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कई रोज हो गए आपको नही देखा जानते हो हमने अपने आप को नहीं देखा। महफिलों में भी तन्हा रहा हू मै ऐ राज न नीद आई है न ही कोई ख्वाब देखा है।।
बड़ी याद आती है और गमें जुदाई है रोया नही हू बस आंख भर आई है। कभी तू भी तो याद कर लिया कर ऐ राज पूरे शहर में तन्हाई ही तन्हाई है।।
जल गई मोहब्बत अपनी अब नफरत की आग में । मेरा राज अब रहता है किसी ओर की फिराक में।।
भूल गया मैं अब तो अदाये मोहब्बत जबसे निगाहे मोड़ ली उसने। उसे इल्म इतना भी न रहा ऐ राज उसके खातिर दुनिया छोड़ दी मैंने।।
मैं जिस सक्श से मोहब्बत करता रहा । ऐ राज वो हमसे मिलने से डरता रहा ।।
अब उनसे दूर हू तब भी जी रहा हू जिंदगी खुशनुमा। आजकल बड़ी रौनक है बेशक उजड़ा हुआ है मेरा मका।।
बड़ी मुद्दत से मैने कोई ख्वाब नही देखा। खुशियों को मैने अपने आस पास नही देखा। जो अपना था उसने कभी सोने नहीं दिया। जैसे ताजमहल ने कभी मुमताज नहीं देखा।।
बड़ी तकलीफ होती है जब कोई अपना दिल तोड़ देता है । जरा सा भी नही सोचता बस ऐ राज तड़पता छोड़ देता है।।
ऐ जिंदगी तुझसे क्या शिकायत करते । जिंदा अब भी है राज कई बार मरते मरते ।। तुमसे मोहब्बत न होती तो जीने की हसरत न होती। ये जान तुमको ही दे देंगे कभी हंसते हंसते।।
वो सांस है तु धड़कन है। एक मेरे पास नहीं यही अड़चन है।।
तुम्हें पाकर के भी फिर से पाने की कोशिश है जानता हूँ ऐ राज होती रोज तेरे इश्क़ की बारिश है। उस प्रभु का सुक्रगुजार हूँ ऐ दोस्त तुझे पाकर तू जान भी हकीकत भी है तू ही मेरी खवाहिश है।।
यू न तलाश करो मेरी आंखों में मेरी तन्हाई को। सीने से लगा रक्खा हू ऐ राज तेरी रुसवाई को। एक अरसा गुजर गया हुए एक सच्ची मोहब्बत को । लोगो ने मुझे नही बस याद रक्खा मेरी बेवफाई को ।।
तेरे न होने से बस इतनी सी कमी रहती है। में लाख मुस्कुराऊ आँखों में नमी रहती है ।। बात मैं लाख कहना चाहु होठों में दबी रहती है। न आसमां अपना लगता है न जमी अपनी लगती है।।
राहें उल्फत भी बड़ी अजीब होती है। दिल तोड़ने वालों में भी तहज़ीब होती है।। कहा मिलता है सबको राही मुकद्दर ऐ राज जिसे मिले मोहब्बत वो खुशिया भी अजीब होती है।।
आप से दूर होकर थी किस कदर तन्हाई। सोए आपके बिस्तर में राज मगर नीद नही आईं।।
कैसे सौप दू तुम्हे मै अपने दिल के गुलाब को जिसे हरपल सीने से लगाए रखा उस हसीं सौगात को। तुम क्या जानोगे कैसे गुजरा है अब तक का हर सिला ऐ राज भूल जाऊ मैं कैसे भला पहली मुलाकात को।।
लोगो ने अब तक मेरे हसीं लबों को देखा किसी ने दिल के अंदर का समंदर नही देखा। किस हाल में जी रहे है हम आज कई दिन से किसी ने न हाले दिल पूछा न ही राज किसी ने मेरे दिल का बवंडर देखा।।
किस किस को अपना बनाऊं सब छोड़ जाते है। जिस दिल में रहते है सुकुन से ऐ राज उसे तोड़ जाते है।।
आज तेरे होठों पे पहले वाली मुस्कान नही है। तेरी आंखों में आज चाहत वाली जान नही है। कभी तो भरी महफिल में मोहब्बते इज़हार करो। ऐ राज तुम तो जान हो मेरी कोई सामान नही हो।।
हिचकियां आपको आये और हमे दर्द हो फिर आप भी कहोगे की कैसे मर्द हो। हमने प्यार किया है आपसे ऐ राज सुनो आप ही हमसफर हो आप ही हमदर्द हो।।