Radha Soami Santmat
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🌿 “कल से भजन करूँगा…” — कहीं यह ‘कल’ कभी आए ही नहीं! 🙏 ज़िंदगी की सबसे बड़ी भूल क्या है? हमारे पास आज होता है, लेकिन हम अपनी भक्ति को हमेशा कल के भरोसे छोड़ देते हैं। सुबह उठकर कहते हैं— 👉 “आज बहुत काम है, कल से भजन करूँगा…” कल आता है तो कहते हैं— 👉 “आज थक गया हूँ, कल से पक्का शुरू करूँगा…” और फिर यही आज और कल का खेल चलता रहता है। हमें पता ही नहीं चलता कि जिस “कल” का इंतज़ार कर रहे थे, उसी इंतज़ार में ज़िंदगी का बहुत बड़ा हिस्सा बीत गया। 😔 ⏳ समय किसी के लिए रुकता नहीं। घड़ी की सुइयाँ लगातार चलती रहती हैं… दिन रात में बदलते हैं, रात फिर दिन में बदल जाती है और देखते ही देखते जीवन की शाम आ जाती है। इसीलिए संत कबीर दास जी ने हमें बहुत गहरी चेतावनी दी— 🌸 “आज कहै मैं काल भजू, काल कहै फिर काल। आज काल के करत ही, औसर जासी चाल॥” 🌸 अर्थ बिल्कुल साफ है— मनुष्य कहता रहता है कि आज नहीं, कल से प्रभु का भजन करूँगा। कल आता है तो फिर किसी और कल का इंतज़ार शुरू हो जाता है। और इसी टालमटोल में वह अवसर निकल जाता है, जो शायद दोबारा मिले या न मिले। ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌼 एक छोटी-सी कहानी… जो शायद हमें आईना दिखा दे 🌼 ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ एक गाँव में एक व्यक्ति रहता था। वह भगवान का बहुत बड़ा भक्त बनना चाहता था। वह रोज़ अपने मन में सोचता— “बस थोड़ा काम कम हो जाए, फिर रोज़ भजन करूँगा।” उसने सोचा— पहले घर बना लूँ… फिर भजन करूँगा। 🏠 घर बन गया तो बोला— “अब बच्चों की जिम्मेदारी पूरी कर लूँ, फिर आराम से नाम जपूँगा।” बच्चे बड़े हो गए तो उसने कहा— “अब शरीर थोड़ा कमजोर है, अगले महीने से नियमित भजन शुरू करूँगा।” अगला महीना आया… लेकिन उसके शरीर की ताकत और कम हो चुकी थी। एक दिन वह चारपाई पर लेटा हुआ था। उसकी आँखों के सामने उसकी पूरी जिंदगी घूमने लगी। घर था… धन था… परिवार था… सामान था… लेकिन जिस “भजन के लिए कल” का वह वर्षों से इंतज़ार करता रहा, वह कल कभी आया ही नहीं। उसने आँखें बंद कीं और मन ही मन कहा— “काश! मैंने कल का इंतज़ार करने के बजाय आज से ही प्रभु को याद किया होता…” 🌿 कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है— भक्ति के लिए जीवन में खाली समय नहीं मिलता, समय निकालना पड़ता है। काम कभी खत्म नहीं होंगे। जिम्मेदारियाँ कभी पूरी तरह खत्म नहीं होंगी। एक इच्छा पूरी होगी तो दूसरी सामने खड़ी होगी। लेकिन साँसों का क्या भरोसा? 😔 ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🕯️ आज ही क्यों? 🕯️ ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ क्योंकि हमारे पास वास्तव में आज ही है। बीता हुआ कल हमारे हाथ में नहीं है। आने वाला कल अभी आया नहीं है। हमारे पास जो है, वह है—यह वर्तमान क्षण। 🙏 अभी कुछ पल नाम-स्मरण कर सकते हैं। 🙏 अभी अपने मन को प्रभु की ओर मोड़ सकते हैं। 🙏 अभी किसी का भला कर सकते हैं। 🙏 अभी अपने भीतर झाँक सकते हैं। 🙏 अभी अहंकार, क्रोध और लोभ को थोड़ा कम कर सकते हैं। भक्ति का अर्थ यह नहीं कि संसार के सारे काम छोड़ दिए जाएँ। 🌿 संसार के काम करते हुए भी मन को परमात्मा की याद से जोड़ना ही तो असली साधना है। जिस तरह हम अपने जरूरी काम के लिए समय निकालते हैं, उसी तरह अपने भीतर के मालिक को याद करने के लिए भी समय निकालना होगा। ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 💭 एक बार खुद से यह सवाल जरूर पूछिए… ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ अगर आज रात हमें पता चले कि हमारे पास केवल कुछ ही दिन बचे हैं, तो क्या हम फिर भी कहेंगे— “कल से भजन करूँगा?” शायद नहीं। फिर जब मौत का समय निश्चित नहीं है, तो भक्ति को निश्चित “कल” पर क्यों छोड़ना? ⏰ घड़ी किसी के लिए नहीं रुकती। 🍂 पत्ते को गिरने से पहले तारीख नहीं पता होती। 🕯️ दीपक को बुझने से पहले समय का पता नहीं होता। 🌱 इंसान को अपनी आखिरी साँस का पता नहीं होता। इसलिए संतों की सीख को केवल पढ़िए मत… उसे आज से अपने जीवन में उतारिए। ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🌸 संतमत विचार — शिक्षा 🌸 ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 🔹 भक्ति को कल पर मत टालिए, क्योंकि कल हमारे हाथ में नहीं है। 🔹 जो समय आज मिला है, वही सबसे मूल्यवान है। 🔹 नाम-सिमरन के लिए किसी विशेष दिन, समय या परिस्थिति का इंतज़ार मत कीजिए—सच्चे मन से आज ही शुरुआत कीजिए। 🔹 दुनिया के काम करते हुए भी मन को प्रभु की याद में लगाना सीखिए। 🔹 जीवन की सबसे बड़ी समझदारी यही है कि सांसें चल रही हों, तब मालिक को याद कर लिया जाए। 🙏 आज का एक पल नाम में लगाया हुआ कल के हजार पछतावों से बेहतर है। इसलिए आज खुद से एक छोटा-सा वादा कीजिए— 🌿 “अब भक्ति कल से नहीं… आज से शुरू होगी।” 🌿
*आज एक लड़के ने बाबा जी से पूछा —* *“जब दुख-तकलीफ़ आती है तो कोई साथ नहीं देता, आप भी साथ नहीं होते…”* *बाबा जी ने प्यार से समझाया —* *“बेटा, दुनिया वाले साथ छोड़ सकते हैं,* *लेकिन बाबा कभी अपने बच्चों का साथ नहीं छोड़ता।”* *फिर बाबा जी ने एक उदाहरण दिया —* *“एक इंसान ने अपने गुरु से कहा —* *‘जब मेरी ज़िंदगी अच्छी चल रही थी, तब मुझे रेत पर चार पैरों के निशान दिखाई देते थे।* *लेकिन जब मैं मुश्किलों में था, तब सिर्फ दो निशान दिखाई दिए।* *क्या उस समय आप मेरा साथ छोड़ गए थे?’* *गुरु ने मुस्कुराकर कहा —* *‘नहीं बेटा…* *जो दो पैरों के निशान तुमने देखे, वो तुम्हारे नहीं, मेरे थे।* *उन कठिन समय में मैं तुम्हें अपनी गोद में उठाकर चल रहा था।’”* *“मालिक अपने बच्चों का साथ कभी नहीं छोड़ता…”*
🌅 सुबह की पहली साँस… अगर वाहेगुरु के नाम हो जाए तो? 🙏 ज़रा एक पल रुककर सोचिए… हर सुबह जब हमारी आँख खुलती है, तो सबसे पहले हम किसे याद करते हैं? मोबाइल को? अपने काम को? कल की चिंता को? या उस मालिक को, जिसने हमें एक और सुबह और एक और साँस दी है? ❤️ हमारे पास दिनभर दुनिया के लिए समय होता है, लेकिन उसी मालिक के लिए कुछ पल निकालना अक्सर भूल जाते हैं। 🌸 एक छोटी-सी कहानी… एक बुज़ुर्ग व्यक्ति रोज़ सुबह सूरज निकलने से पहले उठता था। उसका बेटा एक दिन बोला— “बाबा जी, आप रोज़ इतनी सुबह उठकर क्या करते हो?” बुज़ुर्ग मुस्कुराए और बोले— “बेटा, जब पूरी दुनिया सो रही होती है, तब मैं अपने मालिक का शुक्रिया अदा करता हूँ कि उसने मुझे एक और दिन दिया।” बेटे ने पूछा— “लेकिन सिर्फ कुछ मिनट नाम लेने से क्या होगा?” बुज़ुर्ग ने प्यार से कहा— “बेटा, अगर एक छोटी-सी चाबी बड़ा ताला खोल सकती है, तो क्या कुछ मिनटों का सच्चा नाम-सिमरन हमारे मन का ताला नहीं खोल सकता?” 🙏 फिर उन्होंने कहा— “दिनभर हम दुनिया की आवाज़ सुनते हैं, कम से कम सुबह कुछ पल अपने मालिक की आवाज़ सुनने के लिए शांत तो बैठो।” बेटा उस दिन से रोज़ सुबह पिता के साथ बैठने लगा। धीरे-धीरे उसकी बेचैनी कम होने लगी और उसके चेहरे पर भी वही शांति आने लगी। 🌿 बात बहुत छोटी है, लेकिन असर बहुत बड़ा है… सुबह उठते ही अगर हम मोबाइल देखने के बजाय कुछ पल आँखें बंद करके प्रेम से कहें— “वाहेगुरु… वाहेगुरु… वाहेगुरु…” ❤️ तो दिन की शुरुआत ही एक अलग भाव से होती है। फिर चाहे दिन में कितनी भी परेशानियाँ आएँ, मन के अंदर एक सहारा बना रहता है कि— “मेरा मालिक मेरे साथ है।” 🙏 इसलिए आज से एक छोटा-सा संकल्प करें— ❤️ **सुबह की पहली साँस — वाहेगुरु के नाम। और दिन की हर साँस — उसकी याद में।** क्योंकि हमें नहीं पता अगली साँस मिलेगी या नहीं… लेकिन जो साँस अभी मिली है, उसे उसके नाम से क्यों न भर दें? 🌸
*एक दिन आंटी को मंदिर से सेवा का* *हुकुम आया आंटी सेवा में चली गयी ।* *थोड़ी देर बाद आंटी को फ़ोन आया की* *उसके बेटे का ऐक्सिडेंट हो गया* *वो आंटी गुरु जी से* *आज्ञा लेकर हॉस्पिटल पहुँची ।* *आंटी ने सिमरन किया गुरुजी के आगे* *अरदास की और अपने बेटे को* *चरणामृत पिलाती रही ।* *आंटी की पड़ोसन जो उनकी दोस्त भी थी* *बोली बहन तेरे गुरु जी कैसे है* *तू दिन रात सेवा में लगी रहती है और* *उन्होंने क्या किया......* *तेरे बेटे काऐक्सिडेंट हो गया ।* *वो आंटी बोली मुझे अपने गुरुजी पर पूरा भरोसा है* *वो जो करते है सही करते है* *इसमें भी कोई बात होगी* *मेरे गुरुजी कभी किसी का बुरा नही करते* *जो होता है अच्छा होता है ।* *कुछ दिनो बाद बच्चा ठीक हो गया ।* *आंटी फिर से सेवा में लग गयी* *फिर कुछ दिन बाद पता चला की बेटे का* *फिर ऐक्सिडेंट हो गया है.....* *अब पड़ोसन फिर कहने लगी* *बहन तुझे तेरे सतगुरु ने क्या दिया* *तो आंटी बोली कुछ घटनाएँ हमें* *भरमानेके लिए भी होती है ।* *ज़रुर मेरा गुरुजी मुझे कुछ समझाना चाहता है ।* *मैं भ्रम में नही आऊँगी ।* *आंटी सिमरन करती रही गुरुजी के सामने* *अरदास करती रही......* *धीरे धीरे बेटा फिर ठीक हो गया ।* *अब बेटे का तीसरी बार फिर ऐक्सिडेंट हो गया* *तो पड़ोसन बोली बहन तू नही मानेगी* *लेकिन तू मुझे अपने बेटे की कुंडली दे* *मैं अपने महाराज को दिखाऊँगी* *तो आंटी बोली ठीक है* *तू भी अपनी तसल्ली कर ले* *लेकिन मेरा विश्वास नही डोलेगा* *गुरुजी सब ठीक कर देंगे ।* *अब पड़ोसन कुंडली लेकर अपने पंडित के पास गयी* *और बोली महाराज इस बच्चे का बार बार* *ऐक्सिडेंट हो जाता है कुछ उपाय बताइए ।* *महाराज बोले ये क्या ले आयी बहन* *जिस किसी की भी ये कुंडली है* *वो तो कई साल पहले मर चुका है* *तो बहन बोली नही महाराज* *मेरी सहेली का बेटा है और अभी ज़िंदा है* *पर बार बार चोट लग जाती है ।* *पंडित जी बोले जो भी है.....* *उसकी मृत्यु कई साल पहले हो जानी चाहिए थी* *जरुर कोई शक्ति है जो उसे बचा लेती है।* *साध संगत जी वो बहन की आँखें भर गयी* *दौडी दौड़ी उस आंटी के पास आकर चरणो में गिर गयी* *बोली बहन मुझे भी अपने गुरुजी के पास ले चल ।* *पूछने पर सारी बात बताई ।* *और फिर बहन ने भी ज्ञान ले लिया* *और सेवा करने लगी।* *साध संगत जी कहने का भाव ये है की* *हमारा विश्वास कभी नही डोलना चाहिए* *गुरुजी हर पल हमारी रक्षा करते है।.. Radha Swami Ji👏👏
🌸✨ गुरु के पीछे नहीं… गुरु की बात के पीछे चलो ✨🌸 ━━━━━━━━━━━━━━━ 💫 एक ऐसी घटना… जो आत्मा को हिला दे 💫 ━━━━━━━━━━━━━━━ एक महात्मा जी ने बहुत अनमोल बात सुनाई… ❤️ उन्होंने बताया कि एक सेवादार लगभग 10 साल तक हज़ूर महाराज जी के साथ रहा। एक दिन जब महाराज जी सत्संग के लिए निकल रहे थे, तो वह प्रेमी रास्ते में खड़ा हो गया… 😢 उसने folded hands के साथ कहा — 🕊️ *“महाराज जी… मुझे आपकी पहनी हुई कमीज़ चाहिए…”* महाराज जी ने प्यार से कहा — 🌿 *“मैं सत्संग करके आता हूँ, फिर तुम्हें दूसरी दे दूँगा…”* लेकिन प्रेमी बोला — 💔 *“नहीं महाराज… मुझे यही चाहिए… अभी चाहिए…”* ━━━━━━━━━━━━━━━ 😳 फिर जो हुआ… सुनकर रूह कांप उठेगी 😳 ━━━━━━━━━━━━━━━ महाराज जी ने मुस्कराते हुए कहा — 🕳️ *“जा… कुएँ में छलांग मार दे…”* सभी को लगा यह सामान्य बात है… लेकिन वह प्रेमी सचमुच दौड़ा… और जाकर कुएँ में छलांग लगा दी… 😭 कुछ देर बाद खबर सत्संग तक पहुँची… हज़ूर महाराज जी ने तुरंत सत्संग रोक दिया। 🙏 उन्होंने कहा — ✨ *“जितना सुन लिया, उस पर अमल करो… मुझे ज़रूरी काम है…”* और तुरंत कुएँ की तरफ चल पड़े… ━━━━━━━━━━━━━━━ 🤍 प्रेम की इंतिहा देखिए… 🤍 ━━━━━━━━━━━━━━━ रस्सी नीचे डाली गई… सेवादार बोले — “बाहर आ जाओ…” लेकिन अंदर से आवाज़ आई — 💬 *“पहले उन्हें बुलाओ… जिन्होंने छलांग लगाने को कहा था…”* जब महाराज जी स्वयं आए ❤️ तब भी वह बोला — 👕 *“पहले कमीज़ दो…”* महाराज जी ने वहीं कपड़े बदलकर अपनी कमीज़ उसे भेजी… उसने वह कमीज़ पहनी… फिर बाहर आया… 😭 ━━━━━━━━━━━━━━━ 🥺 और बाहर आकर क्या कहा…? 🥺 ━━━━━━━━━━━━━━━ जैसे ही बाहर आया, महाराज जी ने उसे गले से लगा लिया… ❤️ वह रोते हुए बोला — 💔 *“जब देनी ही थी… तो पहले दे देते…”* ━━━━━━━━━━━━━━━ 🌿 लेकिन असली संदेश यहाँ छुपा है… 🌿 ━━━━━━━━━━━━━━━ आज हम क्या कर रहे हैं…? 📌 दर्शनों के पीछे भागना 📌 फोटो लेने में खुश होना 📌 कपड़ों को छूना 📌 भीड़ में आगे खड़े होना 📌 सेवा में नाम बनाना लेकिन… ❌ भजन-सिमरन नहीं ❌ अंदर बैठना नहीं ❌ शब्द सुनना नहीं ━━━━━━━━━━━━━━━ 🔥 बाबा जी बार-बार क्या समझाते हैं? 🔥 ━━━━━━━━━━━━━━━ 🕊️ “सबसे पहले भजन-सिमरन करो…” “नाम की कमाई करो…” “शब्द सुनो…” “फिर समय बचे तो सेवा भी करो…” 🕊️ लेकिन हम…? गुरु के शरीर के पीछे घूमते रहते हैं, गुरु की बात पर नहीं चलते… 😔 ━━━━━━━━━━━━━━━ 💥 एक और गहरी घटना… 💥 ━━━━━━━━━━━━━━━ एक व्यक्ति को गुरु ने डेरे से बाहर निकलवा दिया… उससे मुँह फेर लिया… गेट बंद करवा दिए… वह टूट गया… 😢 लेकिन उसने शिकायत करने की बजाय भजन-सिमरन शुरू कर दिया… दिन बीते… फिर एक दिन अंदर नूरी दर्शन हुए ✨ उसने रोकर कहा — 💬 *“मेरे साथ ऐसा क्यों किया…?”* गुरु ने उत्तर दिया — 🌸 “तू मेरे देह स्वरूप में उलझ गया था… नाम की कमाई भूल गया था… इसलिए तुझे बाहर किया… ताकि तू भीतर आ सके…” 🌸 ━━━━━━━━━━━━━━━ 🪔 आज खुद से एक सवाल पूछो… 🪔 ━━━━━━━━━━━━━━━ क्या हम सच में मालिक को चाहते हैं…? या सिर्फ दुनिया और दिखावे को…? क्या रात को कभी अकेले बैठकर रोए हैं उसके लिए…? 😢 क्या कभी दिल से आवाज़ निकली — 🤲 *“मालिक… अब तेरे बिना कुछ अच्छा नहीं लगता…”* ━━━━━━━━━━━━━━━ ❤️ गुरु को क्या चाहिए? ❤️ ━━━━━━━━━━━━━━━ ना बड़ी सेवा… ना बड़ा नाम… ना दिखावा… उसे चाहिए सिर्फ — 💖 *एक सच्चा दिल…* 💖 जो पूरी तरह उसी का हो जाए… ━━━━━━━━━━━━━━━ 🌺 याद रखो… 🌺 ━━━━━━━━━━━━━━━ ✨ “जिस दिन अंदर बैठकर नाम में रस आने लगेगा… उस दिन दुनिया फीकी लगने लगेगी…” ✨ 🙏 राधास्वामी जी 🙏
https://youtube.com/post/UgkxLLhuxFKW8jJCC9Uh6SfY5qjuXQlb3teX?si=cPsMu-yJcEksq1vg
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*हम ही नहीं समझते बाबा जी के उपकार, वो हमारी और हमारे परिवार की हर पल रक्षा करते है।* *अमेरिका में एक अंकल-आंटी का जोड़ा रहता था। उनका एक नवजात बेबी था।दोनों पति पत्नी नौकरी करते थे, पर उनकी एक समस्या थी कि दोनों के आफिस के टाइम में दो घंटे का अंतर था। जब अंकल नौकरी पर जाते, तो आंटी को उसके आने से दो घंटे पहले आफिस जाना पड़ता था। इस तरह वह बच्चा दो घंटे घर पर अकेले होता था। पर अमेरिका के कानून के हिसाब से यह जुर्म था। उनका एक पडोसी यह रोज देखता । एक दिन उसने पुलिस में शिकायत कर दी।पुलिस दोपहर मे उनके घर आई और दरवाजे की घंटी बजाई . अंदर से एक काला चश्मा, सफेद पगड़ी पहने, एक सरदार जी आए तो पुलिस ने उनसे सवाल किया:-* *हैलो सर....* *सरदार जी (बाबा जी के रूप में) .... हैलो पुलिस* *सर..... आप कैसे हैं?* *गुरूजी....मै ठीक हूँ, शुक्रिया* *सर...... आप कौन है?* *गुरूजी .... मै इस बच्चे का दादा हूँ* *सर........ओह!ओके, शुक्रिया,* *सोरी सर,हमने आपको परेशान किया।* *गुरूजी ....... कोई बात नहीं, सर कया आप काफी लेंगे?* *सर...... नहीं, शुकिया।* *और पुलिस वहाँ से चली गई। यह सब वो पडोसी देख रहा था।* *अगले दिन रविवार था। पति पत्नी घर पर थे, तो उसने सोचा कि इन लोगों को मिलकर माफी मांग लेता हूं ।वह उनके घर गया और माफी मांग कर बोला कि इसके दादा जी कहां है, आज दिखाई नहीं दे रहे? यह सुन कर वो दोनों बडे़ हैरान हुए और बोले कि आप किस बात की माफी मांग रहे हैं ।फिर इसके दादा जी तो यहाँ कभी आए ही नहीं।वह बोला, "ऐसे कैसे हो सकता है? मैंने कल ही उनको देखा है"। फिर उसने सारी कहानी बताई । तब वह बोला कि उस पिक्चर में जो सरदार जी हैं वो कौन हैं? वो बोले कि ये तो हमारे बाबा जी हैं इडिया से । तब पडोसी बोला कि यही आए थे । अब वे दोनों समझ गए कि जब हम घर से चले जाते हैं तो हमारा बच्चा अकेला नहीं होता, बाबा जी उसके साथ होते हैं। दोनों एक दूसरे के गले लग कर बहुत रोए। उन्होंने यह बात गुप्त रखी, पर उनके पडोसी ने सबको बता दिया कि इंडिया के कोई गुरु हैं जो इनके घर रहते हैं।* 🙏🏻 *हमारे बाबा जी हर पल हमारे साथ हैं । वो हमारी जिन्दगी में बहुत कुछ कर रहें हैं जो हमें मालूम नहीं है । बस हमें उनके साथ अपना कनेक्शन मजबूत करना है। एक सच्चे विश्वास के साथ सब कुछ उन पर छोड़ दो ।* *शुकराना आपका, हर पल शुकराना।।...🙏🌷 Radha Swami Ji👏👏
विश्वास एक 16-17 साल की लड़की अपने स्कूल से अपने घर को जाने के लिए इक बस मैं सफर कर रही थी थोडी देर बाद उसने देखा कुछ लडके बस मे चढे और शराब पीने लगे वो लड़की डर गई सोचने लगी कि अब ये लड़के मुझे जरूर तंग करेंगे और बाबा जी को याद करने लगी...अगले स्टैंड पर एक औरत बस मे चढी. इस लडकी ने इशारा करके उसे अपने पास बैठने के लिए कहा पर वो औरत पीछे जाकर बैठ गई इतने मैं लडकी और घबरा गई उसकी आंखों में पानी आ गया .. कोई रास्ता ना था मन मैं बाबा जी को याद करने लगी .. जब उन लडको का स्टॉप आया वो बस से उतर गए ...अब वो औरत इस लड़की के पास आकर बैठ गई लडकी ने उस औरत से पूछा के मै जब डर रही थी रो रही थी और मैने आप को मेरे साथ बैठने को बोला तो आप मेरे साथ क्यों नहीं बैठे .. आप का फ़र्ज़ था के आप मेरी मदद करते .. मुझे उन लडको से डर लग रहा था .... तो वो महिला बोली बेटी .. तुम्हारे साथ वाली सीट फ्री नहीं थी ..वहाॅ इक बहुत सुंदर से सरदार जी बैठे थे . इतना कह कर वो औरत बस से उतर गई .. उस लड़की की आंखों में पानी आ गया .... ये सारी कहानी उसने अपने घर जा के अपने मम्मी पापा को सुनाई तो दोनो बहुत जोर से रोने लगे और उसे समझाने लगे कि गुरु हमारी हर वक्त देख भाल कर रहे हैं ... ... हमें तो सिर्फ उसपर विश्वास रखना है और भजन सिमरन पूरा करना है ... Radha Swami Ji👏👏
एक गरीब औरत रोज सत्संग में जाती और सेवा करती थी। लोग उसका मज़ाक उड़ाते—“तुझे क्या मिलेगा इससे?” एक दिन उसके घर में खाने को कुछ नहीं था, लेकिन फिर भी वो सेवा करने चली गई। शाम को जब घर लौटी, तो देखा दरवाजे पर राशन से भरी थैली रखी थी 😇 वह समझ गई—ये सतगुरु की मेहर है। ✨ सीख: 👉 सच्ची सेवा कभी व्यर्थ नहीं जाती, फल ज़रूर मिलता है।
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फिर वह समय आया जब 1990 में महाराज चरण सिंह जी चोला छोड़ गए। उसके बाद बाबा गुरिंदर सिंह जी गद्दी पर विराजमान हुए। उसके पिता ने फिर उसे समझाया कि अब नए बाबा जी से नाम दान ले लो। लेकिन उसके मन में अभी भी संदेह था। --- # 💔 पिता का चोला छोड़ना कुछ वर्षों बाद उसके पिता भी इस संसार से विदा हो गए। यह घटना उस युवक के लिए बहुत बड़ा झटका थी। उसे अपने पिता की बातें याद आने लगीं। > “बेटा नाम दान ले ले… > असली भजन सिमरन तभी फल देता है जब गुरु से नाम की दात मिलती है।” अब उसे पछतावा होने लगा कि उसने पिता की बात क्यों नहीं मानी। --- # 🌌 एक दिन अंदर से आई आवाज एक दिन वह चुपचाप ध्यान में बैठा हुआ था। अचानक उसे अंदर से एक आवाज सुनाई दी। आवाज आई: > “बेटा, अब तेरा समय आ गया है… > अब आकर नाम की दात ले ले।” जैसे ही उसने यह आवाज सुनी, उसका दिल खुशी से भर गया। --- # 😭 खुशी के आँसू वह तुरंत उठ खड़ा हुआ। घर में खुशी से नाचने लगा। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे – लेकिन यह आँसू दुख के नहीं बल्कि खुशी और भावुकता के थे। वह बार-बार कह रहा था: > “मुझे बुलावा आ गया है… मेरे गुरु ने मुझे बुलाया है।” सबसे आश्चर्य की बात यह थी कि वह आवाज महाराज चरण सिंह जी की थी। --- # ✨ गुरु की ज्योत एक ही होती है उस आवाज में यह भी कहा गया: > “नाम की दात अब उसी गुरु से लेनी होगी जो इस समय गद्दी पर विराजमान है। > लेकिन दुखी मत होना… मैं उसी ज्योत में हूँ।” गुरु ने समझाया: > “ज्योत एक ही होती है… शरीर बदल जाते हैं।” --- # 🏵️ डेरे में मिला अद्भुत अनुभव कुछ समय बाद वह भाई व्यास डेरे पहुँचा। जब वह नाम दान लेने के लिए अंदर गया तो सामने गद्दी पर बाबा जी बैठे थे। लेकिन उसी समय उसके साथ एक अद्भुत अनुभव हुआ। उसे ऐसा महसूस होने लगा कि गद्दी पर बाबा जी की जगह महाराज चरण सिंह जी दिखाई दे रहे हैं। जब तक नाम दान की पूरी विधि चलती रही, उसे महाराज जी के ही दर्शन होते रहे। --- # 🌞 गुरु कहीं नहीं जाते उस अनुभव के बाद उसकी सोच पूरी तरह बदल गई। उसे समझ आ गया कि: गुरु कहीं नहीं जाते। जैसे हम कहते हैं कि सूरज डूब गया। लेकिन वास्तव में सूरज कहीं नहीं जाता। धरती घूमती है और हमें लगता है कि सूरज डूब गया। ठीक वैसे ही गुरु भी हमेशा मौजूद रहते हैं। --- # 🌺 जीवन में आया बड़ा परिवर्तन उस अनुभव के बाद उसके जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आया। उसने भजन सिमरन का नियम और भी मजबूत कर लिया। वह पहले से कहीं अधिक प्रेम और लगन से साधना करने लगा। लोग कहते हैं कि उस भाई पर मालिक का विशेष रंग चढ़ गया। --- # 📿 इस घटना से मिलने वाली सीख इस सच्ची घटना से हमें कई गहरी बातें समझ आती हैं: ### 🌿 1. गुरु हमें कभी नहीं छोड़ते गुरु हमेशा हमारे साथ रहते हैं। ### 🌿 2. गुरु को हमारी हर पल की खबर होती है हम सोचते हैं कि गुरु हमें नहीं देख रहे, लेकिन ऐसा नहीं है। ### 🌿 3. गुरु की ज्योत एक ही होती है गुरु बदलते नहीं, केवल शरीर बदलता है। ### 🌿 4. विश्वास सबसे बड़ी शक्ति है सच्चा विश्वास अंततः हमें मंजिल तक पहुँचा देता है। --- # 🙏 अंतिम संदेश प्यारी साध संगत जी, गुरु का रास्ता विश्वास, प्रेम और समर्पण का रास्ता है। जब हम सच्चे दिल से गुरु को याद करते हैं तो उनकी मेहर किसी न किसी रूप में हमारे जीवन में प्रकट होती है। कभी किसी घटना के रूप में कभी किसी अनुभव के रूप में और कभी अंदर की आवाज के रूप में। --- 🌹 राधा स्वामी जी
## 🌹 गुरु पर विश्वास की सच्ची कहानी – जब बुलावा स्वयं गुरु की ओर से आया प्यारी साध संगत जी राधा स्वामी जी 🙏 सत्संगों में हम अक्सर गुरु की कृपा, विश्वास और नाम दान की महिमा से जुड़ी अनेक साखियाँ सुनते हैं। लेकिन कभी-कभी जीवन में ऐसी घटनाएँ सुनने को मिल जाती हैं जो केवल कहानी नहीं होतीं, बल्कि जीवित अनुभव बनकर दिल को छू जाती हैं। आज जो घटना आपके साथ साझा की जा रही है, वह किसी किताब की कहानी नहीं बल्कि एक सच्ची घटना है जो एक बुजुर्ग माता जी ने दिल्ली भंडारे के दौरान सुनाई। यह घटना इतनी भावुक और प्रेरणादायक है कि इसे सुनकर किसी की भी आँखें नम हो सकती हैं। यह कहानी है गुरु पर अटूट विश्वास, बुलावे की सच्चाई और उस दिव्य अनुभव की, जिसने एक व्यक्ति का पूरा जीवन बदल दिया। --- # 🌼 दिल्ली भंडारे में हुई एक अनमोल मुलाकात दो दिन पहले दिल्ली भंडारे के दौरान सुबह का समय था। संगत के साथ कैंटीन में नाश्ता चल रहा था। उसी समय एक बुजुर्ग माता जी से मुलाकात हुई। उनकी उम्र लगभग 70 वर्ष के आसपास रही होगी। बातचीत शुरू हुई तो उन्होंने बताया कि वे बहुत पुराने समय से व्यास डेरे से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि वे महाराज चरण सिंह जी के समय से ही सत्संग में आती रही हैं और नाम दान भी उन्होंने उसी समय लिया था। कुछ देर बाद उन्होंने एक ऐसी घटना सुनाई जिसे सुनकर ऐसा लगा जैसे गुरु की मेहर का जीवंत प्रमाण सामने आ गया हो। --- # 🌿 एक ऐसा परिवार जो पीढ़ियों से सत्संग से जुड़ा था माता जी ने बताया कि कई वर्ष पहले उनके पड़ोस में एक परिवार रहता था। यह परिवार बहुत पुराने समय से राधा स्वामी सत्संग से जुड़ा हुआ था। उनके पूर्वज बाबा जयमल सिंह जी के समय से ही व्यास डेरे से जुड़े हुए थे। समय के साथ-साथ सत्संग की गद्दी पर विभिन्न गुरु आए: * बाबा जयमल सिंह जी * महाराज सावन सिंह जी * सरदार बहादुर महाराज जगत सिंह जी * महाराज चरण सिंह जी और हर पीढ़ी के साथ-साथ उस परिवार की नई पीढ़ियाँ भी अपने आप सत्संग से जुड़ती चली गईं। यह सब किसी मजबूरी से नहीं बल्कि गुरु की कृपा और वातावरण की वजह से था। --- # 👶 उस परिवार में एक बच्चे का जन्म जब महाराज चरण सिंह जी गद्दी पर विराजमान थे, लगभग 14-15 वर्ष बाद उस परिवार में एक बच्चे का जन्म हुआ। वह घर का सबसे बड़ा बेटा था। धीरे-धीरे वह बच्चा बड़ा होने लगा और जब उसकी उम्र 14–15 वर्ष हुई तो उसके अंदर भी सत्संग के प्रति एक अलग ही आकर्षण दिखाई देने लगा। उसका कारण था उसके पिता। --- # 🧘 पिता को देखकर ध्यान में बैठने की आदत उस लड़के के पिता रोज़ाना बड़े प्रेम से भजन सिमरन और ध्यान में बैठते थे। जब भी वे ध्यान लगाते, वह लड़का चुपचाप उनके पास बैठ जाता। वह भी आँखें बंद कर लेता और शांत बैठा रहता। सबसे आश्चर्य की बात यह थी कि उसने यह सब किसी से सीखा नहीं था। बस वह अपने पिता को देखकर वही करने लगता। --- # ❤️ पिता की जिज्ञासा एक दिन उसके पिता के मन में जिज्ञासा हुई। उन्होंने बड़े प्यार से अपने बेटे से पूछा: > “बेटा, मैंने तो गुरु महाराज से नाम दान लिया हुआ है, इसलिए मैं भजन सिमरन करता हूँ। > लेकिन तुम्हें तो अभी नाम नहीं मिला… फिर तुम ध्यान में बैठकर क्या करते हो?” लड़के ने बड़ी मासूमियत से मुस्कुराते हुए जवाब दिया। --- # 🌸 बच्चे का मासूम उत्तर लड़के ने कहा: > “पिताजी, मैं कोई खास सिमरन नहीं करता। > मैं तो बस यही प्रार्थना करता हूँ कि महाराज जी मुझे भी जल्दी से नाम दान मिल जाए।” उसने आगे कहा: > “मैं भी जल्दी बड़ा हो जाऊँ ताकि आपकी तरह सच्चे मन से भजन सिमरन कर सकूँ।” यह सुनकर उसके पिता का दिल खुशी से भर गया। --- # 🌱 बचपन की आदत जीवन भर साथ रही समय बीतता गया। लड़का बड़ा हुआ, जवान हुआ और उसकी शादी भी हो गई। अब उसका अपना परिवार था – पत्नी, बच्चे और घर-गृहस्थी। लेकिन बचपन में जो आदत लगी थी, वह कभी नहीं छूटी। जब भी समय मिलता वह शांति से बैठकर ध्यान लगाने की कोशिश करता। हालाँकि उसने अभी तक नाम दान नहीं लिया था। --- # 🙏 पिता की सलाह – अब नाम दान ले लो एक दिन उसके पिता ने कहा: > “बेटा, अब तुम बड़े हो गए हो। > अब तुम्हें डेरे जाकर नाम दान ले लेना चाहिए।” लेकिन बेटे की सोच थोड़ी अलग थी। --- # 🌟 गुरु के बुलावे का इंतजार उसने अपने पिता से कहा: > “मैं खुद से नाम दान लेने नहीं जाऊँगा। > अगर मेरे गुरु की मौज होगी तो वे मुझे खुद बुलाएँगे।” उसने आगे कहा: > “या तो गुरु मुझे बुलाएँगे या फिर मुझे अंदर से आवाज आएगी कि बेटा अब आ जाओ।” उसके पिता ने बहुत समझाया कि गुरु की दात लेने के लिए हमें ही जाना पड़ता है, लेकिन वह युवक अपनी बात पर अडिग रहा। --- # 🕊️ समय का परिवर्तन समय आगे बढ़ता गया।
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