tgindex
༈༈❣️मरीज़-ए-इश्क़❣️༈༈

༈༈❣️मरीज़-ए-इश्क़❣️༈༈

Статистика
@DilKiBaaatхинди

⊙|| दिल के जज़्बात लिखता हूं || || साहित्य || अनमोल || पंक्ति|| दर्द || || हकीकत || शायरी || विचार || || एवं सभी धर्मों का दिल से || || सम्मान करता हूं ||⊙ @Shayariwalain @DilKiBaaat

Последний пост
14 авг.
Последнее чтение
13 авг.
Постов за неделю
6
Всего постов
46
Тип
открытый
Язык
хинди
В каталоге с
12 авг.
Подписчики
3 674
+5 за 4 дн.
Сутки
+7
+0,19%
Неделя
 
Месяц
 
Просмотров на пост
406
40 постов
Вовлечённость
11,1%
к подписчикам
Постов в день
0,9
всего 46
Упоминаний
1
каналов
Охват размещения
оценка
1/24сутки в ленте
198
1/48двое суток
226
1/72трое суток
244

Оценка по просмотрам недавних постов: пост набирает почти всё за первые сутки.

Посты

  • без подписи

  • без подписи

  • без подписи

  • без подписи

  • без подписи

  • без подписи

  • без подписи

  • ये नफरतो का आशीयाना… . बाहर से काफी खुशहाल सा दिखता है… . हम नये थे यहा ये बडा अच्छा सा लगता था… . तुम जो बद्दल गए ये चिडाता सा दिखता है… . चलो ये तो तुम्हारे झुटी मौहब्बत का शहर है… . हमे ही अपने शहर लौट जाना होगा… . @Sanaya_10_13✨

  • без подписи

  • без подписи

  • без подписи

  • तुम डरते रहे दूसरों को खोने से तुम खो गए किसी ने ध्यान ही नही दिया..!!

  • दफनाए हुए हसरतो का… . केहेर होना चाहिए… . ना चाहते हुए जुदा होने का… . करा़र होना चाहिए… . दिल के एक कोने मे कही बसा… . वो ख्वाबो का कब्रिस्तान होना चाहिए… . @Sanaya_10_13✨

  • без подписи

  • . इक ऐसी निंद की ख्वाहिश हैं "सनाया" जिसकी सुबह महबूब की चिख़ों से हो @Sanaya_10_13✨ .

  • без подписи

  • без подписи

  • без подписи

  • без подписи

  • ये बादलों का गरजना, ये बिजली का चमकना, लाया है साथ में बचपन का वो मचलना,, किसानों की आंखों में फसलों की वो आशा, कहती है बारिश की हर एक अनकही भाषा,, भीगना वो गलियों में, वो कागज़ की नाव, भूल गए हम बड़े होकर, वो बचपन का जमाना,, पर आज जब बरसी हैं ये रिमझिम सी बूंदें, मन दौड़ पड़ा है फिर से, पुरानी यादों की ओर आंखें मूंदे,, हम नए सपने बुन रहे, भाग दौड़ कर पा रहे अपनी मंज़िल, पर इस सुहाने मौसम में, हर धड़कन हुई है बेकाबू ,, मेघों के संग उड़ चला है, आज फिर ये चंचल मन, बरसात की हर बूंद में, छुपा है बीता बचपन,, 𝒢𝓊𝓃𝒿𝒶𝓃 𝒿ℴ𝒽𝓇𝒾