अमंगल काल 11:05 PM से 12:24 AM तक हानि, जुलाई 10 लाभ 12:24 AM से 01:44 AM तक उन्नति, जुलाई 10 उद्वेग 01:44 AM से 03:03 AM तक अशुभ, जुलाई 10 शुभ 03:03 AM से 04:22 AM तक उत्तम, जुलाई 10 अमृत 04:22 AM से 05:41 AM तक सर्वोत्तम, जुलाई 10 🌥️विशेष - नवमी को लोकी खाना निषिद्ध है एवं दशमी को कलम्बी का शाक खाना त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34) 🌹 चातुर्मास्य व्रत की महिमा🌹 🔸 चतुर्मास में प्रतिदिन एक समय भोजन करने वाला पुरुष अग्निष्टोम यज्ञ के फल का भागी होता है । पंचगव्य सेवन करने वाले मनुष्य को चन्द्रायण व्रत का फल मिलता है । यदि धीर पुरुष चतुर्मास में नित्य परिमित अन्न का भोजन करता है तो उसके सब पातकों का नाश हो जाता है और वह वैकुण्ठ धाम को पाता है । चतुर्मास में केवल एक ही अन्न का भोजन करने वाला मनुष्य रोगी नहीं होता । 🔸 जो मनुष्य चतुर्मास में केवल दूध पीकर अथवा फल खाकर रहता है, उसके सहस्रों पाप तत्काल विलीन हो जाते हैं । 🔸 पंद्रह दिन में एक दिन संपूर्ण उपवास करने से शरीर के दोष जल जाते हैं और चौदह दिनों में तैयार हुए भोजन का रस ओज में बदल जाता है । इसलिए एकादशी के उपवास की महिमा है । वैसे तो गृहस्थ को महीने में केवल शुक्लपक्ष की एकादशी रखनी चाहिए, किंतु चतुर्मास की तो दोनों पक्षों की एकादशियाँ रखनी चाहिए । 🔸 जो बात करते हुए भोजन करता है, उसके वार्तालाप से अन्न अशुद्ध हो जाता है । वह केवल पाप का भोजन करता है । जो मौन होकर भोजन करता है, वह कभी दुःख में नहीं पड़ता । मौन होकर भोजन करने वाले राक्षस भी स्वर्गलोक में चले गये हैं । यदि पके हुए अन्न में कीड़े-मकोड़े पड़ जायें तो वह अशुद्ध हो जाता है । यदि मानव उस अपवित्र अन्न को खा ले तो वह दोष का भागी होता है । जो नरश्रेष्ठ प्रतिदिन ‘ॐ प्राणाय स्वाहा, ॐ अपानाय स्वाहा, ॐ व्यानाय स्वाहा, ॐ उदानाय स्वाहा, ॐ समानाय स्वाहा’ – इस प्रकार प्राणवायु को पाँच आहुतियाँ देकर मौन हो भोजन करता है, उसके पाँच पातक निश्चय ही नष्ट हो जाते हैं । 🔸चतुर्मास में जैसे भगवान विष्णु आराधनीय हैं, वैसे ही ब्राह्मण भी । भाद्रपद मास आने पर उनकी महापूजा होती है । जो चतुर्मास में भगवान विष्णु के आगे खड़ा होकर ‘पुरुष सूक्त’ का पाठ करता है, उसकी बुद्धि बढ़ती है । 🔸 चतुर्मास सब गुणों से युक्त समय है । इसमें धर्मयुक्त श्रद्धा से शुभ कर्मों का अनुष्ठान करना चाहिए । सत्संगे द्विजभक्तिश्च गुरुदेवाग्नितर्पणम् । गोप्रदानं वेदपाठः सत्क्रिया सत्यभाषणम् । । गोभक्तिर्दानभक्तिश्च सदा धर्मस्य साधनम् । 🔸 ‘सत्संग, भक्ति, गुरु, देवता और अग्नि का तर्पण, गोदान, वेदपाठ, सत्कर्म, सत्यभाषण, गोभक्ति और दान में प्रीति – ये सब सदा धर्म के साधन हैं ।’
🌞 दैनिक पंचांग 🌞 🌥️ दिनांक - 08 जुलाई 2026 🌥️ दिन - बुधवार 🌥️ विक्रम संवत् - 2083 🌥️ संवत्सर - विश्वावसु 🌥️ अयन - दक्षिणायन 🌥️ ऋतु - वर्षा 🌥️ मास - आषाढ़ 🌥️ पक्ष - कृष्ण 🌥️ सूर्य राशि - मिथुन 🌥️ चंद्र राशि - मीन दिन 04:00 तक तद्पश्चात मेष 🌥️ सूर्योदय - 05:40 🌥️ सूर्यास्त - 07:08 (समस्त मूहुर्त नर्मदापुरम मानक समयानुसार) 🌥️तिथि - अष्टमी दिन 12:21 तक तद्पश्चात नवमी 🌥️नक्षत्र - रेवती दिन 04:00 तक तद्पश्चात अश्विनी 🌥️योग - अतिगण्ड दिन 12:38 तक तद्पश्चात सुकर्मा 🌥️राहुकाल - दिन 12:24 से दिन 02:05 तक 🌥️गण्डमूल 👉🏻 अहोरात्रि (दिन-रात) जुलाई 09 के दिन 02:56 तक 🌥️पंचक 👉🏻 अहोरात्रि (दिन-रात) जुलाई 08 की सायं 04:00 तक 🌥️दिशा शूल 👉🏻 उत्तर दिशा में 🌥️अग्निवास: 👉🏻 पाताल- अशुभ दिन 01:24 तक तद्पश्चात पृथ्वी - शुभ 🌥️चन्द्र वास: 👉🏻 उत्तर सायं 04:00 तक तद्पश्चात पूर्व 🌥️शिववास: 👉🏻 गौरी के साथ - शुभ दिन 12:21 तक तद्पश्चात सभा में - कष्टकारक 🌥️ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:16 से प्रातः 04:58 तक 🌥️अभिजीत मुहूर्त - कोई नहीं 🌥️निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:03 जुलाई 09 से रात्रि 12:45 जुलाई 09 तक ⛅व्रत,पर्व आदि विवरण- पंचक, गण्डमूल, आडल योग, बसोरा शीतलाष्टमी ⛅ आजके अन्य मुहूर्त - विवाह संस्कार, व्यापार प्रारम्भ 🔶 चौघड़िया, दिन 🔶 (शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी) लाभ 05:40 AM से 07:21 AM तक उन्नति अमृत 07:21 AM से 09:02 AM तक सर्वोत्तम काल 09:02 AM से 10:43 AM तक हानि शुभ 10:43 AM से 12:24 PM तक उत्तम रोग 12:24 PM से 02:05 PM तक अमंगल उद्वेग 02:05 PM से 03:46 PM तक अशुभ चर 03:46 PM से 05:27 PM तक सामान्य लाभ 05:27 PM से 07:08 PM तक उन्नति 🔶 रात्रि का चौघड़िया 🔶 उद्वेग 07:08 PM से 08:27 PM तक अशुभ शुभ 08:27 PM से 09:46 PM तक उत्तम अमृत 09:46 PM से 11:05 PM तक सर्वोत्तम चर 11:05 PM से 12:24 AM तक सामान्य, जुलाई 09 रोग 12:24 AM से 01:43 AM तक अमंगल, जुलाई 09 काल 01:43 AM से 03:02 AM तक हानि, जुलाई 09 लाभ 03:02 AM से 04:22 AM तक उन्नति, जुलाई 09 उद्वेग 04:22 AM से 05:41 AM तक अशुभ, जुलाई 09 🌥️विशेष - अष्टमी को नारियल फल खाने से बुद्धि का नाश होता है एवं नवमी को लोकी खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34) 🔹नौकरी - व्यवसाय में सफलता, आर्थिक समृद्धि एवं कर्ज मुक्ति हेतु कारगर प्रयोग... 🔸पद्म पुराण के अनुसार हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है। 🔸शनिवार के दिन पीपल में काले तिल, दूध, गुड़, पानी मिलाकर चढ़ायें एवं प्रार्थना करें - ' हे प्रभु ! आपने गीता में कहा है कि वृक्षों में पीपल मैं हूँ। हे भगवान ! मेरे जीवन में यह परेशानी है। आप कृपा करके मेरी यह परेशानी ( परेशानी , दुःख का नाम लेकर ) दूर करने की कृपा करें। पीपल का स्पर्श करें व प्रदक्षिणा करें। 🔹कलह-क्लेश, रोग व दुर्बलता मिटाने का उपाय🔹 🔸जिसको घर में कलह-क्लेश मिटाना हो, रोग या शारीरिक दुर्बलता मिटाना हो वह इस चौपाई की पुनरावृत्ति किया करे : बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौ पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ।। 🔹रोगों से छुटकारा पाने के लिए🔹 🔸 जिसे कोई न कोई रोग बना ही रहता हो, दवाइयों से भी लाभ न मिल रहा हो पद्मपुराण एवं सूर्य पुराण के अनुसार वह व्यक्ति यदि प्रतिदिन प्रातः स्नान के बाद विधिवत शुध्दरूप से "आदित्यहृदय स्तोत्र" का पाठ करे तो रोग से छुटकारा मिल जाता है। 🔸 "आदित्यहृदय स्तोत्र" के नियमित एवं विधिवत पाठ से गंभीर से गंभीर रोग ठीक हो जाते हैं। एवं पाठ करने वाले व्यक्ति को कभी रोग नही व्यापते। 🔸 सरलतम पद्धति से किसी भी प्रकार के स्तोत्र का पाठ या पूजन-अनुष्ठान सीखने के लिए - "ग्रंथ वचन शिक्षा केन्द्र" से जुड़ें → https://t.me/Granth_Vachan_Shiksha_Kendra 🌞🚩🚩 " ।। जय श्री राम ।। " 🚩🚩🌞 ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ (हमारे मनोबल को बनाये रखने के लिए एवं पञ्चाङ्ग का लाभ सभी को मिल सके इसके लिए यह पञ्चाङ्ग अपने सभी परिचितों को एवं सभी ग्रुपों में शेयर अवश्य करें।)
🌞 दैनिक पंचांग 🌞 🌥️ दिनांक - 07 जुलाई 2026 🌥️ दिन - मंगलवार 🌥️ विक्रम संवत् - 2083 🌥️ संवत्सर - विश्वावसु 🌥️ अयन - दक्षिणायन 🌥️ ऋतु - वर्षा 🌥️ मास - आषाढ़ 🌥️ पक्ष - कृष्ण 🌥️ सूर्य राशि - मिथुन 🌥️ चंद्र राशि - मीन 🌥️ सूर्योदय - 05:40 🌥️ सूर्यास्त - 07:08 (समस्त मूहुर्त नर्मदापुरम मानक समयानुसार) 🌥️तिथि - सप्तमी दिन 01:24 तक तद्पश्चात अष्टमी 🌥️नक्षत्र - उत्तराभाद्रपदा दिन 04:24 तक तद्पश्चात रेवती 🌥️योग - शोभन दिन 02:31 तक तद्पश्चात अतिगण्ड 🌥️राहुकाल - दिन 03:46 से सायं 05:27 तक 🌥️गण्डमूल 👉🏻 दिन 04:24 से दिन 02:56 जुलाई 09 तक 🌥️पंचक 👉🏻 अहोरात्रि (दिन-रात) जुलाई 08 की सायं 04:00 तक 🌥️सर्वार्थसिद्धि योग 👉🏻 प्रातः 05:40 से दिन 04:24 तक 🌥️दिशा शूल 👉🏻 उत्तर दिशा में 🌥️अग्निवास: 👉🏻 पाताल- अशुभ दिन 01:24 तक तद्पश्चात पृथ्वी - शुभ 🌥️चन्द्र वास: 👉🏻 उत्तर 🌥️शिववास: 👉🏻 श्मशान में - मृत्युकारक दिन 01:24 तक तद्पश्चात गौरी के साथ - शुभ 🌥️ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:16 से प्रातः 04:58 तक 🌥️अभिजीत मुहूर्त - दिन 11:57 से दिन 12:51 तक 🌥️निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:03 जुलाई 08 से रात्रि 12:45 जुलाई 08 तक ⛅व्रत,पर्व आदि विवरण- पंचक, गण्डमूल, सर्वार्थसिद्धि योग, रवि योग, आडल योग, कालाष्टमी, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी ⛅ आजके अन्य मुहूर्त - विवाह संस्कार 🔶 चौघड़िया, दिन 🔶 (शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी) रोग 05:40 AM से 07:21 AM तक अमंगल उद्वेग 07:21 AM से 09:02 AM तक अशुभ चर 09:02 AM से 10:43 AM तक सामान्य लाभ 10:43 AM से 12:24 PM तक उन्नति अमृत 12:24 PM से 02:05 PM तक सर्वोत्तम काल 02:05 PM से 03:46 PM तक हानि शुभ 03:46 PM से 05:27 PM तक उत्तम रोग 05:27 PM से 07:08 PM तक अमंगल 🔶 रात्रि का चौघड़िया 🔶 काल 07:08 PM से 08:27 PM तक हानि लाभ 08:27 PM से 09:46 PM तक उन्नति उद्वेग 09:46 PM से 11:05 PM तक अशुभ शुभ 11:05 PM से 12:24 AM तक उत्तम, जुलाई 08 अमृत 12:24 AM से 01:43 AM तक सर्वोत्तम, जुलाई 08 चर 01:43 AM से 03:02 AM तक सामान्य, जुलाई 08 रोग 03:02 AM से 04:21 AM तक अमंगल, जुलाई 08 काल 04:21 AM से 05:40 AM तक हानि, जुलाई 08 🌥️विशेष - सप्तमी को ताड़ फल खाने से रोग बढ़ता है व शरीर का नाश होता है एवं अष्टमी को नारियल फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34) 🔹 माल बिकता नहीं हो तो..🔹 दुकान है माल पड़ा रहता है | बिकता भी नहीं , पड़ा रहता है तो जो माल पड़ा रहता है , उसे दुकान में उत्तर और पश्चिम दिशा के बीच वायव्य कोण पड़ता है उधर रख दो | तो वायव्य दिशा यानी वायु भगवान् की दिशा है , तो माल वायु वेग से बिकेगा | 🔹निरोगी व श्री सम्पन्न होने के लिये🔹 ॐ हुं विष्णवे नमः 🔸 निरोगी व श्री सम्पन्न होने के लिये इस मन्त्र की एक माला रोज जप करें, तो आरोग्यता और सम्पदा आती है । 🔹बेटी की शादी🔹 अगर कोई कष्ट है तो ऐसा नहीं सोचना की ये कष्ट सदा रहेगा … बेटी की शादी नहीं हो रही तो पिता गुड़ मिश्रित जल से सूर्य नारायण को अर्घ्य दें, बेटी की शादी जल्दी हो जायेगी…। उत्तर दिशा में मुख करके “ॐ ह्रीं गौरियाय नमः” ये मन्त्र का जप करें तो शादी जल्दी होगी…घर वर अच्छा मिलेगा॥ 🔸 सरलतम पद्धति से पूजन/पाठ, अनुष्ठान आदि सीखने के लिए - "ग्रंथ वचन शिक्षा केन्द्र" से जुड़ें → https://t.me/Granth_Vachan_Shiksha_Kendra 🌞🚩🚩 " ।। जय श्री राम ।। " 🚩🚩🌞 ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ (हमारे मनोबल को बनाये रखने के लिए एवं पञ्चाङ्ग का लाभ सभी को मिल सके इसके लिए यह पञ्चाङ्ग अपने सभी परिचितों को एवं सभी ग्रुपों में शेयर अवश्य करें।)
🔸 सरलतम पद्धति से पूजन/पाठ, अनुष्ठान आदि सीखने के लिए - "ग्रंथ वचन शिक्षा केन्द्र" से जुड़ें → https://t.me/Granth_Vachan_Shiksha_Kendra 🌞🚩🚩 " ।। जय श्री राम ।। " 🚩🚩🌞 ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ (हमारे मनोबल को बनाये रखने के लिए एवं पञ्चाङ्ग का लाभ सभी को मिल सके इसके लिए यह पञ्चाङ्ग अपने सभी परिचितों को एवं सभी ग्रुपों में शेयर अवश्य करें।)
🌞 दैनिक पंचांग 🌞 🌥️ दिनांक - 06 जुलाई 2026 🌥️ दिन - सोमवार 🌥️ विक्रम संवत् - 2083 🌥️ संवत्सर - विश्वावसु 🌥️ अयन - दक्षिणायन 🌥️ ऋतु - वर्षा 🌥️ मास - आषाढ़ 🌥️ पक्ष - कृष्ण 🌥️ सूर्य राशि - मिथुन 🌥️ चंद्र राशि - कुम्भ दिन 09:57 तक तद्पश्चात मीन 🌥️ सूर्योदय - 05:39 🌥️ सूर्यास्त - 07:08 (समस्त मूहुर्त नर्मदापुरम मानक समयानुसार) 🌥️तिथि - षष्ठी दिन 01:47 तक तद्पश्चात सप्तमी 🌥️नक्षत्र - पूर्वाभाद्रपदा दिन 04:07 तक तद्पश्चात उत्तराभाद्रपदा 🌥️योग - सौभाग्य दिन 03:51 तक तद्पश्चात शोभन 🌥️राहुकाल - प्रातः 07:21 से प्रातः 09:02 तक 🌥️भद्रावास - मृत्यु👉🏻 दिन 01:47 से रात्रि 01:41 जुलाई 07 तक 🌥️पंचक 👉🏻 अहोरात्रि (दिन-रात) जुलाई 08 की सायं 04:00 तक 🌥️दिशा शूल 👉🏻 पूर्व दिशा में 🌥️अग्निवास: 👉🏻 पृथ्वी- शुभ दिन 01:47 तक तद्पश्चात आकाश - अशुभ 🌥️चन्द्र वास: 👉🏻 उत्तर 🌥️शिववास: 👉🏻 भोजन में - पीणा दिन 01:47 तक तद्पश्चात श्मशान में - मृत्युकारक 🌥️ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:15 से प्रातः 04:57 तक 🌥️अभिजीत मुहूर्त - दिन 11:57 से दिन 12:51 तक 🌥️निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:03 जुलाई 07 से रात्रि 12:45 जुलाई 07 तक ⛅व्रत,पर्व आदि विवरण- भद्रावास, पंचक, रवि योग, आडल योग, विडाल योग ⛅ आजके अन्य मुहूर्त - विवाह संस्कार, नामकरण संस्कार 🔶 चौघड़िया, दिन 🔶 (शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी) अमृत 05:39 AM से 07:21 AM तक सर्वोत्तम काल 07:21 AM से 09:02 AM तक हानि शुभ 09:02 AM से 10:43 AM तक उत्तम रोग 10:43 AM से 12:24 PM तक अमंगल उद्वेग 12:24 PM से 02:05 PM तक अशुभ चर 02:05 PM से 03:46 PM तक सामान्य लाभ 03:46 PM से 05:27 PM तक उन्नति अमृत 05:27 PM से 07:08 PM तक सर्वोत्तम 🔶 रात्रि का चौघड़िया 🔶 चर 07:08 PM से 08:27 PM तक सामान्य रोग 08:27 PM से 09:46 PM तक अमंगल काल 09:46 PM से 11:05 PM तक हानि लाभ 11:05 PM से 12:24 AM तक उन्नति, जुलाई 07 उद्वेग 12:24 AM से 01:43 AM तक अशुभ, जुलाई 07 शुभ 01:43 AM से 03:02 AM तक उत्तम, जुलाई 07 अमृत 03:02 AM से 04:21 AM तक सर्वोत्तम, जुलाई 07 चर 04:21 AM से 05:40 AM तक सामान्य, जुलाई 07 🌥️विशेष - षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातून मुंह मे डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है एवं सप्तमी को ताड़ फल खाने से रोग बढ़ता है व शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34) 🔹दंडवत प्रणाम का महत्व🔹 🔸ईश्वर की भक्ति के लिए अपने भीतर के सभी नकारात्मक तत्वों को हमें त्यागना पड़ता है और खुद को ईश्वर के चरणों में समर्पित करना होता है । ऐसा हम तभी कर सकते हैं जब हमारे भीतर मौजूद अभिमान हमारे अंतर्मन से निकल जाए । इसलिए शष्टांग प्रणाम के बढ़ावा दिया गया है । 🔹दंडवत प्रणाम कैसे करते हैं ?🔹 🔸अपने शरीर को दंडवत मुद्रा में लाते हुए सिर, हाथ, पैर, जाँघे, मन, ह्रदय, नेत्र और वचन को मिलकर लेट कर प्रणाम करें। अष्ट अंगों में दोनों पाँव, दोनों घुटने, छाती, ठुण्डी और दोनों हथेलियाँ शामिल हैं । इस प्रकार के प्रणाम को हम ‘दण्डवत प्रणाम’ इसलिए भी कहते हैं । 🔹अष्टांग दंडवत नमस्कार करने से लाभ🔹 👉 1. दंडवत प्रणाम करने से व्यक्ति जीवन के असली अर्थ को समझ पाता है और आगे की दिशा में बढ़ पाता है । 👉 2. व्यक्ति के भीतर समान भाव की प्रवृत्ति जागृत होती है और अभिमान खत्म हो जाता है । 👉 3. दंडवत प्रणाम करने से अहम नष्ट होता है, ईश्वर के निकट पहुंचने का रास्ता है दंडवत प्रणाम । 👉 4. मन में दया और विनम्रता जैसे भाव पनपने लगते हैं । 👉 5. आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक है अष्टाङ्ग नमस्कार । 👉 6. मसल्स के स्टिम्युलेशन और एक्टिव प्रयोग से पीठ मजबूत होने लगती है । 👉 7. व्यक्ति अपने शरीर में ऊर्जा महसूस करने लगता है । 👉 8. पाचन क्रिया में संतुलन बनाये रखने में लाभकारी है । 🔹स्त्रियों को दंडवत प्रणाम क्यों नहीं करना चाहिए ? 'धर्मसिन्धु’ नामक ग्रंथ में इसका उत्तर हमें मिलता है, जिसमें स्पष्ट तौर पर निर्देश दिया गया है- ‘ब्राह्मणस्य गुदं शंखं शालिग्रामं च पुस्तकम् । वसुन्धरा न सहते कामिनी कुच मर्दनं।।’ अर्थात् – ब्राह्मणों का पृष्ठभाग, शंख, शालिग्राम, धर्मग्रंथ एवं स्त्रियों का वक्षस्थल यदि प्रत्यक्ष रूप से भूमि का स्पर्श करते हैं तो हमारी पृथ्वी इस भार को सहन नहीं कर सकती है । यदि पृथ्वी इस असहनीय भार को सहन कर भी लेती है तो वह इस भार को डालने वाले से उसकी अष्ट-लक्ष्मियों का हरण कर लेती है । 🔹स्त्रियां ऐसे करें प्रणाम :🔹 🔸स्त्रियां दंडवत प्रणाम के बजाय घुटनों के बल बैठकर अपने मस्तक को भूमि से लगाकर प्रणाम कर सकती हैं ।
🔹अपथ्य आहार : गरिष्ठ भोजन, उड़द, अरहर आदि दालें, नदी, तालाब एवं कुएँ का बिना उबाला हुआ पानी, मैदे की चीजें, ठंडे पेय, आइसक्रीम, मिठाई, केला, मठ्ठा, अंकुरित अनाज, पत्तियोंवाली सब्जियाँ नहीं खाना चाहिए तथा देवशयनी एकादशी के बाद आम नहीं खाना चाहिए । 🔹पथ्य विहार : अंगमर्दन, उबटन, स्वच्छ हलके वस्त्र पहनना योग्य है । 🔹अपथ्य विहार : अति व्यायाम, स्त्रीसंग, दिन में सोना, रात्रि जागरण, बारिश में भीगना, नदी में तैरना, धूप में बैठना, खुले बदन घूमना त्याज्य है । 🔹इस ऋतु में वातावरण में नमी रहने के कारण शरीर की त्वचा ठीक से नहीं सूखती । अतः त्वचा स्वच्छ, सूखी व स्निग्ध बनी रहे इसका उपाय करें ताकि त्वचा के रोग पैदा न हों । इस ऋतु में घरों के आस-पास गंदा पानी इकट्ठा न होने दें, जिससे मच्छरों से बचाव हो सके । 🔹इस ऋतु में त्वचा के रोग, मलेरिया, टायफाइड व पेट के रोग अधिक होते हैं । अतः खाने-पीने की सभी वस्तुओं को मक्खियां एवं कीटाणुओं से बचायें व उन्हें साफ करके ही प्रयोग में लें । बाजारू दही व लस्सी का सेवन न करें । 🔹चातुर्मास में आँवले और तिल के मिश्रण को पानी में डालकर स्नान करने से दोष निवृत्त होते हैं । 🔸 सरलतम पद्धति से पूजन/पाठ, अनुष्ठान आदि सीखने के लिए - "ग्रंथ वचन शिक्षा केन्द्र" से जुड़ें → https://t.me/Granth_Vachan_Shiksha_Kendra 🌞🚩🚩 " ।। जय श्री राम ।। " 🚩🚩🌞 ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ (हमारे मनोबल को बनाये रखने के लिए एवं पञ्चाङ्ग का लाभ सभी को मिल सके इसके लिए यह पञ्चाङ्ग अपने सभी परिचितों को एवं सभी ग्रुपों में शेयर अवश्य करें।)
🌞 दैनिक पंचांग 🌞 🌥️ दिनांक - 05 जुलाई 2026 🌥️ दिन - रविवार 🌥️ विक्रम संवत् - 2083 🌥️ संवत्सर - विश्वावसु 🌥️ अयन - दक्षिणायन 🌥️ ऋतु - वर्षा 🌥️ मास - आषाढ़ 🌥️ पक्ष - कृष्ण 🌥️ सूर्य राशि - मिथुन 🌥️ चंद्र राशि - कुम्भ 🌥️ सूर्योदय - 05:39 🌥️ सूर्यास्त - 07:08 (समस्त मूहुर्त नर्मदापुरम मानक समयानुसार) 🌥️तिथि - पंचमी दिन 01:30 तक तद्पश्चात षष्ठी 🌥️नक्षत्र - शतभिषा दिन 03:12 तक तद्पश्चात पूर्वाभाद्रपदा 🌥️योग - आयुष्मान दिन 04:40 तक तद्पश्चात सौभाग्य 🌥️राहुकाल - दिन 05:27 से सायं 07:08 तक 🌥️पंचक 👉🏻 अहोरात्रि (दिन-रात) जुलाई 08 की सायं 04:00 तक 🌥️दिशा शूल 👉🏻 पश्चिम दिशा में 🌥️अग्निवास: 👉🏻 पाताल- अशुभ दिन 01:30 तक तद्पश्चात पृथ्वी - शुभ 🌥️चन्द्र वास: 👉🏻 पश्चिम 🌥️शिववास: 👉🏻 नंदी पर - अभिष्टसिद्धि दिन 01:30 तक तद्पश्चात भोजन में - पीणा 🌥️ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:15 से प्रातः 04:57 तक 🌥️अभिजीत मुहूर्त - दिन 11:57 से दिन 12:51 तक 🌥️निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:03 जुलाई 06 से रात्रि 12:45 जुलाई 06 तक ⛅व्रत,पर्व आदि विवरण- पंचक, रवि योग, आडल योग, विडाल योग ⛅ आजके अन्य मुहूर्त - कोई नहीं 🔻पद, चरण🔻 (नामकरण हेतु नामाक्षर सूचक) 3 सी→ शतभिषा 08:53 AM तक 4 सू→ शतभिषा 03:12 PM तक 1 से→ पूर्वभाद्रपदा 09:29 PM तक 2 सो→ पूर्वभाद्रपदा 03:44 AM जुलाई 06 तक 🔶 चौघड़िया, दिन 🔶 (शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी) उद्वेग 05:39 AM से 07:20 AM तक अशुभ चर 07:20 AM से 09:01 AM तक सामान्य लाभ 09:01 AM से 10:43 AM तक उन्नति अमृत 10:43 AM से 12:24 PM तक सर्वोत्तम काल 12:24 PM से 02:05 PM तक हानि शुभ 02:05 PM से 03:46 PM तक उत्तम रोग 03:46 PM से 05:27 PM तक अमंगल उद्वेग 05:27 PM से 07:08 PM तक अशुभ 🔶 चौघड़िया, रात 🔶 (शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी) शुभ 07:08 PM से 08:27 PM तक उत्तम अमृत 08:27 PM से 09:46 PM तक सर्वोत्तम चर 09:46 PM से 11:05 PM तक सामान्य रोग 11:05 PM से 12:24 AM तक अमंगल काल 12:24 AM से 01:43 AM तक हानि लाभ 01:43 AM से 03:02 AM तक उन्नति उद्वेग 03:02 AM से 04:21 AM तक अशुभ शुभ 04:21 AM से 05:39 AM तक उत्तम 🌥️विशेष - पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है एवं षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातून मुंह मे डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34) ☔वर्षा ऋतु विशेष ☔ 🔹वर्षा ऋतु में वायु का विशेष प्रकोप तथा पित्त का संचय होता है । वर्षा ऋतु में वातावरण के प्रभाव के कारण स्वाभाविक ही जठाराग्नि मंद रहती है, जिसके कारण पाचनशक्ति कम हो जाने से अजीर्ण, बुखार, वायुदोष का प्रकोप, सर्दी, खाँसी, पेट के रोग, कब्जियत, अतिसार, प्रवाहिका, आमवात, संधिवात आदि रोग होने की संभावना रहती है । 🔹इन रोगों से बचने के लिए तथा पेट की पाचक अग्नि को सँभालने के लिए आयुर्वेद के अनुसार उपवास तथा लघु भोजन हितकर है । इसलिए हमारे आर्षदृष्टा ऋषि-मुनियों ने इस ऋतु में अधिक-से-अधिक उपवास का संकेत कर धर्म के द्वारा शरीर के स्वास्थ्य का ध्यान रखा है । 🔹इस ऋतु में जल की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें । जल द्वारा उत्पन्न होनेवाले उदर-विकार, अतिसार, प्रवाहिका एवं हैजा जैसी बीमारियों से बचने के लिए पानी को उबालें, आधा जल जाने पर उतार कर ठंडा होने दें, तत्पश्चात् हिलाये बिना ही ऊपर का पानी दूसरे बर्तन में भर दें एवं उसी पानी का सेवन करें । जल को उबालकर ठंडा करके पीना सर्वश्रेष्ठ उपाय है । पीने के लिए और स्नान के लिए गंदे पानी का प्रयोग बिल्कुल न करें क्योंकि गंदे पानी के सेवन से उदर व त्वचा-सम्बन्धी व्याधियाँ पैदा हो जाती हैं । 🔹500 ग्राम हरड़ और 50 ग्राम सेंधा नमक का मिश्रण बनाकर प्रतिदिन 5-6 ग्राम लेना चाहिए । 🔹पथ्य आहार : इस ऋतु में वात की वृद्धि होने के कारण उसे शांत करने के लिए मधुर, अम्ल व लवण रसयुक्त, हलके व शीघ्र पचनेवाले तथा वात का शमन करनेवाले पदार्थों एवं व्यंजनों से युक्त आहार लेना चाहिए । सब्जियों में मेथी, सहिजन, परवल, लौकी, सरगवा, बथुआ, पालक एवं सूरन हितकर हैं । सेवफल, मूँग, गरम दूध, लहसुन, अदरक, सोंठ, अजवायन, साठी के चावल, पुराना अनाज, गेहूँ, चावल, जौ, खट्टे एवं खारे पदार्थ, दलिया, शहद, प्याज, गाय का घी, तिल एवं सरसों का तेल, महुए का अरिष्ट, अनार, द्राक्ष का सेवन लाभदायी है । 🔹पूरी, पकोड़े तथा अन्य तले हुए एवं गरम तासीरवाले खाद्य पदार्थों का सेवन अत्यंत कम कर दें ।
🔸 चतुर्मास में बादल, बरसात की रिमझिम, प्राकृतिक सौंदर्य का लहलहाना यह सब साधन-भजनवर्धक है, उत्साहवर्धक है । अत: तपस्या, साधन-भजन करने का यह मौका चूकना नहीं चाहिए । अपनी योग्यता के अनुसार व्यक्ति कोई-न-कोई छोटा-बड़ा नियम ले सकता है । इन दिनों ज्यादा भूख नहीं लगती । उपवास, ध्यान, जप, शांति, आनंद, मौन, भगवत्स्मृति,सात्विक खुराक, स्नान-दान ये विशेष हितकारी, पुण्यदायी, साफल्यदायी है । चतुर्मास में संकल्प कर लें कि ८ महीने तो संसार का धंधा-व्यवहार करते हैं, सर्दी में शरीर की तंदुरुस्ती और दिनों में धन का कोष भरा जाता है किंतु इन ४ महीनों में साधना का खजाना, आध्यात्मिक कोष भरेंगे ।’ 🔸 सरलतम पद्धति से पूजन/पाठ, अनुष्ठान आदि सीखने के लिए - "ग्रंथ वचन शिक्षा केन्द्र" से जुड़ें → 9977115243 🌞🚩🚩 " ।। जय श्री राम ।। " 🚩🚩🌞 ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ (हमारे मनोबल को बनाये रखने के लिए एवं पञ्चाङ्ग का लाभ सभी को मिल सके इसके लिए यह पञ्चाङ्ग अपने सभी परिचितों को एवं सभी ग्रुपों में शेयर अवश्य करें।)
🌞 दैनिक पंचांग 🌞 🌥️ दिनांक - 04 जुलाई 2026 🌥️ दिन - शनिवार 🌥️ विक्रम संवत् - 2083 🌥️ संवत्सर - विश्वावसु 🌥️ अयन - दक्षिणायन 🌥️ ऋतु - वर्षा 🌥️ मास - आषाढ़ 🌥️ पक्ष - कृष्ण 🌥️ सूर्य राशि - मिथुन 🌥️ चंद्र राशि - कुम्भ 🌥️ सूर्योदय - 05:39 🌥️ सूर्यास्त - 07:08 (समस्त मूहुर्त नर्मदापुरम मानक समयानुसार) 🌥️तिथि - चतुर्थी दिन 12:39 तक तद्पश्चात पंचमी 🌥️नक्षत्र - धनिष्ठा दिन 01:43 तक तद्पश्चात शतभिषा 🌥️योग - प्रीति सायं 05:02 तक तद्पश्चात आयुष्मान 🌥️राहुकाल - दिन 09:01 से दिन 10:42 तक 🌥️पंचक 👉🏻 रात्रि 12:48 से जुलाई 08 की सायं 04:00 तक 🌥️दिशा शूल 👉🏻 पूर्व दिशा में 🌥️अग्निवास: 👉🏻 पृथ्वी - शुभ 🌥️चन्द्र वास: 👉🏻 पश्चिम 🌥️शिववास: 👉🏻 कैलाश पर - सौख्य दिन 12:39 तक तद्पश्चात नंदी पर - अभिष्टसिद्धि 🌥️ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:15 से प्रातः 04:57 तक 🌥️अभिजीत मुहूर्त - दिन 11:57 से दिन 12:50 तक 🌥️निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:03 जुलाई 05 से रात्रि 12:45 जुलाई 05 तक ⛅व्रत,पर्व आदि विवरण- पंचक, विडाल योग ⛅ आजके अन्य मुहूर्त - कोई नहीं 🔻पद, चरण🔻 (नामकरण हेतु नामाक्षर सूचक) 3 गु→ धनिष्ठा 07:16 AM तक 4 गे→ धनिष्ठा 13:43 PM तक 1 गो→ शतभिषा 20:08 PM तक 2 सा→ शतभिषा 26:32 AM जुलाई 05 तक 🔶 चौघड़िया, दिन 🔶 (शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी) काल 05:39 AM से 07:20 AM तक हानि शुभ 07:20 AM से 09:01 AM तक उत्तम रोग 09:01 AM से 10:42 AM तक अमंगल उद्वेग 10:42 AM से 12:23 PM तक अशुभ चर 12:23 PM से 02:05 PM तक सामान्य लाभ 02:05 PM से 03:46 PM तक उन्नति अमृत 03:46 PM से 05:27 PM तक सर्वोत्तम काल 05:27 PM से 07:08 PM तक हानि 🔶 चौघड़िया, रात 🔶 (शुभ कार्यों के लिये मुहूर्त सूचक समय सारणी) लाभ 07:08 PM से 08:27 PM तक उन्नति उद्वेग 08:27 PM से 09:46 PM तक अशुभ शुभ 09:46 PM से 11:05 PM तक उत्तम अमृत 11:05 PM से 12:24 AM तक सर्वोत्तम चर 12:24 AM से 01:43 AM तक सामान्य रोग 01:43 AM से 03:01 AM तक अमंगल काल 03:01 AM से 04:20 AM तक हानि लाभ 04:20 AM से 05:39 AM तक उन्नति 🌥️विशेष - चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है एवं पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34) 🔹आध्यात्मिक कोष भरने का काल – चतुर्मास🔹 🔸देवशयनी एकादशी से देवउठी एकादशी तक के ४ महीने भगवान नारायण ध्यानमग्न रहते हैं । अत: ये मास सनातन धर्म के प्रेमी लोगों के बीच आराधना-उपासना के लिए विशेष महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं । चतुर्मास में अन्न, जल, दूध, दही, घी, मट्ठा व गौ का दान तथा वेदपाठ, हवन आदि महान फल देते हैं । स्कंद पुराण ( ब्राह्म खंड, चातुर्मास्य माहात्म्य : ३.११) में लिखा हैं : सद्धर्म: सत्कथा चैव सत्सेवा दर्शनं सताम । विष्णुपूजा रतिर्दाने चातुर्मास्यसुदुर्लभा ।। ‘सद्धर्म (सत्कर्म), सत्कथा, सत्पुरुषों की सेवा, संतों का दर्शन-सत्संग, भगवान का पूजन और दान में अनुराग – ये सब बातें चौमासे में दुर्लभ बतायी गयी हैं ।’ 🔹चतुर्मास में करणीय🔹 🔸चतुर्मास में प्रतिदिन सुबह नक्षत्र दिखे उसी समय उठ जाय और नक्षत्र-दर्शन करे । इन दिनों २४ घंटे में एक बार भोजन करनेवाले व्यक्ति को अग्निष्टोम यज्ञ का फल मिल जाता है । यज्ञ में जो आहुति दे सकें सात्विक भोजन की, वैसा ही यज्ञोचित भोजन करें । ब्रह्मचर्य का पालन करें । चतुर्मास में पलाश की पत्तल पर भोजन बड़े-बड़े पातकों का नाशक है, ब्रह्मभाव को प्राप्त करनेवाला होता है । वटवृक्ष के पत्तों या पत्तल पर भोजन करना भी पुण्यदायी कहा गया है । पुरे चतुर्मास में पलाश की पत्तल पर भोजन करें तो धनवान, रूपवान और मान योग्य व्यक्ति बन जायेगा । 🔸पंचगव्य का शरीर के सभी रोगों और पापों को मिटाने तथा प्रसन्नता देने में बड़ा प्रभाव है । चातुर्मास में केवल दूध पर रहनेवाले को साधन-भजन में बड़ा बल मिलता है अथवा केवल फल-सेवन बड़े-बड़े पापों को नष्ट करता है । 🔸इस समय पित्त-प्रकोप होता है । गुलकंद या त्रिफला का सेवन, मुलतानी मिट्टी से स्नान, दूध पीना पित्त-शमन करता है । हवन आदि में यदि तिल-चावल की आहुति देते हैं तो आप निरोग हो जाते हैं । 🔹चतुर्मास में त्यागने योग्य🔹 🔸चतुर्मास में गुड़ व भोग-सामग्री का त्याग कर देना चाहिए । जो दही का त्याग करता है उसको गोलोक की प्राप्ति होती है । नमक का त्याग कर सकें तो अच्छा है । परनिंदा त्यागने की बहुत प्रशंसा शास्त्रों में लिखी है । चतुर्मास में परनिंदा महापाप है, महाभय को देनेवाली है । इन ४ महीनों में शादी और सकाम यज्ञ, कर्म आदि करना मना है । 🔹आध्यात्मिक कोष अवश्य भरें🔹