मैं और तुम = इश्क़
Статистикаमोहब्बत- ए- किस्सा🔥 मेरी हर आह कों वाह मिलती है यहां, कोन कहता है दर्द बिकता नहीं है🥀🙂
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अगले जन्म आऊँगा तेरे लायक बनके। ये जन्म तो गलतियों में गुज़र गया..🥺।।
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#Unknown
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उसकी टीस नहीं जाती उम्र भर पहला धोखा पहला धोखा होता है !!
⭐⭐
सुंदरता सस्ती है, चरित्र महंगा है।🕊❤️happy new year ✅
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🫰
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शिक्षक दिवस की सभी शिक्षक गण को शुभकामनाएं । 🙏
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लिपट कर बदन कई तिरंगे में आज भी आते हैं, यूँ ही नहीं दोस्तों हम ये पर्व मनाते हैं.. #IndependenceDay 🇮🇳
जानते हो अपनी ही बर्बादी में गया था मैं... उस लड़की की शादी में गया था मैं 💔 डराने का उसको कोई मकसद नहीं था मेरा... बस उसकी आजादी में गया था मैं रोकने को मुझे पहले घर का बड़ा जमाई आया था... बात नहीं बनी फिर बड़ा भाई आया था मैने कहा मैं खामोश हूं... बस उसका घरवाला देखने दो मै चला जाऊंगा पहले इसकी वरमाला देखने दो बस एक उस मुकाम पर मैने आंह भर दी जब मेरे सामने लड़के ने उसकी मांग भर दी थी आखिर में ये वादा भी पड़ेगा निभाना मुझे... मौत के फरिश्ते से कहा है... पहले उसके फेरे देख लू फिर ले जाना मुझे
मुझसे हर शख्स रूठ जाता है मेरा होना भी मसला है एक।।।✅☑️
पागल तो होना ही था, यार नशें दो-दो सम्हालें है पहिले पढ़ ली सारी ग़ज़लें उसकी, फिर बाँची आँखें है!
समाज में जिस रूप में जाने जाते हैं पिता, हूबहू वही छवि बन जाते हैं, कुछ लड़के इतना प्रेम करते हैं पिता से कि मनसा वाचा कर्मणा 'पिता की प्रतिलिपि' बन जाते हैं। Happy Father's Day
तू पढ़ती है मेरी पुस्तक तू पढ़ती है मेरी पुस्तक, मैं तेरा मुखड़ा पढ़ता हूँ तू चलती है पन्ने-पन्ने, मैं लोचन-लोचन बढ़ता हूँ मैं खुली कलम का जादूगर तू बंद किताब कहानी की मैं हंसी-खुशी का सौदागर तू रात हसीन जवानी की तू श्याम नयन से देखे तो, मैं नील गगन में उड़ता हूँ तू पढ़ती है मेरी पुस्तक, मैं तेरा मुखड़ा पढ़ता हूँ. तू मन के भाव मिलाती है मेरी कविता के भावों से मैं अपने भाव मिलाता हूँ तेरी पलकों की छांवों से तू मेरी बात पकड़ती है, मैं तेरा मौन पकड़ता हूँ तू पढ़ती है मेरी पुस्तक, मैं तेरा मुखड़ा पढ़ता हूँ. तू पृष्ठ-पृष्ठ से खेल रही मैं पृष्ठों से आगे-आगे तू व्यर्थ अर्थ में उलझ रही मेरी चुप्पी उत्तर मांगे तू ढाल बनाती पुस्तक को, मैं अपने मन से लड़ता हूँ, तू पढ़ती है मेरी पुस्तक, मैं तेरा मुखड़ा पढ़ता हूँ. तू छंदों के द्वारा जाने मेरी उमंग के रंग-ढंग मैं तेरी आँखों से देखूं अपने भविष्य का रूप-रंग तू मन-मन मुझे बुलाती है, मैं नयना-नयना मुड़ता हूँ तू पढ़ती है मेरी पुस्तक, मैं तेरा मुखड़ा पढ़ता हूँ. मेरी कविता के दर्पण में जो कुछ है तेरी परछाईं कोने में मेरा नाम छपा तू सारी पुस्तक में छाई देवता समझती तू मुझको, मैं तेरे पैयां पड़ता हूँ, तू पढ़ती है मेरी पुस्तक, मैं तेरा मुखड़ा पढ़ता हूँ. तेरी बातों की रिमझिम से कानों में मिसरी घुलती है मेरी तो पुस्तक बंद हुई अब तेरी पुस्तक खुलती है तू मेरे जीवन में आई, मैं जग से आज बिछड़ता हूँ, तू पढ़ती है मेरी पुस्तक, मैं तेरा मुखड़ा पढ़ता हूँ. मेरे जीवन में फूल-फूल तेरे मन में कलियाँ-कलियाँ रेशमी शरम में सिमट चलीं रंगीन रात की रंगरलियाँ चन्दा डूबे, सूरज डूबे, प्राणों से प्यार जकड़ता हूँ तू पढ़ती है मेरी पुस्तक, मैं तेरा मुखड़ा पढ़ता हूँ. ♥️♥️ ~ Gopal singh 🌸