✨ हमारा प्यारा इस्लाम ✨
Статистикаअस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह मसलके आला हज़रत सलामत रहे 🥰 👉 मोमिन पर नमाज़ 5 वक़्त का फर्ज़ है प्यारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फरमाते हैँ इल्म हासिल करना हर मुसलमान आक़ील बालिग़ मर्द व औरत पर फर्ज़ है। इब्ने माजा 224
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⚠️ शैख़ैन के जलवे ह़ैदर की ज़ुबानी ⚠️ मौला ह़ैदरे कर्रार (रद़ियल्लाहु अ़न्हु) के ख़ास़ ख़ादिम सय्यिदुना अब्दे ख़ैर कहते हैं कि मैंने मौला अ़ली से पूछा: "من أول الناس دخولا الجنة بعد رسول الله (ﷺ)؟" "आक़ा (ﷺ 💚) के बाद जन्नत में सबसे पहले कौन दाख़िल होगा?" मौला ने जवाब दिया: "أبو بكر و عمر." "अबू बक्र और उ़मर." फिर मैंने पूछा: "يا أمير المؤمنين! يدخلانها قبلك؟" "ऐ अमीरल् मुअ्मिनीन! वो दोनों आप से पहले जन्नत में दाख़िल होंगे?" मौला ने जवाब दिया: "أى والذى فلق الحبة وبرأ النسمة! إنهما ليأكلان من ثمارها، و يرويان من مائها، و يتكئان على فرشها، و أني موقوف مع معاوية بالحساب." "हाँ, उस (रब) की क़सम जिसने बीज को फाड़ा, और जान को पैदा किया! वो दोनों जिस वक़्त जन्नत के फल खा रहे होंगे, और उसका पानी पी रहे होंगे, और उसके बिस्तरों पर टेक लगाए होंगे, उस वक़्त मैं मुआ़वियह के साथ हिसाब के मैदान खड़ा होऊँगा." 📙अल्-ह़ुज्जह फ़ी बयानिल् मह़ज्जह (इमाम अस़्फ़हानी), ह़दीस नं. 328, जिल्द नं. 2, पेज नं. 369-370, पब्लिकेशन: दारुर् रायह (रियाद), पहला एडीशन, 1419 हि./1999 ई. 📙फ़द़ाइलुस़् स़िद्दीक़ (इमाम उ़शारी), ह़दीस नं. 43, पेज नं. 67, पब्लिकेशन: दारुस़् स़ह़ाबह (त़ंत़ा), पहला एडीशन, 1413 हि./1993 ई. __ मुह़म्मद क़ासिमुल् क़ादिरी अल्-अज़्हरी 03/08/26 ई.
ज़ुह्द किसे कहते हैँ इसका क्या माना है ? ज़ुह्द (الزُّهْد) का मत़लब है: दुनिया से दिल का बे-रग़्बत होना, यानी दुनिया की चीज़ों को मक़सद-ए-ज़िंदगी न बनाना और आख़िरत को तरजीह देना। इसका मतलब यह नहीं कि इंसान ह़लाल माल, कारोबार या ने'मतों को छोड़ दे। बल्कि ज़ुह्द यह है कि: *दुनिया दिल में न हो, हाथ में हो।* *अल्लाह की रज़ा को दुनियां के फ़ायदे पर तरजीह दे।* *ने'मत मिले तो शुक्र करे, न मिले तो सब्र करे।* *ह़राम और बेकार चीज़ों से बचे, और आख़िरत की तैयारी में लगा रहे।* *ह़ज़रत इमाम अह़मद रज़ा ख़ान रह़मतुल्लाहि अ़लैह ने भी ज़ुह्द का यही मफ़हूम बयान किया है कि दुनिया से दिल न लगाया जाए, न कि हलाल असबाब को बिल्कुल छोड़ दिया जाए।* मुख़्तसर तअरीफ़: *"ज़ुह्द यह है कि दुनिया दिल से निकल जाए, हाथ से नहीं।"* मिन्हाजुल आ़बिदीन (हिन्दी), स. 79 मे भी ज़ुह्द के बयान में ऐसा ही कुछ लिखा गया है ।
> *उ़ल्मा की फ़ज़िलत* ह़ज़रते सय्यिदुना अनस बिन मालिक رضى الله تعالى عنه फ़रमाते हैं कि नबिय्ये मुकर्रम, नूरे मुजस्सम, रसूले अकरम صلى الله تعالى عليه واله وسلم ने फ़रमाया : *"बेशक ज़मीन पर उ़-लमा की मिसाल उन सितारों की त़रह़ है जिन से बह़रो बर की तारीकियों में रहनुमाई हा़सिल की जाती है तो जब सितारे मांद (फ़िका) पड़ जाएं तो करीब है कि हिदायत याफ़्ता लोग गुमराह हो जाएं...."* 📙 मुस्नद अह़मद, जि.4, स.314, रक़म 12600 📙 जन्नत मे ले जाने वाले आ'माल : 35 (हिन्दी) . . . 💚 Hamara Pyara îslam 💚
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> *ह़दीस शरीफ़* ह़ज़रते अबू हुरैरा رَضِيَ اللَّهُ تَعَالٰى عَنْهُ से रिवायत है, ह़ुज़ूरे अक़्दस صَلَّى اللَّهُ تَعَالَى عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم ने इर्शाद फ़रमाया : *"तुम ज़रूर नेकी का हु़क्म दोगे और बुराई से मन्अ़ करोगे या अल्लाह तआ़ला तुम पर तुम ही में से बुरे लोगों को मुसल्लत कर देगा, फिर तुम्हारे नेक लोग दुआ करेंगे तो वोह क़ुबूल नहीं की जाएगी।"* सुनन तिर्मिज़ी, ह़दीस न. 2176 . . *अल्लाहु अकबर* . 💚 Hamara Pyara îslam 💚
> *फ़ज़ाइले जुम्आ़* *अह़मद अबू दावूद व तिरमिज़ी ब इफ़ादए तहसीन व नसाई व इब्ने माजह व इब्ने ख़ुजै़मा व इब्ने ह़िब्बान व ह़ाकिम ब इफ़ादए तस्दीह औस बिन औस और तबरानी औस़त में इब्ने अ़ब्बास رَضِ اللَّهُ عَنْهُم से रावी, कि फ़रमाते हैं صَلَّى اللهُ تَعَالٰى عَلَيْهِ وَسَلَّم :* > *"जो नहलाए और नहाए और अव्वल वक़्त आए और शुरूए़ ख़ुत्बा में शरीक हो और चल कर आए सुवारी पर न आए और इमाम से क़रीब हो और कान लगा कर ख़ुत्बा सुने और लग़्व काम न करे, उस के लिये हर क़दम के बदले साल भर का अ़मल है, एक साल के दिनों के रोज़े और रातों के क़ियाम का उसके लिए अज़्र है ।* अह़मद बिन ह़म्बल, जिल्द 5, 16173 बहारे शरीअ़त, जिल्द 1, ह़िस्सा 4, स. 760 . . . 💚 हमारा प्यारा इस्लाम 💚
Aisa gunah jisse bahut barbaadi
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खुद पर गुस्ल वाजिब करना रोज़े की हालत में खुद पर गुस्ल वाजिब करने से रोज़ा टूट जाता है। चूंकि इस में जुर्म, नाकिस है लिहाज़ा बा'द में कज़ा लाज़िम है, लेकिन कफ़्फ़ारा वाजिब नहीं। हाँ अगर रोज़े में एक से ज़्यादा मरतबा, मसलन दूसरी या तीसरी मरतबा गुस्ल वाजिब किया, तो अब ये जुर्म बड़ा होने के सबब, सिर्फ क़ज़ा काफी नहीं, बल्कि क़ज़ा के साथ साथ कफ़्फ़ारा भी वाजिब होगा। فتاوى ہندیه: جلد 1-صفحہ 225
*रमज़ान मुबारक के 03 घंटे बहुत क़ीमती हैं, पस अगर आप इनकी हिफाज़त करें तो ये 03 घंटे माहे रमज़ान के आख़िर तक 90 घंटे हो जाएंगे।* ये तीन घंटे: 1️⃣ इफ़्तार का घंटा: इफ़्तारी जल्दी तैयार कीजिए और दुआ के लिए वक़्त निकालिए, क्योंकि रोज़ेदार की दुआ उस वक़्त रद्द नहीं होती। लिहाज़ा ख़ुद अपने लिए, अज़ीज़ों और मरहूमीन के लिए दुआ करें। 2️⃣ दूसरा घंटा: रात का आख़िरी घंटा। पस ख़ुदावंद-ए-आलम से ख़लवत करें, कि अल्लाह आवाज़ देता है: क्या कोई दरख़्वास्त करने वाला है कि मैं क़बूल करूँ? क्या कोई इस्तिग़फ़ार करने वाला है कि मैं उसको माफ़ कर दूँ? पस उस वक़्त तुम इस्तिग़फ़ार करो। 3️⃣ तीसरा घंटा: सुबह की नमाज़ के बाद से सूरज निकलने तक मुसल्ले पर बैठे रहना और ज़िक्र-ए-ख़ुदा करना। ये 90 घंटे हैं, इन औक़ात को क़ीमती बनाएं, ज़िक्र-ए-ख़ुदा करें और ग़ीबत से दूरी इख़्तियार करें… नमाज़-ए-पंजगाना और नफ़्ल अदा करें, कि सिर्फ़ 30 दिन हैं और बहुत जल्दी गुज़र जाएंगे। तीन दुआएँ पढ़ने के लिए याद कर लें: 1- اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ حُسْنَ الْخَاتِمَةِ 2- اللَّهُمَّ ارْزُقْنِي تَوْبَةً نَصُوحًا قَبْلَ الْمَوْتِ 3- يَا اللَّهُ يَا رَحْمٰنُ يَا رَحِيمُ، يَا مُقَلِّبَ الْقُلُوبِ، ثَبِّتْ قَلْبِي عَلَى دِينِكَ *मजलिस अहले इस्लाम®* *🖋️🇹🇷CHISTI UVESH🇹🇷*
*🌹ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🌹* *💚الصــلوة والسلام عليك يارسول الله صلی الله عليه وسلم💚* ख़ुदा से कुछ भी मांगें लेकिन ये ज़रूर मांगा करें के वो आपको, ऐसे लोगों के शर (बुराई) से महफूज़ रखें जो आपका सुकून बर्बाद करने में माहिर हों.!
*🌹ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🌹* *💚الصــلوة والسلام عليك يارسول الله صلی الله عليه وسلم💚* *हज़रत अनस رضی اللّٰه تعالی عنہ से मर्वी है कि नबी ए करीम صلی الله عليه وسلم ने फ़रमाया* *सहरी खाओ क्योंकि सहरी खाने में बरकत है, और मोमिन की बेहतरीन सहरी खजूर है.!* 📕(صحیح مسلم جلد 5 صفحة 387)
*🌹ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🌹* *💚الصــلوة والسلام عليك يارسول الله صلی الله عليه وسلم💚* *फरमानें नबवी ﷺ है कि* > *जिस ने पांचों नमाज़ों पर उन के वुज़ु, अवक़ात(वक़्त), रुकूअ़ और सुजूद (सजदा) के साथ इस बात का ए'तिराफ़ करते हुवे हमेशगी इख़्तियार की, कि येह अल्लाह तआ़ला का ह़क़ है तो अल्लाह तआ़ला उस के जिस्म को जहन्नम पर ह़राम फ़रमा देगा ।* नेकियों की जज़ाएं और गुनाहों की सजाएं: 16 . . . 💚 हमारा प्यारा इस्लाम 💚
Soban Attari Best Speech
*ह़दीस शरीफ़ - (पोस्ट न.293)* 📿 ज़िक्रुल्लाह का सवाब 📿 ¹...ह़ज़रते सय्यिदुना अ़ब्दुल्लाह बिन अ़म्र रद़ियल्लाहु तआ़ला अ़न्हु से मरवी है कि ताजदारे मदीना सल्लल्लाहु तआ़ला अ़लैही वसल्लम ने फरमाया; *"...बेशक हर चीज़ की सफाई होती है और दिलों की सफाई अल्लाह का ज़िक्र है और ज़िक्रुल्लाह से बढ़ कर अल्लाह के अज़ाब से निजात (छुटकारा) दिलाने वाली कोई चीज़ नहीं।" सह़ाबए किराम عليهم الرضوان ने अ़र्ज़ किया, "...क्या अल्लाह की राह़ में जिहाद करना भी नहीं ?" फ़रमाया, "नहीं, अगचें मुजाहिद तलवार टूटने तक लड़ता रहे..."* 📗 अत्तरग़िब वत्तरहिब, जि. 2/254, रक़म 10 ²...हज़रते सय्यिदुना अ़ब्दुल्लाह बिन बुसर रद़ियल्लाहु तआ़ला अ़न्हु फ़रमाते हैं कि एक शख़्स ने अ़र्ज़ किया, "या रसूलल्लाह صلى الله تعالى عليه واله وسلم ! इस्लामी अह़कामात मुझ पर कसीर हो गए हैं मुझे कोई ऐसी चीज़ के बारे में बताइये जिस को मैं मज़बूती से थाम लूं। "...इर्शाद फ़रमाया, *"तेरी जबान हमेशा ज़िक्रुल्लाह (अल्लाह के ज़िक्र) से तर रहा करे..."* 📗 तिर्मिज़ी शरीफ़, जि.5/245, रक़म 3386 📕 जन्नत में ले जानें वाले आ'माल : 413 . . . 💚 Hamara Pyara Îslam 💚
*ह़दीस शरीफ़ - (पोस्ट न. 292)* *📿 ज़िक्रुल्लाह की बरकत 📿* ह़ज़रते सय्यिदुना अबू हुरैराह रद़ियल्लाहु तआ़ला अ़न्हु फ़रमाते हैं कि आक़ाए करीम सल्लल्लाहु तआ़ला अ़लैही वसल्लम मक्का के रास्ते पर सफ़र करते हुए एक पहाड़ से गुज़रे जिसे "जुमदान" कहा जाता था तो फ़रमाया, "इस जुमदान की सैर किया करो, मुफ़र्रिदून सब्क़त ले गए।" सह़ाबए किराम (अ़लैहिर्रह़्मतो व रिद़वान) ने अ़र्ज़ किया, "या रसूलअल्लाह ﷺ ! मुफ़र्रिदून से क्या मुराद है?" फ़रमाया, "अल्लाह عَزَّوَجَلَّ का कसरत से ज़िक्र करने वाले और वालियां।" मुस्लिम शरीफ़, स. 1439, रक़म 2676 जबकि एक रिवायत में है कि सहाबए किराम عَلَيْهِمُ الرّضوان ने अर्ज किया, "या रसूलअल्लाह ﷺ ! मुफ़र्रिदून कौन हैं?" फ़रमाया, "पाबन्दी के साथ अल्लाह तआ़ला का ज़िक्र करने वाले, ज़िक्र उन के बोझ को कम कर देता है और वोह क़ियामत के दिन अल्लाह की बारगाह में हल्के हो कर ह़ाज़िर होंगे..." 📗 तिर्मिज़ी शरीफ़, जि.5/342, रक़म 3607 📕 जन्नत में ले जाने वाले आ'माल : 410 . . . 💚 Hamara Pyara Îslam 💚
*ह़दीस शरीफ़ - (पोस्ट न. 291)* ह़ज़रते सय्यिदुना अ़ब्दुल्लाह बिन अ़म्र रद़ियल्लाहु तआ़ला अ़न्हु से रिवायत है कि हुज़ूर नबीए पाक ﷺ इर्शाद फ़रमाते हैं : > *"थोड़ा इ़ल्म ज़ियादा इ़बादत से बेहतर है और इंसान के फ़क़ीह (शरीयत का हुक़्म और क़ानून का जानने वाला) होने के लिए अल्लाह तआ़ला की इ़बादत करना ही काफी है और इंसान के जाहिल होने के लिए अपनी राय को पसंद करना ही काफ़ी है..."* 📗 त़बरानी औसत़, जि. 6/257, ह़दीस न. 8698 📕 जहन्नम में ले जाने वाले आ'माल : 32 (hindi) . . . 💚 Hamara Pyara Îslam 💚
*ह़दीस शरीफ़ - (पोस्ट न. 290)* ह़ज़रते सय्यिदुना अमिरे मुआ़विया रद़ियल्लाहु तआ़ला अ़न्हु रिवायत करते हैं मैं ने सरकारे मदीना सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम को फ़रमाते हुए सुना कि : > *"इ़ल्म सिखने से ही आता है और फ़िक़्ह गौरो फ़िक्र से ह़ासिल होती है और अल्लाह अज़्ज़ व जल्ल जिसके साथ भलाई का इरादा फ़रमाता है उसे दीन में समझ बूझ अ़ता़ फ़रमाता है और अल्लाह तआ़ला से उसके बन्दों में वोही डरते हैँ जो इ़ल्म वाले है..."* 📗 त़बरानी, जि. 19/511, रक़म 7312 📕 जन्नत में ले जाने वाले आ'माल : 32 (हिन्दी) . . . 💚 Hamara Pyara Îslam 💚
*ह़दीस शरीफ़ (पोस्ट न. 289)* अल्लाह (अज़्ज़ व जल्ल) के प्यारे मह़बूब सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम इर्शाद फ़रमाते हैं__ जब शैत़ान ज़मीन पर उतरा तो उस ने अ़र्ज़ की : "या रब ﷻ ! मेरा एक घर बना दे। > *" तो अल्लाह ﷻ ने इर्शाद फ़रमाया : "तेरा घर हम्माम (Bathroom) है।"* उस ने फिर अ़र्ज़ की: "मेरे लिये एक बैठक बना दे। > *" तो अल्लाह ﷻ ने इर्शाद फ़रमाया: "बाज़ार तेरी बैठक है।* " उस ने फिर अ़र्ज़ की : "मेरा एक मुनादी बना दे। > *" तो अल्लाह ﷻ ने इर्शाद फ़रमाया: "मज़ामीर (या'नी ढोल बाजे) तेरे मुनादी हैं।* " उस ने फिर अर्ज़ की "मेरे लिये खाना मुक़र्रर कर दे। > *" तो अल्लाह ﷻ ने इर्शाद फ़रमाया: "जिस (खाने की) चीज़ पर मेरा नाम न लिया जाए वोह तेरा खाना है।* " उस ने फिर अ़र्ज़ की "मेरे लिये कोई क़ुरआन बना दे। > *" तो अल्लाह ﷻ ने इर्शाद फ़रमाया: "(बुरे) अश्आ़र (कलाम) तेरा क़ुरआन हैं।* " उस ने फिर अ़र्ज़ की "मेरी ह़दीस बना दे। > *" तो अल्लाह ﷻ ने इर्शाद फ़रमाया: "झूट तेरी ह़दीस है।* " उस ने फिर अर्ज़ की "मेरे लिये शिकारी जाल बना दे। > *" तो अल्लाह ﷻ ने इर्शाद फ़रमाया: "औ़रतें तेरा जाल हैं।"* 📕 तख़रिज अह़ादीस अल् ह़या, जि. 6/271, ह़दीस न. 2622 📗 जहन्नम में ले जाने वाले आ'माल : 284 (हिन्दी) . . . 💚 Hamara Pyara Îslam 💚
ज़िना का बयान (पोस्ट न.288) *ह़ज़रते सय्यिदुना अबू हुरैराह रद़ियल्लाहु तआ़ला अ़न्हु से रिवायत है कि सय्यिदे आ़लम, नूरे मुजस्सम सल्लल्लाहु तआ़ला अ़लैही वसल्लम का फ़रमान है:* > "इब्ने आदम पर ज़िना का जो ह़िस्सा लिख दिया गया है वोह उसे ज़रूर पाएगा, (यानी ऐसा करेगा तो वोह ज़िना करना होगा) आंखों का ज़िना (गै़र मह़रम को) देखना है, कानों का ज़िना (ह़राम) सुनना है, ज़बान का ज़िना बोलना (या'नी फोह़्श कलाम करना) है, हाथों का ज़िना (ह़राम को) पकड़ना है, पाउं का ज़िना (ह़राम की त़रफ़) चलना है और दिल ज़िना की ख़्वाहिश और तमन्ना करता है और शर्मगाह (प्राइवेट पार्ट) इस की तस्दीक या तक्ज़ीब करती है।" सह़ीह़ मुस्लिम, स. 1141, ह़दीस न. 6754 . . . 💚 Hamara Pyara Îslam 💚