हिंदी/उर्दू कविताएँ
СтатистикаBeautiful Collection of Hindi/Urdu Poetry. कविता, शायरी एवं ग़जल संग्रहालय 🖍️ For Contact: @IronFist04 Join Group: @PoetriesUnlimited
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अगर इस reel ने आपको भी बचपन की होली याद दिलाई हो, तो इसे ज़रूर share कीजिए — शायद किसी और को भी अपनी पुरानी यादें याद आ जाएँ। Like और comment करके बताइए आपकी सबसे प्यारी होली की याद क्या है। आपका एक छोटा सा support इस सफर को आगे बढ़ाने की ताकत देता है। ❤️
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युद्ध नहीं जिनके जीवन में वे भी बहुत अभागे होंगे या तो प्रण को तोड़ा होगा या फिर रण से भागे होंगे दीपक का कुछ अर्थ नहीं है जब तक तम से नहीं लड़ेगा दिनकर नहीं प्रभा बाँटेगा जब तक स्वयं नहीं धधकेगा कभी दहकती ज्वाला के बिन कुंदन भला बना है सोना बिना घिसे मेहंदी ने बोलो कब पाया है रंग सलौना जीवन के पथ के राही को क्षण भर भी विश्राम नहीं है कौन भला स्वीकार करेगा जीवन एक संग्राम नहीं है।। अपना अपना युद्ध सभी को हर युग में लड़ना पड़ता है और समय के शिलालेख पर खुद को खुद गढ़ना पड़ता है सच की खातिर हरिश्चंद्र को सकुटुम्ब बिक जाना पड़ता और स्वयं काशी में जाकर अपना मोल लगाना पड़ता दासी बनकरके भरती है पानी पटरानी पनघट में और खड़ा सम्राट वचन के कारण काशी के मरघट में ये अनवरत लड़ा जाता है होता युद्ध विराम नहीं है कौन भला स्वीकार करेगा जीवन एक संग्राम नहीं है।। हर रिश्ते की कुछ कीमत है जिसका मोल चुकाना पड़ता और प्राण पण से जीवन का हर अनुबंध निभाना पड़ता सच ने मार्ग त्याग का देखा झूठ रहा सुख का अभिलाषी दशरथ मिटे वचन की खातिर राम जिये होकर वनवासी पावक पथ से गुजरीं सीता रही समय की ऐसी इच्छा देनी पड़ी नियति के कारण सीता को भी अग्नि परीक्षा वन को गईं पुनः वैदेही निरपराध ही सुनो अकारण जीतीं रहीं उम्रभर बनकर त्याग और संघर्ष उदाहरण लिए गर्भ में निज पुत्रों को वन का कष्ट स्वयं ही झेला खुद के बल पर लड़ा सिया ने जीवन का संग्राम अकेला धनुष तोड़ कर जो लाए थे अब वो संग में राम नहीं है कौन भला स्वीकार करेगा जीवन एक संग्राम नहीं है।। -अर्जुन सिसोदिया
होली की हार्दिक शुभकामनाएँ
कहाँ रुक गया भाई? अभी तो बहुत लंबा चलना है । इसी मोड़ पर मुड़ जाएगा? यही हार थक बैठ जाएगा ? बहुत लोगों की उम्मीदें हैं तुझसे, तेरी जीत में उनका जहाँ हैं, तेरी ख़ुशी में उनका जीवन, और बहुत से तुझे टूटता देखना चाहते हैं, तेरा गिरना उनकी ख़ुशी है, यहाँ तो नहीं, अभी तो बहुत कुछ करना है, चल फिर से, शुरू कर, अपनी ये लड़ाई, अपने आप से, अपने लिए ।
शुभ दीपावली 🪔
हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 🇮🇳
धन्य सुभग स्वर्णिम दिन तुमको धन्य तुम्हारी शुभ घड़ियां जिनमें पराधीन भारत मां की खुल पाईं हथकड़ियां भौतिक बल के दृढ़-विश्वासी झुके आत्मबल के आगे सत्य-अहिंसा के सम्बल से भाग्य हमारे फिर जागे उस बूढ़े तापस के तप का जग में प्रकट प्रभाव हुआ फिर स्वतन्त्रता देवी का इस भू पर प्रादुर्भाव हुआ नव सुषमा-युत कमला ने सब स्वागत का सामान किया कवि के मुख से स्वयं शारदा ने था मंगल-गान किया जय-जय की ध्वनि से गुंजित नभ-मंडल भी था डोल उठा नव जीवन पाकर भूतल का कण-कण भी था बोल उठा श्रद्धा से शत-शत प्रणाम उन देश प्रेम-दीवानों को अमर शहीद हुए जो कर न्यौछावर अपने प्राणों को कितने ही नवयुवक स्वत्व समरांगण में खुलकर खेले अत्याचारी उस डायर के वार छातियों पर झेले कितनों ने कारागृह में ही जीवन का अवसान किया अपने पावनतम सुध्येय पर सुख से सब कुछ वार दिया कितनों ने हंस कर फांसी को चूमा, मुख से आह न की सन्मुख अपने निश्चित पथ के प्राणों की परवाह न की अगणित मां के लाल हुए बलिदान देश बलिवेदी पर तब भारत माँ ने पाया ये दिवस आज का अति सुखकर पन्द्रह अगस्त का यह शुभ दिन कभी न भूला जायेगा स्वर्णाक्षर में अंकित होगा उच्च अमर पद पायेगा 15 अगस्त / महावीर प्रसाद ‘मधुप’
होली की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏🏽
We believed for 500 Years 🧡🥹.. Finally Lord Rama placed at his Birth place Ayodhya 🧡🚩.. Historic moment , Jai Shreeram 🧡🧎🙏
सर्वस्तरतु दुर्गाणि सर्वो भद्राणि पश्यतु। सर्वः कामानवाप्नोतु सर्वः सर्वत्र नन्दतु।। भावार्थः सब लोग कठिनाइयों को पार करें, कल्याण ही कल्याण देखें, सभी की मनोकामना पूर्ण हो, सभी हर परिस्थिती में आनंदित हो। नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें!
राह जहा तक जाएगी. राहगीर वहा तक जाएगा। तुम दरिया से क्या पूछ रहे हो. नीर कहा तक जाएगा। खींच धनुष की डोर. साध निशाना अपने मंजिल का. बाद में देखेंगे तीर कहा तक जाएगा।
Happy Diwali everyone! 🇮🇳 May this Diwali bring you happiness, prosperity, and success in all your endeavors!
Happy Dussehra 🙏🏽
Happy Janmashtami to all of you 🙏🌺🌺 जन्माष्टमी जय हो राधा रानी की जय श्री कृष्ण
Wish you all a very happy independence day 🇮🇳❤️
जहाँ अभिषेक-अम्बुद छा रहे थे, मयूरों-से सभी मुद पा रहे थे, वहाँ परिणाम में पत्थर पड़े यों, खड़े ही रह गये सब थे खड़े ज्यों। करें कब क्या, इसे बस राम जानें, वही अपने अलौकिक काम जानें। कहाँ है कल्पने! तू देख आकर, स्वयं ही सत्य हो यह गीत गाकर। बिदा होकर प्रिया से वीर लक्ष्मण-- हुए नत राम के आगे उसी क्षण। हृदय से राम ने उनको लगाया, कहा--"प्रत्यक्ष यह साम्राज्य पाया।" हुआ सौमित्रि को संकोच सुन के नयन नीचे हुए तत्काल उनके। न वे कुछ कह सके प्रतिवाद-भय से, समझते भाग्य थे अपना हृदय से। कहा आनन्दपूर्वक राम ने तब-- "चलो, पितृ-वन्दना करने चलें अब।" हुए सौमित्रि पीछे, राम आगे-- चले तो भूमि के भी भाग्य जागे। अयोध्या के अजिर को व्योम जानों उदित उसमें हुए सुरवैद्य मानों। कमल-दल-से बिछाते भूमितल में, गये दोनों विमाता के महल में। पिता ने उस समय ही चेत पाकर, कहा--"हा राम, हा सुत, हा गुणाकर!" सुना करुणा-भरा निज नाम ज्यों ही, चकित होकर बढ़े झट राम त्यों ही। - साकेत (मैथिलीशरण गुप्त)
कौन बचा है जिसके आगे इन हाथों को नहीं पसारा यह अनाज जो बदल रक्त में टहल रहा है तन के कोने-कोने यह क़मीज़ जो ढाल बनी है बारिश सर्दी लू में सब उधार का, माँगा-चाहा नमक-तेल, हींग-हल्दी तक सब क़र्ज़े का यह शरीर भी उनका बंधक अपना क्या है इस जीवन में सब तो लिया उधार सारा लोहा उन लोगों का अपनी केवल धार| - अरुण कमल जी
मेरा मुझमें कुछ नहीं, जो कुछ है सो तोर । तेरा तुझकौं सौंपता, क्या लागै है मोर ॥1॥ भावार्थ - मेरे साईं, मुझमें मेरा तो कुछ भी नहीं,जो कुछ भी है, वह सब तेरा ही । तब, तेरी ही वस्तु तुझे सौंपते मेरा क्या लगता है, क्या आपत्ति हो सकती है मुझे ? -संत कबीर दास
बहुत दिनों तक हुई परीक्षा अब रूखा व्यवहार न हो। अजी, बोल तो लिया करो तुम चाहे मुझ पर प्यार न हो॥ जरा जरा सी बातों पर मत रूठो मेरे अभिमानी। लो प्रसन्न हो जाओ गलती मैंने अपनी सब मानी॥ मैं भूलों की भरी पिटारी और दया के तुम आगार। सदा दिखाई दो तुम हँसते चाहे मुझ से करो न प्यार॥ - सुभद्रा कुमारी चौहान