tgindex
मिर्ज़ा ग़ालिब

मिर्ज़ा ग़ालिब

Статистика
@mirza_galibхинди

‘ ग़ालिब ‘ कौन है पूछते हैं वो की ‘ग़ालिब ‘ कौन है ? कोई बतलाओ की हम बतलायें क्या 😏 Link for boost this channel- https://t.me/boost/mirza_galib

Последний пост
13 авг.
Последнее чтение
14 авг.
Постов за неделю
5
Всего постов
26
Тип
открытый
Язык
хинди
В каталоге с
13 авг.
Подписчики
6 940
+7 за 4 дн.
Сутки
0
0,00%
Неделя
 
Месяц
 
Просмотров на пост
2 044
26 постов
Вовлечённость
29,5%
к подписчикам
Постов в день
0,7
всего 26
Упоминаний
0
каналов
Охват размещения
оценка
1/24сутки в ленте
426
1/48двое суток
488
1/72трое суток
526

Оценка по просмотрам недавних постов: пост набирает почти всё за первые сутки.

Посты

  • *जो फूल हर किसी के आँगन मे खिले.. *दुआ करो यारों की कोई ऐसा ना मिले!!🫣 ✍️ किसको किसको समझ आयी lines comment करके बताओ

  • ❀1 बार देखा उसने = मोहब्बत नहीं है ❌ ❀2 बार देखा उसने =मोहब्बत नहीं है ❌ ❀बार बार देखा उसने = मोहब्बत नहीं है ❌ ❀हज़ार बार देखा उसने = मोहब्बत नहीं है ❌ ❀हज़ारो की भीड़ मे भी मुझे देखा उसने = मोहब्बत है ✅ ❀𝘼𝙧𝙨𝙝𝙖𝙙✍️ क्या ये lines कुछ हद तक सच है?comment करके जरूर बताये 🥰

  • *मोहब्बत का कोई सबूत नहीं होता.. *नाम सुनते ही दिल की धड़कन बढ़ जाये समझ लो मोहब्बत है!!

  • बड़े दिन बाद, कोई ज़बाब आया ये शुक्र है, उसे मेरा ख्याल आया क्यूं ना निकलें, नींद में आंसू मेरे बहुत दिन बाद तेरा,ख़्वाब आया हर एक बूंद में है, एक घर रोशन मेरे हिस्से में चांद का दाग आया तुम से नफ़रत भी, लाज़वाब थी तुम पे इश्क़ भी, बेहिसाब आया ..

  • मोहब्बत का कोई तराज़ू नहीं होता, इसे तो बस सच्चाई और नीयत के तराजू में तौला जाता है।

  • 10 авг.1 161174

    ​ न तमाशा किया, न शिकायत की, न कोई सवाल उठाया, उसने छोड़ दिया हाथ मेरा, और मैंने ख़ामोशी से बस सिर झुका लिया..!!

  • 10 авг.1 138135

    ​उम्र भर का साथ न माँग, बस इतना सा एहसान कर दे, जब तक साथ रहे, कोई तीसरा दरमियाँ न आए।

  • 1 авг.2 3682310

    बिन हकीम ही तबियत सही हो गयी तो इसमें हैरानी कैसी.. उनका मुस्कुराकर हाल पूछना भी एक शिफा की दवा है..!!

  • 30 июл.2 6003312

    हर कोई मेरा हो जाए... ऐसी मेरी तक़दीर नहीं... मैं वो शीशा हूँ.... जिसकी कोई तस्वीर नहीं... दर्द से रिश्ता है मेरा... खुशियां मेरा नसीब नहीं... मुझे भी कोई याद करे... मैं इतनी भी खुशनसीब नहीं...😘😘

  • 23 июл.3 407229

    *दिन तो ढल जाता है ज़माने के कामों में उलझकर, *पर ये शाम ढलते ही तेरी यादों का चिराग़ जल उठता है।

  • 23 июл.3 31986

    *​शीशा और रिश्ता दोनों ही बहुत नाज़ुक होते हैं, *एक ज़रा सी चोट से टूटता है, और दूसरा ज़रा सी गफ़लत से। गफ़लत: अनदेखी/लापरवाही/गलतफहमी

  • 23 июл.3 148134

    ख़ामोश मोहब्बत ​तेरा ज़िक्र न भी हो तो क्या, तेरी फ़िक्र हर पल रहती है, ये मोहब्बत है साहब, जो ख़ामोशी में भी बहुत कुछ कहती है।

  • 22 июл.3 15199

    *तेरे मिलने से सुकून-ए-दिल कुछ यूँ मिला मुझे, *जैसे बरसों भटके मुसाफ़िर को मंज़िल का पता मिल गया हो..!!

  • 22 июл.2 99275

    *ज़िंदा थे तो राहों में पत्थर उछालते रहे लोग, ग़ालिब *मर गए तो वही हाथ उठाकर हमारी ​मगफिरत की दुआ करने लगे। ​मगफिरत: गलतियों की माफ़ी अर्थ: जब तक इंसान ज़िंदा रहता है, दुनिया उसे नीचा दिखाने और दर्द देने में कोई कसर नहीं छोड़ती; और उसके जाते ही वही लोग संत बनकर उसके लिए दुआएँ माँगने का नाटक करते हैं।

  • 22 июл.2 63294

    *क़ब्र-ए-आरज़ू पर चिराग़ जलाने तो बहुत आए बाज़ार में, *मगर ज़िंदा जिस्म की तड़प देखने कोई हम-नफ़स न आया। अर्थ: जब तक इंसान ज़िंदा तड़पता रहता है, तब उसका हाल पूछने कोई सच्चा साथी नहीं आता; पर जब ख़्वाहिशें और इंसान दोनों मर जाते हैं, तो ज़माना तमाशा देखने और हमदर्दी जताने आ जाता है।

  • 21 июл.2 603122

    *ज़िंदगी एक दश्त-ए-सफ़र है, मुसाफ़िर हैं हम, *कभी धूप का साया, तो कभी छाँव का भरम।

  • 21 июл.2 41323

    "इस 'दौर-ए-हाज़िर' का यही सबसे बड़ा 'फ़लसफ़ा' है साहेब, यहाँ 'अहल-ए-दिल'  तन्हा हैं और 'अहल-ए-अक्ल' हुकूमत कर रहे हैं।" 💯 ​📖 लफ्ज़-ओ-मायने (Meaning): • दौर-ए-हाज़िर: आधुनिक दौर/आज का ज़माना • फ़लसफ़ा: सिद्धांत/Reality 'अहल-ए-दिल': (दिल वाले) अहल-ए-अक्ल' :(दिमाग वाले)

  • 21 июл.2 209105

    *एक दौर था ज़ब सिर्फ हम उनके थे.. *एक दौर अब है कि ना जाने उनके कितने है..!! जिसको समझ आया हो वो comment मे yes लिखें.. 🙃

  • 20 июл.2 511103

    हां..., एक सवेरा आएगा....!!!! ---------------------------------------------------- ये क्षणिक धुंध.. सताएगा...., माना विवेक ये खायेगा....., रहना अडिग तुम मार्ग पर....., वो एक सवेरा आएगा........, अन्याय का दरिया पल भर का..., तुमसे टकराने आएगा..., हैं.., घात लगाए वो बैरी......, निहत्थों को शिकार बनाएगा..., अब चुप रहना कायरता है.., ये युद्ध की लौ को बुझाएगा...., खोलो अंधकार की पट्टी तुम...., जो तुमको न्याय दिलाएगा...., हां , वो एक सवेरा आएगा..., हो जाओ अब तुम एकजुट...., वो तुम्हें डराने आएगा...., रहना तुम निर्भय.., शांतिपूर्ण..., जो न्याय का परचम लहराएगा...., हां..., वो एक सवेरा आएगा.....!!!!! 🌺🌸 PRAKASH TIWARI 🌸🌺 #justiceforyouth #sonamwangchuk #cjp #allindiayouth #education

  • 19 июл.2 200149

    📖 दौर-ए-हाज़िर (आज का ज़माना) - मुकम्मल ग़ज़ल ✨ यहाँ चेहरों पर नक़ाब, दिलों में मलाल रहता है, अब इस शहर में हर शख़्स बेमिसाल रहता है। वफ़ा की उम्मीद तुम किससे कर रहे हो दोस्त, यहाँ तो साया भी उजाला होने का तलबगार रहता है। ज़रूरत हो तो लोग पलकों पर बिठा लेते हैं, मतलब निकल जाए तो पूछना भी मुहाल रहता है। हमने भी सीख लिया है महफ़िल में मुस्कुरा कर बैठना, वरना इस दिल में तो दुखों का पूरा जंजाल रहता है। गिरा दी हैं हमने भी उम्मीदों की वो तमाम दीवारें, अब न कोई आने की आस, न कोई मलाल रहता है।