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પ્રેરક પ્રસંગો અને સત્સંગ ની વાતો

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રોજ સવારે એક બે પ્રેરક પ્રસંગો અને મોટીવેશન વિડિયો જોવા માટે

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  • पांच बजे उठकर मेरे साथ पार्क में चलना। सुबह की हवा और भी सुहानी होती है। पापा यह कहकर सोने चले गए मैं भी उठकर अपने कमरे में आ गया। मोबाईल पास नही था इसलिए बिस्तर पर पसरते ही नींद आ गई। घुर्रररररर..घुर्ररररररर की आवाज से अचानक आंखे खुल गई। देखा तो सुबह के आठ बज रहे हैं लेकिन पापा ने तो सुबह पांच बजे उठने को कहा था। और ये क्या फोन तो आज ठीक होकर मिलने वाला था फोन किसने लाकर रख दिया मेरे सिरहाने। ""ओहहहहह तो क्या ये सब सपना था..? दिल ने खुद ही दिल से सवाल किया और दिल ने दिल को ही जवाब दिया..हां यह सपना था। उसने एक झटके से "टुनटुने" को टेबल पर रख दिया और मां,पापा, दादाजी चिल्लाता हुआ नीचे की और दौड़ पड़ा नाश्ते की टेबल की तरफ जहां उसके अपने रिश्ते, उसकी खुशियां पलकें बिछाए उसका बेसब्री से इन्तजार कर रहे थे। "टुनटुना" अब भी बज रहा था लेकिन वहां उसकी आवाज सुनने वाला कोई नही था क्योंकि उसका गुलाम आज आजाद हो चुका था। Join 🔻 https://whatsapp.com/channel/0029VbC8YqY4Y9lkaPpGYn09 ➖➖➖➖⛔➖➖➖➖

  • *⏰आज की कहानी⏰* *🔻 टुनटुना 🔻* राजू आज बहुत उदास था। आज उसके हाथ से गिरने की वजह से मोबाईल की स्क्रीन टूट गई थी। शोरूम वाले ने उसे कल तक ठीक करके देने के लिए बोला है। क्या करूं टाइम ही पास नही हो रहा.. "राजू ओ राजू..अन्दर से मां ने आवाज लगाई तो राजू "आया मां..कहकर उठकर चल दिया पिछले तीन चार साल में शायद यह पहला अवसर था जब मां की एक आवाज पर राजू ने जवाब दिया हो.. "बोलो मां.."बेटा आज घर में सब्जी नही है सुबह पानी की मोटर ने पानी देर से उठाया बेटा इसलिए मैं तेरी मौसी(बगल वाली आंटी) के साथ सब्जी लेने नही जा पाई मेरा प्यारा बेटा..मेरा राजा बेटा..मेरा ये काम कर दे ना बेटा..मां ने लगभग मनुहार करते हुए कहा... 'खाली बैठने से अच्छा है चलो आज बाजार ही घूम आता हूं,.. मनही मन मैने सोचा "अच्छा बताओ क्या लाना है...? मां के मुखमंडल पर एक नई सी चमक थी..मां ने सब्जी की लिस्ट और थैला मुझे थमा दिया बाजार जा रहे हो बेटा..ठहरो मैं भी चलता हूं दादा जी ने छड़ी उठाते हुए कहा "हां दादाजी चलिए...."बेटा मेरा ये चश्मा टूट गया है काफी दिन हो गए तुम्हारे पापा को तो आफिस से टाइम नही लगता तुम ही ठीक करवाकर ला दो दादी जी ने मेरी तरफ बढ़ते हुए टूटा हुआ चश्मा मुझे थमा दिया। मैं और दादाजी स्कूटी पर बाजार चल दिए दादा जी को नाई की दुकान पर छोड़कर मैंने सब्जी ली और दादी जी के चश्में का फ्रेम बदलवाया। मैं थोड़ी ही देर में फ्री हो चुका था नाई की दुकान पर पहुंचा तो दादाजी का नम्बर अभी नही आया था कटिंग करवानी थी उन्हें.."बेटा अभी मुझे आधा घण्टा और लग जाएगी इतने तुमको कोई और काम है तो कर आओ..दादाजी ने कहा। अरे हां याद आया रमेश का घर यहीं बगल मे ही तो है कितनी बार बोल चुका है कभी घर आ ना यार.. मैंने मन ही मन सोचा। मैं रमेश के घर पहुंचा तो वह घर पर ही था आंटी से नमस्ते हुई और हम वही ड्राइंग रूम मे बैठे गए आंटी चाय ले आई खूब गपशप हुई पता ही नही चला कब आधा घण्टा बीत गया आज कितने दिनों बाद किसी दोस्त के घर आया था "अच्छा रमेश चलता हूं दादाजी वेट कर रहे होंगे.. "आते रहा करो बेटा..आंटी ने भी कहा। नाई की दुकान पर पहुंचा तो दादाजी फ्री हो चुके थे। हम दोनो घर की तरफ चल पड़े रास्ते में दादाजी ने स्कूटी रूकवाकर कुल्फी वाले से कुल्फी खाई और मुझे भी खिलाई। https://whatsapp.com/channel/0029VbC8YqY4Y9lkaPpGYn09 दादाजी ने बहुत सी बातें बताई उस कुल्फी वाले के बारे में। काफी पुराना था उस कुल्फी वाले का इतिहास..वाकई कुल्फी थी भी गजब की..भूल ही गया था उसका स्वाद अगर पहले कभी खाई भी होगी तो याद नही.. हम वहां से चलकर घर पहुंचे तो दोपहर के दो बज चुके थे दादाजी बोले निहाल कर दिया बेटा तुम जा रहे थे तो साथ चला गया नही तो गर्मी में हालात खराब हो जाती.. दादाजी ने स्कूटी से लगभग उतरते हुए कहा कितना आनन्द था उस पल में। दादीजी के हाथ में जब चश्मा थमाया तो सैंकड़ों आशीषों की पिटारी उपहार स्वरूप मिली। मां ने भी फटाफट शिकंजी बनाकर पिलाई और पास बैठकर अपनी साड़ी से मेरा पसीना पौंछा शायद बहुत बड़ी खुशी दी थी मैने उन्हें आज सब्जी लाकर..थोड़ी देर में खाना तैयार हो गया मैंने खाना खाया और सो गया..शायद थोड़ा थक गया था आज बाजार जाकर.. दो घण्टे की नींद के बाद ऊठा तो पापा आफिस से आ चुके थे। "कैसे हो बरखुरदार..पापा ने पूछा तो मैंने ठीक में सर हिला दिया "पार्क चलोगे मेरे साथ..? खाली घर बैठने से तो अच्छा है चलो आज पापा के साथ पार्क ही हो आता हूं। यह सोचकर मैंने हामी भर दी..आधा घण्टे बाद हम दोनों पार्क में थे पढ़ाई, खेलकूद और ना जाने कितने विषयों पर बातचीत हुई। पार्क में पापा के दोस्तों से भी मिला शायद पहली बार ही मिल रहा था क्योंकि कभी मोबाईल से इत्तर की दुनिया मैंने देखी ही नही थी..बड़ा फ्रैश सा महसूस कर रहा था आज मैं खुद को। दो घण्टे पार्क में बिताकर घर लौटे तो आठ बजे चुके थे। खाना तैयार था खाने की टेबल पर हम सभी ने बैठकर खाना खाया। खूब हंसी मजाक हुआ। मां और दादाजी ने मेरी खूब तारीफ की उन्होंने बताया कि आज मैंने बाजार के काम निपटाकर उनकी कितनी मदद की.. क्यूं बरखुरदार आज तुम्हारे पास तुम्हारा "टुनटुना" नही है..? पापा अक्सर मेरे मोबाईल को "टुनटुना" ही कहते हैं क्योंकि वह बजता ही रहता है कभी व्हट्स एप्प और कभी फेसबुक की नोटिफिकेशन की टोन से.."पापा उसकी स्क्रीन क्रैक हो गई थी ठीक होने को दे रखा है..."कल ठीक करकर देगा..."तभी तो मैं सोचूं आज हमारे बरखुरदार को हमारे पास बैठने का वक्त कहां से मिल गया..मैं बस झेंप कर रहा गया। सच ही तो कह रहे थे पापा शायद पिछले तीन चार साल में परिवार के इतना करीब मैं आज के अलावा शायद ही रहा था..खाना तो अक्सर मैं अपने कमरे में ही खाता था। वो आवाज लगाते लगाते थक जाते थे लेकिन शायद आज पहली बार था जब मैंने हर किसी की पहली आवाज पर मैंने उनको जवाब दिया था.."अच्छा चलो सो जाओ..सुबह

  • *♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️* *!! आलसी व्यक्ति !!* °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° पुराने समय में एक व्यक्ति बहुत आलसी था। वह कोई काम नहीं करता, बस इधर-उधर से किसी तरह खाने की व्यवस्था कर लेता था। एक दिन वह जंगल में घूम रहा था। तभी उसने देखा कि एक लोमड़ी लंगड़ाकर चल रही है। उसका एक पैर टूट गया था। लोमड़ी की ये हालत देखकर आलसी व्यक्ति सोच रहा था कि इस जंगल में अभी तक ये लोमड़ी जीवित कैसे है? इसका किसी ने शिकार नहीं किया, इसे खाने के लिए मांस कैसे मिलता होगा? वह व्यक्ति लोमड़ी के पीछे-पीछे चलने लगा, ताकि उसे मालूम हो सके कि इसके खाने की व्यवस्था कैसे होती है? तभी उस व्यक्ति को शेर की दहाड़ सुनाई दी। वह डर गया और तुरंत ही एक ऊंचे पेड़ पर चढ़कर छिप गया। कुछ ही देर वहाँ शेर पहुँच गया। उसने मुँह में शिकार पकड़ रखा था। जब शेर लोमड़ी के सामने पहुँचा तो शेर के शिकार में से मांस का एक टुकड़ा गिर गया। शेर वहां चला गया तो लोमड़ी ने मांस का टुकड़ा खा लिया। आलसी व्यक्ति ये सब देख रहा था। वह सोचने लगा कि भगवान कितना दयालु है। एक लोमड़ी के खाने की व्यवस्था भी भगवान कर रहे हैं। मैं भी पूजा-पाठ करता हूँ तो भगवान मेरे लिए भी खाने की व्यवस्था जरूर करेगा। ये सोचकर वह अपने घर आ गया। घर आकर आलसी व्यक्ति बैठ गया और इंतजार करने लगा कि भगवान की कृपा से उसे भी खाना मिल जायेगा। बैठे-बैठे तीन दिन गुजर गए, लेकिन उसके खाने की व्यवस्था नहीं हो सकी। खाना न मिलने की वजह से वह बहुत कमजोर हो गया था। तभी उसके घर की ओर एक संत पहुँचे। आलसी व्यक्ति तुरंत ही संत के पास पहुँचा। व्यक्ति ने संत को पूरी बात बता दी। संत ने उससे कहा कि भगवान ने तुम्हें इस घटना के माध्यम से एक बहुत बड़ा संदेश दिया है। तुम एक लोमड़ी की तरह बनना चाहते हो, लेकिन भगवान तुम्हें शेर की तरह बनाना चाहता है। तुम दूसरों पर निर्भर रहना चाहते हो और भगवान तुम्हें दूसरों की मदद करने वाला इंसान बनाना चाहता है। आलसी व्यक्ति को संत की बात समझ आ गई और उसके बाद उसने आलस्य छोड़ दिया और कर्म करने लगा। *शिक्षा:-* हमें दूसरों पर निर्भर रहने वाला नहीं, दूसरों की मदद करने वाला इंसान बनने की कोशिश करनी चाहिये। भगवान भी ऐसे लोगों की मदद करता है, जो दूसरों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं..!! (क्रमशः.👇 *💁‍♀️ प्रेरणादायक कहानियों के लिए हमारे ग्रुप / चेनल जॉइन कर सकते है सभी के लिए मोटिवेशन स्टोरी👇* *👉JOIN WhatsApp 👈🔯* https://whatsapp.com/channel/0029VbC8YqY4Y9lkaPpGYn09 *📘 ➡️JOIN Telegram 🔜* https://t.me/Rojekstory15 🛕 लाइव दर्शन के ग्रुप   🔔 https://whatsapp.com/channel/0029Vb8J2t905MUXr2syZ21c मोबाइल (w)+91  8490871033. ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ *सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।* *जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।* 🦋 *आज की प्रेरणा* 🦋 तने की नम्यता पेड़ को तूफान में खड़ा करती है और व्यवहार में नम्यता इंसान का दिल जीतती है। *आज से हम* नम्य बनें... ➖➖➖➖⛔➖➖➖➖

  • 12 авг.341из moj1506

    *ઈમાનદારી..!* આજે કયા ગઈ છે...!? રોજિંદી લેણદેણ કરવાવાળા બધા લોકો આ વિડિયો ધ્યાનથી જુઓ, આના પર વિચાર કરો, અને પછી ઈશ્વરીય શક્તિના માધ્યમથી આને જીવનમાં લાગુ કરો. 🌹🌹🌹 નોંધ: વિડિયો કોઈ દ્વારા AI જનરેટેડ છે, પણ ઉદ્દેશ્ય સારો છે આથી આપ સૌને મોકલ્યો છે.🪶હરેકૃષ્ણ ..

  • अच्छी बाते ।।।।

  • *⏰ આજ ની કહાની⏰* 🔻 *શ્રદ્ધા અને ભક્તિનું ફળ* 🔻 એક ગામમાં રમેશ નામનો ગરીબ ખેડૂત રહેતો હતો. તેની પાસે થોડી જમીન હતી અને તે મહેનત કરીને પરિવારનું ગુજરાન ચલાવતો હતો. રમેશ ભગવાન શિવનો ખૂબ મોટો ભક્ત હતો. દરરોજ સવારે વહેલા ઊઠીને સ્નાન કરતો, મંદિરે જઈને ભગવાનના દર્શન કરતો અને પછી પોતાના કામે જતો. એક વર્ષે ગામમાં ભારે દુષ્કાળ પડ્યો. વરસાદ ન પડવાને કારણે ખેતરો સુકાઈ ગયા. ગામના ઘણા લોકો નિરાશ થઈ ગયા. કેટલાક લોકોએ તો ભગવાન પરનો વિશ્વાસ પણ ગુમાવી દીધો. પરંતુ રમેશે પોતાની શ્રદ્ધા અને ભક્તિ છોડ્યા નહીં. તે રોજ ભગવાનને પ્રાર્થના કરતો કે, "હે મહાદેવ, મને શક્તિ આપો. હું મહેનત કરતો રહીશ." એક દિવસ રમેશ ખેતરમાં કામ કરી રહ્યો હતો ત્યારે તેને જમીનમાં એક જૂનો ઘડો મળ્યો. જ્યારે તેણે ઘડો ખોલ્યો ત્યારે તેમાં સોનાના સિક્કા હતા. રમેશ ખૂબ ખુશ થયો. પરંતુ તેણે વિચાર્યું કે આ સંપત્તિ ભગવાનની કૃપાથી મળી છે, તેથી તેનો ઉપયોગ માત્ર પોતાના માટે નહીં પરંતુ ગામના લોકોના ભલા માટે પણ કરવો જોઈએ. રમેશે તે પૈસાથી ગામમાં કૂવો ખોદાવ્યો જેથી લોકોને પાણી મળી રહે. ગરીબોને અનાજ આપ્યું અને જરૂરિયાતમંદોની મદદ કરી. તેની દયા અને સેવાભાવથી આખું ગામ ખુશ થઈ ગયું. થોડા સમયમાં વરસાદ પણ સારો પડ્યો અને ગામ ફરી હરિયાળું બની ગયું. ગામના લોકો સમજી ગયા કે સાચી ભક્તિ માત્ર મંદિરમાં પૂજા કરવાથી નથી થતી, પરંતુ સારા કર્મો અને બીજા લોકોની સેવા કરવાથી પણ થાય છે. બોધ: જે વ્યક્તિ મુશ્કેલ સમયમાં પણ ભગવાન પર શ્રદ્ધા રાખે છે, મહેનત કરે છે અને બીજા લોકોની મદદ કરે છે, તેના જીવનમાં ભગવાન જરૂર કૃપા વરસાવે છે. 🔻 *રોજ સવારે એક બે મોટીવેશન કહાની વાંચવા માટે અમારા ગ્રુપ માં જોડાવા નીચે આપેલ લિંક પર ક્લિક કરો* 👇 *👉JOIN WhatsApp 👈🔯* https://whatsapp.com/channel/0029VbC8YqY4Y9lkaPpGYn09 *📘 ➡️JOIN Telegram 🔜* https://t.me/Rojekstory15 👉 मोबाइल (w)+91  8490871033. ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖

  • *⏰ આજ ની કહાની⏰* *🔻શ્રદ્ધાનું ફળ🔻* એક ગામમાં રમેશ નામનો એક ગરીબ ખેડૂત રહેતો હતો. તે ખૂબ મહેનતુ હતો, પરંતુ સતત બે વર્ષથી વરસાદ ઓછો પડવાના કારણે તેની ખેતીમાં નુકસાન થતું હતું. ગામના ઘણા લોકો નિરાશ થઈ ગયા હતા, પરંતુ રમેશ ભગવાન પર અતૂટ શ્રદ્ધા રાખતો હતો. દરરોજ સવારે તે મંદિરમાં જઈને પ્રાર્થના કરતો અને કહેતો, “હે પ્રભુ! હું મારી મહેનત કરતો રહીશ, બાકી બધું તમારા હાથમાં છે.” ગામના લોકો તેની મજાક ઉડાવતા અને કહેતા, “માત્ર પ્રાર્થનાથી કંઈ મળતું નથી.” પરંતુ રમેશ હસીને જવાબ આપતો, “પ્રાર્થના મને શક્તિ આપે છે.” એક દિવસ ગામમાં એક સંત મહાત્મા આવ્યા. તેમણે ગામલોકોને કહ્યું કે જે વ્યક્તિ સાચા મનથી ભગવાન પર વિશ્વાસ રાખે છે અને કર્મ કરવાનું છોડતો નથી, તેને જરૂર સફળતા મળે છે. રમેશે સંતના શબ્દોને પોતાના જીવનમાં ઉતારી લીધા. થોડા દિવસો પછી રમેશે પોતાની જમીનમાં એક નવો પાક વાવ્યો. વરસાદની કોઈ આશા ન હોવા છતાં તે દરરોજ મહેનત કરતો રહ્યો. અચાનક એક રાત્રે ભારે વરસાદ પડ્યો. આખા ગામમાં ખુશી છવાઈ ગઈ. રમેશના ખેતરમાં પાક ખૂબ જ સારો થયો અને તેને સારો નફો મળ્યો. ગામલોકો આશ્ચર્યચકિત થઈ ગયા. તેઓ રમેશ પાસે આવ્યા અને પૂછ્યું, “તને ક્યારેય નિરાશા કેમ ન આવી?” રમેશે જવાબ આપ્યો, “ભગવાન પર શ્રદ્ધા રાખવાથી મુશ્કેલ સમયમાં પણ હિંમત મળે છે. ભગવાન આપણને ફળ જરૂર આપે છે, પરંતુ યોગ્ય સમયે આપે છે.” તે દિવસથી ગામના લોકો પણ પ્રાર્થના સાથે મહેનત કરવા લાગ્યા. તેઓ સમજી ગયા કે માત્ર ચમત્કારની રાહ જોવી નહીં, પરંતુ ભગવાન પર વિશ્વાસ રાખીને કર્મ કરવું એ જ સાચી ભક્તિ છે. *બોધ: ભગવાન પર અડગ શ્રદ્ધા રાખો, સારા કર્મ કરતા રહો અને ધીરજ રાખો. યોગ્ય સમયે ભગવાન જરૂર કૃપા કરે છે.* 🙏🌸 🔻 *રોજ સવારે એક બે મોટીવેશન કહાની વાંચવા માટે અમારા ગ્રુપ માં જોડાવા નીચે આપેલ લિંક પર ક્લિક કરો* 👇 *👉JOIN WhatsApp 👈🔯* https://whatsapp.com/channel/0029VbC8YqY4Y9lkaPpGYn09 *📘 ➡️JOIN Telegram 🔜* https://t.me/Rojekstory15 👉 मोबाइल (w)+91  8490871033. ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖

  • *⏰ આજ ની કહાની⏰* 🔻 *શ્રદ્ધા અને વિશ્વાસની શક્તિ* 🔻 એક ગામમાં રમેશ નામનો એક ગરીબ ખેડૂત રહેતો હતો. તે ખૂબ મહેનત કરતો, પરંતુ સતત ત્રણ વર્ષ સુધી વરસાદ ન પડતા તેની ખેતી બરબાદ થઈ ગઈ. ઘરમાં પૈસાની તંગી હતી અને પરિવાર પણ ચિંતામાં હતો. એક દિવસ ગામના મંદિરમાં એક સંત આવ્યા. રમેશે પોતાની મુશ્કેલી સંતને કહી. સંતે કહ્યું, "બેટા, મહેનત કરવી બંધ ન કર અને ભગવાન પર અડગ વિશ્વાસ રાખ. મુશ્કેલી કાયમ રહેતી નથી." રમેશે સંતની વાત દિલથી સ્વીકારી. બીજા દિવસે ફરીથી ખેતરમાં કામ શરૂ કર્યું. લોકો તેની મજાક ઉડાવતા હતા કે વરસાદ વગર ખેતી કેવી રીતે થશે? પરંતુ રમેશ રોજ ભગવાનનું સ્મરણ કરતો અને પોતાની ફરજ નિભાવતો. થોડા દિવસો પછી આકાશમાં વાદળો છવાવા લાગ્યા. એક રાત્રે જોરદાર વરસાદ વરસ્યો. ખેતરોમાં પાણી ભરાઈ ગયું અને પાક લહેરાવા લાગ્યો. થોડા મહિનાઓમાં રમેશની ખેતી એટલી સારી થઈ કે તેણે પોતાના બધા દેવા ચૂકવી દીધા. ગામના લોકો આશ્ચર્યચકિત થઈ ગયા. તેમણે રમેશને પૂછ્યું, "તારી સફળતાનું રહસ્ય શું છે?" રમેશે હસીને જવાબ આપ્યો, "મહેનત મારી હતી, પરંતુ શક્તિ ભગવાને આપી. જ્યારે બધા રસ્તા બંધ લાગે ત્યારે પણ શ્રદ્ધા અને વિશ્વાસ ક્યારેય છોડવા નહીં." તે દિવસથી ગામના લોકો પણ મુશ્કેલ સમયમાં હિંમત રાખવા અને ભગવાન પર વિશ્વાસ રાખવા લાગ્યા. બોધ: જીવનમાં મુશ્કેલીઓ આવે ત્યારે ગભરાવું નહીં. ભગવાન પર શ્રદ્ધા અને પોતાના કર્મ પર વિશ્વાસ રાખશો તો સફળતા ચોક્કસ મળશે. 🙏✨ 🔻 *રોજ સવારે એક બે મોટીવેશન કહાની વાંચવા માટે અમારા ગ્રુપ માં જોડાવા નીચે આપેલ લિંક પર ક્લિક કરો* 👇 *👉JOIN WhatsApp 👈🔯* https://whatsapp.com/channel/0029VbC8YqY4Y9lkaPpGYn09 *📘 ➡️JOIN Telegram 🔜* https://t.me/Rojekstory15 👉 मोबाइल (w)+91  8490871033. ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖

  • *⏰ આજ ની કહાની⏰* *🔻 શ્રદ્ધાની શક્તિ – એક પ્રેરણાદાયક આધ્યાત્મિક વાર્તા* 🔻 એક નાના ગામમાં મોહન નામનો એક ગરીબ ખેડૂત રહેતો હતો. તે ખૂબ મહેનત કરતો, પરંતુ છેલ્લા કેટલાક વર્ષોથી તેના ખેતરમાં પાક સારો થતો નહોતો. ઘરમાં આર્થિક મુશ્કેલીઓ વધતી જતી હતી. છતાં મોહન ભગવાન પરની પોતાની શ્રદ્ધા ક્યારેય ગુમાવતો નહોતો. દરરોજ સવારે તે મંદિરે જઈને પ્રાર્થના કરતો અને પછી પોતાના કામે લાગી જતો. ગામના ઘણા લોકો તેની મજાક ઉડાવતા અને કહેતા, "ફક્ત પ્રાર્થના કરવાથી કંઈ મળતું નથી." પરંતુ મોહન હંમેશા હસીને કહેતો, "ભગવાન પર વિશ્વાસ રાખો, યોગ્ય સમયે ફળ જરૂર મળશે." એક દિવસ ગામમાં એક સંત આવ્યા. મોહને તેમની સેવા કરી અને પોતાની મુશ્કેલીઓ વિશે જણાવ્યું. સંતે કહ્યું, "બેટા, ભગવાન ક્યારેય કોઈની મહેનત અને શ્રદ્ધા વ્યર્થ જવા દેતા નથી. તું ફક્ત સારા કર્મ કરતો રહેજે." સંતના શબ્દોથી મોહનને નવી પ્રેરણા મળી. તેણે વધુ ઉત્સાહથી મહેનત શરૂ કરી. થોડા સમય પછી તે વિસ્તારમાં સારો વરસાદ પડ્યો. મોહનના ખેતરમાં આ વખતે એટલો સારો પાક થયો કે તેની તમામ મુશ્કેલીઓ દૂર થઈ ગઈ. ગામના લોકો આશ્ચર્યચકિત થઈ ગયા. ત્યારે મોહને બધાને કહ્યું, "મને સફળતા ફક્ત વરસાદથી નથી મળી. મને સફળતા મળી છે મારી અડગ શ્રદ્ધા, સતત મહેનત અને સારા કર્મોથી. ભગવાને યોગ્ય સમયે મારી પ્રાર્થના સાંભળી." આ વાત સાંભળીને ગામના લોકો સમજી ગયા કે જીવનમાં મુશ્કેલીઓ આવે ત્યારે હિંમત હારવી નહીં. શ્રદ્ધા, ધીરજ અને મહેનત સાથે આગળ વધતા રહેવાથી ભગવાન જરૂર માર્ગ બતાવે છે. *બોધ:* ભગવાન પર અડગ વિશ્વાસ રાખો, સારા કર્મ કરો અને ધીરજ રાખો. જ્યારે સમય યોગ્ય હશે ત્યારે ભગવાન તમારી મહેનતનું ફળ જરૂર આપશે. 🙏✨ 🔻 *રોજ સવારે એક બે મોટીવેશન કહાની વાંચવા માટે અમારા ગ્રુપ માં જોડાવા નીચે આપેલ લિંક પર ક્લિક કરો* 👇 *👉JOIN WhatsApp 👈🔯* https://whatsapp.com/channel/0029VbC8YqY4Y9lkaPpGYn09 *📘 ➡️JOIN Telegram 🔜* https://t.me/Rojekstory15 👉 मोबाइल (w)+91  8490871033. ➖➖➖➖➖➖➖➖➖ જય શ્રી કૃષ્ણ! 🌺🙏

  • *⏰आज की कहानी⏰* *🔻बेटी – पिता के हृदय की धड़कन🔻* गाँव के सम्मानित शिक्षक राघव जी अपनी इकलौती बेटी प्रमिला से बहुत प्रेम करते थे। प्रमिला बचपन से ही संस्कारी, समझदार और अपने माता-पिता की सेवा करने वाली बेटी थी। समय बीता और उसके विवाह का रिश्ता एक अच्छे परिवार में तय हो गया। लड़के का नाम नवनीत था। उसका परिवार भी संस्कारों और स्नेह से भरा हुआ था। रिश्ता तय होने के बाद राघव जी के मन का बड़ा बोझ उतर गया। उन्हें विश्वास था कि उनकी बेटी को अच्छा घर मिल रहा है। एक दिन नवनीत के माता-पिता ने राघव जी को भोजन पर आमंत्रित किया। उस समय राघव जी मधुमेह (शुगर) की बीमारी से पीड़ित थे। डॉक्टर ने उन्हें मीठी चीज़ों से दूर रहने की सलाह दी थी। तबीयत भी कुछ ठीक नहीं थी, लेकिन होने वाले समधी का निमंत्रण टालना उन्हें उचित नहीं लगा। जब वे वहाँ पहुँचे तो उनका बड़े सम्मान के साथ स्वागत हुआ। थोड़ी देर बाद चाय आई। राघव जी सोचने लगे, “अब मना करूँगा तो अच्छा नहीं लगेगा।” उन्होंने चाय का कप हाथ में लिया और पहली चुस्की ली। आश्चर्य! चाय बिल्कुल बिना चीनी की थी और उसमें हल्की-सी इलायची की सुगंध थी, ठीक वैसी जैसी उन्हें पसंद थी। दोपहर के भोजन में भी वही सब्जियाँ और रोटियाँ थीं जो उनकी सेहत के अनुसार बनाई गई थीं। भोजन के बाद आराम करने के लिए पतली चादर और दो तकिए रखे गए। उठने पर उन्हें सौंफ का पानी दिया गया, जो वे रोज़ घर पर पीते थे। राघव जी बार-बार सोच रहे थे कि आखिर इन लोगों को उनकी पसंद और स्वास्थ्य की इतनी जानकारी कैसे है? शाम को विदा होते समय उन्होंने संकोच से पूछा, “समधन जी, आपको मेरी खान-पान की इतनी जानकारी कैसे है?” यह सुनकर नवनीत की माँ मुस्कुराईं और बोलीं, “कल रात प्रमिला का फोन आया था। उसने कहा था—‘मेरे पिताजी बहुत सरल स्वभाव के हैं। वे अपनी परेशानी किसी से नहीं कहते। कृपया उनका ध्यान रखिएगा। उन्हें बिना चीनी की चाय दीजिएगा और भोजन भी उनकी सेहत के अनुसार बनवाइएगा।’” यह सुनते ही राघव जी की आँखें भर आईं। उनका गला रुंध गया। उन्हें लगा जैसे उनकी दिवंगत माँ फिर से उनके जीवन में लौट आई हो। घर पहुँचकर वे सीधे पूजा कक्ष में गए। वहाँ अपनी माँ की तस्वीर के सामने खड़े होकर बोले, “माँ, लोग कहते हैं कि बेटियाँ पराई हो जाती हैं, लेकिन आज समझ आया कि बेटी कभी पराई नहीं होती। वह तो माँ का ही दूसरा रूप होती है।” उनकी आँखों से आँसू बह निकले। तभी प्रमिला उनके पास आई और बोली, “पिताजी, आप रो क्यों रहे हैं?” राघव जी ने बेटी के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, “बेटी, तुम जहाँ भी जाओगी, मेरे दिल में हमेशा रहोगी। तुम मेरी शक्ति हो, मेरा गर्व हो।” उस दिन राघव जी ने महसूस किया कि बेटियाँ घर छोड़ सकती हैं, लेकिन अपने माता-पिता का साथ और उनकी चिंता कभी नहीं छोड़तीं। *शिक्षा:* बेटियाँ बोझ नहीं, बल्कि माता-पिता के जीवन की सबसे अनमोल पूँजी होती हैं। वे जहाँ भी रहें, अपने प्रेम, संस्कार और स्नेह से परिवार को जोड़े रखती हैं। इसलिए हर बेटी का सम्मान करें और गर्व से कहें—"मैं एक बेटी का पिता हूँ।" 🌹🙏 *💁‍♀️ प्रेरणादायक कहानियों के लिए हमारे ग्रुप / चेनल जॉइन कर सकते है सभी के लिए मोटिवेशन स्टोरी👇* *👉JOIN WhatsApp 👈🔯* https://whatsapp.com/channel/0029VbC8YqY4Y9lkaPpGYn09 *📘 ➡️JOIN Telegram 🔜* https://t.me/Rojekstory15 🛕 लाइव दर्शन के ग्रुप   🔔 https://whatsapp.com/channel/0029Vb8J2t905MUXr2syZ21c मोबाइल (w)+91  8490871033. ▫️▫️▫️▫️🔻▫️▫️▫️▫️

  • *⏰आज की कहानी⏰* *🔻हौसलों की उड़ान🔻* बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे से राज्य में वीरेंद्र नाम का एक युवक रहता था। वह एक साधारण किसान का पुत्र था। उसके पिता चाहते थे कि वह खेती करे, लेकिन वीरेंद्र का सपना था कि वह राज्य का सबसे श्रेष्ठ धनुर्धर बने और अपनी प्रतिभा से लोगों की सेवा करे। उस समय राज्य में एक प्रसिद्ध गुरुकुल था, जहाँ केवल राजपरिवार और बड़े घरानों के बच्चों को ही शिक्षा मिलती थी। जब वीरेंद्र ने वहाँ प्रवेश लेने की इच्छा जताई, तो लोगों ने उसका मज़ाक उड़ाया। एक दिन गाँव के कुछ लोग हँसते हुए बोले, "अरे वीरेंद्र! तुम्हारे जैसे गरीब किसान के बेटे का धनुर्धर बनने का सपना वैसा ही है जैसे कोई चिड़िया आकाश को अपने पंखों में बाँधना चाहे।" उनकी बातें सुनकर वीरेंद्र का मन दुखी हुआ, लेकिन उसने हार नहीं मानी। उसने मन ही मन निश्चय किया कि चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, वह अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटेगा। गुरुकुल में प्रवेश न मिलने पर उसने जंगल को ही अपना गुरुकुल बना लिया। वह प्रतिदिन सूर्योदय से पहले उठता, लकड़ी से बने धनुष-बाण से अभ्यास करता और घंटों तक अपने लक्ष्य पर निशाना साधता। कभी बारिश होती, कभी तेज़ धूप पड़ती, लेकिन उसके हौसलों की आग कभी ठंडी नहीं हुई। कई वर्षों तक लगातार अभ्यास करने के बाद उसकी धनुर्विद्या इतनी अद्भुत हो गई कि दूर-दूर तक उसकी चर्चा होने लगी। उसी समय राज्य पर पड़ोसी राजा ने आक्रमण कर दिया। युद्ध के दौरान शत्रु सेना ने पहाड़ी पर कब्ज़ा कर लिया, जहाँ से वे राज्य की सेना पर लगातार प्रहार कर रहे थे। राज्य के बड़े-बड़े योद्धा भी उन्हें रोकने में असफल हो रहे थे। राजा बहुत चिंतित थे। तभी किसी सैनिक ने वीरेंद्र का नाम सुझाया। राजा ने उसे बुलवाया। वीरेंद्र ने बिना किसी डर के युद्धभूमि में कदम रखा। उसने अपनी एकाग्रता और अद्भुत धनुर्विद्या से शत्रु सेना के प्रमुख योद्धाओं को परास्त कर दिया। उसके निशाने इतने सटीक थे कि शत्रु सेना घबराकर पीछे हटने लगी। कुछ ही समय में युद्ध समाप्त हो गया और राज्य को विजय प्राप्त हुई। राजा ने प्रसन्न होकर वीरेंद्र को सम्मानित किया और पूछा, "तुमने यह अद्भुत कौशल कहाँ से सीखा?" वीरेंद्र मुस्कुराकर बोला, "महाराज, जब दुनिया ने मेरे सपनों पर हँसी उड़ाई, तब मैंने हार मानने के बजाय अपने हौसलों को गुरु बना लिया।" उसकी बात सुनकर सभा में उपस्थित सभी लोग भावुक हो गए। वही लोग, जो कभी उसका उपहास उड़ाते थे, आज उसकी प्रशंसा कर रहे थे। उस दिन वीरेंद्र ने सबको एक अमूल्य शिक्षा दी— "हार की बात मत करो। कठिन रास्तों से मत डरो। यदि लक्ष्य पर नज़र और मन में विश्वास हो, तो एक दिन मंज़िल स्वयं कहती है— अब और इम्तिहान मत कर।" *शिक्षा:* सफलता उन्हें ही मिलती है जो परिस्थितियों से नहीं, अपने हौसलों से लड़ते हैं। पंख नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और अथक परिश्रम ही इंसान को ऊँची उड़ान देते हैं। 🏆 *💁‍♀️ प्रेरणादायक कहानियों के लिए हमारे ग्रुप / चेनल जॉइन कर सकते है सभी के लिए मोटिवेशन स्टोरी👇* *👉JOIN WhatsApp 👈🔯* https://whatsapp.com/channel/0029VbC8YqY4Y9lkaPpGYn09 *📘 ➡️JOIN Telegram 🔜* https://t.me/Rojekstory15 🛕 लाइव दर्शन के ग्रुप   🔔 https://whatsapp.com/channel/0029Vb8J2t905MUXr2syZ21c मोबाइल (w)+91  8490871033. ▫️▫️▫️▫️🔻▫️▫️▫️▫️

  • *⏰ आज की प्रेरणा प्रसंग ⏰*   *🔰 गुरुमंत्र का प्रभाव 🔻* एक महिला रोटी बनाते बनाते *"गुरुमंत्र"* का जाप कर रही थी काम करते-करते भी उसे *"गुरुमंत्र"* का जाप करने की आदत सी हो गई थी । एकदिन एकाएक धड़ाम से जोरों की आवाज हुई और साथ में दर्दनाक चीख। कलेजा धक से रह गया जब आंगन में दौड़ कर ऊपर से नीचे झांकी तो आठ साल का उनका लाडला बेटा चित्त पड़ा था, खून से लथपथ। दहाड़ मार मार कर रोने लगी। घर में उसके अलावा कोई नहीं था, रोकर भी किसे बुलाती, फिर बेटा को संभालना भी तो था। दौड़ कर नीचे गई तो देखा बेटा आधी बेहोशी में माँ-माँ की रट लगाए हुए है। मां की ममता तड़प गई, आंखों से निकल कर अपनी मौजूदगी का अहसास करवाया। फिर 10 दिन पहले ही करवाये अपेंडिक्स के ऑपरेशन के बावजूद ना जाने कहाँ से इतनी शक्ति आ गयी कि बेटे को गोद मे उठा कर पड़ोस के नर्सिंग होम की ओर दौड़ी। रास्ते भर अपने गुरुदेव को जी भर कर कोसती रही, बड़बड़ाती रही, हे गुरुदेव क्या बिगाड़ा था मैंने तुम्हारा, जो मेरे ही बच्चे को..। खैर डॉक्टर मिल गए और समय पर इलाज होने पर बेटा बिल्कुल ठीक हो गया। चोटें गहरी नहीं थी, ऊपरी थीं तो कोई खास परेशानी नही हुई। रात को घर पर जब सब टीवी देख रहे थे तब उस औरत का मन बेचैन था। गुरुदेव से विरक्ति होने लगी थी। एक मां की ममता गुरुसत्ता को चुनौती दे रही थी।उसके दिमाग में दिन की सारी घटना चलचित्र की तरह चलने लगी। कैसे बेटा आंगन में गिरा और फिर एकाएक उसकी आत्मा सिहर उठी, कल ही तो पुराने हैंडपंप का पाइप का टुकड़ा आंगन से हटवाया है, ठीक उसी जगह था जहां  बेटा गिरा था। अगर कल मिस्त्री न आया होता तो..? उसका हाथ अब अपने पेट की तरफ गया जहां टांके अभी हरे ही थे, ऑपरेशन के। आश्चर्य हुआ कि उसने 20-22 किलो के बेटे को उठाया कैसे, कैसे वो आधा किलोमीटर तक दौड़ती चली गयी? फूल सा हल्का लग रहा था बेटा। वैसे तो वो कपड़ों की बाल्टी तक छत पर नही ले जा पाती। फिर उसे ख्याल आया कि डॉक्टर साहब तो 2 बजे तक ही रहते हैं  और जब वो पहुंची तो साढ़े 3 बज रहे थे, उसके जाते ही तुरंत इलाज हुआ, मानो किसी ने उन्हें रोक रखा था। उसका सर गुरु चरणो में श्रद्धा से झुक गया। अब वो सारा खेल समझ चुकी थी। मन ही मन गुरुदेव से अपने शब्दों के लिए रोते रोते क्षमा मांगने लगी।तभी टीवी पर प्रवचन आ रहा था,*"मैं तुम्हारे आने वाले संकट रोक नहीं सकता क्योंकि वह तुम्हारा ही कर्म है। लेकिन तुम्हें इतनी शक्ति दे सकता हूँ कि तुम आसानी से उन्हें पार कर सको, तुम्हारी राह आसान कर सकता हूँ। बस धर्म के मार्ग पर चलते रहो।"*  (क्रमशः.....) उस औरत ने घर के मंदिर में झांक कर देखा तो गुरूदेव की छवी मुस्कुरा रही थी.!! गुरूदेव की कृपा कोई खैरात नहीं है जो कि मुफ्त में मिल जाए। *सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।* *जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।*            *🌹 आज की प्रेरणा 🌹* किसी का खराब काम देखकर क्रोध आना मामूली बात है। मगर क्रोध के बजाय उसके लिए दुआ निकले, ये महान आत्मा के लक्षण हैं। 👉 *आज से हम* दूसरों पर नाराज़ होने के बजाय उन्हें बहुत खुशी देंगे 😊  😊  😊😊  😊  😊 मैं जो चाहता हूँ उसके लिए एक चुंबक समान हूँ। मैं सबसे अच्छे जीवन के लायक हूँ जो मैं चाहता हूँ। मैं दूसरों को दिए गए प्यार और दया को प्राप्त करने के लिए तैयार हूँ। मैं उस भलाई के योग्य हूँ जो मैं लोगों के साथ करता हूँ । मैं उस धन के योग्य हूँ जिसका मैं स्वागत करता हूँ। *💁‍♀️ प्रेरणादायक कहानियों के लिए हमारे ग्रुप / चेनल जॉइन कर सकते है सभी के लिए मोटिवेशन स्टोरी👇* *👉JOIN WhatsApp 👈🔯* https://whatsapp.com/channel/0029VbC8YqY4Y9lkaPpGYn09 *📘 ➡️JOIN Telegram 🔜* https://t.me/Rojekstory15 🛕 लाइव दर्शन के ग्रुप   🔔 https://whatsapp.com/channel/0029Vb8J2t905MUXr2syZ21c मोबाइल (w)+91  8490871033. ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖

  • *⏰ आज का प्रेरक प्रसंग ⏰* *!! 🔻किसान की घड़ी🔻 !!* °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° एक दिन की बात है। एक किसान अपने खेत के पास स्थित अनाज की कोठी में काम कर रहा था। काम के समय उसकी घड़ी कहीं खो गई। वह घड़ी उसके पिता द्वारा उसे उपहार में दी गई थी। इस कारण उससे उसका भावनात्मक लगाव था। उसने वह घड़ी ढूंढने की बहुत कोशिश की। कोठी का हर कोना छान मारा लेकिन घड़ी नहीं मिली। हताश होकर वह कोठी से बाहर आ गया। वहाँ उसने देखा कि कुछ बच्चे खेल रहे हैं। उसने बच्चों को पास बुलाकर उन्हें अपने पिता की घड़ी खोजने का काम सौंपा। घड़ी ढूंढ निकालने वाले को ईनाम देने की घोषणा भी की। ईनाम के लालच में बच्चे तुरंत मान गए। कोठी के अंदर जाकर बच्चे घड़ी की खोज में लग गए। इधर-उधर, यहाँ-वहाँ, हर जगह खोजने पर भी घड़ी नहीं मिल पाई। बच्चे थक गए और उन्होंने हार मान ली। किसान ने अब घड़ी मिलने की आस खो दी। बच्चों के जाने के बाद वह कोठी में उदास बैठा था। तभी एक बच्चा वापस आया और किसान से बोला कि वह एक बार फिर से घड़ी ढूंढने की कोशिश करना चाहता था। किसान ने हामी भर दी। बच्चा कोठी के भीतर गया और कुछ ही देर में बाहर आ गया। उसके हाथ में किसान की घड़ी थी। जब किसान ने वह घड़ी देखी, तो बहुत ख़ुश हुआ। उसे आश्चर्य हुआ कि जिस घड़ी को ढूंढने में सब नाकामयाब रहे, उसे उस बच्चे ने कैसे ढूंढ निकाला? पूछने पर बच्चे ने बताया कि कोठी के भीतर जाकर वह चुपचाप एक जगह खड़ा हो गया और सुनने लगा। शांति में उसे घड़ी की टिक-टिक की आवाज़ सुनाई पड़ी और उस आवाज़ की दिशा में खोजने पर उसे वह घड़ी मिल गई। किसान ने बच्चे को शाबासी दी और ईनाम देकर विदा किया। *शिक्षा:-* शांति हमारे मन और मस्तिष्क को एकाग्र करती है और यह एकाग्र मन:स्थिति जीवन की दिशा निर्धारित करने में सहायक है। इसलिए दिनभर में कुछ समय हमें अवश्य निकलना चाहिए, जब हम शांति से बैठकर मनन कर सकें। अन्यथा शोर-गुल भरी इस दुनिया में हम उलझ कर रह जायेंगे। हम कभी न खुद को जान पायेंगे न अपने मन को। बस दुनिया की भेड़ चाल में चलते चले जायेंगे। जब आँख खुलेगी, तो बस पछतावा होगा कि जीवन की ये दिशा हमने कैसे निर्धारित कर ली? हम चाहते तो कुछ और थे जबकि वास्तव में हमने तो वही किया, जो दुनिया ने कहा। अपने मन की बात सुनने का तो हमने समय ही नहीं निकाला। *सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।* *जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।* 🦋 *आज की प्रेरणा* 🦋 अपने स्वभाव को उस दीपक की तरह रखिये जो एक गरीब की झोपड़ी में भी उतनी ही रोशनी देता है जितनी कोई बादशाह के महल में। *आज से हम* छोटे बड़े का ध्यान न रखते हुए हम सब एक समान व्यवहार करें। *💁‍♀️ प्रेरणादायक कहानियों के लिए हमारे ग्रुप / चेनल जॉइन कर सकते है सभी के लिए मोटिवेशन स्टोरी👇* *👉JOIN WhatsApp 👈🔯* https://whatsapp.com/channel/0029VbC8YqY4Y9lkaPpGYn09 *📘 ➡️JOIN Telegram 🔜* https://t.me/Rojekstory15 🛕 लाइव दर्शन के ग्रुप   🔔 https://whatsapp.com/channel/0029Vb8J2t905MUXr2syZ21c मोबाइल (w)+91  8490871033. ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖

  • *⏰ आज की प्रेरणा प्रसंग ⏰* *🔻 ये जीवन है 🔻* *एक घर के पास काफी दिन से एक बड़ी इमारत का काम चल रहा था। वहां रोज मजदूरों के छोटे छोटे बच्चे एक दूसरे की शर्ट पकडकर रेल रेल का खेल खेलते थे। रोज कोई बच्चा इंजिन बनता और बाकी बच्चे डिब्बे बनते थे। इंजिन और डिब्बे वाले बच्चे रोज बदल जाते पर, केवल चड्डी (अंडरवियर) पहना एक छोटा बच्चा हाथ में रखा कपड़ा घुमाते हुए रोज गार्ड बनता था।* *एक दिन मैंने देखा कि उन बच्चों को खेलते हुए रोज़ देखने वाले एक व्यक्ति ने कौतुहल से गार्ड बनने वाले बच्चे को पास बुलाकर पूछा.. "बच्चे तुम रोज़ गार्ड बनते हो। तुम्हें कभी इंजिन, कभी डिब्बा बनने की इच्छा नहीं होती ? इस पर वो बच्चा बोला बाबूजी मेरे पास पहनने के लिए कोई शर्ट नहीं है। तो मेरे पीछे वाले बच्चे मुझे पकड़ेंगे कैसे और मेरे पीछे कौन खड़ा रहेगा.? इसीलिए मैं रोज गार्ड बनकर ही खेल में हिस्सा लेता हूँ। ये बोलते समय मुझे उसकी आँखों में पानी दिखाई दिया।* *आज वो बच्चा मुझे जीवन का एक बड़ा पाठ पढ़ा गया। अपना जीवन कभी भी परिपूर्ण नहीं होता। उसमें कोई न कोई कमी जरुर रहेगी। वो बच्चा माँ-बाप से ग़ुस्सा होकर रोते हुए बैठ सकता था। परन्तु ऐसा न करते हुए उसने परिस्थितियों का समाधान ढूंढा।* *हम कितना रोते हैं? कभी अपने साँवले रंग के लिए, कभी छोटे क़द के लिए, कभी पड़ौसी की बडी कार, कभी पड़ोसन के गले का हार, कभी अपने कम मार्क्स, कभी अंग्रेज़ी, कभी पर्सनालिटी, कभी नौकरी की मार तो कभी धंधे में मार, कभी अपने सिंगिंग की लो-स्केल को लेकर...हमें इससे बाहर आना ही पड़ता है....* *ये जीवन है... इसे ऐसे ही जीना पड़ता है।* *चील की ऊँची उड़ान देखकर चिड़िया कभी डिप्रेशन में नहीं आती, वो अपने आस्तित्व में मस्त रहती है, मगर इंसान, इंसान की ऊँची उड़ान देखकर बहुत जल्दी चिंता में आ जाते हैं। तुलना से बचें और खुश रहें। ना किसी से ईर्ष्या , ना किसी से कोई होड़..! मेरी अपनी हैं मंजिलें , मेरी अपनी है *👉शिक्षा* *"परिस्थितियां कभी समस्या नहीं बनती। समस्या इस लिए बनती है, क्योंकि हमें उन परिस्थितियों से लड़ना नहीं आता।"* *सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।* *जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।* *🌹 आज की प्रेरणा 🌹* मुस्कुराता हुआ चेहरा आपकी शान बढ़ाता है और मुस्कुराकर किया हुआ कार्य आपकी पहचान बढ़ाता है। *आज से हम* हर कार्य करते अपने चेहरे को मुस्कुराहट से सजाएं रखें... *💁‍♀️ और प्रेरक प्रसंग और कहानियों के लिए 👇* *📘 ➡️JOIN Telegram 🔜* https://t.me/Rojekstory15 *✨➡️JOIN 🪀whatsapp 🔜* https://chat.whatsapp.com/HvI63pRXBmPK0dif4wzgJE?mode=ac_t 😊 😊 😊 😊 😊 😊 मैं निडर हूँ । जीवन आज मेरे सामने कितनी भी चुनौतियां पेश करें, मैं उनका सामना करने के लिए तैयार हूँ, मैं साहसी हूँ और मेरे पास कार्य को सरलता से पूर्ण करने की शक्ति है। चीजें कितनी भी कठिन क्यों ना हों, मुझे पता है कि मैं इसे संभाल सकता हूँ , मुझे अपने कार्य करने की क्षमता पर भरोसा है। ➖➖➖➖➖➖➖➖➖

  • *♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*          *!! खुद की कमियों को ढूँढे़.. !!* ~~~~ कबूतर के एक जोड़े ने अपने लिए घोंसला बनाया परंतु जब कबूतर जोड़ें उस घोंसले में रहते हैं तो अजीब बदबू आती रहती थी। उन्होंने उस घोंसले को छोड़ कर दूसरी जगह एक नया घोंसला बनाया, मगर स्थिति वैसी ही थी; बदबू ने यहां भी पीछा नहीं छोड़ा! परेशान होकर उन्होंने वह मोहल्ला ही छोड़ दिया और नए मोहल्ले में घोंसला बनाया। घोंसले के लिए साफ सुथरे तिनके जोड़ें, मगर यह क्या! इस घोंसले में भी वहीं, उसी तरह की बदबू आती रहती थी। थक हार कर उन्होंने अपने एक बुजुर्ग चतुर कबूतर से सलाह लेने की ठानी और उनके पास जाकर तमाम वाकया बताया। चतुर कबूतर उनके घोंसले में गया, आसपास घुमा फिरा और फिर बोला, घोंसला बदलने से यह बदबू नहीं जाएगी। बदबू घोंसले में नहीं, तुम्हारे अपने शरीर से आ रही है। खुले में तुम्हें अपनी बदबू महसूस नहीं होती, मगर घोंसले में घुसते ही तुम्हें यह महसूस होती है और तुम समझते हो कि बदबू घोंसले से आ रही है, अब जरा अपने आप को साफ करो। *शिक्षा:-* पूरी दुनिया से खामियां निकालने और बदबू ढूंढने के बजाय हम अपने भीतर की खामियों (कमजोरियों) और अपवित्रता रूपी (विकारों) बदबू को हटाएं तो दुनिया सचमुच खूबसूरत और खुशबूदार हो जायेगी..!! *💁‍♀️ और प्रेरक प्रसंग और कहानियों के लिए 👇* *📘 ➡️JOIN Telegram 🔜* https://t.me/Rojekstory15 *✨➡️JOIN 🪀whatsapp 🔜* https://chat.whatsapp.com/HvI63pRXBmPK0dif4wzgJE?mode=ac_t *सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।* *जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।* ✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️        *🦋 आज की प्रेरणा 🦋* किसी भी व्यक्ति व परिस्थिति की वजह से परेशान न हों क्योंकि आपकी प्रतिक्रिया के बिना ये दोनों ही शक्तिहीन हैं। 👉 *आज से हम* किसी भी परिस्थिति में प्रतिक्रिया न जताएँ...

  • *⏰आज की कहानी⏰* *🔻छोटे सफ़र की बड़ी सीख 🔻* महाभारत युद्ध समाप्त हो चुका था। एक दिन भगवान श्रीकृष्ण के साथ अर्जुन और भीम हस्तिनापुर से एक आश्रम की ओर जा रहे थे। रास्ता लंबा था, इसलिए वे एक साधारण बैलगाड़ी में अन्य यात्रियों के साथ बैठ गए। कुछ दूर चलने के बाद एक क्रोधी स्वभाव का यात्री भी बैलगाड़ी में चढ़ा। उसके पास भारी सामान था। उसने बिना सोचे-समझे अपना सामान इस तरह रखा कि उसका बोझ अर्जुन के पैरों और कंधे पर आ गया। इतना ही नहीं, वह बार-बार अर्जुन को धक्का भी देता रहा। भीम का स्वभाव तेज़ था। उनका क्रोध बढ़ने लगा। वे बोले, "पार्थ! यह व्यक्ति तुम्हारा अपमान कर रहा है। बस एक आदेश दो, अभी इसे इसकी मर्यादा याद दिला दूँ।" अर्जुन मुस्कुराए और शांत स्वर में बोले, "भैया भीम, धैर्य रखिए।" भीम ने आश्चर्य से पूछा, "अपमान सहना भी कोई वीरता है?" अर्जुन बोले, "हम कुछ ही देर में अपने गंतव्य पर उतर जाएंगे। यह यात्री अपने मार्ग चला जाएगा और हम अपने। इस छोटे से सफ़र के लिए यदि मैं क्रोध करूँ, विवाद करूँ या किसी का अपमान करूँ, तो नुकसान मेरा ही होगा।" भगवान श्रीकृष्ण यह सब सुनकर मुस्कुराए और बोले, "पार्थ ने आज जीवन का सबसे बड़ा रहस्य समझ लिया है। यह संसार भी एक यात्रा है। यहाँ मिलने वाले सभी लोग कुछ समय के सहयात्री हैं। कोई सम्मान देता है, कोई अपमान; कोई सुख देता है, कोई दुःख। यदि हर छोटी बात पर क्रोध करेंगे, तो अपना ही मन अशांत करेंगे।" श्रीकृष्ण आगे बोले, "मनुष्य का जीवन दुर्लभ है और क्षणभंगुर भी। कौन कब इस संसार की यात्रा पूरी कर ले, कोई नहीं जानता। इसलिए क्षमा, धैर्य और प्रेम के साथ जीवन जीना ही सच्ची बुद्धिमानी है।" भीम ने विनम्र होकर कहा, "आज समझ में आया कि सबसे बड़ा बल केवल बाहुबल नहीं, बल्कि अपने क्रोध पर विजय पाना है।" उस दिन से भीम ने निश्चय किया कि जहाँ तक संभव हो, छोटी-छोटी बातों पर क्रोधित होने के बजाय धैर्य और विवेक से काम लेंगे। *🌺 शिक्षा:* जीवन एक छोटा सफ़र है। इसमें हर व्यक्ति कुछ समय का सहयात्री है। इसलिए छोटी-छोटी बातों पर विवाद करने के बजाय धैर्य, क्षमा और प्रेम से व्यवहार करें। यही सच्ची वीरता और जीवन की सबसे बड़ी जीत है। *💁‍♀️ प्रेरणादायक कहानियों के लिए हमारे ग्रुप / चेनल जॉइन कर सकते है सभी के लिए मोटिवेशन स्टोरी👇* *👉JOIN WhatsApp 👈🔯* https://whatsapp.com/channel/0029VbC8YqY4Y9lkaPpGYn09 *📘 ➡️JOIN Telegram 🔜* https://t.me/Rojekstory15 🛕 लाइव दर्शन के ग्रुप   🔔 https://whatsapp.com/channel/0029Vb8J2t905MUXr2syZ21c मोबाइल (w)+91  8490871033. ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖

  • *⏰आज की कहानी⏰* *🔻प्रभु की लीला अपरंपार 🔻* बहुत समय पहले की बात है। वृंदावन धाम में श्रीकृष्ण के परम भक्त एक संत रहते थे। उनका जीवन अत्यंत सरल था। वे कभी भी बिना भगवान को भोग लगाए अन्न ग्रहण नहीं करते थे। उनके लिए संसार की हर वस्तु से बढ़कर प्रभु का प्रसाद था। एक दिन संत अपने शिष्य के साथ किसी धार्मिक कार्य से हस्तिनापुर (वर्तमान दिल्ली क्षेत्र) गए। कार्य पूरा होने के बाद वे वापस वृंदावन लौट रहे थे। मार्ग में अचानक उनकी बैलगाड़ी टूट गई। शाम होने लगी और आसपास केवल एक छोटा-सा भोजनालय दिखाई दिया। शिष्य ने विनम्रता से कहा, "गुरुदेव, जब तक गाड़ी ठीक होती है, आप यहीं थोड़ा विश्राम कर लें।" भोजनालय का मालिक बड़ा श्रद्धालु था। उसने संत को पहचान लिया और तुरंत शुद्ध सात्विक भोजन बनवाया। हाथ जोड़कर बोला, "महाराज, कृपया यह भोजन स्वीकार करें।" संत मुस्कुराए और बोले, "वत्स, मैं केवल वही अन्न ग्रहण करता हूँ जिसे पहले मेरे ठाकुर श्रीकृष्ण को भोग लगाया गया हो।" यह सुनकर भोजनालय का मालिक बहुत दुखी हो गया। शिष्य भी सोचने लगा कि गुरुदेव सुबह से भूखे हैं, अब क्या होगा? उसी समय जैसे स्वयं भगवान ने लीला रच दी। थोड़ी देर बाद एक रथ वहाँ आकर रुका। उसमें से एक भक्त दंपति उतरे। उनके हाथों में सुंदर बाल गोपाल की प्रतिमा थी। उन्होंने भोजनालय के मालिक से कहा, "भैया, जल्दी से सात्विक भोजन तैयार कर दो। हमारे लड्डू गोपाल के भोग का समय हो गया है। रास्ते में विलंब हो गया, इसलिए हम समय पर घर नहीं पहुँच सके।" भोजनालय का मालिक आश्चर्यचकित रह गया। उसने तुरंत वही भोजन भगवान गोपाल को अर्पित कराया जो संत के लिए बनाया गया था। भोग के बाद वही प्रसाद संत के पास लाया गया। जैसे ही संत ने यह बात सुनी, उनकी आँखों से प्रेमाश्रु बहने लगे। वे दौड़कर बाल गोपाल के चरणों में दण्डवत लेट गए। भाव-विभोर होकर बोले, "हे मेरे श्याम! जहाँ मैं तेरे बिना एक ग्रास भी नहीं खा सकता था, वहाँ तू स्वयं मेरे लिए आ गया। मैं तेरा कितना ऋणी हूँ। तू अपने भक्त की छोटी-सी भावना का भी कितना ध्यान रखता है।" संत ने प्रसाद को अपने मस्तक से लगाया और बड़े प्रेम से ग्रहण किया। उस दिन उन्हें वह प्रसाद अमृत से भी अधिक मधुर लगा। यह सब देखकर भोजनालय का मालिक भी रो पड़ा। उसने मन ही मन कहा, "हे बाँके बिहारी! मैं तो कभी-कभी ही तुझे याद करता हूँ, फिर भी तू अपने भक्तों की लाज रखने स्वयं चला आता है। सचमुच, तेरी करुणा का कोई अंत नहीं।" उस दिन वहाँ उपस्थित हर व्यक्ति ने समझ लिया कि भगवान केवल मंदिरों में ही नहीं, बल्कि अपने सच्चे भक्तों की निष्काम भक्ति और अटूट विश्वास में भी निवास करते हैं। *शिक्षा:* जो भक्त सच्चे मन, श्रद्धा और विश्वास से भगवान का स्मरण करता है, उसकी रक्षा और सेवा के लिए स्वयं प्रभु कोई न कोई मार्ग बना देते हैं। उनकी लीला मनुष्य की समझ से परे है। इसलिए हर परिस्थिति में भगवान पर विश्वास बनाए रखना ही सच्ची भक्ति है। *💁‍♀️ प्रेरणादायक कहानियों के लिए हमारे ग्रुप / चेनल जॉइन कर सकते है सभी के लिए मोटिवेशन स्टोरी👇* *👉JOIN WhatsApp 👈🔯* https://whatsapp.com/channel/0029VbC8YqY4Y9lkaPpGYn09 *📘 ➡️JOIN Telegram 🔜* https://t.me/Rojekstory15 🛕 लाइव दर्शन के ग्रुप   🔔 https://whatsapp.com/channel/0029Vb8J2t905MUXr2syZ21c मोबाइल (w)+91  8490871033. ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖

  • *⏰आज का प्रेरक प्रसंग ⏰* *!! 🔰गुस्से की दवा🔰 !!* °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° एक स्त्री थी। उसे बात बात पर गुस्सा आ जाता था। उसकी इस आदत से पूरा परिवार परेशान था। उसकी वजह से परिवार में कलह का माहौल बना रहता था। एक दिन उस महिला के दरवाजे एक साधू आया। महिला ने साधू को अपनी समस्या बताई। उसने कहा, “महाराज! मुझे बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता है। मैं चाहकर भी अपने गुस्से पर नियंत्रण नहीं रख पाती। कोई उपाय बताइये।” साधू ने अपने झोले से एक दवा की शीशी निकालकर उसे दी और बताया कि जब भी गुस्सा आये। इसमें से चार बूंद दवा अपनी जीभ पर डाल लेना। 10 मिनट तक दवा को मुंह में ही रखना है। 10 मिनट तक मुंह नहीं खोलना है, नहीं तो दवा असर नहीं करेगी।” महिला ने साधू के बताए अनुसार दवा का प्रयोग शुरू किया। सात दिन में ही उसकी गुस्सा करने की आदत छूट गयी। सात दिन बाद वह साधू फिर उसके दरवाजे आया तो महिला उसके पैरों में गिर पड़ी। उसने कहा, “महाराज! आपकी दवा से मेरा क्रोध गायब हो गया। अब मुझे गुस्सा नहीं आता और मेरे परिवार में शांति का माहौल रहता है।” तब साधू महाराज ने उसे बताया कि वह कोई दवा नहीं थी। उस शीशी में केवल पानी भरा था। *शिक्षा:-* गुस्से का इलाज केवल चुप रहकर ही किया जा सकता है। क्योंकि गुस्से में व्यक्ति उल्टा सीधा बोलता है, जिससे विवाद बढ़ता है। इसलिए क्रोध का इलाज केवल मौन है। सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।। *💁‍♀️ प्रेरणादायक कहानियों के लिए हमारे ग्रुप / चेनल जॉइन कर सकते है सभी के लिए मोटिवेशन स्टोरी👇* *👉JOIN WhatsApp 👈🔯* https://whatsapp.com/channel/0029VbC8YqY4Y9lkaPpGYn09 *📘 ➡️JOIN Telegram 🔜* https://t.me/Rojekstory15 🛕 लाइव दर्शन के ग्रुप   🔔 https://whatsapp.com/channel/0029Vb8J2t905MUXr2syZ21c मोबाइल (w)+91  8490871033. 🦋 *आज की प्रेरणा* 🦋 जी भर ज़िन्दगी को जीने का सर्वोत्तम तरीका है - बच्चा बनें यानी बच्चे की तरह मासूम बनें भले आपकी उम्र कुछ भी हो। *आज से हम* अपना जीवन जी भरकर जियें... ➖➖➖➖➖➖➖➖➖