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★Aam Aadmi Party's unofficial channel for dedicated AAP volunteers ★Made to provide content to be shared on WhatsApp and other social media "CRUSADE AGAINST PAID/BIASED MEDIA" t.me/AAPPulse

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  • 30 мар.Some specimens of the amounts spent on just one-day PR events of Modi.0,00%
  • 30 мар.This is why Entire Mainstream Media of India is Slave of the Modi Govt.0,00%
  • 30 мар.A reporter says he was SHOCKED when he did an investigative story on drugs issue in Punjab. Instead of going after him like most govts do, the AAP govt suspended the local SHO based on his report and spoke to him for an hour to understand what else it could do.0,00%
  • 30 мар.क्या आपको भी लगता है कि 2014 से यही पेटर्न रिपीट हुआ है‍?0,00%
  • 14 сент. 2025 г.It is the government of India that is failing India. If it had the will and is as patriotic as it claims to be. Here are 8 ways the gov. could have stopped the cricket. 1. Deny permission – Refuse team clearance to play Pakistan. 2. Refuse security clearance – Cite safety risks for players/fans. 3. Advise BCCI withdrawal – Direct board to boycott fixtures vs Pakistan. 4. Ban sponsors/broadcasters – Make the match commercially unviable. 5. Restrict travel – Bar Indian team from going to unsafe venues. 6. Invoke national security – Issue directive citing Pakistan as adversary. 7. Law & order grounds – Block match citing risk of unrest/protests. 8. Lobby ICC/ACC – Push for exclusion or refusal to play if Pakistan included. The government never had the will. Commercial interests supersede national interests. It is that simple. Keep crying. But don’t blame the cricketers. If you don’t have the guts to question the government, just shut up.0,00%
  • 12 сент. 2025 г.“केजरीवाल-सिसोदिया दिल्ली के बच्चों को शराबी बना रहे हैं” केजरीवाल सरकार तो दिल्ली के बच्चों को “शराबी” नहीं बना पाई, पर रेखा गुप्ता सरकार ज़रूर बनाएगी… पिछले 4 सालों से दिल्ली की जिस शराब नीति को बीजेपी नें घोटाला बताया उसमें शराब पीने की उम्र 25 से घटाकर 21 करना प्रस्तावित था। दिल्ली के पड़ोस, यानि नोएडा और गुरुग्राम में ये उम्र पहले से 21 थी, यहाँ पहले से बीजेपी की सरकार थी। फ़िर भी बीजेपी सरकारों की उसी नीति का बीजेपी नें दिल्ली में ख़ूब विरोध किया। फ़ाइनली, केजरीवाल सरकार की शराब नीति में शराब पीने की उम्र में कोई बदलाव नहीं किया गया। पर अब दिल्ली की बीजेपी सरकार शराब पीने की उम्र 25 से घटाकर 21 करने जा रही हैं। अपने पाखंड पर पर्दा डालने के लिए अब बीजेपी कहेगी कि उम्र की छूट केवल “बियर” के लिए है!! तो जैसे भ्रष्टाचार के आरोपी नेता जब बीजेपी में शामिल हो जाते हैं तो वो “भ्रष्टाचारी” नहीं रहते, अब उसी तरह बीजेपी की पालिसी लागू होने के बाद “बियर” को शराब नहीं माना जाएगा… है न ये बीजेपी के दोगलेपन का नया रिकॉर्ड??0,00%
  • 12 июл. 2025 г.इस बार सुप्रीम कोर्ट रास्ते में आ रहा है!! 8 नवंबर 2016: मोदी जी ने ख़ुद टीवी पर घोषणा की थी कि उसी रात से ₹500 और ₹1000 के नोट मान्य नहीं होंगे। इसे “नोटबंदी” कहा गया। 24 जून 2025: मोदी जी नहीं, बल्कि चुनाव आयोग ने घोषणा की कि बिहार में वोट देने के लिए अब आधार, राशन कार्ड और मौजूदा वोटर कार्ड मान्य नहीं होंगे। इसे “वोटबंदी” कहा जा रहा है। यानि जो काम 10 साल पहले ख़ुद मोदी जी ने किया वो अब एक इंडिपेंडेंट संवैधानिक संस्था कर रही है, बस उनके एक इशारे पर!! ख़ैर, “नोटबंदी” की विभीषिका तो देश ने देखी और झेली, पर उम्मीद है “वोटबंदी” के तांडव से शायद देश बच जाए। क्यों? क्योंकि इस बार सुप्रीम कोर्ट "पितामह भीष्म" की तरह खामोश रहकर संविधान का चीर हरण होते देखने के मूड में नहीं लग रहा है। पहली ही पेशी में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग अर्थात् मोदी सरकार को बता दिया कि बिना ठोस दलील के वो वोटर लिस्ट के लिए मान्य दस्तावेजों को “पिक एंड चूज” नहीं कर सकते!! वैसे जनता और सुप्रीम कोर्ट के सामने चुनाव आयोग अर्थात् मोदी सरकार की दलील आज भी वही है, जो कल थी- किसी “काले” को कंट्रोल करना। लिहाज़ा जैसे नोटबंदी का “घोषित” मक़सद काले धन को ख़त्म करना था। ठीक उसी तर्ज़ पर "वोटबंदी" यानि स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न का भी “घोषित” मक़सद है “काले भारतीय” यानि ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से अपने आप को भारतीय बताकर भारत में रहने वाले लोगों को वोटर लिस्ट से हटाना। और जैसे नोटबंदी देश से "काला धन" ख़त्म नहीं कर पाई उसी तरह वोटबंदी भी "काले नागरिकों" को वोटर लिस्ट से नहीं हटा पाएगी। दस साल पहले देश ने देखा था कि जिनके पास वाक़ई काला धन था, उन्होंने अपनी सेटिंग कर के उसे ठिकाने लगा दिया था। बाद में रिज़र्व बैंक ने भी माना कि लगभग सभी ₹500 और ₹1000 की नोटें वापस आ गए थे। लेकिन अपनी गाढ़ी कमाई, जो कि काला धन नहीं था, उसे ही बैंक से निकालने की अफ़रातफ़री में न जाने कितने मासूमों की जानें गई। और काले धन वाले आराम से अपना धंधा बढ़ाते रहे। अब यही कहानी “वोटबंदी” के नाम पर दोहराने की पूरी तैयारी है। सोचने की बात है कि आख़िर हमारे देश में 10वीं का सर्टिफिकेट जुगाड़ना ज़्यादा आसान है, या आधार कार्ड? पर चुनाव आयोग ने 10वीं के सर्टिफिकेट को अपनी 11 मान्य दस्तावेजों की सूची में रखा था, लेकिन आधार कार्ड को नहीं!! जिन घुसपैठियों के नाम पर ये सारी कवायद हो रही है, और सरकार को शक है की उन्होंने फ़र्ज़ी तरीक़े से आधार कार्ड बनवा रखे हैं, क्या वो किसी दूर दराज़ के बोर्ड से 10वीं का एक सर्टिफिकेट नहीं बनवा सकते? अगर बायोमेट्रिक डेटा वाले आधार कार्ड पर सरकार को भरोसा नहीं है तो फिर पासपोर्ट को छोड़कर बाक़ी 10 डॉक्यूमेंट्स पर कैसे भरोसा किया जा सकता है? तो हक़ीक़त ये है कि दिल्ली और झारखंड के चुनाव में बीजेपी ने जिस तरह से रोहिंग्या- बांग्लादेशी कार्ड खेला था, वही कार्ड बिहार में कुछ अलग तरीक़े से खेलने की मंशा है। चूँकि बिहार में सालों से डबल इंजन की सरकार है तो तथाकथित घुसपैठियों को बसाने की बात कह नहीं सकते, इसलिए बीजेपी उन्हें वोटर लिस्ट से "हटाने" का दावा करेगी। पर जैसे नोटबंदी में कोई काले धन वाला सेठ-साहूकार लाइनों में नहीं खड़ा हुआ था, उसी तरह से वोटबंदी में भी कोई रोहिंग्या- बांग्लादेशी नहीं बल्कि देश का ग़रीब ही एक बार फ़िर ज़िल्लत झेलेगा। उम्मीद है सुप्रीम कोर्ट इस बार मोदी सरकार की मनमानी रोकेगी…0,00%
  • 9 июл. 2025 г.HISTORIC FIRST: Punjab exports LITCHIs now 1️⃣ *London* : Started in 2024 - Exported via Amritsar’s cargo facility - Fetched 500% of Market Price India 2️⃣ *UAE & Qatar* : Litchi export started in 2025 - Exported to Lullu Group Details 👇 https://aamaadmiparty.wiki/Achievements/Punjab/LitchiPromotion0,00%
  • 28 июн. 2025 г.क्या अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को जेल भेजना भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ कारवाई थी? क्या अब तथाकथित क्लासरूम घोटाला, अस्पताल घोटाला भ्रष्टाचार निवारण अभियान है? क्या पिछले 11 सालों में मोदी सरकार का एक भी क़दम भ्रष्टाचार ख़त्म करने के लिए था? सभी का जवाब है, बिल्कुल नहीं!! न तो बीजेपी के बड़े इंजन, और न ही छोटे इंजन की सरकार भ्रष्टाचार मुक्त भारत या दिल्ली चाहती है। अगर भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ मोदी सरकार ने एक रत्ती भी काम किया होता तो इसके दो निश्चित परिणाम होते: पहला, सरकारी कर्मचारी आम जनता से इज़्ज़त से पेश आते और बिना रिश्वत के काम होता। दूसरा, महँगाई इस कदर न होती क्योंकि व्यापारियों को नेताओं-अधिकारियों को कमीशन और पार्टियों को नजायज़ चंदा न देना होता। इसलिए ख़ुद से पूछिये, क्या पिछले 11 सालों में आपका काम, चाहे वो सरकारी दफ़्तर में हो या पुलिस स्टेशन में, बिना किसी को रिश्वत दिए हुआ है? और ये भी पूछिये अपने आप से कि पिछले दशक में आपकी सैलरी जितनी बढ़ी है, क्या उससे कम दर से आपकी ज़रूरत वाली चीज़ों के दाम बढ़े हैं? अगर एक का भी जवाब “न” है तो पूछिये मोदी सरकार से कि भ्रष्टाचार के नाम पर CBI, ED, IT, ACB के खेल से जनता को क्या मिला? भ्रष्टाचार के नाम पर बीजेपी की राजनीति तो ख़ूब चमकी पर आम जनता के जीवन पर इसका क्या असर पड़ा? क्या देश के किसी भी विभाग में पहले से चल रहे भ्रष्टाचार में एक रुपये की भी कमी आई? ऐसा नहीं है की देश में भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगाई जा सकती। केजरीवाल सरकार ने अपने 49 दिनों के शासन में यही किया था। भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ 2013 में केजरीवाल सरकार का कदम ऐसा था जिससे आम जनता को राहत मिली, उनके काम बिना बाबुओं को रिश्वत दिए होने लगे थे। पर उसे मोदी सरकार ने चलने नहीं दिया। क्यों? क्योंकि मोदी सरकार देश से भ्रष्टाचार हटाना ही नहीं चाहती, उसे तो सिर्फ़ भ्रष्टाचार का तमग़ा एक हथियार के रूप में अपने राजनैतिक विरोधियों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल करना है। और हो भी क्यों न.. आख़िर जब भ्रष्टाचार की काल्पनिक कहानी सुनाने से ही मोदी सरकार और बीजेपी का काम चल जाता है तो फ़िर सचमुच के भ्रष्टाचार को हटाने की क्या ही ज़रूरत!! और अब तो इसी गुरुमंत्र के सहारे दिल्ली में बीजेपी की छोटे इंजन वाली सरकार भी एसीबी के ज़रिए अपने विरोधियों के काल्पनिक भ्रष्टाचार की कहानी सुनाने में लग गई है… इसलिए जब तक बीजेपी का ये सर्कस चल रहा है तब तक आम जनता रिश्वत देकर और महंगाई झेलकर अपना काम चलाती रहे!!0,00%
  • 4 июн. 2025 г.100 दिन शिक्षा के नाम पर, दिल्ली की बीजेपी सरकार के राज में, अब तक... क्या हुआ? -स्कूल ऑफ़ स्पेशलाइज्ड एक्सीलेंस की जगह सीएम-श्री स्कूल बनाए जायेंगे -हैप्पीनेस करिकुलम हटा कर साइंस ऑफ़ लिविंग लागू होगी -देशभक्ति करिकुलम नहीं, राष्ट्रनीति पढ़ाई जाएगी -बिज़नेस ब्लॉस्टर का पुनर्जन्म, नीव के रूप में होगा नोट: ये बदलाव सिर्फ़ नाम का नहीं है, ये शुरुआत है सरकारी स्कूलों को वापस 2015 से पहले वाले ढर्रे पर ले जाने की!! क्या नहीं हुआ? -प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस के ख़िलाफ़ न तो विधानसभा में कोई बिल आया, न ही अध्यादेश जारी हुआ -बोर्ड रिजल्ट्स आने के हफ्तों बाद तक मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री ने सरकारी स्कूलों के बच्चों की कोई सुध नहीं ली -सरकारी स्कूलों के बोर्ड परीक्षा में परफ़ॉर्मेंस की कोई रिपोर्ट ज़ारी नहीं हुई वैसे ये कोई शिकवा-शिकायत नहीं है क्योंकि इसी बदलाव का तो वादा किया था बीजेपी ने, अब बदलाव सबके सामने है...0,00%
  • 4 июн. 2025 г.कल JEE-Advanced का रिज़ल्ट आया, दिल्ली सरकार के स्कूलों से कितने बच्चे सलेक्ट हुए, पता नहीं.. पिछले साल 158 बच्चे सलेक्ट हुए थे। दो महीने पहले JEE-Mains का रिज़ल्ट आया था, दिल्ली सरकार के स्कूलों से कितने बच्चे सलेक्ट हुए, अभी तक नहीं पता.. पिछले साल 783 बच्चे सेलेक्ट हुए थे। पिछले महीने बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट्स आए थे, दिल्ली सरकार के स्कूलों का क्या परफॉरमेंस रहा, कोई ख़बर नहीं.. पिछले साल 12वीं में 97% और 10वीं में 94% रिजल्ट्स था। आख़िर इतनी खामोशी क्यों है? क्या ये सिर्फ़ बीजेपी सरकार की उदासीनता है, या फिर से सरकारी स्कूलों को हाशिए पर भेज कर प्राइवेट स्कूलों के लिए बाज़ार तैयार करने की मंशा?0,00%
  • 3 июн. 2025 г.आज इतिहास बना है। पंजाब के सरकारी स्कूलों के 32 बच्चों ने JEE एडवांस जैसे देश के सबसे कठिन एग्ज़ाम को पास कर लिया है ….और अब ये बच्चे IITs में पढ़ेंगे। कल तक पंजाब के जिन सरकारी स्कूलों में दीवारें तक नहीं थीं, आज वहाँ से बच्चों के सपने उड़ान भर रहे हैं … सीधा IIT तक। इन बच्चों की कहानियाँ ही इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल हैं … - अर्शदीप, जिसकी माँ एक सफाई कर्मचारी हैं और अकेले ही बेटे को पढ़ा रही हैं। - जसप्रीत, जिसके पिता की महीने की आमदनी सिर्फ़ ₹7000 है। - लखविंदर, जो एक दलित परिवार से है और आज पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन गया है। यह कोई संयोग नहीं है। यह @ArvindKejriwal और @BhagwantMann की सरकार का शिक्षा मॉडल है। जहाँ अच्छी शिक्षा सिर्फ कुछ खास का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि हर गरीब, किसान, मज़दूर, दलित, पिछड़े वर्ग के बच्चे का हक़ है। यह कोई आंकड़ा नहीं … यह एक क्रांति है। जात, धर्म, वर्ग और गरीबी से परे .. हर बच्चे को समान अवसर देने की क्रांति। पंजाब बदल रहा है। अब गरीब का बच्चा भी कह सकता है - मेरा सपना IIT है, और मैं उसे हासिल कर सकता हूँ।0,00%