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तैयार रहिए कल सुबह प्रैक्टिस के लिए 7:15 पर ।
https://www.youtube.com/live/3HlVQycaFVw?si=Hta7lRB441TT7cnO
https://www.youtube.com/live/izQnrkysFa4?si=0z4a2p68HvVflXyj
ये किसी ने मेरी फेक i d बना ली कोई भी बच्चा पैसा न डाले सब से पैसा मांग रहा है
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अंग्रेजी में नंबर थोड़े कम आते हैं, अंग्रेजी बोलने से भी घबराते हैं, पर स्टाइल के लिए पूरी जान लगाते हैं, क्योंकि हम हिंदी बोलने से शर्माते हैं, एक वक्त था जब हमारे देश में हिंदी का बोलबाला था, मां की आवाज में भी सुबह का उजाला था, उस मां को अब हम Mom बुलाते हैं, क्योंकि हम हिंदी बोलने से शर्माते हैं, देश आगे बढ़ गया पर हिंदी पीछे रह गई, इस भाषा से अब हम नजर चुराते हैं, क्योंकि हम हिंदी बोलने से शर्माते हैं, माना, अंग्रेजी पूरी दुनिया को चलाती है, पर हिंदी भी तो हमारी पहचान दुनिया में कराती है, क्यों ना अपनी मातृभाषा को फिर से सराखों पर बिठाए, आइए हम सब मिलकर विश्व हिन्दी दिवस मनाएं, जय हिन्द 🇮🇳 जय हिन्दी 📚 हिन्दी by शैलेन्द्र सर 7619037788
Pet wale tyar ho jao 👍👍
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युग्म शब्द.pdf
पर्यायवाची शब्द.pdf
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जब यार देखा नैन भर, दिल की गई चिंता उतर ऐसा नहीं कोई अजब राखे उसे समझाय कर जब आँख से ओझल भया, तड़पन लगा मेरा जिया हक़्क़ा इलाही क्या किया, आँसू चले भर लाय कर तू तो हमारा यार है, तुझ पर हमारा प्यार है तुझ दोस्ती बिसियार है, एक शब मिलो तुम आय कर जाना तलब तेरी करूँ, दीगर तलब किसकी करूँ तेरी जो चिंता दिल धरूँ, एक दिन मिलो तुम आय कर मेरा जो मन तुमने लिया, तुमने उठा ग़म को दिया तुमने मुझे ऐसा किया, जैसा पतंगा आग पर ख़ुसरो कहै बातें ग़ज़ब, दिल में न लावे कुछ अजब कुदरत ख़ुदा की है अजब, जब जिव दिया गुल लाय कर हिन्दी BY शैलेन्द्र सर
kal संस्थान में अवकाश है
UPSI की DATE आ गई
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इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है, नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है। एक चिनगारी कही से ढूँढ लाओ दोस्तों, इस दिए में तेल से भीगी हुई बाती तो है। एक खंडहर के हृदय-सी, एक जंगली फूल-सी, आदमी की पीर गूंगी ही सही, गाती तो है। एक चादर साँझ ने सारे नगर पर डाल दी, यह अंधेरे की सड़क उस भोर तक जाती तो है। निर्वचन मैदान में लेटी हुई है जो नदी, पत्थरों से, ओट में जा-जाके बतियाती तो है। दुख नहीं कोई कि अब उपलब्धियों के नाम पर, और कुछ हो या न हो, आकाश-सी छाती तो है। 📚 हिन्दी BY शैलेन्द्र सर 📚
"कुछ चेहरों के उठ जाने से ज़िंदगी की महफ़िल सूनी नहीं होती। हर मोड़ पर रब ऐसे लोग भेजता है जो आपकी रूह तक को संभाल लेते हैं। कभी खुद को तन्हा मत समझना, ये सफ़र भले मुश्किल लगे पर राहों में उजाले कम नहीं। चलते रहो… किस्मत की हवाएँ भी उनके दरवाज़े खोल देती हैं जो दिल से सच्चे और हौसले से भरे हों। यक़ीन रखो— कल तुम्हारे लिए कुछ अच्छा ज़रूर लाएगा, क्योंकि रब देर करता है पर खाली हाथ कभी नहीं छोड़ता।" हिन्दी BY शैलेन्द्र सर
अनेकार्थी शब्द.pdf