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Prashast IAS official (प्रशस्त IAS)

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  • दोस्तों, एक छोटी-सी अपील। 🙏 झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर बड़ी संख्या में छात्र कई दिनों से धरने पर बैठे हैं। खबरों के अनुसार कई छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्हें भोजन-पानी जैसी मूलभूत जरूरतों की भी परेशानी हो रही है। हम सभी…

  • दोस्तों, एक छोटी-सी अपील। 🙏 झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर बड़ी संख्या में छात्र कई दिनों से धरने पर बैठे हैं। खबरों के अनुसार कई छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्हें भोजन-पानी जैसी मूलभूत जरूरतों की भी परेशानी हो रही है। हम सभी मुखर्जी नगर में रहने वाले छात्र हैं। चाहे किसी की विचारधारा या मांग अलग हो सकती है, लेकिन एक छात्र होने के नाते मुश्किल समय में दूसरे छात्रों की बुनियादी ज़रूरतों में सहयोग करना हमारी जिम्मेदारी भी है। मैं चाह रहा हूँ कि हम सब मिलकर स्वेच्छा से छोटा-सा योगदान करें, ताकि वहाँ खाने-पीने की सामग्री पहुँचाई जा सके। ₹50, ₹100, ₹200 या जितना भी आपकी इच्छा हो, उतना सहयोग करें। छोटी-छोटी मदद मिलकर बड़ा सहारा बनती है। यदि पर्याप्त सहयोग जुटता है, तो पूरी पारदर्शिता के साथ सामग्री खरीदकर वहाँ भिजवाई जाएगी और उसका पूरा हिसाब तथा रसीद/फोटो ग्रुप में साझा की जाएगी। जो साथी सहयोग करना चाहते हैं, कृपया मुझे मैसेज करें। हम छात्र हैं, और छात्रों के साथ खड़े होना हमारी पहचान होनी चाहिए। ❤️ - मार्शल

  • 🔆 PLI Scheme for Advanced Chemistry Cell (ACC) Batteries 📍 Why in Focus? ✅ The Ministry of Heavy Industries has invited global bids to establish 10 GWh of advanced battery manufacturing capacity under the PLI Scheme for ACC Batteries 📍 About the Scheme ✅ Approved in 2021 with an outlay of ₹18,100 crore ✅ Targets creation of 50 GWh domestic ACC battery manufacturing capacity ✅ 40 GWh has already been allocated, while bids have been invited for the remaining 10 GWh 📍 What are ACC Batteries? ✅ Advanced Chemistry Cells are new-generation energy storage technologies used in applications such as grid-scale energy storage ✅ They can store electricity generated from intermittent renewable sources such as solar and wind 📍 Objectives ✅ Reduce India’s dependence on imported advanced batteries ✅ Strengthen domestic battery manufacturing ✅ Develop a globally competitive battery manufacturing ecosystem ✅ Support India’s renewable energy transition and energy security 📍 Mains Question ✅ Discuss the role of domestic battery manufacturing in strengthening India’s energy security and accelerating its transition towards renewable energy (150 words) #GovernmentSchemes

  • उत्तर प्रदेश के राजभवन का नया नाम?

  • चीन का विरोधाभास चीन इन निर्माण कार्यों को ‘वैध’ बताकर भारत की आपत्तियों को खारिज करता है। विडंबना यह है कि एक तरफ चीन कश्मीर को भारत-पाकिस्तान का ‘द्विपक्षीय मुद्दा’ कहता है, वहीं दूसरी ओर वह उसी विवादित क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सामरिक बुनियादी ढांचा बना रहा है। निष्कर्ष शक्सगाम घाटी में बढ़ता निर्माण कार्य यह संकेत देता है कि चीन एल.ए.सी. (LAC) के पश्चिमी क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। यह घटनाक्रम न केवल सैन्य बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है जहाँ उसे अब ‘ढाई मोर्चों’ की सुरक्षा रणनीति पर अधिक गंभीरता से विचार करना होगा।

  • जम्मू एवं कश्मीर की शक्सगाम घाटी को लेकर भारत तथा चीन के बीच एक नया राजनयिक व रणनीतिक तनाव उभर आया है। यह गतिरोध पूर्वी लद्दाख में हाल ही में बनी स्थिति के बावजूद सुरक्षा चिंताओं को फिर से बढ़ा रहा है। शक्सगाम घाटी सियाचिन ग्लेशियर के पास स्थित है और उत्तर में चीन के शिनजियांग, दक्षिण व पश्चिम में पाकिस्तान के अधिकृत कश्मीर से लगी हुई है। इस स्थिति के कारण यह क्षेत्र भारत की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। शक्सगाम घाटी : भौगोलिक अवस्थिति 🔴अवस्थिति: शक्सगाम घाटी को ट्रांस-काराकोरम ट्रैक्ट भी कहते हैं। यह पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान के हुंजा क्षेत्र में स्थित है। 🔴विस्तार: यह लगभग 5,000 वर्ग किलोमीटर का दुर्गम इलाका है। 🔴कनेक्टिविटी: इसके उत्तर में चीन का शिनजियांग प्रांत और दक्षिण-पश्चिम में पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) है। भारत के लिए रणनीतिक महत्व शक्सगाम घाटी भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सियाचिन ग्लेशियर के उत्तर में स्थित है और काराकोरम दर्रे तक पहुंच की सुविधा देती है। 🟡भारत सियाचिन से पाकिस्तान की सैन्य गतिविधियों पर नजर रख सकता है। 🟡काराकोरम दर्रा चीन के सैन्य अभ्यासों पर दृष्टि बनाए रखने का अवसर देता है। इस प्रकार, शक्सगाम घाटी में हो रहे घटनाक्रम का प्रभाव भारत की सुरक्षा पर चीन के साथ एल.ए.सी. एवं पाकिस्तान के साथ एल.ओ.सी. दोनों मोर्चों पर पड़ता है। चीन का बढ़ता अवसंरचना विस्तार भू-रणनीतिज्ञों का कहना है कि शक्सगाम में चीन की ‘सलामी स्लाइसिंग’ रणनीति निर्णायक मोड़ पर है। सलामी स्लाइसिंग रणनीति में क्षेत्रीय विस्तार या प्रभाव बढ़ाने के लिए छोटे-छोटे, क्रमिक कदम उठाए जाते हैं। ये कदम व्यक्तिगत रूप से मामूली लग सकते हैं किंतु ये मिलकर विवादित क्षेत्रों में नियंत्रण में बदलाव लाते हैं। वर्ष 2024 के मध्य तक चीन ने 4,805 मीटर ऊंचे अघिल दर्रे को पार करते हुए निचली शक्सगाम घाटी तक सड़क का निर्माण पूरा कर लिया। इसके परिणामस्वरूप चीनी निर्माण दल एवं संभावित सैन्य गश्त भारत सियाचिन के इंदिरा कॉल से केवल 50 किमी. दूर पहुंच गई। दो मोर्चों पर सुरक्षा चुनौती ऐतिहासिक रूप से सियाचिन में भारत का ध्यान मुख्यत: दक्षिण में पाकिस्तान की ओर केंद्रित था। उत्तर से चीन की नई पहुंच इस समीकरण को बदलती है और दो मोर्चों पर टकराव की संभावना बढ़ा देती है। इससे भारत की चिंताएँ बढ़ गई हैं कि चीन एवं पाकिस्तान संयुक्त रूप से भारतीय ठिकानों पर दबाव डाल सकते हैं। पाकिस्तान द्वारा शक्सगाम घाटी का चीन को सौंपना 🟢ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: शक्सगाम घाटी पाकिस्तान के साथ वर्ष 1963 में हुए तथाकथित सीमा समझौते के बाद चीन के नियंत्रण में चली गई। भारत ने आपत्ति जताई किंतु इस पर भौतिक नियंत्रण स्थापित नहीं किया जा सका। 🟢औपनिवेशिक काल: वर्ष 1936 में ब्रिटिश प्रभाव में हुंजा के मीर ने तघदुम्बाश पामीर और रसकम घाटी पर अधिकार छोड़ दिए। शक्सगाम घाटी एवं अघिल पर्वतमाला उनके नियंत्रण में बनी रही। 🟢स्वतंत्रता के बाद: अक्टूबर 1947 में जम्मू एवं कश्मीर के भारत में विलय के बाद यह घाटी कानूनी रूप से भारतीय क्षेत्र बन गई। किंतु पाकिस्तान ने आसपास के क्षेत्रों पर कब्जा कर भारत का नियंत्रण रोक दिया। 🟢चीन का प्रवेश और पाकिस्तान की रणनीति: 1950 के दशक में चीन ने पूर्वी हुंजा में अपनी पैठ बनानी शुरू की। पाकिस्तान ने अयूब खान के नेतृत्व में भारत की चिंताओं की अनदेखी करते हुए चीन के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए। 🟢1963 का सीमा समझौता: पाकिस्तान ने यारकंद नदी क्षेत्र और शक्सगाम घाटी को औपचारिक रूप से चीन को सौंप दिया, हालांकि कानूनी अधिकार उसके पास नहीं थे। 🟢वर्तमान सुरक्षा निहितार्थ: डोकलाम गतिरोध के बाद से चीन ने इस घाटी में सैन्य अवसंरचना विकास तेज कर दिया, जिससे भारत के लिए यह क्षेत्र एक महत्वपूर्ण सुरक्षा चुनौती बन गया। चीन का अवसंरचना विकास और भारत की चिंताएँ रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन ने इस घाटी में लगभग 75 किमी. लंबी, 10 मीटर चौड़ी, हर मौसम में प्रयोग होने वाली सड़क का निर्माण पूरा कर लिया है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे से जुड़े विकास ने भारत की चिंताएँ बढ़ा दी हैं कि ये दोनों देश मिलकर इस क्षेत्र में भारत पर दबाव डाल सकते हैं। भारत की प्रतिक्रिया भारत का कहना है कि पाकिस्तान ने 1963 में शक्सगाम घाटी का 5,180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र अवैध रूप से चीन को सौंपा, जिसे नई दिल्ली ने कभी स्वीकार नहीं किया। यह इलाका जम्मू एवं कश्मीर का हिस्सा था, जिस पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा था। विदेश मंत्रालय ने कहा कि शक्सगाम घाटी भारतीय क्षेत्र है और भारत अपने हितों की रक्षा के लिए ‘आवश्यक कदम’ उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

  • नीला कार्बन (Blue Carbon) नीला कार्बन वह कार्बन है जो समुद्री और तटीय पारिस्थितिक तंत्रों; जैसे मैंग्रोव, समुद्री घास और लवणीय आर्द्रभूमियों द्वारा अवशोषित कर लंबे समय तक संग्रहीत किया जाता है। यह कार्बन जलवायु परिवर्तन को कम करने में सहायक होता है और इसके साथ ही तटीय सुरक्षा और समुद्री जैव विविधता को मज़बूती प्रदान करता है।

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  • होप द्वीप (Hope Island)

  • परिवेश (PARIVESH) पोर्टल

  • ‘नेटिंग’ क्या है? 🟢‘नेटिंग’ एक वित्तीय प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत दो या अधिक पक्षों के बीच मौजूद अनेक देय (Payables) एवं प्राप्य राशियों को समायोजित कर एकल शुद्ध भुगतान निकाला जाता है। इससे लेन–देन की संख्या, लागत तथा निपटान/क्रेडिट जोखिम में उल्लेखनीय कमी आती है। यह प्रक्रिया सामान्यतः ट्रेडिंग, अंतर-कंपनी अंतरण तथा वित्तीय दायित्वों के प्रबंधन में दक्षता एवं नकदी प्रवाह सुधारने हेतु अपनाई जाती है। 🟢अनेक छोटे भुगतानों के स्थान पर केवल शुद्ध राशि का निपटान किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि पार्टी A पर पार्टी B का $100 बकाया है और पार्टी B पर A का $80 बकाया है, तो केवल $20 का ही लेन-देन होता है।

  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के बारे में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश का तात्पर्य किसी अन्य देश की वित्तीय परिसंपत्तियों (जैसे—इक्विटी एवं बॉण्ड) में विदेशी निवेशकों द्वारा किया गया निष्क्रिय निवेश है, जिसमें प्रबंधन पर नियंत्रण शामिल नहीं होता है। मुख्य विशेषताएँ 🟡इसमें इक्विटी शेयर, ऋण प्रतिभूतियाँ, अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीप्ट्स (ADR), ग्लोबल डिपॉजिटरी रिसीप्ट्स (GDR), म्यूचुअल फंड तथा एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) शामिल हैं। 🟡स्वामित्व या प्रबंधन नियंत्रण नहीं (FDI के विपरीत)। 🟡उच्च तरलता एवं बाजार-आधारित होने के कारण यह अस्थिर होता है तथा वैश्विक जोखिम के प्रति संवेदनशील रहता है। 🟡इसे भुगतान संतुलन के पूँजी खाते में दर्ज किया जाता है।

  • मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा ने 21 जनवरी, 2026 को अपना राज्य दिवस मनाया, जो पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 के अंतर्गत उनके गठन का प्रतीक है। पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 के बारे में यह अधिनियम भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के पुनर्गठन हेतु प्रशासनिक दक्षता, जातीय आकांक्षाओं और क्षेत्रीय विकास को संबोधित करने के लिए अधिनियमित किया गया था। 🟢राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का गठन (धारा 3–8) 🟡मणिपुर और त्रिपुरा को केंद्रशासित प्रदेश से पूर्ण राज्य का दर्जा प्रदान किया गया। 🟡मेघालय को असम से अलग कर राज्य का दर्जा प्रदान किया गया। 🟡मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश को केंद्रशासित प्रदेश के रूप में स्थापित किया गया (दोनों वर्ष 1987 में राज्य बने)। 🟢न्यायिक पुनर्गठन (धारा 28): असम, नागालैंड, मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा के लिए एक साझा गुवाहाटी उच्च न्यायालय की स्थापना की गई। 🟡मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा के लिए अलग-अलग उच्च न्यायालयों की स्थापना बाद में 2012 के संशोधन अधिनियम (जो वर्ष 2013 से प्रभावी हुआ) द्वारा संभव हुई। 🟢स्वायत्त जिले (धारा 71): मेघालय में स्वायत्त जिला परिषदों के पुनर्गठन हेतु छठी अनुसूची में संशोधन किया गया। 🟢संस्थागत समर्थन: इस अधिनियम के साथ ही क्षेत्रीय विकास, संपर्कता और सुरक्षा को बढ़ावा देने हेतु उत्तर-पूर्वी परिषद अधिनियम, 1971 भी पारित किया गया। इस अधिनियम ने भारत के उत्तर-पूर्व में राजनीतिक स्थिरता, पहचान की मान्यता और संतुलित विकास के लिए संवैधानिक आधार प्रदान किया।

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  • हाल ही में, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-IV के तहत एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की गई है। जम्मू एवं कश्मीर, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को 10,000 किलोमीटर से अधिक की सड़क परियोजनाओं की मंजूरी दी गई है जो विकसित भारत के लिए ग्रामीण विकास विभाग की प्रतिबद्धता को अधिक मजबूत करती है। प्रमुख बिंदु प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना–IV के तहत वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार मैदानी क्षेत्रों में 500 से अधिक, पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 250 से अधिक, विशेष श्रेणी के क्षेत्रों (जनजातीय अनुसूची V, आकांक्षी जिले/ब्लॉक, मरुस्थलीय क्षेत्र) में 25,000 असंबद्ध बस्तियों और वाम उग्रवाद से प्रभावित जिलों में 100 से अधिक आबादी वाली बस्तियों को कनेक्टिविटी प्रदान की जानी है। इस योजना का उद्देश्य उन बस्तियों को 62,500 किलोमीटर लंबी, हर मौसम में उपयोग योग्य सड़कें उपलब्ध कराना है जो अभी तक आपस में जुड़ी नहीं हैं। इन सड़कों के साथ-साथ आवश्यक पुलों का निर्माण भी किया जाएगा। सड़क परियोजनाओं का महत्त्व दूरस्थ पहाड़ियों से लेकर ग्रामीण समुदायों के मध्य तक फैली ये सड़कें मात्र अवसंरचना में सुधार का प्रतीक नहीं हैं; बल्कि ये प्रगति के लिए महत्वपूर्ण मार्ग हैं जो अनेक अवसर खोलती हैं और समावेशी विकास को बढ़ावा देती हैं। इन सड़कों के निर्माण से लगभग 3,270 पहले से अलग-थलग पड़े क्षेत्रों को कनेक्टिविटी व आवश्यक सेवाओं तक पहुंच मिलेगी। ऐसा अनुमान है कि स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और बेहतर आजीविका तक पहुंच प्रदान करके ये सड़कें ग्रामीण जीवन को गहराई से बदल देंगी तथा एक विकसित भारत की नींव को मजबूत करेंगी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना–IV के बारे में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 11 सितंबर, 2024 को ग्रामीण विकास विभाग के वित्त वर्ष 2024-25 से 2028-29 के दौरान प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-IV (PMGSY-IV) के कार्यान्वयन के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस योजना का कुल परिव्यय 70,125 करोड़ रुपए (केंद्र सरकार का हिस्सा 49,087.50 करोड़ रुपए और राज्य सरकार का हिस्सा 21,037.50 करोड़ रुपए) है।

  • गोल्डीलॉक्स अर्थव्यवस्था (Goldilocks Economy) गोल्डीलॉक्स अर्थव्यवस्था वह आर्थिक स्थिति है जिसमें किसी देश की अर्थव्यवस्था न तो अत्यधिक तेज़ी से बढ़ती है और न ही मंदी की ओर जाती है। इस अवस्था में आर्थिक वृद्धि, मुद्रास्फीति, ब्याज दरें और रोजगार सभी संतुलित स्तर पर रहते हैं। इसे आर्थिक संतुलन की आदर्श अवस्था माना जाता है।

  • मेटाडॉन घोरपाडेई (Metadon Ghorpadei) मेटाडॉन रीमेरी (Metadon reemeri)

  • एकीकृत 72वीं संयुक्त (प्रारंभिक) प्रतियोगिता परीक्षा, जो 26 जुलाई, 2026 को आयोजित होनी थी, अपरिहार्य कारणों से स्थगित कर दी गई है

  • 3 июл.1 25824

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  • 3 июл.1 25821

    без подписи