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Jaun Elia - Hindi

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किस से इज़हार-ए-मुद्दआ कीजे  आप मिलते नहीं हैं क्या कीजे  एक ही फ़न तो हम ने सीखा है  जिस से मिलिए उसे ख़फ़ा कीजे Jaun elia Paid promotion available

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13 авг.
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  • अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो, जान थोड़ी है ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिन हमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी है Rahat Indori 🎧

  • साथ देने का दिलाया था भरोसा तू ने और फिर छोड़ दिया मुझ को अकेला तूने अपनी मर्ज़ी से मुझे छोड़ के जाने वाले मेरी मर्ज़ी को कहाँ छोड़ दिया था तूने हाए अफ़सोस तुझे अब भी ये मालूम नहीं ज़िंदगी मेरी बना दी है तमाशा तूने जैसे-तैसे मैं बिना रोए चली जाती मगर किस लिए देख लिया मुड़ के दुबारा तूने बात रुख़्सार की होती तो कोई बात न थी आज तो रूह पे मारा है तमाँचा तूने ~ हिमांशी बाबरा

  • 6 авг.1 384205

    कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया वो लोग बहुत ख़ुश-क़िस्मत थे जो इश्क़ को काम समझते थे या काम से आशिक़ी करते थे हम जीते-जी मसरूफ़ रहे कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया काम इश्क़ के आड़े आता रहा और इश्क़ से काम उलझता रहा फिर आख़िर तंग आ कर हम ने दोनों को अधूरा छोड़ दिया ~ Faiz ahmad Faiz

  • 3 авг.1 87026

    Hey everyone,, just puch rha agr kisika kuch sunane ka man ho to ek sham voice call stream kiya jaye,,,apna opinion jrur dejiyega 👀...

  • 3 авг.1 864135

    तुम्हारा हिज्र मना लूँ अगर इजाज़त हो मैं दिल किसी से लगा लूँ अगर इजाज़त हो तुम्हारे बा'द भला क्या हैं वअदा-ओ-पैमाँ बस अपना वक़्त गँवा लूँ अगर इजाज़त हो तुम्हारे हिज्र की शब-हा-ए-कार में जानाँ कोई चराग़ जला लूँ अगर इजाज़त हो जुनूँ वही है वही मैं मगर है शहर नया यहाँ भी शोर मचा लूँ अगर इजाज़त हो किसे है ख़्वाहिश-ए-मरहम-गरी मगर फिर भी मैं अपने ज़ख़्म दिखा लूँ अगर इजाज़त हो तुम्हारी याद में जीने की आरज़ू है अभी कुछ अपना हाल सँभालूँ अगर इजाज़त हो ~ Jaun Elia

  • 31 июл.2 090125

    हम से क्या हो सका मोहब्बत में ख़ैर तुम ने तो बेवफ़ाई की ~ Firaq Gorakhpuri

  • 27 июл.2 720192

    मेरे घर में चूल्हा था रोज़ खाना पकता था रोटियाँ सुनहरी हैं गर्म गर्म ये खाना खुल नहीं रही आँखें क्या मैं मरने वाला हूँ माँ अजीब थी मेरी रोज़ अपने हाथों से मुझ को वो खिलाती थी कौन सर्द हाथों से छू रहा है चेहरे को इक निवाला हाथी का इक निवाला घोड़े का इक निवाला भालू का ~ Javed Akhtar

  • 25 июл.2 630122

    दिया ख़ामोश है लेकिन किसी का दिल तो जलता है चले आओ जहाँ तक रौशनी मा'लूम होती है ~ नुशूर वाहिदी

  • 21 июл.3 220294

    लड़ो लड़ नहीं सकते, बोलो बोल नहीं सकते, लिखो लिख नहीं सकते, साथ दो साथ नहीं दे सकते, काम करने वालो का मनोबल बढ़ाओ यदि वो भी नहीं कर सकते हो, जो कर रहे हैं, उनका मनोबल मत तोड़ों क्योंकि वो तुम्हारे हिस्से की लड़ाई लड़ रहा है। ~ खुदीराम बोस

  • 16 июл.3 550375

    без подписи

  • 12 июл.3 8102615

    कहानी जिस की थी उस के ही जैसा हो गया था मैं तमाशा करते करते ख़ुद तमाशा हो गया था मैं न मेरा नाम था न दाम बाज़ार-ए-मोहब्बत में बस उस ने भाव पूछा और महँगा हो गया था मैं कई दिन तक उसे देखा नहीं जब उस की खिड़की पर तो अपनी आँखों में खिड़की का पर्दा हो गया था मैं बिछड़ कर उस से तन्हाई का वो 'आलम रहा मुझ में कि इक दिन आइने में उस का चेहरा हो गया था मैं बुझा तो ख़ुद में इक चिंगारी भी बाक़ी नहीं रक्खी उसे तारा बनाने में अंधेरा हो गया था मैं बिता दी 'उम्र मैं ने उस की इक आवाज़ सुनने में उसे जब बोलना आया तो बहरा हो गया था मैं बहुत दिन बा'द वो इक दिन बिछड़ कर फिर मिला मुझ को मगर इस बार मिलते ही अकेला हो गया था मैं वो दुश्मन दोस्त बन कर घात में था अच्छे मौक़े की पता उस दिन चला जिस दिन निहत्ता हो गया था मैं सो ख़ुद को ढूँड कर इक रोज़ गोली मार दी मैं ने जिसे चाहा उसी की जाँ का ख़तरा हो गया था मैं ~ शकील आजमी

  • 5 июл.4 030196

    आज पानी गिर रहा है, बहुत पानी गिर रहा है, रात-भर गिरता रहा है, प्राण मन घिरता रहा है, अब सवेरा हो गया है, कब सवेरा हो गया है, ठीक से मैंने न जाना, बहुत सोकर सिर्फ़ माना— क्योंकि बादल की अँधेरी, है अभी तक भी घनेरी, अभी तक चुपचाप है सब, रातवाली छाप है सब, चार भाई चार बहिनें, भुजा भाई प्यार बहिनें, खेलते या खड़े होंगे, नज़र उनकी पड़े होंगे। पिताजी जिनको बुढ़ापा, एक क्षण भी नहीं व्यापा, रो पड़े होंगे बराबर, पाँचवें का नाम लेकर, पाँचवाँ मैं हूँ अभागा, जिसे सोने पर सुहागा, पिताजी कहते रहे हैं, प्यार में बहते रहे हैं, आज उनके स्वर्ण बेटे, लगे होंगे उन्हें हेटे, क्योंकि मैं उन पर सुहागा बँधा बैठा हूँ अभागा, और माँ ने कहा होगा, दुःख कितना बहा होगा आँख में किस लिए पानी, वहाँ अच्छा है भवानी, वह तुम्हारा मन समझ कर, और अपनापन समझ कर, गया है सो ठीक ही है, यह तुम्हारी लीक ही है, पाँव जो पीछे हटाता, कोख को मेरी लजाता, इस तरह होओ न कच्चे, रो पड़ेगे और बच्चे, पिताजी ने कहा होगा, हाय कितना सहा होगा, कहाँ, मैं रोता कहाँ हूँ, धीर मैं खोता, कहाँ हूँ, गिर रहा है आज पानी, याद आता है भवानी, उसे थी बरसात प्यारी, रात-दिन की झड़ी झारी, खुले सिर नंगे बदन वह, घूमता फिरता मगन वह, बड़े बाड़े में कि जाता, बीज लौकी का लगाता, तुझे बतलाता कि बेला ने फलानी फूल झेला, तू कि उसके साथ जाती, आज इससे याद आती, मैं न रोऊँगा,—कहा होगा, और फिर पानी बहा होगा, ~ भवानीप्रसाद मिश्र

  • 4 июл.3 3901712

    जिंदगी के बाजार में हर एक शय की कीमत है चीजों की मिलने से पहले, और रिश्तों की खोने के बाद

  • 2 июл.4 000247

    किसी के हुस्न पे मरकर, इबादत तुम नहीं करना कभी माँ बाप से बच्चों, बगावत तुम नहीं करना यहाँ पर दिल लगाने की सज़ा बस मौत है सुन लो नये इस दौर के लड़कों,मुहब्बत तुम नहीं करना अगर रिश्ता नहीं भाया तो उसको तोड़ सकती थी तू अपने फैसले का रुख कभी भी मोड़ सकती थी ज़रूरत क्या पड़ी तुमको धकेला जो पहाड़ों से किसी चेतन की खातिर तुम,ये केतन छोड़ सकती थी ~ रवि सरोहा

  • 29 июн.4 080116

    है कुछ ऐसा कि जैसे ये सब कुछ इस से पहले भी हो चुका है कहीं ~ Jaun elia

  • 29 июн.4 380911

    तुम्हें उस से मोहब्बत है तो हिम्मत क्यूँ नहीं करते किसी दिन उस के दर पे रक़्स-ए-वहशत क्यूँ नहीं करते इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँ नहीं करते तुम्हारे दिल पे अपना नाम लिक्खा हम ने देखा है हमारी चीज़ फिर हम को इनायत क्यूँ नहीं करते मिरी दिल की तबाही की शिकायत पर कहा उस ने तुम अपने घर की चीज़ों की हिफ़ाज़त क्यूँ नहीं करते बदन बैठा है कब से कासा-ए-उम्मीद की सूरत सो दे कर वस्ल की ख़ैरात रुख़्सत क्यूँ नहीं करते क़यामत देखने के शौक़ में हम मर मिटे तुम पर क़यामत करने वालो अब क़यामत क्यूँ नहीं करते मैं अपने साथ जज़्बों की जमाअत ले के आया हूँ जब इतने मुक़तदी हैं तो इमामत क्यूँ नहीं करते तुम अपने होंठ आईने में देखो और फिर सोचो कि हम सिर्फ़ एक बोसे पर क़नाअ'त क्यूँ नहीं करते बहुत नाराज़ है वो और उसे हम से शिकायत है कि इस नाराज़गी की भी शिकायत क्यूँ नहीं करते कभी अल्लाह-मियाँ पूछेंगे तब उन को बताएँगे किसी को क्यूँ बताएँ हम इबादत क्यूँ नहीं करते ~ Farhat Ehsas

  • 23 июн.4 3803119

    सोच रहा हूँ जंग छिड़ी तो बाज़ारों का क्या होगा? बंदूकें तो बिक जाएँगी, गुलदस्तों का क्या होगा? आज अब्बू ने खाँस दिया तो एक अजीब ख़्याल आया, छत के एकदम गिर जाने से दीवारों का क्या होगा? ~ Jubair ali Tabish

  • 15 июн.5 012236

    एक मिसरा हूं मैं, एक मिसरा हो तुम दोनों मिल जाए तो शेर हो जाएगा घर पहुंच कर खुशी तो मिलेगी मगर घर पहुंच कर सफर खत्म हो जायेगा ~ Tahir faraz

  • 14 июн.5 124116

    मेरे घर में चूल्हा था रोज़ खाना पकता था रोटियाँ सुनहरी हैं गर्म गर्म ये खाना खुल नहीं रही आँखें क्या मैं मरने वाला हूँ माँ अजीब थी मेरी रोज़ अपने हाथों से मुझ को वो खिलाती थी कौन सर्द हाथों से छू रहा है चेहरे को इक निवाला हाथी का इक निवाला घोड़े का इक निवाला भालू का मौत है कि बे-होशी जो भी ग़नीमत है मौत है कि बे-होशी जो भी है ग़नीमत है आज तीसरा दिन था आज तीसरा दिन था ~ Javed Akhtar

  • 14 июн.4 0802911

    शर्म, दहशत, झिझक, परेशानी नाज से काम क्यों नहीं लेती आप, वो, जी, मगर ये सब क्या है तुम मेरा नाम क्यों नहीं लेती ~ Jaun Elia