Vaidic Physics
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https://youtu.be/vtZA8Z3CMgA
आरक्षण हटाओ या आरक्षण बचाओ? आरक्षण और जातिवाद की समस्या का वास्तविक समाधान क्या हो सकता है? इस वीडियो में इसी प्रश्न पर गम्भीर विचार किया गया है। वीडियो देखें और अपनी राय अवश्य दें– https://youtu.be/JMed6AmNT2g
CJP Protest- समीक्षा | CJP के विरोध प्रदर्शन का विश्लेषण https://youtu.be/vCsfN0tqZqU
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📖 सर्वाधिक विवादित विषय (नियोग) की विवेचना https://youtube.com/shorts/AG6wZZz8DTU नियोग-मीमांसा लेख डाउनलोड करें– ⬇️ https://tinyurl.com/niyog-mimansa यदि विषय उपयोगी लगे, तो इसे अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें।
वेद पर 'श्रद्धा' क्यों? क्या आपने कभी स्वयं वेद पढ़े? क्या वेद केवल पूजा-पाठ और परम्परा तक सीमित हैं? अगर हम वेदों का वास्तविक विज्ञान (Science) नहीं समझ पाए, तो हमारी संस्कृति की जड़ें खोखली हो जायेंगी। इस वीडियो में जानिए वेद को बचाने का एकमात्र मार्ग—प्रचार नहीं, शोध है। ◼ क्या वेद केवल परम्परा है? ◼ वेद और आधुनिक विज्ञान का सम्बन्ध? ◼ हमारा कर्तव्य? ◼ वेद को बचाने के लिए किसकी आवश्यकता? 🗓️ 13/07/2026 🕣 08:00PM https://youtube.com/live/EfIl2t8bKc4
विद्या एक रहस्य https://youtu.be/cgpAW0U38ew
विवाह की आयु — ऋषि की भूल या वैज्ञानिक रहस्य कुछ लोग ऋषि दयानन्द द्वारा सत्यार्थ प्रकाश में विवाह की आयु को लेकर उपहास करते हैं। सत्यार्थ प्रकाश चतुर्थ समुल्लास में विवाह की आयु को इस प्रकार दर्शाया है— विवाह की आयु कन्या— १६ वर्ष, पुरुष— २५ वर्ष कन्या— १८-२० वर्ष, पुरुष— ३५-४० वर्ष कन्या— २४ वर्ष, पुरुष— ४८ वर्ष वस्तुतः यह विषय आयुर्वेद का है— जिसके अन्तर्गत शरीर की रचना व क्रिया विज्ञान को गहराई समझने वाला व्यक्ति ही इस विषय पर गम्भीरता से विचार कर सकता है, सामान्य व्यक्ति नहीं। ऋषि दयानन्द ने यह विचार आयुर्वेद के प्रामाणिक ग्रन्थ सुश्रुत संहिता सूत्रस्थान, अध्याय ३५ में लिखा है— पञ्चविंशे ततो वर्षे पुमान् नारी तु षोडशे। समत्वागतवीर्यौ तौ जानीयात् कुशलो भिषक्॥ १५॥ अर्थात् पुरुष पच्चीसवें वर्ष तथा स्त्री सोलहवें वर्ष में समान वीर्य या परिपूर्ण वीर्य हो जाते हैं ऐसा कुशल वैद्य जान लेवे ॥१५॥ षोडशसप्तत्योरन्तरे मध्यं वयः। तस्य विकल्पो वृद्धियौवनं सम्पूर्णता हानिरिति। तत्र, आविंशतेर्वृद्धिः, आत्रिंशतो यौवनम्, आचत्वारिंशतः सर्वधात्विन्द्रियबलवीर्य्यसम्पूर्णता, अत ऊर्ध्वमीषत्परिहाणिर्यावत् सप्ततिरिति ॥ ३५॥ अर्थात् सोलह वर्ष की आयु से लेकर सत्तर वर्ष की अवस्था पर्यन्त मध्य अवस्था होती है उसके भी वृद्धि, यौवन, सम्पूर्णता और हानि ऐसे चार भेद होते हैं। उनमें बीस वर्ष की आयु तक शरीर के अङ्ग प्रत्यङ्गों की वृद्धि की अवस्था होती है तथा तीस वर्ष तक यौवन एवं चालीस वर्ष तक रस-रक्तादि सर्व धातु, इन्द्रिय, बल और वीर्य इनकी सम्पूर्णता की अवस्था तथा उसके पश्चात् सत्तर वर्ष की आयु तक कुछ-कुछ क्षीणता होने की आयु मानी जाती है।॥ ३५॥ आचार्य सुश्रुत के इन वचनों को पढ़कर कोई भी बुद्धिमान् व्यक्ति सहजता से समझ सकता है कि ऋषि दयानन्द ने विवाह की जो आयु बतलायी है, उसका आधार सुश्रुत संहिता ही है। हाँ, हमें यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि ऋषि दयानन्द ने भगवान् मनु का प्रमाण देकर यह भी बताया है कि विवाह करने के अधिकारी वे कुमार वा कुमारी ही हैं, जिन्होंने आखण्ड ब्रह्मचारी रहकर सङ्गोपाङ्ग न्यूनतम एक वेद का तो विधिवत् अध्ययन कर लिया हो। इसका अर्थ है कि वे शरीर से भी बहुत बलवान् तथा महान् विद्वान् व वैज्ञानिक हों, वे ही विवाह के अधिकारी हैं, अन्य नहीं, क्योंकि अविद्वान्, दुर्बल, रोगी एवं पापी लोग विवाह करके तथा अपने जैसी सन्तान पैदा करके धरती पर भार ही बढ़ाने वाले होंगे। वे न तो किसी दूसरे का भला करेंगे और न स्वयं की ही भलाई कर पायेंगे। स्वप्न में भी शुक्र रज का क्षय न होवें, तब से ४८ वर्ष तक पूर्ण युवा रहेंगे और पूर्ण विद्वान् भी बन जायेंगे। उन्हें सम्पूर्ण आध्यात्मिक व पदार्थ विज्ञान का पूर्ण ज्ञान होगा, जिससे वे संसार का कल्याण करने की योग्यता से युक्त होंगे। इसलिए वर्तमान पतनकाल में यह आयु सीमा उचित नहीं है, क्योंकि ४८ वर्ष में तो व्यक्ति अधेड हो जाता है और वेदादि शास्त्रों के ज्ञान से तो उसका दूर का भी सम्बन्ध नहीं है। आयु का अनुपात शरीरशास्त्र के विज्ञान पर ही आधारित है। कन्या का विवाह २४ वर्ष के पश्चात् करने से सन्तानोत्पत्ति की क्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती होगी, इसलिए आचार्य सुश्रुत ने १६ः२५ लिखा। उसी के आधार पर ऋषि दयानन्द ने तीन अनुपात बताते हुए उत्तरोत्तर को श्रेष्ठतर माना है। https://audiomack.com/vaidicphysics/song/6a527058173b6 —आचार्य अग्निव्रत प्रमुख, वैदिक एवं आधुनिक भौतिकी शोध संस्थान (श्री वैदिक स्वस्ति पन्था न्यास द्वारा संचालित)
चुनौती— वेद विज्ञान ही है । Acharya Agnivrat । Vaidic Physics
क्या ब्रह्म को भी भ्रम हो सकता है? ❓प्रश्न जो देते हैं अद्वैतवाद को चुनौती 😱 ▶️ अवश्य देखें— https://youtu.be/Mtu3umuRFPo
मेरी परम्परा vs पौराणिक परम्परा l मेरी गौरवशाली परम्परा https://youtu.be/1PYezGX0ETQ वीडियो में दिये प्रमाणों को विस्तार से पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर जायें– ⬇️ https://tinyurl.com/parampra वीडियो को Like करें, अपने मित्रों के साथ Share करें तथा चैनल को Subscribe करें।
क्यों लेने पड़े भगवान् विष्णु जी को अवतार https://youtu.be/pMNIBAVhZ2I
जिनको पुरी शंकराचार्य जी के शिष्य के साथ हुई चर्चा पर आदरणीय आचार्य योगेश जी भारद्वाज की समीक्षा https://youtu.be/-u5FBEarH1M
पुरी शंकराचार्य जी के शिष्य के साथ हुई चर्चा पर आर्य विद्वान् आचार्य सोमदेव जी के विचार https://youtu.be/19RoQ1_rXxQ
ऋषि दयानन्द पर ही आक्रमण क्यों? https://youtu.be/_j3fRfct5VE
🎧 Podcast | Einstein के सापेक्षता सिद्धान्त को चुनौती देने वाले भारतीय वैज्ञानिक https://youtu.be/J2RVK-cY1SM
वेद के बारे में ऐसी जानकारी और कहीं नहीं मिलेगी https://youtu.be/-UURM6wNn8U