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Vastu Shastra

वास्तु शास्त्र के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराने के लिए इस चैनल को बनाया गया है !! आप सभी इस ग्रुप में आमन्त्रित हैं !!

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  • प्रश्न :- गणेशजी को वास्तुदोष निवारक के रूप में घर के मुख्य द्वार पर लगाने का विधान है !! इसकी क्या वजह है ??? 👉 गणेशजी को वास्तुदोष निवारक के रूप में भवन के मुख्य द्वार पर अंदर की ओर लगाने का विधान है !! उत्तर :- पुराणों में भगवान गणेशजी और वास्तु पुरुष की उत्पत्ति का उल्लेख है !! इससे हमको समझने में आसानी होगी !! 👉 *7 वर्ष पूर्व JCI में वास्तु शास्त्र पर मेरा वक्तव्य हुआ था !!* https://youtu.be/yVyfPrzynLg?si=btUnDPYUn3rjcILO&sfnsn=wiwspwa ) भगवान गणेश की उत्‍पत्ति :- 🕉️ एक बार शिवजी के गण नंदी द्वारा आज्ञा का पालन नहीं करने पर माता पार्वती नाराज हो गईं। तब उन्‍होंने ठान लिया कि मैं ऐसा पुत्र प्राप्‍त करूंगी जो मेरी आज्ञा का पालन करे और मेरी रक्षा करे। 🕉️ तब उन्‍होंने अपने शरीर के मैल और उबटन से अपने पुत्र का निर्माण किया। एक बार वह स्‍नान करने गईं और बाहर अपने इस पुत्र को खड़ा कर गईं। उन्‍होंने बालक को समझाया कि कोई भी अंदर न आने पाए। 🕉️ कुछ देर बात वहां भगवान शिव आए और माता र्पाती के पास जाने लगे तो उस बालक ने उन्‍हें रोकने का प्रयास किया। यह देखकर भगवान शंकर को क्रोध आ गया और उन्‍होंने बिना कुछ सोचे समझे उसका *सिर धड़ से अलग कर दिया* और अंदर चले गए। 🕉️ माता पार्वती ने दो थालियों में भोजन परोसकर भगवान शिव को आमंत्रित किया। तब दूसरी थाली देख शिव ने आश्चर्यचकित होकर पूछा कि यह किसके लिए है। 🕉️  पार्वती बोलीं, ‘यह मेरे पुत्र गणेश के लिए है जो बाहर द्वार पर पहरा दे रहा है। क्या आपने आते वक्त उसे नहीं देखा?’ 🕉️ यह बात सुनकर शिव बहुत हैरान हुए और पार्वती को सारा वृत्तांत कह सुनाया। यह सुन देवी पार्वती क्रोधित हो विलाप करने लगीं। उनकी क्रोधाग्नि से सृष्टि में हाहाकार मच गया। *वास्तु समाधान* *नियमित वास्तु टिप्स* Like & comments 🕉️ तब सभी देवताओं ने मिलकर उनकी स्तुति की और बालक को पुनर्जीवित करने के लिए कहा। तब पार्वती को प्रसन्न करने के लिए भगवान शिव ने एक हाथी के बच्चे का सिर काट कर बालक के धड़ से जोड़ दिया। ( वास्तु प्रवास :- 28 अगस्त 2025 को रायपुर Pt Deonarayan Sharma वास्तु सलाहकार +91 94252 07282 +91 83199 44101 ) वास्तु पुरुष की उत्पत्ति :- 🕉️ भगवान शिव के पसीने से वास्तु पुरुष की उत्पत्ति हुई है। भगवान शिव का पसीना धरती पर गिरा तो उससे ही वास्तु पुरुष उत्पन्न होकर जमीन पर गिरा। 🕉️ वास्तु पुरुष को प्रसन्न करने के लिए वास्तु शास्त्र की रचना की गई। वास्तु पुरुष का असर सभी दिशाओं में रहता है। 👉 वास्तु शास्त्र की सम्पूर्ण जानकारी के लिए वॉट्सएप्प ग्रुप को जॉइन करें:- 👉 अपने मित्रों और सभी ग्रुप में अवश्य शेयर करें 🕉️ इसके बाद वास्तु पुरुष के कहने पर ब्रह्मा जी ने वास्तु शास्त्र के नियम बनाए। जिनके अनुसार कोई भी मकान या इमारत बनाई जाती है। इसके बाद भूमि पूजन से गृह प्रवेश तक हर मौके पर वास्तु पुरुष की पूजा का महत्व है। 👉 गणेश जी माँ पार्वती के पुत्र हैं !! 👉 वास्तु पुरुष की उत्पत्ति भगवान शिव के पसीने से हुई है !! 👉 इसलिए वास्तु पुरुष और गणेश जी दोनो भाई हुए !! 👉 इसलिए गणेशजी को वास्तुदोष निवारक के रूप में घर के मुख्य द्वार पर लगाने का विधान है !!

  • *गणेश जी का आध्यात्मिक महत्व* भगवान गणेश का व्यक्तित्व बेहद आकर्षक माना गया है। उनका मस्तक हाथी का है और वाहन मूषक है। उनकी ५ पत्निया हे रिद्धि -सिद्धि , तुष्ठी -पुष्ठी एवं श्री हैं। सभी गणों के स्वामी होने के कारण इनका नाम गणोश है। परंपरा में हर कार्य के प्रारंभ में इनका स्मरण आवश्यक है। उन्हें विघ्नहर्ता कहते हैं। गणेश में ऐसी क्या विशेषताएं हैं कि उनकी पूजा  देवी-देवताओं में सर्व प्रथम होती है। आइए जानें गणेश की विशिष्टता के बारे में- ऋग्वेद में लिखा है ‘न ऋते त्वम क्रियते किं चनारे’ अर्थात हे गणेश, तुम्हारे बिना कोई भी कार्य प्रारंभ नहीं किया जाता है। तुम्हें वैदिक देवता की उपाधि दी गयी है।  गणेश आदिदेव है। वैदिक ऋचाओं में उनका अस्तित्व हमेशा रहा है। गणेश पुराण में ब्रहा, विष्णु एवं शिव के द्वारा उनकी पूजा किए जाने का तक उल्लेख मिलता है। वाहन चूहा क्यों:- भगवान गणेश की शारीरिक बनावट के मुकाबले उनका वाहन चूहा काफी छोटा है। चूहे का काम किसी चीज को कुतर डालना है। वह चीर-फाड़ कर उसके प्रत्येक अंग-प्रत्यंग का विश्लेषण करता है। गणेश बुद्धि और विद्या के अधिष्ठाता हैं। तर्क-वितर्क में वे बेजोड़ हैं। इसी प्रकार मूषक भी तर्क-वितर्क में पीछे नहीं हैं। काट छांट में उसका कोई सानी नहीं है। मूषक के इन्हीं गुणों को देखकर उन्होंने इसे वाहन चुना है। ( *वास्तु प्रवास :-* 27 अगस्त को रायपुर प्रवास पर Pt Deonarayan Sharma वास्तु सलाहकार +91 94252 07282 +91 83199 44101 ) गणोशजी की सूंड:- गजानन की सूंड हमेशा हिलती डुलती रहती है जो उनके सचेत होने का संकेत है। इसके संचालन से दु:ख-दारिद्रय समाप्त हो जाते हैं। अनिष्टकारी शक्तियां डरकर भाग जाती हैं। यह सूंड जहां बड़े-बड़े दिग्पालों को भयभीत करती है, वहीं देवताओं का मनोरजंन भी करती है। इस सूंड से गणोश, ब्रहाजी पर पानी एवं फूल बरसाते है। सूंड के दायीं और बायीं ओर होने का अपना महत्व है। मान्यता है कि सुख-समृद्वि हेतु उनकी दायीं ओर मुड़ी सूंड की पूजा करनी चाहिए, वहीं शत्रु को परास्त करने या ऐश्वर्य पाने के लिए बायीं ओर मुड़ी सूंड की पूजा करनी चाहिए। 👉 *अपने मित्रों और सभी ग्रुप में अवश्य शेयर करें* 👉 वास्तु शास्त्र की सम्पूर्ण जानकारी के लिए वॉट्सएप्प ग्रुप को जॉइन करें:- बड़ा उदर:- गणेश जी का पेट बहुत बड़ा है। इसी कारण उन्हें लंबोदर भी कहा जाता है। लंबोदर होने का कारण यह है कि वे हर अच्छी और बुरी बात को पचा जाते हैं और किसी भी बात का निर्णय सूझबूझ के साथ लेते हैं। वे संपूर्ण वेदों के ज्ञाता है। संगीत और नृत्य आदि विभिन्न कलाओं के भी जानकार हैं। ऐसा माना जाता है कि उनका पेट विभिन्न विद्याओं का कोष है। लंबे कान:- श्री गणेश लंबे कान वाले हैं। इसलिए उन्हें गजकर्ण भी कहा जाता है। लंबे कान वाले भाग्यशाली होते हैं। लंबे कानों का एक रहस्य यह भी है कि वह सबकी सुनते हैं और अपनी बुद्धि और विवेक से ही किसी कार्य का क्रियान्वयन करते हैं। बड़े कान हमेशा चौकन्ना रहने के भी संकेत देते हैं। मोदक बेहद पसंद - बड़े पेट वालों को मीठा बेहद पसंद होता है। भगवान गणेश एक ही दांत होने के कारण चबाने वाली चीजें नहीं खा पाते होंगे और लडडू खाने में उन्हें आसानी होती होगी। इसीलिए मोदक उन्हें प्रिय है क्योंकि वह आनंद का भी प्रतीक है। वह ब्रrाशक्ति का प्रतीक है क्योंकि मोदक बन जाने के बाद उसके भीतर क्या है, दिखाई नही देता। मोदक की गोल आकृति गोल और महाशून्य का प्रतीक है। शून्य से ही सब उत्पन्न होता है और शून्य में सब विलीन हो जाता है। गणेश जी का दांत:- भगवान परशुराम से युद्ध में उनका एक दांत टूट गया था। उन्होंने अपने टूटे दांत की लेखनी बना कर महाभारत का ग्रंथ लिखा। पाश:- उनके हाथ में पाश है। यह राग, मोह और तमोगुण का प्रतीक है। इसी पाश से वे पाप समूहों और संपूर्ण प्रारब्ध को आकर्षित कर अंकुश से इनका नाश कर देते हैं। परशु:- इसे गणेश हाथ में धारण करते हैं। यह तेज धार का होता है और तर्कशास्त्र का प्रतीेक है। वरमुद्रा - गणपति प्राय: वरमुद्रा में ही दिखाई देते हैं। यह सत्वगुण का प्रतीक है। इसी से वे भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं। इस प्रकार गणेश जी का सारा व्यक्तिव निराला है। उनके आंतरिक गुण भी उतने ही अनूठे हैं जितना उनका बाहरी व्यक्तित्व। गणेशजी के सभी प्रतीक सिखाते हैं कि हम अपनी बुद्धि को जाग्रत रखें, अच्छी-बुरी बातों को पचाएं, पापों के शमन के लिए सद्तर्को की धार रखें तथा तमोगुण पर विजय हासिल कर सत्वगुणों का विस्तार करें।

  • *भगवान श्रीकृष्ण को ठीक तरह से प्रार्थना अर्पित करते हैं ??* 🧘‍♂️सनातन धर्म के अनुसार हमारे जीवन में जो भी घटना घटती है वह हमारी प्रतिक्रिया मात्र है !! 🧘‍♂️हमारे जीवन में जो भी दुःख या सुख के क्षण आते हैं उसके लिए हमारा वर्तमान  जीवन या हमारा पूर्व जन्म में  किये गये हमारे संचित कर्म जिम्मेदार होता है !! 🧘‍♂️ महाभारत की एक घटना मुझे याद आती है जिसमे योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण की उंगली कट जाती है जिसका उपचार बहन द्रौपदी अपने साड़ी के एक हिस्से को काटकर भगवान श्रीकृष्ण की उंगली में बांधकर कर करती है !! 🧘‍♂️ *चीरहरन* के दौरान जब द्रौपदी सबसे पहले अपने बल पर विश्वास करती हैं पर साड़ी खिंचता चला जाता है !! 👉 फिर अपने पांचों पति को मदद के लिए बुलाती है !! फिर सभा मे उपस्थित सभी लोगों को निवेदन करती हैं !! 🧘‍♂️ अंत मे भगवान श्रीकृष्ण को याद करती है तो भगवान श्रीकृष्ण साड़ी की वर्षा करते हैं जिससे द्रौपदी चीरहरन से बच जाती है !! 🧘‍♂️ इसका मतलब जो साड़ी का छोटा सा हिस्सा द्रौपदी ने प्रेमस्वरूप भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किया था वही साड़ी विपरीत  परिस्थिति में भगवान श्रीकृष्ण ने देकर द्रौपदी की लाज बचाई !! 👉 भगवान श्रीकृष्ण से जब द्रौपदी मिलती हैं तो उनसे पूछती है कि आपने मेरी मदद देर से क्यों की ?? 👉 भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि मैं तब तक किसी भी भक्त की मदद नही कर सकता जब तक भक्त मुझसे प्रार्थना नही करेगा !! 🧘‍♂️ क्या आप अपने इष्ट देव को ठीक तरह से प्रार्थना अर्पित कर पाते हैं ?? 🧘‍♂️अगर हम किसी भी प्राणी मात्र की मदद निष्काम रूप से करते हैं तो यही मदद हमे प्रकृति कई गुना अधिक मात्र में वापस कर देती है !! ( *वास्तु प्रवास :-* 19 अगस्त 2025 को रायपुर/ दुर्ग प्रवास Pt Deonarayan Sharma *वास्तु सलाहकार* +91 94252 07282 +91 83199 44101 ) 🧘‍♂️ इसलिए संसार में रहते हुवे यदि हम किसी से घृणा करते हैं तो प्रकृति उसी घृणा को हमें वापस करती है !! 👉 लोग हमसे घृणा करना शुरू कर देते हैं !! 🧘‍♂️इसलिए संसार में रहते हुवे यदि हम किसी पर क्रोध  करते हैं तो प्रकृति उसी क्रोध को हमें वापस करती है !! 👉लोग हम पर क्रोध  करना शुरू कर देते हैं !! 🧘‍♂️ प्रत्येक क्रिया के बराबर किन्तु ठीक विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है !! 🧘‍♂️ जब चार दोस्त किसी घर में जाते हैं तो जो दोस्त कुत्ते से डरता है ,घर का कुत्ता उसी को काटता है ,क्योंकि कुत्ते के प्रति हमारा डर कुत्ते को सम्प्रेषित हो जाता है  !! 👆 यह है नकारात्मक सोंच का परिणाम !! 🧘‍♂️अपने घर में ताला लगाकर जब हम बाहर घुमने जाते हैं और डर कर सोंचते हैं कि कंही हमारे घर में चोरी न हो जाये  !! 👉 तो हम अपने शहर के चोरो को एक प्रकार का आमंत्रण  देते रहते हैं कि चोरों आवो मेरे घर में अभी कोई नही है ,और चोर उसी घर में चोरी करते हैं !! 👉 तो यह है नकारात्मक सोंच का परिणाम !! 🧘‍♂️ इसलिए वास्तु शास्त्र की अपनी नकारात्मक /सकारात्मक उर्जा के साथ ही साथ हमारी अपनी नकारात्मक /सकारात्मक  उर्जा से भी हम अपने भविष्य की आधारशिला रखते हैं !! 👉 *अपने मित्रों और सभी ग्रुप में अवश्य शेयर करें* 👉 *वास्तु शास्त्र की सम्पूर्ण जानकारी के लिए वॉट्सएप्प ग्रुप को जॉइन करें:-* 🧘‍♂️ इसलिए सुंदर भविष्य के लिए आइये  आज से ही हम सकारात्मक विचारों को अपने अंदर पल्लवित , पोषित करें !! 🧘‍♂️ अगर आप नकारात्मक विचारों से परेशान हैं तो  *ध्यान का अभ्यास* आज से शुरू कर दें ,ध्यान का अभ्यास आपके नकारात्मक विचारों को धीरे धीरे आपके अंतर्मन से बाहर निकालने में मदद करेगा !!

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  • वास्तु प्रवास :- 👉23 जनवरी 2025 को कांटाभांजी उड़ीसा 👉25 और 26 को नागपूर Pt Deonarayan Sharma वास्तु सलाहकार +91 94252 07282 +91 83199 44101

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