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प्यारी शायरी

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चांद से चेहरे रंगीं आंचल चलते फिरते साए हैं

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  • 6 авг.इससे पहले कि इश्क का ये तिलिस्म टूटे, मैं मौत के आग़ोश में समा जाना चाहती हूं 💜🌸1,51%
  • 24 июл.मै बचाता रहा दीमक से घर अपना और चंद कुर्सी के कीड़े पूरा मुल्क खा गए..!!1,25%
  • 10 июл.वो दे तो शुक्र उसका , न दे तो मलाल नहीं , मेरे रब के फैसले कमाल है , उन फैसलों पे कोई सवाल नहीं !0,85%
  • 1 авг.चलो फिर कागजों पर दास्ताने-ए-दर्द लिखते हैं ज़माना मुंतज़िर होगा गमों पर मुस्कुराने को..!!0,82%
  • 28 июл.तलाश न कर उसकी जो तेरी क़िस्मत में नहीं न ढूंढ वहां ख़ुशी जहाँ तेरी मौजूदगी शामिल नहीं न खो उन परछाईयों में जहां तेरे अक्स को इजाज़त नहीं न ठहर उन राहों पर जहां तेरी कोई मंजिल नहीं कुछ फ़ासले ही बेहतर हैं शायद कोई जरिया तेरे नज़दीक नहीं जितनी भी ख़्वाहिश रख लें हम मौक़े जो मिलते वो काफ़ी नहीं तमाम उम्र ढूंढते हैं हम सुक़ून उलझनें हैं काफ़ी,इत्मीनान हासिल नहीं...0,78%
  • 29 июл.कोई तदबीर करो,वक़्त को रोको यारों सुबह देखी ही नहीं,शाम हुई जाती है....!!0,78%
  • 30 июл.जिनसे उम्मीदें खत्म हो जाती हैं फिर उनसे शिकायतें नहीं रहती0,72%
  • 30 июл.मशहूर तो बहुत है मेरे अल्फाजों की तासीर मगर वो एक शख्स मुझसे मनाया न गया।0,65%
  • 28 маяअगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा मगर तुम्हारी तरह कौन मुझ को चाहेगा तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा मगर वो आँखें हमारी कहाँ से लाएगा न जाने कब तिरे दिल पर नई सी दस्तक हो मकान ख़ाली हुआ है तो कोई आएगा मैं अपनी राह में दीवार बन के बैठा हूँ अगर वो आया तो किस रास्ते से आएगा तुम्हारे साथ ये मौसम फ़रिश्तों जैसा है तुम्हारे बा'द ये मौसम बहुत सताएगा! बशीर बद्र0,62%
  • 2 июл.जिसने तकदीरें लिखी है उसने कुछ तो सोचा होगा यूं बेवजह तो कोई किसी का नहीं होता0,47%
  • 9 июл.हमें माफ कर देना मेरी बच्ची हमने धर्म जीते मुल्क जीते मेडल जीते चुनाव जीते मनुष्यता से हार गए मेरी बच्ची हमें माफ कर देना कि हम, तुम्हारे रहने लायक मुल्क नहीं बना पाए जहां दिन और रात किसी भी समय सड़क पर बेखौफ घूम सको तुम हम बिकी हुई मनुष्यता वाले मुल्क के नागरिक हैं पहले खुद बिकेंगे फिर तुम्हे बेचेंगे हमने किताबों, ग्रंथों, चलचित्रों, रीलों में कामुकता नहीं भरी जेहन में भरी है जो अब सड़ांध मारने लगी है, हम विश्व की सबसे बड़ी विकृत मानसिकता वाले पुरुष हैं हम कामुकता से भरे चलते फिरते विस्फोटक है जिनसे हर बच्ची को खतरा है हम संकुचित धर्म संकुचित सोच संकुचित मनुष्यता लेकर जीवित हैं और बेशर्मी से उन्नत और विकसित कहते हैं खुद को हमारे विकास पर हमारे उन्नत होने पर हमारे चरित्र पर तुम शक करके बाहर निकलना मेरी बच्ची यह मुल्क दुष्चरित्र पुरुषों से अटा पड़ा है यहां का पुरुष स्त्री के संदर्भ में विश्वास के काबिल कत्तई नहीं है।। वीरेंदर भाटिया0,42%
  • 14 июл.बहुत मुमकिन है मासूमों को कातिल कह दिया जाए बहुत मुमकिन है कातिल को मसीहा चुन लिया जाए बहुत मुमकिन है मेरा कत्ल हो और मैं ही मुजरिम हूँ बहुत मुमकिन है मेरा घर जले और मैं ही मुल्जिम हूँ बहुत मुमकिन है गद्दारों को मसनद पर बैठाया जाए वफादारों को मुमकिन है कि सूली पर चढ़ाया जाए बहुत मुमकिन है आइंदा से हकगोई पर पहरा हो बहुत मुमकिन है मसनद पर जो बैठा है वह बहरा हो बहुत मुमकिन है जो घर के मुहाफिज हैं लुटेरे हों जिन्होंने सांप पाले हैं वह मुमकिन है सपेरे हों बहुत मुमकिन है जो खामोश हैं वह चीख उठें एक दिन बहुत मुमकिन है वह जो चीखते हैं मर मिटें एक दिन कलाम: कामरान गनी सबा @Pyari_Shayri0,39%