Rahat Indori Shayari
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साथ देने का दिलाया था भरोसा तू ने और फिर छोड़ दिया मुझ को अकेला तूने अपनी मर्ज़ी से मुझे छोड़ के जाने वाले मेरी मर्ज़ी को कहाँ छोड़ दिया था तूने हाए अफ़सोस तुझे अब भी ये मालूम नहीं ज़िंदगी मेरी बना दी है तमाशा तूने जैसे-तैसे मैं बिना रोए चली जाती मगर किस लिए देख लिया मुड़ के दुबारा तूने बात रुख़्सार की होती तो कोई बात न थी आज तो रूह पे मारा है तमाँचा तूने ~ हिमांशी बाबरा
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विश्वगुरु - नीलोत्पल मृणाल
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पुर हूँ मैं शिकवे से यूँ राग से जैसे बाजा इक ज़रा छेड़िए फिर देखिए क्या होता है
चुरा के मुट्ठी में दिल को छुपाए बैठे हैं बहाना ये है कि मेहंदी लगाए बैठे हैं
तुम से मिल कर इमली मीठी लगती है तुम से बिछड़ कर शहद भी खारा लगता है
सितम ये है कि हम जैसे गरीबों की कलाई में घड़ी होती किसी की है किसी का वक़्त होता है ~ आदित्य सिंह 'आदि
क्या मौसमों के टूटते रिश्तों का ख़ौफ़ है शीशे सजा लिए हैं सभी ने दुकान पर 👉 Join @Rahat_Indori #RahatIndori
तुम्हारी निश्चल आँखें तारों-सी चमकती हैं मेरे अकेलेपन की रात के आकाश में प्रेम पिता का दिखाई नहीं देता ईथर की तरह होता है ज़रूर दिखाई देती होंगी नसीहतें नुकीले पत्थरों-सी दुनिया भर के पिताओं की लंबी क़तार में पता नहीं कौन-सा कितना करोड़वाँ नंबर है मेरा पर बच्चों के फूलों वाले बग़ीचे की दुनिया में तुम अव्वल हो पहली क़तार में मेरे लिए मुझे माफ़ करना मैं अपनी मूर्खता और प्रेम में समझता था मेरी छाया के तले ही सुरक्षित रंग-बिरंगी दुनिया होगी तुम्हारी अब जब तुम सचमुच की दुनिया में निकल गई हो मैं ख़ुश हूँ सोचकर कि मेरी भाषा के अहाते से परे है तुम्हारी परछाईं। • चंद्रकांत देवताले 👉 Join @Rahat_Indori
कभी बादल, कभी कश्ती, कभी गर्दाब लगे कभी बादल, कभी कश्ती, कभी गर्दाब लगे वो बदन जब भी सजे कोई नया ख्वाब लगे एक चुप चाप सी लड़की, न कहानी न ग़ज़ल याद जो आये कभी रेशम-ओ-किम्ख्वाब लगे अभी बे-साया है दीवार कहीं लोच न ख़म कोई खिड़की कहीं निकले कहीं मेहराब लगे घर के आँगन मैं भटकती हुई दिन भर की थकन रात ढलते ही पके खेत सी शादाब लगे - निदा फ़ाज़ली 👉 Join @Rahat_Indori
आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो राह के पत्थर से बढ़ कर कुछ नहीं हैं मंज़िलें रास्ते आवाज़ देते हैं सफ़र जारी रखो एक ही नद्दी के हैं ये दो किनारे दोस्तो दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो आते जाते पल ये कहते हैं हमारे कान में कूच का ऐलान होने को है तय्यारी रखो ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ाएम रहे नींद रखो या न रखो ख़्वाब मेयारी रखो ये हवाएँ उड़ न जाएँ ले के काग़ज़ का बदन दोस्तो मुझ पर कोई पत्थर ज़रा भारी रखो ले तो आए शाइरी बाज़ार में 'राहत' मियाँ क्या ज़रूरी है कि लहजे को भी बाज़ारी रखो - राहत इंदौरी 👉 Join @Rahat_Indori
तुम से मिल कर इमली मीठी लगती है तुम से बिछड़ कर शहद भी खारा लगता है