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Reasoning with Sovindra Sir
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Learner | Educator | Motivator | Author Subject matter expert at Arihant Publications India Limited Follow Sovindra sir on: Facebook: https://www.facebook.com/singhsovindra/ Instagram: https://www.instagram.com/reasoningby_sovindra/
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доля реакций к просмотрам- 28 февр.अकारण बेचैनी: जब मन बिना बात के शोर करे अक्सर जीवन में सब कुछ सही होने के बावजूद भीतर एक अजीब सी हलचल महसूस होती है—एक ऐसी बेचैनी जिसका कोई ठोस कारण (Reason) नहीं होता। हम अपने आसपास देखते हैं, रिश्तों को टटोलते हैं, काम की स्थिति जाँचते हैं, पर कहीं कोई कमी नज़र नहीं आती। फिर भी, सीने में एक भारीपन या मन में एक अनजाना डर बना रहता है। यह वह स्थिति है जहाँ हमारी 'समझने' और 'कंट्रोल' करने की बुद्धि हारने लगती है। ऐसी बेचैनी दरअसल मन का वह शोर है जो तब पैदा होता है जब हम वर्तमान के मौन से घबराते हैं। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में हमने खुद को हमेशा 'व्यस्त' रहने का आदी बना लिया है। जैसे ही जीवन में ठहराव आता है, हमारा मन उस खालीपन को 'खतरे' की तरह देखने लगता है और बिना किसी बाहरी कारण के तनाव पैदा करने लगता है। कभी-कभी यह हमारे दबे हुए पुराने अनुभवों या भविष्य की अनिश्चितता का एक सूक्ष्म रूप होती है, जिसे हमारा तर्क (Logic) पहचान नहीं पाता। इस अकारण बेचैनी का समाधान उसे 'सुलझाने' में नहीं, बल्कि उसे स्वीकार करने में है। जब हम इसे 'ठीक' करने की कोशिश करते हैं, तो हम फिर से उसी 'कंट्रोल' के जाल में फँस जाते हैं। इसके बजाय, अगर हम बस यह मान लें कि "आज मन थोड़ा अशांत है और यह ठीक है," तो वह बेचैनी अपनी शक्ति खोने लगती है। जिस तरह बादल बिना किसी कारण के आते हैं और चले जाते हैं, वैसे ही इन मानसिक लहरों को भी बस 'होने' देना चाहिए। असल शांति तब नहीं मिलती जब हमारे पास हर सवाल का जवाब हो, बल्कि तब मिलती है जब हम बिना जवाब के जीना सीख जाते हैं।0,99%
- 13 мар. 2025 г.My second book as a author Thnx for luv n support0,88%
- 14 апр. 2025 г.Maturity is realizing Dr. B.R. Ambedkar's legacy goes beyond caste - he fought for justice, equality, and dignity for every Indian. A visionary who shaped our Constitution, uplifted the oppressed, and dreamt of a united nation. Salute to the legend who gave voice to the voiceless. #AmbedkarJayanti #realhero0,60%
- 1 янв. 2025 г.आपकी सफलता और खुशी आप में ही निहित है। खुश रहने का संकल्प लें, और अपनी खुशी से आप कठिनाइयों के खिलाफ एक अजेय निश्चय ले । आप इस वर्ष के हर दिन नए उमंग के साथ अपने लक्ष्य के प्रति हर कदम बढ़ाएं। आपको नया साल मुबारक हो। #happynewyear0,58%
- 30 янв. 2025 г.In a certain code language, 'FIGURE' is coded as 'VSUGJW' and COPIED is coded as 'YMLSWX'. What will be the code for BLANKET? SSC CGL (Tier-I) 26/9/2024 Shift-l (a) ZPANQWH (b) ZPMNQHW (c) ZPANQHW (d) ZPNAQWH0,49%
- 23 мар. 2025 г.без подписи0,44%
- 28 апр."संख्या छोटी हो सकती है, पर सवाल बड़ा है। लोकतंत्र कोई गणित का खेल नहीं जहाँ चंद अंकों को 'नगण्य' मानकर छोड़ दिया जाए। यहाँ संख्या मायने नहीं रखती, सिद्धांत मायने रखता है। अगर एक भी नागरिक का संवैधानिक अधिकार छीना जाता है, तो वह पूरी व्यवस्था की विफलता है। क्योंकि लोकतंत्र में 'भीड़' नहीं, 'इंसान' मायने रखता है।" न्याय तभी पूर्ण है जब वह अंतिम व्यक्ति (The Last Man) तक पहुँचे। "लोकतंत्र की मजबूती इस बात से नहीं मापी जाती कि कितने करोड़ों ने वोट दिया, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि क्या एक भी पात्र व्यक्ति वोट देने से वंचित तो नहीं रह गया।" Right to vote - no one left behind.0,41%
- 4 мар.Happy holi to all0,35%
- 20 мар. 2025 г.без подписи0,29%
- 22 мар. 2025 г.Six girls P, Q, R, S, T and U are sitting in two lines, one line behind the other line. All the girls are facing north. In the front line there are three girls. The remaining girls are sitting in the second line. T is just behind P. R is sitting to the immediate left of U. S is between T and Q. S is sitting to the immediate left of Q. Who is sitting just behind of R? छः लड़कियाँ P, Q, R, S, T और U दो पंक्तियों में बैठी हैं। एक पंक्ति दूसरी पंक्ति के पीछे है। सभी लड़कियाँ उत्तर दिशा की ओर अभिमुख हैं। आगे की पंक्ति में तीन लड़किया हैं। शेष लड़कियाँ दूसरी पंक्ति में बैठी हैं। T ठीक P के पीछे बैठी है। R ठीक U के बाएँ पड़ोस में बैठी है। S, T और Q के बीच में है। S ठीक Q के बाएँ पड़ोस में बैठी है। R के ठीक पीछे कौन-सी लड़की बैठी है? (SSC GD, 09/12/2021/Shift-III) (a) Cannot be determined (b) P (c) Q (d) S0,27%
- 13 мар. 2025 г.без подписи0,27%
- 25 февр.समझने की सीमा और जीवन का प्रवाह अक्सर हम जीवन की हर घटना, भावना और परिस्थिति को बुद्धि की कसौटी पर कसना चाहते हैं, क्योंकि 'समझना' हमारे लिए अनिश्चितता के विरुद्ध एक सुरक्षा कवच की तरह है। जब हम किसी चीज़ का कारण जान लेते हैं, तो हमें एक आभासी नियंत्रण (Control) महसूस होता है कि अब हम इसे संभाल सकते हैं। लेकिन सत्य यह है कि जीवन तर्क की सीमाओं में नहीं बंधता; वह एक निरंतर बहती धारा है जो कई बार बिना किसी स्पष्ट कारण के घटित होती है। हर चीज़ की व्याख्या खोजने की ज़िद हमें वर्तमान के शुद्ध अनुभव से दूर ले जाती है और एक मानसिक बोझ पैदा करती है। जब हम इस 'कंट्रोल' की इच्छा को त्याग देते हैं कि हमें सब कुछ जानना ही है, तब हम वास्तव में जीना शुरू करते हैं। यह स्वीकार करना कि "ज़िंदगी बस होती है," हार नहीं बल्कि एक गहरी स्वतंत्रता है, जो हमें विश्लेषण के शोर से हटाकर अस्तित्व की शांति से जोड़ देती है।0,23%