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Kabir Ke Dohe
@kabirkedoheхинди

Kabir Das was a 15th-century Indian mystic poet and saint.

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  • कबीर कुत्ता राम का, मुतिया मेरा नाऊँ। गलै राम की जेवड़ी, जित खैंचे तित जाऊँ॥ ▫️भावार्थ :- प्रस्तुत दोहे में संत शिरोमणि कबीरदास जी स्वयं को राम का कुत्ता बताते हैं, जिसका नाम मुतिया है। उनके गले में राम की रस्सी बंधी है, इसलिए वे जिधर राम खींचें, उधर ही जाते हैं। यह पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। यह दोहा सिखाता है कि सच्ची भक्ति में भक्त की अपनी इच्छा समाप्त हो जाती है; वह ईश्वर की शक्ति के अधीन हो जाता है। अहंकार विलीन होकर भक्त ईश्वर से एकाकार हो जाता है। प्रेम के इस बंधन में केवल मौज है। Join @kabirkedohe

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  • नागिन के तो दोये फन, नारी के फन बीस | जाका डसा ना फिर जीये, मरि है बिसबा बीस || ▫️भावार्थ :- प्रस्तुत दोहे में संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि नागिन के केवल दो विषैले दांत होते हैं, जिनसे वह डसती है, परन्तु एक महिला के बीस दंश होते है, इसलिए वो जिसे डांसती है उसका बचना नामुमकिम हो जाता है! अर्थात् किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने से पहले सोचें, क्योंकि शारीरिक चोट से ज्यादा गहरी मानसिक चोट होती है। साथ ही, स्त्री की शक्ति और संवेदनशीलता को कम नहीं आँकना चाहिए। आज के युग में यह संदेश स्त्री-पुरुष सभी पर लागू होता है—किसी की भावनाओं को आहत करने से बचें, क्योंकि मन की चोट शरीर से ज्यादा दर्द देती है।

  • कबीरा बात गरीब की, सच माने न कोय | धनवान की झूठ में भी, हाँ जी हाँ जी होय || ▫️भावार्थ :- प्रस्तुत दोहे में संत शिरोमणि कबीरदास जी समाज में व्याप्त एक विडंबना की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि गरीब व्यक्ति की बात को कोई गंभीरता से नहीं लेता, जबकि धनी व्यक्ति के झूठ को भी लोग सच मान लेते हैं.🤥 Join @kabirkedohe❤️

  • Kabir Ke Dohe pinned «2. क्या आपने कभी कबीर जी का कोई दोहा अपनी जिंदगी में अपनाया है?»

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  • प्रेमी ढूँढ़त मैं फिरूँ, प्रेमी मिलै न कोइ। प्रेमी कूँ प्रेमी मिलै तब, सब विष अमृत होइ॥ परमात्मा के प्रेमी को मैं खोजता घूम रहा हूँ परंतु कोई भी प्रेमी नहीं मिलता है। यदि ईश्वर-प्रेमी को दूसरा ईश्वर-प्रेमी मिल जाता है तो विषय-वासना रूपी विष अमृत में परिणत हो जाता है। प्लीज ज्वाइन @kabirkedohe

  • 🕉️ "Kabir Ke Dohe – जीवन का सत्य" 🕉️ इस ग्रुप में हम हर दिन संत कबीर के एक अनमोल दोहे को पढ़ेंगे, उसकी सरल और जीवन से जुड़ी व्याख्या को समझेंगे, और आपस में अपने विचार भी बाँटेंगे। 📿 सच्चे शब्द, सरल अर्थ – जो मन को छू जाएं और जीवन को दिशा दें। 👇 ग्रुप से जुड़ने के लिए अभी क्लिक करें: 🔗 https://t.me/kabirkedohe ❝ चलिए मिलकर कबीर के ज्ञान से जीवन को और सुंदर बनाते हैं ❞ सादर आमंत्रण 🌸 🌟 कृपया इस संदेश को अपने परिवार और दोस्तों के साथ भी ज़रूर शेयर करें, ताकि अधिक से अधिक लोग कबीर के दोहों से लाभान्वित हो सकें।

  • तूँ तूँ करता तूँ भया, मुझ मैं रही न हूँ। वारी फेरी बलि गई, जित देखौं तित तूँ ॥ अर्थ – जीवात्मा कह रही है कि ‘तू है’ ‘तू है’ कहते−कहते मेरा अहंकार समाप्त हो गया। इस तरह भगवान पर न्यौछावर होते−होते मैं पूर्णतया समर्पित हो गई। अब तो जिधर देखती हूँ उधर तू ही दिखाई देता है। @kabirkedohe

  • कबीर माया पापणीं, हरि सूँ करे हराम। मुखि कड़ियाली कुमति की, कहण न देई राम॥ अर्थ यह माया बड़ी पापिन है। यह प्राणियों को परमात्मा से विमुख कर देती है तथा उनके मुख पर दुर्बुद्धि की कुंडी लगा देती है और राम-नाम का जप नहीं करने देती। @kabirkedohe

  • गुरुमुख गुरु आज्ञा चलै, छाड़ी देयी सब काम कहै कबीर गुरुदेव को, तुरत करै प्रनाम। अर्थ- गुरु का सच्चा शिष्य उनके आज्ञा के अनुसार ही सब काम को छोड़ कर चलता है। कबीर कहते है की वह गुरुदेव देखकर तुरंत झुक कर प्रणाम करता है। @kabirkedohe

  • 20 июл. 2024 г.7 8131из Dr_BR_Ambedkar

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  • https://www.instagram.com/p/C4po2t1tkzP/?igsh=ZWR1eGwxZ3d4NGI2 Please Like and comment on this post and share it with your friends it's for a contest organised by my Department. Thank You so Much 😇

  • 15 февр. 2024 г.10,3 тыс318

    जीवन में मरना भला, जो मरि जानै कोय | मरना पहिले जो मरै, अजय अमर सो होय || अर्थ : जीते जी ही मरना अच्छा है, यदि कोई मरना जाने तो। मरने के पहले ही जो मर लेता है, वह अजर-अमर हो जाता है। शरीर रहते-रहते जिसके समस्त अहंकार समाप्त हो गए, वे वासना - विजयी ही जीवनमुक्त होते हैं। @kabirkedohe

  • 22 окт. 2023 г.13 тыс414

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  • 4 окт. 2023 г.12,4 тыс418

    अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप॥ ~ कबीरदास

  • 3 окт. 2023 г.12,1 тыс323

    मन के हारे हार हैं, मन के जीते जीति। कहै कबीर हरि पाइए, मन ही की परतीति॥ -संत कबीर अनुवाद: मन के हारने से हार होती है, मन के जीतने से जीत होती है। मन के गहन विश्वास से ही परमात्मा की प्राप्ति होती है।