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भारत ने अलग अलग लेयर वाली एयर डिफेंस का इस्तेमाल किया। छोटे ड्रोन के खिलाफ एंटी ड्रोन सिस्टम, जमीन से फायर करने वाली गन, अलग अलग मिसाइल सिस्टम और लंबी दूरी की एयर डिफेंस को एक साथ इस्तेमाल किया गया। यानी हर छोटे टारगेट के लिए जरूरी नहीं था कि सबसे महंगी मिसाइल ही इस्तेमाल की जाए। यही लेयर्ड डिफेंस का फायदा होता है। एक सिस्टम छोटे ड्रोन को संभालता है, दूसरा मिडिल लेयर में काम करता है और बड़े या ज्यादा खतरनाक टारगेट के लिए दूसरे सिस्टम इस्तेमाल किए जाते हैं। इसका मतलब ये हुआ कि अगर सामने वाला सैकड़ों छोटे टारगेट भेज भी दे, तो जरूरी नहीं कि हर एक पर बराबर कीमत वाला हथियार इस्तेमाल किया जाए। पाकिस्तान को लग सकता था कि वह भारत की मिसाइलें खत्म कर रहा है, लेकिन दूसरी तरफ भारत की एयर डिफेंस अलग अलग लेयर में काम कर रही थी। और यहीं पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा सामने आता है। पाकिस्तान ने एक बार टॉय ड्रोन को असली एयरक्राफ्ट समझा। फिर एक डिकॉय को राफेल समझने का दावा सामने आया। फिर भारत की चुप्पी को कमजोरी समझा गया। फिर ड्रोन की बड़ी संख्या को भारत के एयर डिफेंस के लिए बड़ी परेशानी समझा गया। यानी हर बार पाकिस्तान ने वही देखा, जो उसे अपनी रणनीति के हिसाब से सही लगा। लेकिन आधुनिक युद्ध में सबसे बड़ा खतरा यही है कि आपको लगता रहे कि आप सामने वाले को पढ़ रहे हैं, जबकि सामने वाला आपको पढ़ रहा हो। इस पूरी कहानी को अगर एक लाइन में समझना हो, तो ऐसा कहा जा सकता है, पाकिस्तान बार बार अपनी चालाकी देख रहा था, लेकिन हो सकता है कि असल में वो भारत की बिछाई हुई रणनीति पर रिएक्ट कर रहा था। पहले उसने सोचा भारत सीमा पर बड़ी सेना दिखाएगा। ऐसा नहीं हुआ। उसने समझा शायद भारत सिर्फ दबाव बना रहा है। फिर एक छोटा टारगेट दिखाई दिया और उसे असली एयरक्राफ्ट समझ लिया। फिर एक डिकॉय पर मिसाइल गई। फिर राफेल गिराने का दावा सामने आया। फिर ड्रोन की बड़ी लहर आई। हर बार ऐसा लगा कि पाकिस्तान को कुछ बड़ा फायदा मिल गया है, लेकिन बाद में उसी दावे पर सवाल खड़े हो गए। यही वजह है कि ऑपरेशन सिंदूर को सिर्फ मिसाइल और एयरstrike की कहानी समझना अधूरा होगा। इसमें deception यानी भ्रम पैदा करना, electronic warfare यानी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को प्रभावित करना, decoy यानी नकली टारगेट, radar tracking और psychological pressure, सबकी भूमिका हो सकती है। पाकिस्तान हर लेयर पर भारत के अगले कदम का अंदाजा लगाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन अगर सामने वाला आपको वही दिखा रहा हो, जो वह चाहता है कि आप देखें, तो आपका पूरा प्लान गलत दिशा में जा सकता है। युद्ध में सबसे खतरनाक स्थिति तब होती है, जब आपको अपनी जीत पर इतना भरोसा हो जाए कि आप हार के संकेत देखना ही बंद कर दें। ऑपरेशन सिंदूर की कहानी में यही सबसे बड़ा psychological angle दिखाई देता है। पाकिस्तान को लगा कि वह भारत को एक्सपोज कर रहा है, लेकिन हर क्लेम के साथ उसके अपने सिस्टम और उसकी अपनी सोच पर सवाल उठने लगे। पहलगाम में जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया, उनके लिए ये सिर्फ मिलिट्री ऑपरेशन नहीं था। उनके लिए ये जवाब था कि आतंकवादी हमला करके सिर्फ बयान जारी करके मामला खत्म नहीं होगा। भारत ने संदेश देने की कोशिश की कि आतंकवाद के पीछे मौजूद ठिकानों तक भी जवाब पहुंच सकता है। और शायद इस पूरे ऑपरेशन की सबसे सिनेमैटिक तस्वीर वही है, जिससे हमने शुरुआत की थी। एक छोटी सी रडार स्क्रीन, उस पर एक छोटा सा ब्लिप, ऑपरेटर का उसे असली टारगेट समझना, कमान रूम से फायर का आदेश और फिर मिसाइल का आसमान में जाना। अगर ये डिकॉय वाला दावा सही है, तो पाकिस्तान को लगा होगा कि उसने एक भारतीय टारगेट पकड़ लिया। लेकिन असल में हो सकता है कि भारत उसी पल उसकी एयर डिफेंस के बारे में जरूरी जानकारी हासिल कर रहा हो। यानी उसे लगा कि वो देख रहा है, लेकिन हो सकता है कि असल में उसे वही दिखाया जा रहा था जो भारत चाहता था कि वो देखे। उसे लगा कि वो भारतीय विमानों का पीछा कर रहा है, लेकिन हो सकता है कि उसे एक तय दिशा में खींचा जा रहा हो। उसे लगा कि उसने राफेल गिरा दिया, लेकिन अगर डिकॉय वाला दावा सही था, तो उसने शायद राफेल नहीं, बल्कि एक डिकॉय को निशाना बनाया था। और यही आधुनिक युद्ध का नया चेहरा है। आज लड़ाई सिर्फ इस बात की नहीं है कि किसके पास ज्यादा मिसाइल हैं। लड़ाई इस बात की भी है कि किसके पास बेहतर जानकारी है, कौन बेहतर तरीके से अपने सिस्टम को छिपा सकता है और कौन सामने वाले को गलत जानकारी पर रिएक्ट करने के लिए मजबूर कर सकता है। ऑपरेशन सिंदूर की सबसे बड़ी कहानी शायद यही है, पहले दिमाग से गेम खेलो, फिर हथियार इस्तेमाल करो। दुश्मन को तब तक यकीन रहने दो कि गेम उसके कंट्रोल में है, जब तक उसे समझ आए कि गेम कब का खत्म हो चुका है। - साभार
इसीलिए डिकॉय ड्रोन जैसी चीजों की भूमिका सामने आती है। पाकिस्तान ने जिस छोटे से टारगेट को असली भारतीय एयरक्राफ्ट समझा, उस पर मिसाइल फायर की। अगर इस दावे को सही माना जाए, तो उस एक फायर से भारत को पाकिस्तान की एयर डिफेंस की एक्टिविटी और उसके रिस्पॉन्स के बारे में जरूरी जानकारी मिल गई। यानी पाकिस्तान को लगा कि उसने एक भारतीय टारगेट को निशाना बना लिया, लेकिन हो सकता है कि उसी समय भारत उसकी एयर डिफेंस को पढ़ रहा हो। इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर की भूमिका आती है। रडार को जाम करना, कम्युनिकेशन में दिक्कत पैदा करना और दुश्मन की स्क्रीन पर सही और गलत सिग्नल के बीच फर्क करना मुश्किल बना देना, आधुनिक युद्ध का बेहद अहम हिस्सा है। दावे के मुताबिक, पाकिस्तान की एयर डिफेंस पर इलेक्ट्रॉनिक दबाव बनाया गया और कुछ समय के लिए उसके सिस्टम को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कमान रूम में स्क्रीन पर नॉइज़, कम्युनिकेशन में कन्फ्यूजन और अलग अलग जगहों से आने वाली सूचनाओं के बीच तालमेल की समस्या पैदा हो सकती थी। और इसी बीच भारतीय एयरक्राफ्ट अपने मिशन की तरफ बढ़ रहे थे। बताया गया कि भारतीय फॉर्मेशन में राफेल के साथ सुखोई Su 30MKI, मिग 29, मिराज 2000 और दूसरे एयरक्राफ्ट शामिल थे। इनका मकसद सिर्फ हमला करना नहीं था, बल्कि अलग अलग एयरक्राफ्ट और सिस्टम को एक साथ इस्तेमाल करके मिशन को ज्यादा प्रभावी बनाना था। फिर टारगेट लॉक हुए और स्ट्राइक शुरू हुई। भारत के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। भारतीय पक्ष का कहना था कि ये टारगेट आतंकी संगठनों के ठिकाने थे और इन्हें प्रिसिजन स्ट्राइक से निशाना बनाया गया। पूरी कार्रवाई काफी कम समय में पूरी की गई और भारतीय एयरक्राफ्ट वापस लौट आए। लेकिन पाकिस्तान को अभी पूरी तस्वीर समझ में भी नहीं आई थी कि इसके बाद एक और मोर्चा खुल गया। रडार और एयर डिफेंस सिस्टम दोबारा एक्टिव हुए और पाकिस्तान की तरफ से बड़ी संख्या में एयरक्राफ्ट हवा में लाए जाने की खबरें सामने आईं। पाकिस्तान को लगा कि अब भारतीय एयरक्राफ्ट वापस जा रहे होंगे, फ्यूल कम हो रहा होगा और शायद यही मौका है भारतीय फॉर्मेशन को घेरने का। उसे लगा कि अब बाजी पलट सकती है। लेकिन यहीं से एक अलग तरह का साइकोलॉजिकल गेम शुरू हुआ। भारतीय विमानों ने पाकिस्तानी जेट्स को ट्रैक किया और उन्हें लॉक किया। लेकिन हर लॉक के बाद मिसाइल चलाना जरूरी नहीं था। सामने वाले पायलट के कॉकपिट में अगर लगातार चेतावनी बज रही हो कि आपको किसी ने निशाना बना लिया है, तो उसका मानसिक दबाव बहुत बढ़ जाता है। लॉक हुआ, फिर रिलीज हुआ। फिर दोबारा लॉक हुआ। पाकिस्तानी पायलट को समझ नहीं आ रहा था कि अगला कदम क्या होगा। मिसाइल आएगी या नहीं आएगी, हमला होगा या सिर्फ चेतावनी दी जा रही है, यही कन्फ्यूजन अपने आप में एक हथियार बन जाता है। यानी कभी कभी दुश्मन को गोली चलाने से ज्यादा जरूरी होता है उसे ये यकीन दिलाना कि गोली कभी भी चल सकती है। इसके बाद डिकॉय सिस्टम की एक और कहानी सामने आई। राफेल के पीछे एक डिकॉय सिस्टम इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई। सोशल मीडिया पर इसे मजाकिया अंदाज में "लटकन बाबा" तक कहा गया। दावा था कि इसमें एक लंबा वायर और उसके अंत में भारी डिवाइस था, जिसका मकसद दुश्मन की मिसाइल को असली एयरक्राफ्ट से दूर खींचना था। फिर पाकिस्तान के J 10C से PL 15 मिसाइल फायर होने की खबर आई। टारगेट राफेल बताया गया। मिसाइल आगे बढ़ी और पाकिस्तान की तरफ से शायद यही उम्मीद रही होगी कि इस बार भारतीय राफेल को निशाना बना लिया गया है। लेकिन अगर डिकॉय ने अपना काम किया, तो मिसाइल असली राफेल की जगह डिकॉय की तरफ चली गई। और फिर पाकिस्तान की तरफ से ये दावा सामने आया कि राफेल गिरा दिया गया। कमान रूम में शायद उस समय ये खबर जीत की तरह देखी गई होगी। लेकिन असली सवाल बाद में आया, अगर राफेल गिरा था तो मलबा कहां है? पायलट कहां है? घटना का ठोस सबूत कहां है? यहीं से एक और चीज सामने आती है, युद्ध में सिर्फ हमला करना ही काफी नहीं होता, आपको ये भी पता होना चाहिए कि सामने वाला आपको क्या दिखा रहा है। इसके बाद ड्रोन फ्लड की बात सामने आई। पाकिस्तान की तरफ से बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइल भेजे जाने की खबरें आईं। सोच ये हो सकती थी कि अगर भारत को हर ड्रोन के लिए महंगी मिसाइल इस्तेमाल करनी पड़ेगी, तो धीरे धीरे भारत का एयर डिफेंस स्टॉक कम हो जाएगा। उसके बाद बड़े हमले का रास्ता आसान हो सकता है। कागज पर ये रणनीति समझदारी वाली लग सकती है। लेकिन असली युद्ध में हर चीज इतनी सीधी नहीं होती।
7 मई 2025 की रात। पाकिस्तान के एक एयर डिफेंस कंट्रोल रूम में रडार स्क्रीन पर अचानक एक छोटा सा ब्लिप दिखाई दिया। बहुत छोटा, धीमा और अकेला। ऑपरेटर ने स्क्रीन को ध्यान से देखा और उसे लगा कि कोई भारतीय एयरक्राफ्ट पाकिस्तान की तरफ बढ़ रहा है। कमान रूम में आवाज आई, "फायर करो।" मिसाइल दाग दी गई। और यहीं से पाकिस्तान ने वो गलती कर दी, जिसका भारत शायद इंतजार कर रहा था। क्योंकि जिस एयरक्राफ्ट को पाकिस्तान ने असली समझा था, वो असल में एक छोटा सा डिकॉय ड्रोन था। यानी ऐसा सिस्टम जिसे दुश्मन के रडार को भ्रमित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। दावा ये है कि पाकिस्तान ने जैसे ही उस डिकॉय पर मिसाइल चलाई, उसकी एयर डिफेंस बैटरी, रडार की एक्टिविटी और उसका रिस्पॉन्स पैटर्न भारत के सामने खुल गया। पाकिस्तान को लगा कि उसने खतरा खत्म कर दिया, लेकिन अगर ये दावा सही है, तो असल में उसने अपनी ही एयर डिफेंस के बारे में जरूरी जानकारी सामने ला दी थी। यही था ऑपरेशन सिंदूर के शुरुआती गेम का एक अहम हिस्सा, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। उस रात भारत ने पाकिस्तान को सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि बार बार गलत दिशा में देखने पर मजबूर किया। पाकिस्तान को लगता रहा कि वह गेम समझ रहा है, लेकिन असल में वह भारत की बनाई हुई रणनीति के हिसाब से रिएक्ट कर रहा था। और फिर कुछ ही समय में वो स्ट्राइक हुई, जिसकी शायद पाकिस्तान ने उस तरह से कल्पना नहीं की थी। कहानी शुरू होती है 22 अप्रैल 2025 से, पहलगाम, कश्मीर में हुए आतंकी हमले से। इस हमले ने पूरे देश को हिला दिया था। परिवार टूट गए थे और लोगों में गुस्सा था। इस बार माहौल पहले जैसा नहीं था। दिल्ली में सुरक्षा से जुड़े बड़े अधिकारियों के बीच लगातार बैठकें शुरू हुईं। पाकिस्तान के बहावलपुर और मुरीदके जैसे इलाकों पर नजर गई। संदेश साफ था, इस बार जवाब सिर्फ सीमा तक सीमित नहीं रहने वाला था। पाकिस्तान पुरानी स्क्रिप्ट जानता था। आतंकी हमला होगा, भारत कड़ी निंदा करेगा, पाकिस्तान हमेशा की तरह जिम्मेदारी से इनकार करेगा, इंटरनेशनल प्रेशर आएगा, दोनों देशों के टीवी चैनल कई दिनों तक बहस करेंगे और फिर कुछ समय बाद मामला ठंडा पड़ जाएगा। लेकिन इस बार भारत ने वही पुरानी स्क्रिप्ट नहीं अपनाई। पहला बड़ा भ्रम यहीं से शुरू हुआ। पाकिस्तान सीमा पर भारतीय सेना की बड़ी मूवमेंट, टैंकों के कॉलम और बड़े सैन्य काफिले तलाश रहा था। लेकिन इस बार उसे वैसा कुछ साफ दिखाई नहीं दिया। न बड़े काफिले खुले में निकले, न सीमा पर कोई ऐसी हलचल दिखी जिससे पाकिस्तान को तुरंत अंदाजा हो जाता कि कुछ बड़ा होने वाला है। बाहर से सब शांत था। पाकिस्तान के कुछ लोगों को लगा कि शायद भारत सिर्फ दबाव बना रहा है और असल में कुछ बड़ा करने वाला नहीं है। लेकिन यही दूसरी गलती थी। क्योंकि कई बार जो दिखाई नहीं देता, वही सबसे बड़ी तैयारी होती है। 1 मई से 5 मई के बीच भारत के अंदर एक अलग तरह की तैयारी चल रही थी। कुछ रिपोर्ट्स में इसे ऑपरेशन हल्दीघाटी से जोड़ा गया। इसमें ड्रोन उड़ाने, हवाई टारगेट को ट्रैक करने, रडार पर खतरे पहचानने और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के बीच अपनी एयर डिफेंस को ऑपरेट करने जैसी चीजों की प्रैक्टिस की गई। मतलब बाहर से शांति थी, लेकिन अंदर से पूरी तैयारी चल रही थी। युद्ध सिर्फ जमीन और आसमान में नहीं होता। एक और लड़ाई सोशल मीडिया पर चल रही थी, इंफॉर्मेशन वॉर। पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क्स की तरफ से पुराने वीडियो, यूक्रेन और गाजा के पुराने एक्सप्लोजन क्लिप्स और गलत विजुअल्स सोशल मीडिया पर फैलाए जाने लगे। मकसद साफ था, लोगों को कन्फ्यूज करो, डर का माहौल बनाओ, मीडिया को फेक वीडियो में उलझाओ और असली घटनाओं से ध्यान हटाओ। लेकिन अगर एक पक्ष झूठे वीडियो और फेक नैरेटिव में लोगों को उलझाने में लगा हो और दूसरा पक्ष चुपचाप अपनी तैयारी कर रहा हो, तो फायदा किसे मिलेगा, ये समझना मुश्किल नहीं है। पाकिस्तान सोशल मीडिया पर नैरेटिव बनाने में लगा था और भारत अपने टारगेट पैकेज और सैन्य तैयारी पर काम कर रहा था। फिर आई 7 मई की रात। और यहीं से शुरू हुआ सबसे अहम दांव। भारत को पाकिस्तान की एक्टिव एयर डिफेंस के बारे में रियल टाइम जानकारी चाहिए थी। सैटेलाइट तस्वीरों से ये पता चल सकता है कि किसी जगह पर रडार या एयर डिफेंस सिस्टम मौजूद है, लेकिन सिर्फ तस्वीर देखकर ये पता लगाना मुश्किल है कि उस समय कौन सा रडार एक्टिव है, कौन सी बैटरी किस दिशा में देख रही है और खतरा सामने आने पर कौन सा सिस्टम कितनी तेजी से प्रतिक्रिया देगा। ये जानकारी दुश्मन के रिएक्शन से मिल सकती है।
Operation सिन्दूर - detailed Post Below
The Hindustan Aeronautics Limited (HAL) has tied up with Adani Defence Systems and Technologies Limited and Bharat Earth Movers Limited (BEML) for manufacturing fuselage structures for the Prachand Light Combat Helicopter (LCH).
स्वतंत्रता दिवस की बहुत बहुत शुभकामनायें 🙏
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This is fantastic news for India's aerospace industry! Congratulations to both Reliance and Rolls-Royce on this strategic partnership 🎯
A young man had just cleared his Army selection, but when others were celebrating with their families, no one had reportedly come to meet him. A viral video shows a senior officer noticing him standing alone and stepping forward to hug him, turning a lonely moment into one of support and respect. The exact circumstances behind the clip have not been independently verified. Sometimes, one small gesture can mean everything ❤️❤️
IIT Madras ने आज बेहद शानदार काम किया.... वहां के researchers ने पूरी तरह से भारत में बने Bharat 6G Testbed पर 6G data का Demonstration दिया.... जिसमे transmission speed थी 6.39 Gbps. इसमें ख़ास क्या है? अभी तक हम जो भी Cellular, Telecom या Transmission technologies इस्तेमाल करते थे.. उसमे कुछ ना कुछ विदेशी होता था.... हमने इस ओर serious efforts करने शुरू किये थे 5G के समय... जब हमारे ही देश में Transmitter, receivers, antenna , और Technology Stack बनना शुरू हुआ. 6G तकनीक और Solutions लगभग पूरी तरह भारत में ही बनाये जा रहे हैं..... Transmitters से लेकर Technology Stack... और Baseband Technologies से लेकर receivers तक भारत में ही बन रहे हैं. दुनिया में हम कहाँ stand करते हैं? अमेरिका, जापान, जर्मनी, चीन, भारत, साउथ korea, नोर्वे, Sweden, ब्राजील, कनाडा जैसे कुछ ही देश हैं... जो 6G तकनीक पर काम कर रहे हैं. लेकिन मात्र 6 देश हैं.... अमेरिका, जापान, चीन, साउथ Korea, फिनलैंड और भारत....जो लगभग 100% 6G तकनीक अपने ही दम पर बना रहे हैं. यह सभी देश radio technology, RF/THz hardware, chips, antennas, baseband, core network, software, AI, protocols, और test equipment खुद बना रहे हैं... और इन सभी के पास 6G से सम्बंधित कई पेटेंट्स भी हैं. यह अपने आप में बहुत बड़ी बात है.... भारत जो कुछ साल पहले तक Cellular और Telecom तकनीक के मामले में पूरी तरह से पश्चिमी देशों पर निर्भर था... वो अब इस मामले में भी आत्मनिर्भर बन गया है.
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हाँ तो खबर यह है कि अब भारत में 5th Generation Fighter जेट engine को बनाने के लिए Serious Efforts शुरू हो गए हैं. अब रिलायंस और Rolls Royce साथ आये हैं... और यह मिल कर AMCA के लिए Engine बनाएंगे. चूँकि प्राइवेट sector अब इन मामलों में involve हो रहा है.... अब results आएंगे. वहीं रोंदू type के लोग बुक्का फाड़ कर रो सकते हैं... कि मोदी ने एयरफोर्स अम्बानी को बेच दी 🤣🤣
और कुछ चौमू कह रहे थे... कि भारत को बांग्लादेश बनाएंगे.... बांग्लादेश की जीडीपी फलाना है ढिकाना है. ले लो बांग्लादेश 🤣🤣