गुप्त तंत्र मंत्र साधनाएं
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Agar mujh par koi tantra hua hai yaa mere upar kuch bhi kiya gaya hai ya ghar pe to pata kaise lagau ki kya hai Aur agar mujhe kisi se revenge lena hai to kaise lu
Agar mujh par koi tantra hua hai yaa mere upar kuch bhi kiya gaya hai ya ghar pe to pata kaise lagau ki kya hai Aur agar mujhe kisi se revenge lena hai to kaise lu
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मयुर जी 🙏 अडिगा बेताल पैशाचिक साधना है या तामसिक अडिगा बेताल की सिद्धि करना सही है भविष्य में कोई नुक़सान तो नहीं होगा ना भोग में बकरा देने से कोई पाप कर्म तो नहीं होगा ना उत्तर : पैशाचिक-तामसिक दोनों। बाकी लोगों के अनुभव देखकर तो यही लगता है, की इन सब चीजों से दूर रहने में भलाई है। कोई सात्विक योगिनी या अप्सरा की साधना करे। अगर फिर भी पैशाचिक साधना करने की प्रबल लालसा है तो किसी भी साधना से पूर्व महाकाल भैरव साधना के १.५ लाख जाप + महाकाली के १.५ लाख जाप सुनिश्चित कर ले। जिससे जीवन काल सुरक्षित रहे। भोग में बकरा देने से पुण्य और पाप का तोल मापन करने में सक्षम नहीं हु। आप स्वयं अपने मन से इसका उत्तर प्राप्त करे।
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किसी भी प्रकार के प्रश्न के लिए संपर्क करे @rajyogimayur
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भगवान श्री कृष्ण की गुप्त साधना अद्भुत मायावी शक्तियों पर विजय पाने और देवतुल्य सामर्थ्यवान बनने के लिए भगवान श्री कृष्ण की साधना इस युग में अति-उत्तम है। इनकी साधना से आपका सहस्त्रार चक्र जाग उठता है और ज्ञान की कुंडली जाग उठती है जिससे लोक-परलोक आदि के सारे रहस्य खुल जाते हैं। इस साधना से बहुत तीव्र बुद्धि आती है जिससे साधक एक सूक्ष्म प्रयोग कर अनुकूल क्रन्तिकारी परिवर्तन संसार में ला सकता है। इस साधना से आकर्षण, सम्मोहन और वशीकरण करने की शक्ति स्वतः जाग जाती है और वह वास्तविक धर्म को परिभाषित करता है। इसमें कोई शक नहीं कि यदि बताये अनुसार सही तरीके से इनकी साधना कर ली जाए तो साधक श्री कृष्ण तुल्य हो जाएगा। वह अद्भुत माया-जाल फैला सकता है और वह खुद माया से मुक्त बना रहता है। उनके एक-एक कहे शब्द सत्य साबित होते हैं क्योंकि उन्हें पता होता है कि आगे क्या होने वाला है। वर्तमान युग में ऐसी परिस्थितियां बन रही है कि सही दिशा देने के लिए यह साधना एक आवश्यक अंग बन गया है। अतः संसार के कल्याण के लिए और भगवान श्री कृष्ण की असीम कृपा पाने के लिए यह साधना बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। महाभारत होने वाला है - मैं अपने सभी प्रिय साधकों को यह साधना करने का निर्देश देता हूँ। भगवान् श्री कृष्ण जी की इस साधना में ब्रह्मचर्य अनिवार्य नहीं है लेकिन उसमे अति भी नहीं होना चाहिए। सप्ताह में एक बार शारीरिक सम्बन्ध बना लेने से हर्ज नहीं या आपका प्रयास होना चाहिए कि कम से कम सम्भोग हो। यदि साधक अपने अनुकूल कुछ योगासनों का अभ्यास करता है और उसके बाद यौगिक क्रियाएं और प्राणायाम भी करता है तो उन्हें तीव्रता से सिद्धि मिलना आरम्भ हो जाता है और भगवान् श्री कृष्ण के प्रत्यक्ष दर्शन लाभ भी होंगे। यदि इनकी साधना से भगवान् श्री कृष्ण के दर्शन लाभ हुए तो साधक के मन-आत्मा से ये जुड़कर एकाकार हो जाते हैं और श्री कृष्ण के सामान वह हो जाता है। यदि साधक यौगिक क्रियाएं आदि नहीं भी करता है तो सभी प्रकार से श्री कृष्ण की कृपा होती ही है और वह संसार के लिए कल्याणकारी कार्य करने में समर्थ हो उठता है। सच कहा जाए तो आप इनकी साधना से कल्कि अवतार से कम नहीं होंगे, अर्थात- आप ही हैं कल्कि अवतार जिसमे अद्वितीय दिव्य शक्तियों का भंडार होगा जिससे आप पुनः युग को सुधार सकते हैं और कंस-युग से लोगों को मुक्ति दिला सकते हैं। मैंने बहुत कम शब्दों में आपको बताने का प्रयास कर रहा हूँ और मुझे विश्वास है कि आप कम शब्दों को विस्तार से समझ पा रहे होंगे। जीवन-भर झाल बजाने, शंख फुक्ने, कीर्तन-भजन और घंटियां बजाने से भगवान् श्री कृष्ण के दर्शन नहीं होंगे या उनकी कृपा के पात्र नहीं बन सकेंगे। अतः मैं यौगिक विधान के अनुसार भगवान् श्री कृष्ण की अद्भुत साधना बताने जा रहा हूँ जिससे आपको 100 प्रतिशत सफलता मिलेगी। कैसे करें यह साधना - दीक्षा - इस साधना को सिर्फ देख-समझ कर न करें। साधना की दीक्षा लेकर ही साधना करें। ब्रह्मचर्य - ब्रह्मचर्य के बारे में बताया जा चूका है कि जहाँ तक संभव हो, ब्रम्हचर्य ही रहें। जप माला - संस्कारित रुद्राक्ष या तुलसी की माला साधना कर सकते हैं। नीले हकीक की माला भी सर्वोत्तम है। आसन और वस्त्र - लाल,पीला, नीला या सफ़ेद-क्रीम। साधना की दिशा - साधना शुरू करने का जो मुहूर्त और दिन बताया जाएगा, उस अनुसार दिशा का चुनाव कर साधना कर सकते हैं। साधारणतः पूरब, पश्चिम या उत्तर दिशा होकर साधना की जाती है। साधना का समय - कोई भी एक निश्चित समय। साधना स्थल पर जलाने के लिए घी की दीपक। गणपति जी को नमस्कार करने के बाद भगवान् श्री कृष्ण की साधना करें। मूलमंत्र है -OM SHREENG KREENG KRISHNAYAI HOOM FATT ( 33/ 6 ) ॐ श्रीँग क्रींग कृष्णायै हूम फट उक्त मंत्र में साधक अपनी जन्मतिथि, राशि और लग्न के अनुसार उपयुक्त बीज-मंत्र लगा लें जिसे दीक्षा के बाद बता दी जाएगी। सुबह खाली पेट में योगाभ्यास, क्रिया और प्राणायाम से निपट लें और उसे बिना कोई ढील किये अभ्यास जारी रखें और किसी भी समय से मंत्रजप /साधना के लिए और अच्छी सफलता के लिए 15 माला जप करना चाहिए। इस प्रकार 51 दिन साधना करनी है। इस साधना को वर्ष में तीन बार करेने से पूर्ण सिद्धि हो जाती है और भगवान् श्री कृष्ण के दर्शन भी होते हैं। इस साधना को करना बहुत सरल है। इसमें दशांश हवनादि कर्म करने की आवश्यकता नहीं है। आपका प्रेम और श्रद्धा ही आपको सिद्धि दिलाएगा
भगवान दत्तात्रेय साधना - ॐ ह्रीम द्रह दत्तात्रेय द्रह ॐ नमः - om hreem drah dattatrey drah om namah . यह एक बहुत श्रेष्ठ मन्त्र है। इस जप से साधक सूर्य के समान प्रगति करता है और अध्यात्म के चरम बिंदु तक जा पहुँचता है। एक माला या तीन माला रोज। दिशा पाश्छिम रहेगी। दीपक जलाने की जरुरत नहीं। कोई भी आसन , कोई भी वस्त्र । अन्य कोई भी नियम नहीं। एक वर्ष तक
शिव साधना यह शिव जी की सर्वश्रेष्ठ साधना है और ज्ञात होता है कि रावण ने इसी मन्त्र से शिव जी की साधना की थी और गुरु तैलंग स्वामी महाराज ने भी इसी मंत्र से 20 वर्षो तक तप करके प्रभु के दर्शन प्राप्त किये थे और उसके बाद उनकी जीवनी हर व्यक्ति जनता है। तो आइए जानते है उस महा मन्त्र को जो शिव जी के दर्शन और कृपा दिलाने में सक्षम है। मंत्र। बम बम बम योगिरूपा हूं हूं हूं शिवाय नमः।। माला - संस्कारित रुद्राक्ष माला संख्या।। 15 माला प्रतिदिन कुल जप। 21 दीन दिशा। पूर्व आसन। सफेद दशांश हवन। बाजार में मिलने वाले समान्य हुमाद से।
माता मातंगी साधना इस साधना से धन , भौतिक-सांसारिक सफलता , अध्यात्म में सफलता और ब्रह्माण्ड के सभी रहस्यों को समझने में अंतर्ज्ञान विकसित होता है। यह बहुत ही शक्तिशाली साधना है। साधारण शब्दों में - जो लोग अध्यात्म में और सांसारिक सफलता एक ही साधना से करना चाहते हों उन्हें यह साधना करनी चाहिए। इस साधना से साधक भयमुक्त हो जाता है। इस साधना की अनेकों चमत्कारी उपलब्धिया है जिसका बखान करना सूर्य को दीपक दिखाने के बराबर है। माता स्वयं सूर्य की देवी हैं तो जिन क्षेत्रों के लिए सूर्य कारक है उन सभी क्षेत्रों पर माता का पूर्ण अधिकार है। किसी की कुंडली में अगर सूर्य सम्बन्धी समस्याएं हो और सूर्य कमज़ोर हो उन्हें माता की साधना करने से असीम लाभ प्राप्त होता है।इनकी साधना से व्यक्ति के अंदर आत्मविश्वास बढ़ता है और वह हार कार्य सफल करने में समर्थ हो जाता है। जो व्यक्ति उच्च पद की अधिकारी जॉब इत्यादि की तैयारी करने में रूचि रखते हैं जैसे सिविल सर्विसेज , IAS ,IPS इत्यादि एवं जो शिक्षा के क्षेत्र में बहुत आगे जाना चाहते हो उन्हें यह साधना अवश्य करनी चाहिए। सर्वप्रथम कोई राशि अनुसार बहुत अच्छा मुहूर्त देख लें और यह साधना शुरू करें। मन्त्र जप से पहले माता के ध्यान श्लोक का पाठ करें। ध्यान-श्लोक - श्यामांगी शशिशेखरां त्रिनयनां वेदैः करैर्विभ्रतीं, पाशं खेटमथांकुशं दृढमसिं नाशाय भक्तद्विषाम् । रत्नालंकरणप्रभोज्जवलतनुं भास्वत्किरीटां शुभां मातंगी मनसा स्मरामि सदयां सर्वाथसिद्धिप्रदाम् ।। shyamangi shashishekharaam trinayanam wedaih karaivibhratim paasham khetmathamkusham dridhmasim nashyay bhaktdwisham . ratnalankaran prabhojjwalaltanum bhaswtiritam shubham matangi mansa smarami sadayam sarwarth siddhi pradam . इसके बाद मूल मन्त्र का यथासंभव जितनी माला सहजता से कर सकें उतना जाप करें। बस यह ध्यान रखें की जितने दिनों का पुरश्चरण किया जा रहा है प्रतिदिन उतनी ही माला जाप करनी है , जितनी प्रथम दिन की थी। इसके बाद अगले पुरश्चरण में माला संख्या बढ़ा सकते हैं। मूल मंत्रः ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा । om hrim klim hoom matangayi fatt swaha साधना -विधि - लाल, गुलाबी या पीला आसन छोड़कर कोई भी आसन का प्रयोग होता है। वस्त्र भी ऐसे ही होने चाहिए। जप-माला - संस्कारित कमलगट्टे की माला या काले या नीले रंग वाले हकीक की संस्कारित माला। आप आठमुखी रुद्राक्ष की संस्कारित माला से भी साधना कर सकते हैं। जप काल की दीपक - सरसों के तेल या घी के दीपक। यह साधना दिन या रात किसी भी समय कर सकते हैं. जप का समय कोई भी एक निश्चित काल में कर सकते हैं। साधना दिशा -पूरब या दक्षिण रखें। आपको पांच लाख जप करना है। दैनिक जप की संख्या अपनी क्षमता के अनुसार रखें। और कम से कम पंद्रह दिनों तक करें और आगे की एक सप्ताह के अंदर दशांश हवनादि कर्म पूरा कर लें। इसके बाद फिर से कोई भी दिन सुनिश्चित करके पुनः साधना आरम्भ करें। - इस साधना की शुरुआत अच्छे शुभ मुहूर्त से आरम्भ करें। अगली बार जब इस साधना को करना है तो दुबारा मुहूर्त देखने की जरुरत नहीं है। दशांश हवन - हवन की लकड़ी - आम की लकड़ी , नौ ग्रह की लकड़ी और कत्थे की लकड़ी। हवन-सामग्री- शतावरी , जटामांसी , मुलहटी ,कमलगट्टे की बीज , पंचमेवा , गाय के घी , चावल , श्वेतार्क के फूल , उड़हुल के फूल। -इनमे जो भी सुलभ हो , वो ले सकते हैं। तर्पण और मार्जन - शराब। या दूध, केशर , कच्चे नारियल के पानी। इसके बाद बलि प्रदान करें। - बलि की सामग्री - बथुआ ( पेठा ) -जिससे आगरा में मुरब्बे बनते हैं। एक खड़े पेठे को एक ही चाक़ू या कटार से बीच में काटें और कटे हुए हिस्से में सिंदूर लगाएं। अब इसे सामने रखकर समर्पित करें। प्रणाम करें और उठ जाएं। यदि किसी मौसम में पेठा न मिले तो नारियल के गोले से बलि दे सकते हैं। यह इस साधना का पहला किश्त है। इसी प्रकार इस साधना को कई किश्तों में करके आप पांच लाख जप पूरा करें। संभव हो तो 51 लाख तक जप करें। माता की साधना एवं साथ में क्रियायोग ध्यान करने से आप असीमित शक्तियों के स्वामी हो जायेंगे। फिर ऐसा कुछ भी नहीं इस संसार में जो आपके लिए संभव न हो। सर्व मनोरथ पूर्ण करने वाली इस साधना को अवश्य अपने जीवन में करें।
गुप्त तंत्र मंत्र साधनाएं pinned Deleted message
नमस्कार सभी साधक मित्र 🙏, आज आप सभी साधक मित्रों को अचूक धन दौलत, व्यापर वृद्धि, और आर्थिक तंगी से मुक्ति हेतु भगवान महा गणेश के तांत्रिक बीज मंत्र देना चाहता हूँ आशा है आप इसे आवश्य जाप करेंगे मंत्र :- ॐ गण गण श्रींग महा गणपतये ह्रींग ॐ श्रींग नमः OM GAN GAN SHREENG MAHA GANPATAYE HREENG OM SHREENG NAMAH (3/6) दिशा :- पश्चिम दिशा वस्त्र और आसन - कोई भी साधना दिवस - सात दिवसीय मंत्र जप टाइमिंग :- किसी भी समय 10 से 15 मिनट मानसिक जप, साधना मुहूर्त आज से ही शुरू करें आपको ध्यान मुद्रा लगाकर ध्यान में बैठ जाना है और इस मंत्र का अपने भूमध्य में ध्यान लगाकर मानसिक जप करते रहना है। यदि उपरोक्त मंत्र के जाप से आपको इन सात दिनों में आश्चर्यजनक परिणाम मिलते है तो आप इस मंत्र की गुरुदेव योगीजी से दीक्षा लेकर विधिवत साधना करें विघ्नहर्ता गणेश जी आपके सभी नाना प्रकार के कष्टों को हर लेंगे यह अचूक मंत्र है अतः प्रयोग में आवश्य लाये । बाकी की जानकारी दीक्षा के बाद दी जाएगी फिलहाल आप इस सात दिवसीय मंत्र का प्रयोग करके परीक्षा करें। आज से शुरु कर दे सब लोग
गुजरात में शिविर होना तय हुआ है। शिविर स्थल के लिए अभियान जारी है। आपकी सलाह वांछित है। गुरूजी को व्यक्तिगत मैसेज कर सकते हैं। अप्रैल माह में शिविर होगा। शिविर में पिछली बार की तरफ ३०% साधकों को गुप्त सिद्धियां भी ट्रान्सफर होने के संभावना है। अगर आप इस शिविर में सहभाग लेना चाहते है गुरूजी से सम्पर्क करे। गुरूजी से संपर्क करने हेतु - 9065629338 सिर्फ whatsapp शिविर में क्रिया योग तंत्र योग गुप्ता तांत्रिक साधनाओं की जानकारी गुप्त तंत्र योग ध्यान योगिक क्रियाओं का अभ्यास साधना सफल कैसे की जाए इन पर चर्चा की जायेगी आपके रहने खाने का इंतजाम किया जाएगा।
किसी भी प्रकार के प्रश्न हेतु - @rajyogimayur
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सूर्य देव सरल और शक्तिशाली साधना गुप्त विधान - (अगर आपके घर में कोई छोटा लड़का - लड़की है जो पढ़ाई ठीक से नहीं कर पाते तो उनको यह साधना जरूर करवाएं।) जो लोग सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे,चर्म रोग से ग्रसित है,शत्रु प्रबल है,समाज पे प्रतिष्ठा प्राप्त करना चाहते है,कुंडली मे सूर्य ग्रह कमजोर है,किसी प्रकार के कोर्ट कचहरी के चक्कर मे फसे है और ऐसे तमाम चीजे जो सूर्य से सम्बंधित है उनके लिए ये साधना औषधि समान है। (जो लोग पढ़ाई में कमजोर है अथवा शिक्षा ग्रहण करने में समस्या आती है तो यह साधना उनके लिए बहुत उपयुक्त है खास तौर पे School और कॉलेज के छात्रों के लिए) मूल मंत्र - महा-अंगारा जीवनदायिनी ह्रीम सूर्याय नमः।। आसन - लाल या गुलाबी आसन दिशा - पूर्व माला संख्या - ५ माला 73 दिनों तक (१ पुरुष्चरण) ब्रह्मचर्य आवश्यक हवन की आवश्यकता नही। माला। - रुद्राक्ष या गुलाबी हकीक की माला मुहूर्त - सिर्फ रविपुष्य योग साधना समय - दिन में किसी भी समय कर सकते है। पर पहले दिन जिस समय पे साधना करने बैठे है उसी समय पे ७३ दिनों तक बैठना है। (यह साधना पुर्ण रूप से सात्विक है इसलिए इसमें दीक्षा लेने की जरूरत नहि है। बिना दीक्षा लिए हर वर्ग का का व्यक्ती साधना को कर सकता है।)