tgindex
Последний пост
11 авг.
Последнее чтение
13 авг.
Постов за неделю
1
Всего постов
20
Тип
открытый
Язык
und
В каталоге с
13 авг.
Подписчики
96
+1 за 3 дн.
Сутки
0
0,00%
Неделя
 
Месяц
 
Просмотров на пост
65
20 постов
Вовлечённость
67,7%
к подписчикам
Постов в день
0,1
всего 20
Упоминаний
1
каналов
Охват размещения
оценка
1/24сутки в ленте
13
1/48двое суток
14
1/72трое суток
16

Оценка по просмотрам недавних постов: пост набирает почти всё за первые сутки.

Посты

  • 11 авг.155из PuranPravachan

    Grok से डिबेट सिख के आने वाले बच्चे जिनका कुटाई हुआ इनके पास कोई पुस्तक प्रमाण नहीं बस प्रमाण के नाम पे Grok ही है इन छपरियों के पास 😂😂

  • शूद्रयोनौ हि जातस्य सद्गुणानुपतिष्ठतः । वैश्यत्वं भवति ब्रह्मन्क्षत्रियत्वं तथैव च।। आर्जवे वर्तमानस्य ब्राह्मण्यमभिजायते । गुणास्ते कीर्तिताः सर्वे किं भूयः श्रोतुमिच्छसि।। शूद्र योनि में जन्म अपने सद्गुणों से वैश्य क्षत्रिय ब्राह्मण हो सकता है। Credit - Aman Maurya जी ●▬▬▬▬▬🚩⚖️🚩▬▬▬▬▬●      𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @Dharama_talks

  • без подписи

  • без подписи

  • без подписи

  • 7 авг.5531из PuranPravachan

    क्या बुद्ध मूलनिवासी थे या विदेशी ? अक्सर नव बौद्ध बोलते हैं कि राम जी और कृष्ण जी या तो काल्पनिक है या तो विदेशी है मनुवादी बाहर से आए। तो इनके जो बुद्ध है वो कौनसे वंश के थे ? संयुत्तनिकाय (८/७) में बुद्ध को स्पष्ट "आदिच्चबन्धुनं" कहा गया है जिसका अर्थ होता है सूर्यवंश में उत्पन्न बुद्ध। और राम जी भी सूर्यवंशी ही थे जो मनु जी के ही वंश था। इसी सूत्त का तुर्किस्तान में पांडुलिपि भी प्राप्त हुआ है। जिसमें लिखा है - वन्दे त्वादित्य बान्धवम् अर्थात् - सूर्यवंशी (बुद्ध) को नमन इसी प्रकार ८ वी शताब्दी के मैत्रेयसमितिनका के पांडुलिपि में भी बुद्ध को बोला गया - चक्रवर्षि इक्ष्वाकुय्सर्कशगौतमकोत्र अर्थात् - चक्रवर्ती इक्ष्वाकु वंशी और गौतम गोत्र में उत्पन्न। अगर मनु, राम जी आदि सूर्यवंशी राजा इनके हिसाब से विदेशी है तो बुद्ध भी सूर्यवंशी होने से विदेशी सिद्ध हो गए। ●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●     𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan

  • 4 авг.455из VEDIC_SCRIPTURE_OFFICIAL

    क्या अल्लाह मोहताज है एक औरत का बच्चे पैदा करने के लिए ? जैसा कि हम जानते है अल्लाह का जेंडर मेल है और उसको बच्चे पैदा करने के लिए एक औरत चाहिए ( अरे रुक जाओ बाबा दे रहा हु आयात में 😂) السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ أَنَّىٰ يَكُونُ لَهُ وَلَدٌ وَلَمْ تَكُن لَّهُ صَاحِبَةٌ ۖ وَخَلَقَ كُلَّ شَيْءٍ ۖ وَهُوَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمٌ" सूरह अल-अनआम (6:101) "वह आकाशों और धरती का अनोखा पैदा करने वाला है। उसकी संतान कैसे हो सकती है जबकि उसकी कोई संगिनी (पत्नी) नहीं है? उसने हर चीज़ को पैदा किया है, और वह हर चीज़ को भली-भाँति जानने वाला है। इधर अल्लाह की बात से ही पता चल रहा अल्लाह का जेंडर मेल है और बच्चे पैदा करने के लिए वो एक औरत ओर निर्भर है

  • 4 авг.4761из PuranPravachan

    क्या ऋग्वेद के नासदीय सूक्त में Agnosticism है? एक मुल्ले के द्वारा लगाया गया अनर्गल आरोप का खंडन ●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●     𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan

  • Does pali-chinese agreement prove authenticity of pali sutta ?

  • без подписи

  • https://www.youtube.com/live/d2VQ8VB5hFo?si=xnHD5u139Ic8fB1p

  • без подписи

  • 30 июл.6172из PuranPravachan

    जब शंकराचार्य के समर्थक ने मातृभूमि भारत को माता मानने से नकारा। तो हमने अथर्ववेद के पृथ्वी सूक्त (१२/१/१२) का मंत्र दिया जिसमें लिखा है - माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः अर्थात् - भूमि हमारे माता और हम उसके सन्तान हैं। और भारत भूमि हमारे मातृभूमि होने से माता ही है। भारत माता की जय 🙏🙏 ●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●     𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan

  • 30 июл.434из PuranPravachan

    शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वर बोल रहे की - "इस भारत भूमि को भारत माता कहना शास्त्रों में नहीं है इसलिए यह सब कल्पना है।" अब मैं इनसे पूछता हु कि कौनसे शास्त्र में शंकराचार्य पद होने का वर्णन है? ये शास्त्रों से दिखाओ या तो ये भी मान लो कि तुम्हारा शंकराचार्य पद ही काल्पनिक हैं।🤣🤣 दोगले शंकराचार्य भारत विरोधी ●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●     𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan

  • без подписи

  • 25 июл.5942из PuranPravachan

    सप्त ऋषि कौन हैं? वेदों में सप्त ऋषि के वर्णन आता है पर वह कोई व्यक्तियों की बात नहीं है। वेदांग निरुक्त में सप्त ऋषि के दो प्रकार से अर्थ लिया गया आधिदैविक रूप और आध्यात्मिक रूप। आधिदैविक पक्ष - सप्त ऋषि जो है वह सूर्य के सात रश्मियों को कहा जाता है। आध्यात्मिक पक्ष - सप्त ऋषि हमारे शीर में ५ ज्ञानेंद्रिय और मन, बुद्धि मिला के ७ ऋषि कहे जाते हैं। इसी प्रकार के व्याख्या कुछ भेद से बृहदारण्यक उपनिषद् में भी है - हमारे दो कान - गौतम और भरद्वाज ऋषि है। हमारे दो नेत्र - विश्वामित्र और जमदग्नि ऋषि है। हमारे दो नासारन्ध्र - वशिष्ठ और कश्यप ऋषि है। हमारे वाक् इन्द्रिय - अत्री ऋषि है। ●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●     𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan

  • अभी थोड़ा शांति से अध्ययन किया, और मंथन किया। प्रत्युत्तर: उपरोक्त प्रमाण है श्रीमद्दयानन्दसरस्वतीजी कृत संस्कारविधिः ग्रंथ (जिसपर आर्य समाज के विचारवन्त ने लेखस्वरूप भाष्य "संस्कार-प्रकाश" का लेखन किया)। अस्तु... ज्ञानवर्धक है कि संदर्भित मंत्रोच्चारण "समावर्त्तनसंस्कार" के अंतर्गत लिखित हैं। द्रष्टव्य — प्रत्येक मंत्र का प्रथम वर्ण एवं शब्द क्या है? "ओम्" अर्थात् ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन् । तो जो वेदमन्त्र उद्धृत हैं तथा विद्यार्थी को उच्चारण करने की आज्ञा दी गई है वो किसके नामस्मरण से आरम्भ और हेतु/निमित्त के लिए हैं? परमपिता परमात्मा ईश्वर के। विमूढ़ आक्षेपकर्तां ने इस सूक्ष्म अपितु विशिष्ट नाम को जानबूझकर दुर्लक्षित करके पाठक के मन में संभ्रम निर्माण करने का यत्न किया है। इस विश्लेषण से यह स्पष्ट है कि परमेश्वर के नामोच्चारण के ध्येय से मंत्र संस्कारविधि में संदर्भित हैं, न कि अलङ्कार, दर्पण, पादत्राण आदि को नमन किया जा रहा है। आक्षेपकर्ता जैसे घृणावादी, कुत्सित मानसिकता के लोगों से सदैव दूर रहें। महर्षि दयानंद सरस्वती के स्वर्णमयी ग्रंथ का पठन करें। ।। ओ३म् ।।

  • 21 июл.59из Billy Butcher (KASAI)

    без подписи

  • 21 июл.67из Billy Butcher (KASAI)

    без подписи

  • без подписи